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20 April 2018

खराब मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता, उत्तर भारत में आॅंधी-बारिश की आशंका

गन्ना किसानों ​के रिकार्ड बकाया भुगतान के हल हेतु मंत्री समूह का गठन

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीनी मिलों पर किसानों के रिकार्ड बकाया भुगतान का हल निकालने के लिए केंद्र सरकार ने मंत्री समूह का गठन किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर चार मंत्रियों का समूह इस पर फैसला लेगा। सूत्रों के अनुसार मंत्री समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली केबिनेट की बैठक में इस बारे में सलाह देगा, उसी के आधार पर फैसला लिया जायेगा। 
चालू पेराई सीजन में मध्य अप्रैल तक ही गन्ना किसानों के बकाया की राशि रिकार्ड 18,000 करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है तथा अभी भी 227 चीनी मिलों में पेराई चल रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि पेराई सीजन के अंत तक बकाया की राशि बढ़कर 20,000 करोड़ के पार पहुंच जायेगी।

नितिन गड़करी की अध्यक्षता में गठित मंत्री समूह की बैठक सोमावार को होना प्रस्तावित है तथा मंत्री समूह में शामिल अन्य मंत्रियों में रामविलास पासवान, राधा मोहन सिंह और धर्मेन्द्र प्रधान है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2017 से 15 अप्रैल तक चीनी का रिकार्ड उत्पादन 299.80 लाख टन का हो चुका है तथा उत्पादक राज्यों में अभी 227 चीनी मिलों में पेराई चल रही है। ऐसे में उद्योग को मानना है कि चीनी का उत्पादन बढ़कर 310 से 315 लाख टन हो जायेगा।
केंद्र सरकार चीनी मिलों को राहत देती है, तो घरेलू बाजार में चीनी के भाव में हल्का सुधार बन सकता है लेकिन ज्यादा तेजी की संभावना इसलिए नहीं है, क्योंकि घरेलू बाजार में चीनी का बंपर स्टॉक है तथा विश्व बाजार में भाव काफी नीचे है, जिस कारण निर्यात पड़ते नहीं लग रहे हैं। शुक्रवार को दिल्ली में चीनी का भाव 3,050 से 3,125 रुपये प्रति क्विंटल रहा।..............   आर एस राणा

18 April 2018

चीनी का उत्पादन 300 लाख टन के करीब, मिलों पर किसानों का बकाया 18 हजार करोड़

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू गन्ना पेराई सीजन 2017-18 में पहली अक्टूबर 2017 से 15 अप्रैल 2018 तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 299.80 लाख टन का हो चुका है, जबकि चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि भी बढ़कर 18,000 करोड़ रुपये हो गई है। तय समय पर भुगतान नहीं मिलने से गन्ना किसानों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल तक 104.98 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। राज्य में 187 चीनी मिलों में गन्ना की पेराई आरंभ हुई थी, जिनमें से 50 चीनी मिलों में अब भी पेराई चल रही है। उधर उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में चीनी का रिकार्ड 104.8 लाख टन का उत्पादन हो चुका है, तथा राज्य की 100 से ज्यादा चीनी मिलों में अभी भी पेराई चल रही है। कर्नाटका में चालू पेराई सीजन में 15 अप्रैल तक 36.3 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, हालांकि इस समय राज्य में केवल एक ही चीनी मिल में पेराई चल रही है।
227 चीनी मिलों में चल रही है अभी भी पेराई
इस्मा के मुताबिक 15 अप्रैल तक चीनी का उत्पादन सालाना खपत से भी 50 लाख टन ज्यादा का हो चुका है जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों में 227 चीनी मिलों में पेराई अभी भी चल रही है, अत: चीनी के स्टॉक में आगे और बढ़ोतरी होगी।
उत्पादन लागत की तुलना में 8 रुपये किलो नीचे है एक्स फैक्ट्री भाव
इस्मा के अनुसार बंपर उत्पादन होने के कारण चीनी की कीमतों में लगातार गिरावट बनी हुई है तथा पिछले 4 से 5 महीने में ही इसके भाव में करीब 9 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है। चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव घटकर उत्पादन लागत की तुलना में करीब 8 रुपये प्रति किलो नीचे आ गए हैं जिस कारण चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की राशि बढ़ रही है। चालू पेराई सीजन में अभी तक बकाया राशि बढ़कर 18,000 करोड़ रुपये हो चुकी है तथा माना जा रहा है कि चालू गन्ना पेराई सीजन के आखिर तक यह 20,000 करोड़ रुपये हो जायेगी।
विश्व बाजार में कीमतें कम
चीनी कारोबारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि विश्व बाजार में चीनी के भाव नीचे बने हुए हैं, इसलिए हमारे यहां से निर्यात नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार ने 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी हुई है, लेकिन निर्यात पड़ते नहीं लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों के पास चीनी का बंपर स्टॉक जमा है जबकि ग्राहकी काफी कमजोर है इसीलिए भाव में तेजी नहीं आ पा रही है। .....  आर एस राणा

गेहूं की सकारी खरीद बढ़कर 107 लाख टन के पार

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2018-19 में 107.48 लाख टन गेहूं की खरीद समर्थन मूल्य पर हुई है जोकि पिछले साल की तुलना में पिछड़ी है। पिछले साल इस समय तक 119.08 लाख टन गेहूं की एमएसपी पर खरीद हो चुकी थी। प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा के साथ मध्य प्रदेश से सरकारी खरीद पिछले साल से पीछे चल रही है जबकि उत्तर प्रदेश और राजस्थान से खरीद बढ़ी है।
पंजाब से चालू रबी में गेहूं की खरीद कम होकर 24.63 लाख टन की हो पाई है जबकि​ पिछले साल इस समय तक राज्य से 37.42 लाख टन की खरीद हो चुकी थी। इसी तरह से हरियाणा से चालू सीजन में समर्थन मूल्य पर अभी तक 44.50 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया है जबकि पिछले साल हरियाणा से इस समय तक 47.16 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। मध्य प्रदेश भी चालू सीजन में 28.89 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया है जबकि पिछले साल इस समय तक 30.55 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी थी।
उत्तर प्रदेश से चालू रबी में गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद बढ़कर 5.15 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य से केवल 1.56 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। राजस्थान से भी चालू रबी में खरीद बढ़कर 4 लाख टन की हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 2.31 लाख टन गेहूं की ही समर्थन मूल्य पर खरीद हुई थी।
केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 320 लाख टन का तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में 308.24 लाख टन गेहूं की खरीद समर्थन मूल्य पर की थी।.....  आर एस राणा

ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़ा, भाव में तेजी की उम्मीद

16 April 2018

महाराष्ट्र से नेफेड 25 हजार टन प्याज की करेगी खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्याज की कीमतों में आई गिरावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र से 25 हजार टन प्याज की खरीद को मंजूरी दी है। सहकारी संस्था राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) अगले सप्ताह से प्याज की खरीद शुरू करेगी।
नेफेड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्ढा के अनुसार राज्य के नासिक जिले की लासलगांव और पिंपलगांव मंडियों से प्याज की खरीद की जायेगी। इससे प्याज के भाव में सुधार बनने की संभावना है। नेफेड अपनी इकाई में 5,000 टन प्याज का भंडारण करेगा और बाकी बचे प्याज का भंडारण किराये के गोदामों में किया जाएगा। 2-3 महीने बाद प्याज को बाजार में बेचा जायोगा। देश के कुल उत्पादन में रबी प्याज का योगदान करीब 65 प्रतिशत है।
मंडियों में 300 से 877 रुपये प्रति क्विंटल रह गए भाव
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में 12 अप्रैल को प्याज का भाव घटकर 400 से 788 रुपये प्रति क्विंटल रह गया जबकि दैनिक आवक 15,665 क्विंटल की हुई। इस दौरान राज्य की पिंपलगांव मंडी में प्याज के भाव 300 से 877 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा दैनिक आवक 21,974 क्विंटल की हुई। 
एमईपी हटाने के बाद भी घट रहे हैं भाव
प्याज की कीमतों में गिरावट रोकने के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी के आरंभ में प्याज के न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया था, इसके बावजूद प्याज की कीमतों में लगातार गिरावट बनी हुई है। प्याज व्यापारी योगेश अग्रवाल ने बताया कि महाराष्ट्र और गुजरात के बाद राजस्थान की मंडियों में भी नए प्याज की आवक बढ़ने से भाव में मंदा बना हुआ है।
निर्यात में आई कमी
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के अप्रैल से जनवरी के दौरान प्याज का निर्यात घटकर 20.34 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इसका निर्यात 27.20 लाख टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2016-17 में प्याज का कुल निर्यात 34.92 लाख टन का हुआ था.....  आर एस राणा

देशभर के किसान 10 दिन रहेंगे अवकाश पर, दूध, फल और सब्जियां नहीं बेचेंगे

आर एस राणा
नई दिल्ली। पूर्ण कर्ज माफी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लागत का डेढ़ गुना तय करने की मांगों को लेकर देशभर के किसान 10 दिन के अवकाश पर रहेंगे। राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले देशभर के 90 किसान संगठन पहली जून से 10 जून तक दूध, फल और सब्जियों के साथ ही खाद्यान्न की बिक्री भी नहीं करेंगे।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि देश के किसान कर्ज तले दबे हुए हैं, साथ ही उन्हें फसलों का उचित मूल्य भी नहीं रहा है जिस कारण किसान आत्महत्या जैसे कदम उठा रहा है केंद्र के साथ ही राज्य सरकारें किसानों की लगातार अनदेखी कर रही है इसलिए देशभर के किसान संगठनों ने राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले किसान अवकाश मनाने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान किसान पूरी तरह से अवकाश पर रहेंगे, दूध के साथ फल, सब्जियों और खाद्यान्न की बिक्री नहीं की जायेगी। इसके अलावा शहर से दवाईयों को छोड़ अन्य वस्तुओं की खरीद भी किसानों द्वारा नहीं की जायेगी।
मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा उर्फ कक्का जी ने बताया कि किसान अवकाश के दौरान किसान गांव में ही रहेंगे। उन्होंने बताया कि 6 जून को मंदसौर जिले में शहीद किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए देशभर में हवन का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अगर केंद्र सरकार ने किसानों की मांगे नहीं मानी तो फिर 10 जून को भारत बंद का आह्वान किया जायेगा। हम उन सभी से अनुरोध करेंगे, जो किसानों द्वारा उत्पादित अन्न, फल, दूध या फिर सब्जियों का उपयोग करते हैं, किसानों को बचाने के लिए भारत बंद में सहयोग दे। .........  आर एस राणा