Total Pageviews

17 February 2018

जनवरी में वनस्पति तेलों का आयात 25 फीसदी बढ़ा —एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में तिलहनों की कीमतों में आए सुधार से जनवरी में खाद्य तेलों के साथ ही अखाद्य तेलों के आयात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 12,46,847 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी में इनका आयात 10,28,859 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2017-18 के पहले तीन महीनों नवंबर-17 से जनवरी-18 के दौरान खाद्य और अखाद्य तेलों का कुल आयात 6 फीसदी बढ़कर 36,28,734 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका आयात 34,14,008 टन का ही हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 35,30,451 टन का और अखाद्य तेलों का आयात 98,283 टन का हुआ है।
आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भी दिसंबर के मुकाबले जनवरी में बढ़ोतरी हुई है। एसईए के अनुसार आरबीडी पॉमोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जनवरी में बढ़कर औसतन 669 डॉलर प्रति टन हो गया जबकि दिसंबर में इसका भाव 661 डॉलर प्रति टन था। क्रुड पॉम तेल का भाव भी दिसंबर के 662 डॉलर प्रति टन से बढ़कर जनवरी में 669 डॉलर प्रति टन हो गया। क्रुड सोयाबीन तेल के भाव इस दौरान भारतीय बंदरगाह पर पहुंच 811 डॉलर से बढ़कर 817 डॉलर प्रति टन हो गए। ..........आर एस राणा

सरकारी कदमों से दलहन के आयात में तो कमी आई, लेकिन भाव नहीं सुधरे

आर एस राणा
केंद्र सरकार द्वारा दलहन आयात में कमी लाने के लिए आयात शुल्क में बढ़ोतरी के साथ ही आयात की तय सीमा कर देने से आयात में तो भारी कमी आई है, लेकिन इसका असर उत्पादक मंडियों में दालों की कीमतों पर नहीं पड़ा है। दिसंबर महीने में दालों का आयात घटकर 3.19 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल दिसंबर में 8.24 लाख टन दालों का आयात हुआ था। हालांकि उत्पादक राज्यों में किसानों को दालें एमएसपी से 1,000 से 1,500 रुपये प्रति ​क्विंटल नीचे बेचनी पड़ रही है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने घरेलू दलहन किसानों के हितों को देखते मटर, चना और मसूर पर आयात शुल्क लगाया है जबकि अरहर, मूंग और उड़द के आयात की सीमा तय कर दी थी। अत: अरहर, मूंग और उड़द का आयात नहीं हो रहा है जबकि चना, मसूर और मटर के आयात में भी भारी कमी आई है। उन्होनें बताया कि चालू वित्त वर्ष के दिसंबर महीने में आयात घटकर 3.91 लाख टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले नवंबर में 7.56 लाख टन दालों का आयात हुआ था। 
कुल आयात में कमी आने का अनुमान
उन्होने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा उठाये गए कदमों से दलहन के कुल आयात में पिछले साल की तुलना में कमी आयेगी। चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान 56.80 लाख टन दालोें का आयात हो चुका है। वित्त वर्ष 2016—17 में दालों का रिकार्ड आयात 66.08 लाख टन का हुआ था। इसके पिछले वित्त वर्ष 2015—16 में दलहन का आयात 57.97 लाख टन का हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2017—18 की ​तीसरी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दालों का आयात घटकर 16.5 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इनका आयात 26.4 लाख टन का हुआ था।
आयात घटाने के लिए उठाए कदम
केंद्र सरकार ने चालू महीने में चना के आयात शुल्क को 30 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी किया है, जबकि इससे पहले दिसंबर में चना और मसूर के आयात पर 30 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। नवंबर में केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर 50 फीसदी का आयात शुल्क लगाया था। अगस्त में केंद्र सरकार ने अरहर के आयात की 2 लाख टन और मूंग और उड़द के आयात की 3 लाख टन की सीमा तय की थी।
पैदावार ज्यादा होने का अनुमान
कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में देश में दलहन की रिकार्ड पैदावार 229 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2015—16 में उत्पादन केवल 163.5 लाख टन का ही हुआ था। देश में दलहन की सालाना खपत 240 से 250 लाख टन की होती है।
उत्पादक मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे
महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना की मंडियों में अरहर के भाव 4,000 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,450 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) किया हुआ है।.....आर एस राणा

16 February 2018

गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी पर फैसला टला — कृषि सचिव

आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्पादक राज्यों में खराब मौसम ने केंद्र सरकार को आयातित गेहूं को हतोत्साहित करने के लिए शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला कुछ समय के लिए टालने पर मजबूर कर दिया है। केंद्रीय कृषि सचिव एस के पटनायक ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी पर फैसला नहीं हो सका।
गेहूं के उत्पादन के बारे में उन्होंने कहां कि चालू रबी में अभी तक मौसम फसल के अनुकूल ही रहा है इसलिए गेहूं का उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर ही होने का अनुमान है। हालांकि उन्होंने माना कि उत्पादन की सही तस्वीर 15 मार्च के बाद ही साफ होगी। गेहूं के आयात पर इस समय 20 फीसदी आयात शुल्क है। सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्रालय ने आयात शुल्क को 20 फीसदी से बढाकर 40 फीसदी करने का प्रस्ताव किया था। चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई में कमी आई है जबकि उत्पादक राज्यों में चालू सप्ताह के शुरु में मौसम खराब हो गया था।
एग्रीकल्चर—2022 कार्यशाला के बारे में उन्होंने बताया कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक के साथ ही निजी निवेश की हिस्सेदारी बढ़ाने ​पर ​जोर दिया जायेगा। इस कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही किसान प्रतिनिधियों और निजी सेक्टर को आमंत्रित किया गया है। कार्यशाला के पहले दिन 19 फरवरी को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह बैठक में शामिल होंगेे जबकि 20 फरवरी को प्रधानमंत्री खुद इस बैठक में शामिल होकर वैज्ञानिकों, किसानों संगठनों और अधिकारियों के साथ विचार—विमर्श करेंगे।
इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शुरु की गई सभी बड़ी परियोजनाओं की बारिकी से समीक्षा की जायेगी। किसानों के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार में राज्यों की अहम भूमिका है, इसलिए राज्यों के प्रतिनिधियों को कार्यशाला में आमंत्रित किया गया है।
कार्यशाला  में पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री के साथ ही मत्सय पालन को प्रोत्साहन देने के उपायों पर भी विचार किया जायेगा। किसानों के उत्पादों की बिक्री के लिए मार्केटिंग, एग्रो लॉजिस्टिक और एग्रो वैल्यू सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दिया जायेगा।
किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कैसे मिलें, इस पर कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों के साथ ही किसान प्रतिनिधियों की सलाह अहम रहेगी। देश में 2 हैक्टेयर से छोटी जोत वाले किसानों की संख्या ज्यादा है इसलिए छोटी जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर मुख्य जोर दिया जायेगा।.....आर एस राणा

15 February 2018

चीन की आयात मांग बढ़ने से केस्टर तेल का निर्यात बढ़ा—एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। चीन की आयात मांग बढ़ने से दिसंबर महीने में केस्टर तेल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर महीने में केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 49,076 टन का हुआ है जबकि पिछले साल दिसंबर में इसका निर्यात केवल 38,442 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (एसईए) के अनुसार के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017—18 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान केस्टर तेल के निर्यात में थोड़ी कमी आई है। इस दौरान देश से केस्टर तेल का निर्यात 4.11 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016—17 की समान अवधि में इसका निर्यात 4.15 लाख टन का हुआ था। वित्त वर्ष 2016—17 के दौरान केस्टर तेल का कुल निर्यात 5.37 लाख टन का हुआ था। वर्तमान में हो रहे निर्यात सौदों को देखते हुए माना जा रहा है कि कुल निर्यात पिछले साल के लगभग बराबर ही हो जायेगा।
एसईए के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में केस्टर सीड का उत्पादन घटकर 11.30 लाख टन का ही हुआ था जबकि इसके पिछले साल 14 लाख टन का उत्पादन हुआ था।...... आर एस राणा

रबी में एमएसपी पर 320 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी विपणन सीजन 2018—19 में केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 320 लाख टन गेहूं और 55 लाख टन चावल की खरीद करेगी। खाद्य सचिव रविकांत की अध्यक्षता में गुरुवार को नई दिल्ली में हुई प्रमुख उत्पादक राज्यों के खाद्य सचिवों की बैठक में राज्यों ने गेहूं के खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने के साथ ही गेहूं का समय पर उठाने की मांग की।
खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और जूट मिलों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में राज्य के खाद्य सचिवों ने मांग की, कि किसानों को गेहूं का समय पर भुगतान होने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये, कि उनकी उपज एमएसपी से नीचे ना बिके।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रबी विपणन सीजन 2018—19 में 320 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया गया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन 2017-18 में  308 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। पिछले खरीद सीजन में खरीद का लक्ष्य 330 लाख टन का था।
चालू रबी के लिए एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल
रबी विपणन सीजन 2018—19 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल था। 
पंजाब और उत्तर प्रदेश से खरीद लक्ष्य ज्यादा
प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब से रबी विपणन सीजन 2018—19 में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 119 लाख टन का तय किया है जबकि पिछले साल पंजाब से 117.06 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। हरियाणा से चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 74 लाख टन का है जबकि पिछले साल हरियाणा से 74.32 लाख टन की खरीद हुई थी। मध्य प्रदेश से भी खरीद का लक्ष्य 67 लाख टन का ही रखा है जबकि पिछले साल मध्य प्रदेश से 67.25 लाख टन की खरीद हुई थी।
सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश से चालू रबी में गेहूं की खरीद का लक्ष्य 40 लाख टन का तय किया गया है जबकि पिछले साल राज्य से 36.99 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। राजस्थान से चालू रबी में खरीद का लक्ष्य 16 लाख टन का तय किया है जबकि पिछले साल राजस्थान से 12.45 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इसके अलावा बिहार से 2 लाख टन, उत्तराखंड से एक लाख टन, गुजरात से 50 हजार टन और अन्य राज्यों से भी 50 हजार टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य ​तय किया है।
रबी में 55 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य
रबी विपणन सीजन 2018—19 में चावल की खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का तय किया गया है जबकि खरीफ में 375 लाख टन चाल की खरीद की गई है। आंध्रप्रदेश से चावल की खरीद का लक्ष्य 18 लाख टन, तेलंगाना से 19 लाख टन, उड़ीसा से 7 लाख टन, तमिलनाडु से 5 लाख टन, केरल से 1.32 लाख टन, पश्चिमी बंगाल से 4 लाख टन, असम से 34 हजार टन और महाराष्ट्र से भी 34 हजार टन चावल की लक्ष्य तय किया है।
चालू रबी में गेहूं की बुवाई कम
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी सीजन में गेहूं की बुवाई घटकर 304.29 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 317.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
उत्पादन अनुमान में कमी की आशंका
मंत्रालय ने चालू रबी में गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य 975 लाख टन का ही रखा है जबकि फसल सीजन 2016-17 में गेहूं का उत्पादन 983.8 लाख टन का हुआ था।....... आर एस राणा

12 February 2018

मध्य प्रदेश में गेहूं और धान किसानों को मिलेगा 200 रुपये का बोनस

आर एस राणा
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्य सरकार गेहूं के साथ ही धान के किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी। मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान की फसल पर किसानों को यह बोनस मिलेगा।
राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार पिछले साल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमतें मिली थी, इसलिए राज्य के किसानों को गेहूं और धान का उचित मूल्य नहीं पाया था। इसलिए हमने फैसला किया है कि मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान पर किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जायेगा।
मध्य प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा बोनस दिए जाने की घोषणा से गेहूं की कीमतों में 50 से 100 रुपये का सुधार आने का अनुमान है।
रबी विपणन सीजन 2018—19 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017—18 के लिए धान कामन ग्रेड का एमएसपी 1,550 रुपये और ए ग्रेड के धान का भाव 1,590 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।........  आर एस राणा


महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश और ओलवाृष्ठि से फसलों को नुकसान

महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में बेमौसम ओलावृष्टि और भारी बारिश होने से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। राज्य के कृषि निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार जालना, बीड, अमरावती, बुल्धाना, वाशिम, अकोला और आसपास के इलाकों में ओलावृष्टि से गेहूं, अंगूर, चना और आम की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सुबह साढ़े सात बजे से ओलावृष्टि शुरू हुई और यह आधे घंटे तक लगातार जारी रही।
जालना व कुछ अन्य हिस्सों पर महज 15 मिनट तक ओलावृष्टि हुई लेकिन इतने में ही ऐसा दृश्य सामने आया कि हरे-भरे खेत कश्मीर की घाटी की तरह जैसे बर्फ की चादर से ढंक गए। किसानों ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से चना, नारंगी, केला, ज्वार, गेहूं और आम व अन्य फसलें तबाह हो गई। कुछ जगहों पर टेनिस की गेंद के आकार के ओले पड़े, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान वाशिम के यमुना हुमबड़ और जालना के नामदेव शिंदे (70) के रूप में हुई हैै। वाशिम में दो लोग घायल भी हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद सक्रियता दिखाई और राज्य के कृषि मंत्री ने सभी किसानों को उनकी तबाह हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की घोषणा की।
उधर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई इलाकों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश और ओले गिरे। प्रदेश के सीहोर, विदिशा, होशंगाबाद, गुना, राजगढ़, हरदा बैतूल और रायसेन सहित अन्य कई इलाकों में हुई बारिश और ओलावृष्टि से चना, सरसों और गेंहू की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में भी आंधी—तूफान और ओलावृष्ठि की संभावना है।