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30 दिसंबर 2008

यूपी में मिल रहा है एक रुपये किलो आलू, बोलो खरीदोगे!

थोक बाजार में तेरह साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा आलू
सिध्दार्थ कलहंस / लखनऊ December 29, 2008
साल दर साल बंपर पैदावार के बाद उत्तर प्रदेश में आलू सड़कों पर फेंका जा रहा है। किसानों द्वारा कोल्ड स्टोरों से माल न निकालने के बाद अब इन स्टोरों के मालिक आलू सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं।
इससे भी बदतर हालात यह है कि इस साल थोक बाजारों में आलू की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर नीचे चली गई है। उत्तर प्रदेश के थोक बाजारों में आलू की कीमत बीते 13 सालों में सबसे कम स्तर पर जा पहुंची है।इस समय प्रदेश की थोक मंडियों में आलू की नई फसल की कीमत एक रुपये प्रति किलोग्राम है जो कि बीते 13 सालों में सबसे कम है।पहली बार सीजन की शुरुआत होते ही खुदरा बाजारों में आलू की कीमत गिरकर 2 से 3 रुपये के स्तर पर आ गई है। किसानों की बदहवासी का आलम यह है कि इस साल कोल्ड स्टोरों में आलू रखने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है। हालांकि किसानों का कहना है कि इसके पीछे खास वजह कोल्ड स्टोर मालिकों द्वारा एडवांस मांगा जाना है। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीते साल आलू की पैदावार रिकॉर्ड 130 लाख टन हुई थी और इस साल भी पैदावार इसी आंकड़े के आस-पास रहने की आशा है। अधिकारियों का कहना है कि आलू की फसल के पूरे आंकड़े अभी आ नही सके हैं पर आशा है कि इस साल भी 110 से 125 लाख टन की पैदावार होगी। गौरतलब है कि बीते साल आलू की कीमतों थोक बाजारों गिरकर 2 रुपये किलोग्राम तक आ गई थीं। किसानों की बदहाली का आलम यह है कि बीते साल कोल्ड स्टोरों मे जमा आलू भी निकाला नहीं गया है। यह हालत तब है जब किसानों के लिए कोल्ड स्टोर मालिकों ने अपनी शर्तों पर आलू निकालने की छूट दे दी है। कई कोल्ड स्टोर मालिकों ने तो किसानों को बिना भाड़ा दिए आलू निकालने की इजाजत दे दी है। उत्तर प्रदेश कोल्ड स्टोर एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र स्वरुप के मुताबिक किसानों को हर तरह की सुविधा देने के लिए कोल्ड स्टोर मालिक तैयार हैं, फिर भी करीब 25 से 30 फीसदी आलू अभी कोल्ड स्टोरों में पड़ा है। इन्हें निकालने से किसानों ने इनकार कर दिया है। इससे परेशान कोल्ड स्टोर मालिकों ने आलू निकालकर सड़क पर फेंक दिया है। महोबा, फर्रुखाबाद, आगरा, झांसी और इटावा में सड़कों के किनारे करीब 800 क्विंटल आलू फेंक दिया गया है। हाताल बेकाबू देख कर प्शासन ने अब आलू को गरीबों के बीच मुफ्त बांटने का फैसला किया है। (BS Hindi)

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