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22 नवंबर 2013

चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने के मूड में नहीं खाद्य मंत्रालय

यूपी में गन्ने का मूल्य घटाने की मांग कर रही मिलों का पेराई से इंकार मौजूदा सीजन में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों की पेराई से इंकार के बावजूद खाद्य मंत्रालय कोई और राहत देने के मूड में नहीं है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के. वी. थॉमस ने गुरुवार को कहा कि चीनी पर आयात शुल्क बढ़ाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। इस समय चीनी पर 15 फीसदी आयात शुल्क है जबकि उद्योग आयात शुल्क को बढ़ाकर 60 फीसदी करने की मांग कर रहा है। सरकार ने बुधवार को चीनी उद्योग को कुछ अन्य रियायतें देने की पहल की थी। थॉमस ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मिलों पर गन्ना किसानों की जो बकाया राशि बची हुई है, वह राज्य सरकार का मसला है तथा इससे निपटने में राज्य सरकार उद्योग की सहायता कर सकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार पहले ही उद्योग से लेवी चीनी और रिलीज मेकेनिज्म को समाप्त करके राहत दे चुकी है। चीनी उद्योग का कहना है कि चीनी की कीमतों में पिछले साल की तुलना में भारी कमी आई है जबकि राज्य सरकार ने गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) पिछले साल के बराबर ही तय किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सीजन 2013-14 के लिए अगेती किस्म के गन्ने का एसएपी 290 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य किस्म के लिए 280 रुपये प्रति क्विंटल तथा दोयम किस्म के गन्ने के लिए 275 रुपये प्रति क्विंटल का ही दाम तय किया है। मिलें गन्ने के खरीद मूल्य में कटौती चाहती हैं। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार पिछले साल पेराई सीजन के शुरू में चीनी की कीमतें 3,150 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि इस समय दाम 2,900 से 2,950 रुपये प्रति क्विंटल है। पेराई सीजन 2013-14 का ही मिलों पर अभी भी करीब 2,400 करोड़ रुपये बकाया है। राज्य सरकार ने सामान्य किस्म के गन्ने का एसएपी 280 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, इससे नए पेराई सीजन में मिलों पर बकाया राशि का बोझ बढ़कर 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये हो सकता है जिससे किसान गन्ने की खेती से पलायन करने को मजबूर होंगे। मौजूदा चीनी की कीमतों के आधार पर चालू पेराई सीजन में गन्ने का एसएपी घटाकर 225 रुपये प्रति क्विंटल ही तय होना चाहिए। (Business Bhaskar.....R S Rana)

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