Total Pageviews

28 August 2015

सोया खली में निर्यात मांग कम होने का असर सोयाबीन की कीमतों पर


महाराष्ट्र में बारिष की कमी का असर पैदावार पर पड़ने की आषंका
आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में बारिष कम होने का असर सोयाबीन की पैदावार पर पड़ने की आषंका तो है लेकिन सोया खली और तेल में कमजोर मांग होने के कारण इसकी कीमतों में अभी भारी तेजी की संभावना नहीं है।
सोयाबीन के थोक कारोबारी नरेष गोयनका ने बताया कि सोया खली में निर्यात के साथ ही घरेलू मांग भी कमजोर बनी हुई है जबकि आयातित खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा होने के कारण तेल में भी मांग सीमित मात्रा में आ रही है। हालांकि चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई तो पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे जैसे हालात का असर सोयबीन की पैदावार पर पड़ने की आषंका है। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद भी सोयाबीन की कीमतों में भारी तेजी की संभावना नहीं है।
सोयाबीन के कारोबारी उमेष जैन ने बताया कि उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक तो कम है लेकिन प्लांटों की मांग भी कमजोर बनी हुई है जिससे भाव में तेजी नहीं आ पा रही है। उन्होंने बताया कि इंदौर मंडी में सोयाबीन के भाव 3,300 से 3,350 रुपये, कोटा मंडी में 3,200 से 3,300 रुपये और लातूर मंडी में 3,390 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। कांडला बंदरगाह पर सोया खली के भाव 31,000 रुपये प्रति टन रह गए जबकि इंदौर में सोया खली के भाव 29,500 रुपये प्रति टन रहे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई बढ़कर 114.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 110.30 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
साल्वेंट एक्ट्रेक्टर्स एसोसिएषन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही में सोया खली का निर्यात घटकर 34,161 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,00,746 टन का निर्यात हुआ था। भारतीय बंदरगाह पर सोया खली के भाव जून महीने में घटकर 553 डॉलर प्रति टन रह गए जबकि मई महीने में इसके भाव 592 टन प्रति टन थे।...आर एस राणा

दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी


धान की रौपाई पिछले साल के लगभग बराबर
आर एस राणा
नई दिल्ली। जून महीने में हुई अच्छी बारिष से चालू खरीफ में दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में 345.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 345.48 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई बढ़कर 105.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 94.18 लाख हैक्टेयर में ही दालो की बुवाई हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई 34.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 33.58 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह से उड़द की बुवाई पिछले साल के 23.24 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 26.34 लाख हैक्टेयर में और मूंग की बुवाई 19.97 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 23.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 172.67 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 167.23 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। बाजरा की बुवाई 67.02 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 62.57 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मक्का की बुवाई पिछले साल के 73.30 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 73.79 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में 174.59 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 172.26 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू खरीफ में 114.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 110.30 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंगफली की बुवाई पिछले साल के 35.73 लाख हैक्टेयर से घटकर 34.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 48.84 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अविध में 47.17 लाख हैक्टेयर में गन्ने की बुवाई हुई थी। कपास की बुवाई पिछले साल के 122.50 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 112.68 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।.......आर एस राणा

27 August 2015

अनुकूल मौसम से आस्ट्रेलिया में चने की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान


अक्टूबर में आयेगी नई षिपमेंट, भाव में गिरावट की आषंका
आर एस राणा
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया में अनुकूल मौसम से चना की पैदावार बढ़ने का अनुमान है तथा सितंबर के आखिर में नई फसल की आवक षुरु हो जायेगी, तथा अक्टूबर में षिपमेंट चालू हो जायेंगे, जिससे घरेलू बाजार में चने की कीमतें में गिरावट आने की आषंका है।
चना आयातक संतोष उपाध्याय ने बताया कि हम आस्ट्रेलिया से कुल आयात 70 से 75 फीसदी चना आयात करते हैं तथा चालू सीजन में आस्ट्रेलिया में मौसम फसल के अनुकूल बना हुआ है जिससे पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया चना के भाव 710 डॉलर प्रति टन है तथा अक्टूबर-नवंबर षिपमेंट के सौदे 690 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं। आस्ट्रेलिया में चने की नई फसल की आवक सितंबर महीने के आखिर में षुरु होगी, तथा षिपमेंट अक्टूर-नवंबर में होगी।
चना कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि घरेलू बाजार में उपलब्धता कम होने के कारण चना की कीमतों में तेजी बनी हुई है। वैसे भी चना दाल अन्य दालों के मुकाबले अभी भी सस्ती है इसलिए चना दाल की खपत ज्यादा हो रही है। घरेलू बाजार में सितंबर महीने में चना के दाम उंचे रह सकते हैं लेकिन अक्टूबर-नवंबर में भाव घटने की संभावना है। दिल्ली में गुरुवार को चना के भाव 4,850 से 4,875 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा दैनिक आवक 25 से 30 मोटर की हुई। महाराष्ट्र की लातूर मंडी में चना के भाव 4,950 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा इसकी कीमतों में 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। मध्य प्रदेष की इंदौर मंडी में चना के भाव 4,600 रुपये और राजस्थान की जयपुर मंडी में 4,850 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
चना व्यापारी महेष जैन ने बताया कि चना के प्रमुख चना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेष के कुछ भागों में अगस्त महीने में कम बारिष हुई है जिसका असर रबी में चना की बुवाई पर पड़ सकता है। ऐसे में आगामी दिनों में चना की तेजी-मंदी काफी हद तक मानसूनी बारिष पर भी निर्भर करेगी।
कृषि मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल वर्ष 2014-15 में चना की पैदावार घटकर 71.7 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल इसकी रिकार्ड पैदावार 95.3 लाख टन की हुई थी।.....आर एस राणा

स्टॉकिस्टों की सक्रियता से बढ़े रहे हैं ग्वार के भाव


ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 52 फीसदी की भारी गिरावट
आर एस राणा
नई दिल्ली। ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कमजोर बनी हुई है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता से ग्वार की कीमतों में तेजी आई है। उत्पादक मंडियों में पिछले 10 दिनों में ग्वार सीड की कीमतो में करीब 500 से 550 रुपये और ग्वार गम की कीमतों में 1,200 से 1,250 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है।
ग्वार गम निर्यातक कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कमजोर बनी हुई है, लेकिन स्टॉकिस्टों की पकड़ मजबूत होने से ग्वार के भाव में तेजी बनी हुई है। उत्पादक राज्यों में जून महीने में हुई अच्छी बारिष से ग्वार की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन अगस्त महीने में बारिष कम होने का डर दिखाकर स्टॉकिस्ट बाजार में सक्रिय हो गए हैं। जोधपुर मंडी में 17 अगस्त को ग्वार का भाव 3,600 रुपये और गंगानगर मंडी में 3,500 रुपये प्रति क्विंटल था। जोधपुर मंडी में इस दौरान ग्वार गम का भाव 7,800 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि गुरुवार को ग्वार गम का भाव बढ़कर 9,050 रुपये और ग्वार का भाव 4,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। गंगानगर मंडी में इस दौरान ग्वार का भाव बढ़कर 4,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान मूल्य के हिसाब से ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 1,534.08 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 3,192.69 करोड़ रुपये का हुआ था।
एपिडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 48 फीसदी की गिरावट आकर केवल 90,000 टन ग्वार गम उत्पादों का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1.78 लाख टन का निर्यात हुआ था।
ग्वार कारोबारी सुरेंद्र सिंघला ने बताया कि उत्पादक मंडियों में ग्वार की दैनिक आवक 18 से 20 हजार बोरी की हो रही है। चालू सीजन में ग्वार की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन आगामी दिनों में तेजी-मंदी काफी हद तक मानसूनी बारिष पर निर्भर करेगी। अगर आगामी सप्ताह में उत्पादक राज्यों में बारिष हुई तो भाव घट सकते हैं, लेकिन अगर बारिष नहीं हुई तो फिर स्टॉकिस्ट और भी भाव को बढ़ा देंगे।......आर एस राणा

25 August 2015

महाराष्ट्र के अहमदनगर में नई उड़द की आवक षुरु


आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की अहमदनगर मंडी में नई उड़द की आवक षुरु हो गई है तथा मंडी में नई उड़द के भाव 8,700 रुपये प्रति क्विंटल रहे। चालू खरीफ में उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है लेकिन प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में बारिष की कमी का असर फसल पर पड़ने की आषंका है। आयातित उड़द के भाव भी तेज बने हुए हैं। ऐसे में अभी उड़द की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है।
उड़द कारोबारी संतोष उपाध्याय ने बताया कि अहमदनगर मंडी में नई उड़द की आवक षुरु हो गई है तथा आगामी दिनों में अन्य मंडियों में भी आवक षुरु हो जायेगी। हालांकि अन्य दालें तेज बनी हुई है इसलिए अभी कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं है। मुंबई में आयातित उड़द एफएक्यू का भाव 1,200 डॉलर और एसक्यू का 1,350 डॉलर प्रति टन हो गया। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में उड़द की बुवाई तो पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है लेकिन उत्पादक राज्यों में बारिष कम होने से प्रति हैक्टेयर पैदावार पर असर पड़ने की आषंका है।
दलहन कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि पिछले पंद्रह दिनों में उड़द की कीमतों में 1,000 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। हालांकि चालू सीजन में उड़द की पैदावार तो ज्यादा हुई थी लेकिन अन्य दालों की कीमतों में आई तेजी का असर इसकी कीमतों पर पड़ा है। साथ ही आयातित उड़द के भाव लगातार तेज बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की सोलापुर मंडी में उड़द के भाव 8,500 से 8,600 रुपये, अकोला मंडी में 7,500 से 8,000 रुपये, उत्तर प्रदेष की कानपुर मंडी में 8,800 रुपये और मध्य प्रदेष की इंदौर मंडी में 8,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में उड़द की बुवाई 24.63 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 21.57 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में उड़द की पैदावार 18.7 लाख टन की हुई है जबकि इसके पिछले साल इसकी पैदावार 17 लाख टन की हुई थी।..............आर एस राणा

सूखे से निपटने के लिए केंद्र ने प्रमाणित बीजों पर बढ़ाई सब्सिडी


आर एस राणा
नई दिल्ली। देष के कई जिलों में जुलाई-अगस्त में हुई कम बारिष से सूखे जैसे हालात बन गए है इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने धान, दलहन और मोटे अनाज के प्रमाणित बीजों पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी की दर बढ़ौतरी कर दी है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देष के कई जिलों में जुलाई-अगस्त में हुई बारिष से सूखे जैसे हालात बन गए हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को फसलों की दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है इसलिए मत्रालय ने किसानों पर आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सब्सिडी की दर में बढ़ोतरी करनी का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि बढ़ी हुई सब्सिडी का लाभ केवल सूखाग्रस्त जिले के किसानों को ही मिलेगा।
उन्होंने बताया कि धान के हाईब्रिड बीजों पर किसानों को सब्सिडी 7,500 रुपये प्रति क्विंटल या फिर 50 फीसदी लागत के आधार पर मिलेगी जबकि पहले यह 5,000 रुपये प्रति क्विंटल और लागत का 50 फीसदी थी। इसी तरह से दलहन के बीजों पर किसानों को सब्सिडी 3,750 रुपये प्रति क्विंटल या फिर लागत का 50 फीसदी जो भी कम हो उस आधार पर सब्सिडी मिलेगी, जबकि पहले 2,500 रुपये प्रति क्विंटल या फिर लागत का 50 फीसदी के आधार पर थी। इसी तरह से मोटे अनाजों के हाईब्रिड बीजों पर सब्सिडी की दर को बढ़ाकर 7,500 प्रति क्विंटल एवं 50 फीसदी लागत के आधार पर कर दिया है जबकि पहले यह 5,000 रुपये प्रति क्विंटल या फिर लागत का 50 फीसदी के आधार पर थी।
उन्होंने बताया कि सभी राज्यों को इस बारे में पत्र लिख दिया गया है तथा किसानों को सब्सिडी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिषन के अलावा आरकेवीवाई स्कीम के तहत दी जायेगी।......आर एस राणा

24 August 2015

आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में बारिश कम होने से हल्दी में और तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। हल्दी के प्रमुख उत्पादक राज्यों आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में बारिश की कमी का असर हल्दी की कीमतों पर पड़ रहा है, साथ ही उत्तर भारत की मांग बढ़ने से भी इसके भाव बढ़ रहे हैं। घरेलू मसाला कंपनियों के साथ ही निर्यातकों की मांग बढ़ने की उम्मीद है जिससे मौजूदा कीमतों में और भी सुधार आने का अनुमान है।
हल्दी कारोबारी पी सी गुप्ता ने बताया कि चालू खरीफ में हल्दी की बुवाई तो अच्छी हुई है लेकिन अगस्त महीने में बारिश कम हुई है जिससे स्टॉकिस्टों की सक्रियता बढ़ गई है। यही कारण है कि हल्दी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव बढ़कर 7,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा दैनिक आवक 800 बोरी की हुई। इंरोड मंडी में हल्दी के भाव 7,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा दैनिक आवक 4,000 बोरी की हुई। नंानदेड मंडी में हल्दी के भाव 7,000 से 8,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्पादक मंडियों में पिछले आठ-दस दिनों में हल्दी की कीमतों में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है।
हल्दी व्यापारी सुरेंद्र जैन ने बताया कि त्यौहारी सीजन से पहले घरेलू मसाला कंपनियों की मांग बढ़ने से हल्दी की कीमतों में तेजी आई है, जबकि इस समय उत्पादक मंडियों में हल्दी की दैनिक आवक पहले की तुलना में कम हो रही है। चालू खरीफ में हल्दी की बुवाई करीब 70 से 80 फीसदी पूरी हो चुकी है, लेकिन जुलाई-अगस्त महीने में प्रमुख उत्पादक राज्यों आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु आदि के हल्दी उत्पादक क्षेत्रों में बारिश कम हुई है जबकि इस समय फसल को पानी की जरुरत है। ऐसे में हल्दी की कीमतों में और भी तेजी की संभावना है।
खाड़ी देषों की आयात मांग भी हल्दी में आनी शुरु हो गई है त्यौहारी सीजन को देखते उत्तर भारत के राज्यों की मांग भी बढ़ी है। इसलिए आगामी दिनों में भाव में और सुधार आने का अनुमान है वैसे भी हल्दी की नई फसल आने में अभी करीब 6 महीने बचे हुए हैं। आंध्रप्रदेश में हल्दी की बुवाई 9,772 हैक्टेयर में और तेलंगाना में 38,990 हैक्टेयर में हल्दी की बुवाई हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान 25,000 टन हल्दी का निर्यात हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी का भाव 3.53 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले साल की समान अवधि में भी विश्व बाजार यही भाव थे।
भारतीय मसाला बोर्ड के वित वर्ष 2014-15 के दौरान हल्दी का निर्यात बढ़कर 86,000 टन का हुआ है जबकि वित वर्ष 2013-14 में इसका निर्यात 77,500 टन का हुआ था। मसाला बोर्ड ने वित वर्ष 2014-15 में हल्दी के निर्यात का लक्ष्य 80,000 टन का रखा था। ......आर एस राणा

22 August 2015

केंद्र ने प्याज की तेजी रोकने के लिए एमईपी 700 डॉलर किया

केंद्र ने प्याज की तेजी रोकने के लिए एमईपी 700 डॉलर किया
आर एस राणा
नई दिल्ली। प्याज की कीमतों में चल रही तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) को 425 डॉलर से बढ़ाकर 700 डॉलर प्रति टन कर दिया। साथ ही 10,000 टन प्याज आयात के लिए भी निविदा आमंत्रित की है।
मालूम हो कि केंद्र सरकार ने प्याज की नई फसल की आवक के समय अप्रैल महीने में प्याज के एमईपी को 300 डॉलर प्रति टन से घटाकर 250 डॉलर प्रति टन किया था लेकिन घरेलू मंडियों में प्याज की कीमतों में आई तेजी के कारण उपभोक्ताओं के हित के लिए केंद्र सरकार ने जून महीने में एमईपी को बढ़ाकर 425 डॉलर प्रति टन कर दिया था।
प्याज की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है तथा खुदरा में प्याज के भाव बढ़कर 70 से 75 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। आजादपुर मंडी में सप्ताहभर में प्याज की कीमतों में 600 से 750 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। मंडी में पूना लाईन के प्याज का भाव बढ़कर 1,900 से 2,100 रुपये प्रति 40 किलो हो गया।
इस समय प्याज का लीन सीजन चल रहा है तथा मंडियों में इस समय रबी सीजन का प्याज आ रहा है, अक्टूबर में खरीफ के प्याज की आवक षुरु हो जायेगी। प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में प्याज का करीब 20 से 22 लाख टन का बकाया स्टॉक जमा है लेकिन तेजी के कारण स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आ रही है।
प्याज की पैदावार देष में रबी सीजन के अलावा खरीफ और लेट खरीफ में भी होता है। रबी प्याज की आवक उत्पादक मंडियोें में मार्च से जून महीने तक होती है जबकि खरीफ प्याज की आवक अक्टूबर से दिसंबर तक तथा लेट खरीफ प्याज की आवक उत्पादक मंडियों में जनवरी से मार्च तक होती है। खरीफ में प्याज का उत्पादन 15 से 20 फीसदी और लेट खरीफ में 20 से 25 फीसदी होता है जबकि रबी में प्याज का उत्पादन 60 से 65 फीसदी तक होता है। इस समय उत्पादक मंडियों में रबी सीजन की प्याज की आवक बनी हुई है।
कृषि मंत्रालय के राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल वर्ष 2014-15 में प्याज की बुवाई 11.92 लाख हैक्टेयर में हुई है तथा पैदावार 193.57 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल इसकी बुवाई 12.03 लाख हैक्टेयर में हुई थी तथा पैदावार 194.01 लाख टन की हुई थी। रबी सीजन में प्याज की खुदाई के समय कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिष और ओलावृष्टि से भी फसल को नुकसान हुआ था जिसकी वजह से प्याज का स्टॉक पिछले साल की तुलना में कम हुआ, उसकी का असर इस समय कीमतों पर देखा जा रहा है।
वित वर्ष 2014-15 के के दौरान 10.86 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ है जबकि वित वर्ष 2013-14 में देष से 13.58 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था जबकि इसके पिछले वित वर्ष 2012-13 में 16.66 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था।............आर एस राणा

21 August 2015

The total sown area under kharif crops as on

Kharif Crop Sowing Crosses 938 Lakh Hectares
           The total sown area under kharif crops as on 21th August, 2015 stands at has reached to 938.41 lakh hectares as compared to 929.48 lakh hectare last year at this time.
             Rice has been sown/transplanted in 333.65 lakh hectares, pulses in 101.96 lakh hectare, coarse cereals in 167.69 lakh hectare, oilseeds in 168.25 lakh hectare and cotton in 110.23 lakh hectare.
             The details of the area covered so far and that covered during last year this time given as follows:

                                                                                                                              Lakh hectare 
Crop
Area sown in 2015-16
Area sown in 2014-15
Rice
333.65
332.09
Pulses
101.96
92.57
Coarse Cereals
167.69
162.27
Oilseeds
168.25
168.45
Sugarcane
48.84
47.17
Jute & Mesta
7.80
8.13
Cotton
110.23
118.81
Total
938.41
929.48

            

दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी, कपास और तिलहनों की पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में दलहन के साथ मोटे अनाजों की बुवाई में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन कपास के साथ ही तिलहनों की बुवाई में कमी आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में देषभर में 938.41 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 929.48 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में बढ़कर 333.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 332.09 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। चालू खरीफ में दलहन की बुवाई बढ़कर 101.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 92.57 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह से मोटे अनाजों की बुवाई बढ़कर 167.69 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 162.27 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
कपास की बुवाई चालू खरीफ में केवल 110.23 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 118.81 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। तिलहनों की बुवाई भी पिछले साल के 168.45 लाख हैक्टेयर से कम होकर केवल 168.25 लाख हैक्टेयर में ही हुई है। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 48.84 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक  47.17 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।....आर एस राणा

रबी 2015-16 में दलहन पैदावार बढ़ाने के लिए 400 करोड़ का अतिरिक्त आवंटन


पचास-पचास फीसदी खर्च का वहन करना होंगा केंद्र और राज्यों को मिलकर
आर एस राणा
नई दिल्ली। देष को दलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। रबी सीजन 2015-16 में दालों की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि मंत्रालय ने राज्यों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिषन (एनएफएसएम) के तहत अलग से 400 करोड़ रुपये आंविटत करने का फैसला किया है। इसमें केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों को 50-50 फीसदी राषि का वहन करना होगा।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दालों के आयात में कमी लाने के लिए सरकार देष में दालों की पैदावार बढ़ाने पर जोर दे रही है। एनएफएसएम के अतंर्गत इसके लिए 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राषि का आवंटन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए देष के 19 राज्यों आंध्रप्रदेष, तेलंगाना, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटका, मध्य प्रदेष, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेष, पष्चिमी बंगाल, हिमाचल प्रदेष, जम्मू-कष्मीर और उत्तराखंड का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि चिंहित राज्यों में किसानों को प्रमाणित बीजों के साथ ही खाद आदि पर सब्सिडी दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा राषि का आवंटन मध्य प्रदेष को 115 करोड़ रुपये, राजस्थान को 54 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 53 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेष को 40 करोड़ रुपये, कर्नाटका को 29 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 17 करोड़ रुपये, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेष को क्रमषः 15-15 करोड़ रुपये, तेलंगाना को 13 करोड़ रुपये, बिहार को 12 करोड़ रुपये, उड़ीसा और गुजरात को क्रमषः 9-9 करोड़ रुपये, झारखंड को 6 करोड़ रुपये और हरियाणा को 4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि 2015-16 में देष में 200.5 लाख टन दलहन की पैदावार का लक्ष्य तय किया है जिसमें रबी में 130 और खरीफ में 70.5 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। दलहन की ज्यादा पैदावार रबी सीजन में होती है तथा रबी में दलहन की प्रमुख पैदावार चने की है। फसल सीजन 2014-15 में देष में दलहन की पैदावार 172 लाख टन की ही हुई थी। इस दौरान चने की पैदावार 71.7 लाख टन और अरहर की पैदावार 27.8 लाख टन की हुई है। दलहन की घरेलू पैदावार कम होने के कारण ही वित्त वर्ष 2014-15 में देष में रिकार्ड 45 लाख टन दालों का आयात हुआ है।......आर एस राणा

20 August 2015

महाराष्ट्र और कर्नाटका में बारिष कम होने से अरहर को नुकसान की आषंका


म्यंामार में स्टॉक कम होने से आयात पड़ते महंगे, घरेलू बाजार में और तेजी संभव
आर एस राणा
नई दिल्ली। अरहर के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटका में बारिष सामान्य से कम होने का असर इसकी फसल पर पड़ने की आषंका बनी हुई है। इसीलिए अरहर की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। म्यांमार में अरहर का स्टॉक कम है जबकि नई फसल आने में अभी काफी टाइम है, ऐसे में घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अरहर के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटका में मध्य जुलाई से मध्य अगस्त तक बारिष सामान्य से कम हुई है जिससे फसल को नुकसान होने की आषंका है। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में अरहर की बुवाई 32.18 लाख हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 31.67 लाख हैक्टेयर से तो ज्यादा है, बारिष की कमी का असर पैदावार पर पड़ सकता है। महाराष्ट्र में चालू खरीफ में अरहर की बुवाई 9.43 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 9.03 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। कर्नाटका में केवल 5.25 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई है जबकि पिछले इस समय तक 6.3 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
दलहन कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में स्टॉक कम होने के साथ ही आयात पड़ते महंगे होने से घरेलू बाजार में अरहर की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। पिछले दस दिनों में अरहर की कीमतों में करीब 1,500 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। दिल्ली में गुरूवार को अरहर की कीमतें बढ़कर 9,500 से 10,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जबकि उत्तर प्रदेष की कानपुर मंडी में इसके भाव 9,250 रुपये, लातूर मंडी में अरहर लाल के भाव 10,500 रुपये, इंदौर मंडी में 10,000 रुपये और नागपुर मंडी में 10,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दलहन व्यापारी संतोष उपाध्याय ने बताया कि म्यंमार में अरहर का स्टॉक कम पिछले साल से कम है साथ ही भारत की बढ़ती आयात मांग के कारण भाव में लगातार तेजी बनी हुई है। मुंबई में लेमन अरहर के भाव बढ़कर 9,650 से 9,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि 10 अगस्त को इसके भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल थे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में अरहर की पैदावार घटकर 27.8 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी रिकार्ड पैदावार 31.17 लाख टन की हुई थी।........आर एस राणा

19 August 2015

मूंगफली का स्टॉक कम, कीमतों में और तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में मूंगफली का स्टॉक सीमित मात्रा में बचा हुआ है जबकि इस समय तेल में मांग अच्छी बनी हुई है। चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में कम हुई है तथा गुजरात के प्रमुख मूंगफली उत्पादक क्षेत्रों में अभी तक बारिष भी कम हुई है। ऐसे में मूंगफली की कीमतों में तेजी जारी रहने की संभावना है।
मूंगफली कारोबारी समीर भाई षाह ने बताया कि उत्पादक राज्यों में मूंगफली का स्टॉक काफी कम है जबकि इस समय मूंगफली तेल में घरेलू मांग अच्छी है। इसीलिए मूुंगफली की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। राजकोट में मूंगफली के भाव बढ़कर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि मूंगफली तेल का भाव 1,075 रुपये प्रति 10 किलो हो गया। उन्होंने बताया कि उत्पादक मंडियों में मूंगफली की दैनिक आवक घटकर 5,000 से 6,000 बोरी (एक बोरी-35 किलो) की रह गई। नई फसल की आवक अक्टूबर में बनेगी, ऐसे में मौजूदा कीमतों में और भी तेजी की संभावना है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान मूंगफली दाने का निर्यात मूल्य के हिसाब से बढ़कर 935.14 करोड़ रुपये का हो गया जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 919.34 करोड़ रुपये का ही हुआ था।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई 32.37 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 33.47 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.....आर एस राणा

बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद कीमतों में भारी गिरावट


स्टॉकिस्टों को भारी घाटा, नए सीजन में भी कीमतों में तेजी की उम्मीद कम
आर एस राणा
नई दिल्ली। बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भी कीमतों में गिरावट बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही में बासमती चावल के निर्यात में 1.46 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है इसके बावजूद भी पूसा बासमती 1,121 सेला चावल की कीमतों में पिछले पंद्रह दिनों में करीब 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है।
एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान देष से 11.32 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 9.86 लाख टन का निर्यात हुआ था। इस दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात घटकर 14.35 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 16.50 लाख टन का निर्यात हुआ था। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2015-16 में बासमती चावल के निर्यात में पिछले साल की तुलना में करीब 8 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
बासमती चावल कारोबारी रामविलास खुरानियां ने बताया कि बासमती चावल की कीमतों में आई भारी गिरावट से स्टॉकिस्टों को भारी घाटा लग रहा है। उत्पादक मंडियों में पिछले पंद्रह दिनों में बासमती चावल की कीमतों में करीब 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है। मंडियों में पूसा बासमती 1,121 सेला चावल का भाव 4,700-4,800 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 4,200 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। इस दौरान बासमती 1,509 सेला चावल का भाव 3,900-4,000 रुपये से घटकर 3,300 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।
चावल व्यापारी राजेष जैन ने बताया कि चालू फसल सीजन में चावल की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है तथा मौसम भी फसल के अनुकूल है। ऐसे में चावल की पैदावार पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है। वैसे भी इस समय उत्पादक मंडियों में धान का स्टॉक बचा हुआ है। ऐसे में नए सीजन में भी बासमती धान की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि पूसा बासमती 1,121 धान की कीमतें घटकर 2,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गई जबकि दस दिन पहले इसकी कीमतें 2,600 से 2,650 रुपये प्रति क्विंटल थी। इसी तरह से पूसा बासमती 1,509 की कीमतें 1,900 रुपये से घटकर 1,750 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रौपाई बढ़कर 300.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 288.15 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।,.......आर एस राणा

17 August 2015

4th Advance production estimates of major crops during 2014-15

The Fourth Advance Estimates of production of major crops for 2014-15 have been released by the Department of Agriculture & Cooperation here today. As per these estimates, the production of major crops during 2014-15 is as under:
 
Ø   Foodgrains  –  252.68 million tonnes
·         Rice  –  104.80 million tonnes
·         Wheat – 88.94 million tonnes
·         Coarse Cereals  –  41.75 million tonnes
·         Maize  –  23.67 million tonnes 
·         Pulses  –  17.20 million tonnes 
·         Tur  –  2.78 million tonnes 
·         Gram – 7.17 million tonnes 
Ø   Oilseeds  –  26.68 million tonnes 
·         Soyabean  –  10.53 million tonnes
·         Groundnut  –  6.56 million tonnes 
·         Rapeseed& Mustard – 6.31 million tonnes
Ø   Cotton  –  35.48 million bales (of 170 kg each) 
Ø   Sugarcane – 359.33 million tonnes
 
It may be noted that production of kharif crops during 2014-15 suffered due to bad monsoon. Unseasonal rains/hailstorm during Feb-March 2015 had significant impact on production of rabi crops. As a result of setback in kharif as well as rabi seasons, the production of most of the crops in the country has declined during 2014-15. 
 
As per 4th Advance Estimates for 2014-15, total foodgrains production in the country is estimated at 252.68 million tonnes which is lower by 12.36 million tonnes than the last year’s record foodgrains production of 265.04 million tonnes. Total production of rice is estimated at 104.80 million tonnes which is lower by 1.85 million tonnes than the last year’s record production of 106.65 million tonnes. Production of wheat estimated at 88.94 million tonnes is lower by 6.91 million tonnes than the record production of 95.85 million tonnes achieved during 2013-14.  Total production of Coarse Cereals estimated at 41.75 million tonnes is also lower by 1.54 million tonnes than their production during 2013-14.
 
Production of pulses estimated at 17.20 million tonnes is lower by 2.05 million tonnes than their production during the last year. With a decrease of 6.07 million tonnes over the last year, total production of oilseeds in the country is estimated at 26.68 million tonnes.
 
Production of sugarcane is estimated at 359.33 million tonnes which is higher by 7.19 million tonnes as compared to last year. Total production of cotton estimated at 35.48 million bales (of 170 kgs each) is marginally lower than last year but higher by 3.01 million bales than the average production of last 5 years. Production of jute & mesta is estimated at 11.45 million bales (of 180 kg each) which is marginally lower than their production during the last year. 
 
 
In an agricultural year (July-June), the Directorate of Economics & Statistics (DES), Department of Agriculture& Cooperation, Ministry of Agriculture releases four Advance Estimates followed by Final Estimates of production of major agricultural crops of the country. First Advance Estimates, released in September when Kharif sowing is generally over, cover only Kharif crops. Second Advance Estimates are released in February next year when rabi sowing is also over. These estimates covering Kharif as well as rabi crops take into account firmed up figures on kharif area coverage along with available data on crop cutting experiments for yield assessment of Kharif crops and tentative figures on area coverage of rabi crops. Third Advance Estimates incorporating revised data on area coverage for rabi crops and better yield estimates of Kharif crops are released in April-May.
 
Fourth Advance Estimates are released in July-August and by this time fully firmed up data on area as well as yield of Kharif crops and rabi crops are expected to be available with the States. As such, Fourth Advance Estimates are considered to be almost as good as Final Estimates released in next February along with Second Advance Estimates for the subsequent agricultural year. In order to allow sufficient time to States to take into account even the delayed information while finalizing area and yield estimates of various crops, the Final Estimates are released about seven months after the Fourth Advance Estimates and no revision in the State level data is accepted after release of Final Estimates by DES.

खाद्यान्न उत्पादन घटकर 25.62 करोड़ टन होने का अनुमान


चौथे आरंभिक अनुमान में सरसों और चना उत्पादन में कमी आने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। फसल सीजन 2014-15 में देश में खाद्यान्न का उत्पादन घटकर 25.62 करोड़ टन होने का अनुमान है। रबी फसल की कटाई के समय उत्पादक राज्यों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से दलहन की प्रमुख फसल चना के साथ ही रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों को भी नुकसान हुआ था। अतः चौथे आरंभिक अनुमान में इनका उत्पादन तीसरे आरंभिक अनुमान के मुकाबले कम होगा। ऐसे में दलहन के साथ ही आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता और बढ़ जायेगी।
कृषि मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देश में खाद्यान्न का उत्पादन घटकर 25.62 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल देश में 26.50 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन हुआ था। चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार चना का उत्पादन घटकर 71.7 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में इसका उत्पादन 75.9 लाख टन होने का अनुमान था। फसल सीजन 2013-14 में देश में रिकार्ड 95.3 लाख टन चना की पैदावार हुई थी। दलहन की अन्य फसलों अरहर का उत्पादन 27.8 लाख टन होने का अनुमान है।
रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों का उत्पादन चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार 63.1 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार सरसों का उत्पादन 67.57 लाख टन का अनुमान था। फसल सीजन 2013-14 में देश में सरसों की पैदावार 78.77 लाख टन की हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन का उत्पादन चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार 105.3 लाख टन होने का अनुमान है जबकि मूंगफली का उत्पादन 65.6 लाख टन होने का अनुमान है।
रबी की प्रमुख फसल गेहूं का उत्पादन फसल सीजन 2014-15 में 889.4 लाख टन होने का अनुमान है जबकि चावल का उत्पादन 10.48 करोड़ टन होने का अनुमान है।
मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार मोटे अनाजों का उत्पादन 417.5 लाख टन होने का अनुमान है। मोटे अनाजों में मक्का का उत्पादन 236.7 लाख टन होने का अनुमान है। चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार कपास का उत्पादन तीसरे आरंभिक अनुमान 353.28 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) से बढ़कर 354.8 लाख गांठ होने का अनुमान है।........आर एस राणा 

पहली तिमाही में ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 48 फीसदी की भारी गिरावट



आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 48 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 90,000 टन का ही हुआ है। मूल्य के हिसाब से इस दौरान ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 52.61 फीसदी की भारी गिरावट आई है।
एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही में देश से केवल 90 हजार टन ग्वार गम उत्पादों का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 1.78 लाख टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ ही खाड़ी देशों की आयात मांग इस दौरान काफी कम रही है, लेकिन उम्मीद है कि आगामी दिनों में इन देशों की आयात मांग में सुधार आयेगा। निर्यातक कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि चालू खरीफ में उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिश से पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है जबकि उत्पादक राज्यों में ग्वार सीड का स्टॉक ज्यादा है। इसीलिए बिकवाली इस समय ज्यादा आ रही है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान देश से केवल 1,104.77 करोड़ रुपये मूल्य का ही ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2014-15 की पहली तिमाही में 2,331.12 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था।
ग्वार कारोबारी राजकुमार बंसल ने बताया कि ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कमजोर होने के साथ ही उत्पादक मंडियों में आवक ज्यादा होने से ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में लगातार गिरावट बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जोधपुर मंडी में ग्वार सीड के भाव घटकर सोमवार को 3,600 रुपये और गंगानगर मंडी में 3,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। जोधपुर मंडी में ग्वार गम के भाव घटकर 7,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उन्होंने बताया कि महीने भर में ग्वार सीड की कीमतों में करीब 500 से 600 रुपये और ग्वार गम की कीमतों में 1,000 से 1,100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है।......आर एस राणा

14 August 2015

खरीफ में दलहन की बुवाई बढ़ी, धान की रौपाई भी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई में तो बढ़ोतरी हुई ही है, साथ ही धान की रौपाई भी पिछले साल से ज्यादा हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ फसलों की बुवाई बढ़कर 890.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 863.61 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में बढ़कर 300.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान  अवधि में इसकी रोपाई्र 288.15 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से दलहन की बुवाई चालू सीजन में बढ़कर 97.44 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 87.29 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 163.75 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 155.14 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 163.78 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 160.83 लाख हैक्टेयर में तिलहनों की बुवाई हुई थी।
भले ही किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं हुआ हो लेकिन गन्ने की बुवाई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। हालांकि चालू सीजन में फसल की आवक के समय कपास के भाव एमएसपी से नीचे चले गए थे, इसका असर कपास की बुवाई पर जरुर पड़ा है। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 48.84 लाख हैक्टेयर मेें और कपास की बुवाई्र 108.67 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इनकी बुवाई क्रमषः 47.17 और 116.91 लाख हैक्टेयर में हुई थी।....आर एस राणा

वनस्पति के आयात में 26 फीसदी की भारी बढ़ोतरी


चालू तेल वर्ष में रिकार्ड वनस्पति तेलों का आयात होने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2014-15 के पहले 9 महीनों नवंबर-14 से जुलाई-15 के दौरान वनस्पतति तेलों (खाद्य एंव अखाद्य तेलों) के आयात में 26 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 10,351,016 लाख टन का हो चुका है। चालू तेल वर्ष में रिकार्ड 138-140 लाख टन तेलों का आयात होने का अनुमान है जिसकी कुल कीमत करीब 65,000 करोड़ रुपये होगी।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष के पहले 9 महीनों में वनस्पति तेलों का भारी आयात हो चुका है। इस दौरान 10,351,016 लाख टन का हुआ है जबकि तेल वर्ष की समान अवधि में 8,191,894 टन तेलों का आयात हुआ था। जुलाई महीने में वनस्पति तेलों का रिकार्ड आयात हुआ है। जुलाई में 1,501,195 टन खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात हुआ है जबकि पिछले साल जुलाई महीने में 1,109,674 टन का आयात हुआ था।
एसईए के अनुसार ओजीएल के तहत जुलाई 2015 में रिकार्ड 15.01 लाख टन खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात हुआ है जबकि इसके पहले रिकार्ड आयात मई 2015 में 13.71 लाख टन का हुआ था। जुलाई में पॉम तेल का भाव रिकार्ड 9.76 लाख टन का आयात हुआ है जबकि इससे पहले मई 2015 में 9.07 लाख टन का रिकार्ड हुआ था।
आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले तीन महीने से गिरावट बनी हुई है। भारतीय बंदरगाह पर आर बी डी पॉमोलीन का भाव मई 2015 में 667 डॉलर प्रति था जोकि जुलाई में घटकर 648 डॉलर प्रति टन रह गया। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव इस दौरान 647 डॉलर प्रति टन से घटकर 618 डॉलर प्रति टन रह गया। क्रुड सोयाबीन तेल का भाव इस दौरान 788 डॉलर प्रति टन से घटकर 725 डॉलर प्रति टन रह गए।.....आर एस राणा

13 August 2015

सीरिया और टर्की की फसल आने से जीरा की कीमतों में आई गिरावट


आर एस राणा
नई दिल्ली। सीरिया और टर्की में जीरा की नई फसल आने से विष्व बाजार के साथ ही घरेलू बाजार में भी जीरा की कीमतों में गिरावट आई है। विष्व बाजार में भारतीय जीरा का भाव घटकर 3.42 डॉलर प्रति किलो रह गया। प्रमुख उत्पादक मंडी उंझा में जीरा के भाव 2,700 से 3,200 रुपये प्रति 20 किलो क्वालिटीनुसार रहे।
जीरा निर्यातक रजनीकांत पोपट ने बताया कि सीरिया और टर्की में जीरा की नई फसल की आवक षुरु हो गई है तथा अगस्त-सितंबर में इन देषों में आवक का पीक सीजन होता है, साथ ही खाड़ी देषों को टर्की और सीरिया से भारत की तुलना में सस्ता जीरा मिलता है। इसीलिए विष्व बाजार में भी जीरा की कीमतों में कमी आई है। उन्होंने बताया कि विष्व बाजार में भारतीय जीरा का भाव घटकर 3.42 डॉलर प्रति किलो रह गया जबकि पिछले महीने इसका भाव 3.64 डॉलर प्रति किलो था। हालांकि टर्की और सीरिया में राजनीति गतिरोध के कारण भारत से निर्यात पिछले साल की तरह ज्यादा ही होगा।
जीरा कारोबारी एस अग्रवाल ने बताया कि उंझा मंडी में जीरा की दैनिक आवक 3,000 से 4,000 बोरी (एक बोरी-45 किलो) की हो रही है जबकि दैनिक सौदे 5,000 बोरी के हो रहे है। उन्होंने बताया कि मंडी में हल्की क्वालिटी के जीरा की आवक ज्यादा हो रही है जिससे भाव में कमी आई है। उन्होंने बताया कि महीने भर में जीरा की कीमतों में करीब 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है। उंझा मंडी में गुरुवार को हल्की क्वालिटी के जीरा का भाव 2,700 से 2,800 रुपये प्रति 20 किलो रहे जबकि बढ़िया क्वालिटी के जीरा के भाव 2,800 से 2,900 रुपये और निर्यात क्वालिटी जीरा के भाव 3,000 से 3,200 रुपये प्रति 20 किलो रहे।
सूत्रों के अनुसार उत्पादक मंडियों में जीरा की कुल आवक पिछले साल से आधी ही हुई है। पिछले साल इस समय तक मंडियों में 3,36,765 टन जीरा की आवक हुई थी जबकि चालू सीजन में अभी तक केवल 1,12,460 टन की ही आवक हुई है। प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में बेमौसम बारिष और ओलावृष्टि से जीरा की फसल की क्वालिटी काफी खरीद हुई थी जिसकी वजह से उच्च गुणवत्ता के जीरा की उपलब्धता कम है। उम्मीद है कि आगामी दिनों में निर्यातकों के साथ ही घरेलू मसाला कंपनियों की मांग बढ़ेगीा, जिससे कीमतों में फिर तेजी आने का अनुमान है।
मसाला बोर्ड के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में जीरा के निर्यात में 28 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 1,55,500 टन का हुआ था जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में केवल 1,21,500 टन का ही निर्यात हुआ था।.....आर एस राणा

चीनी उद्योग को रियायत


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में चालू पेराई सीजन में चीनी उद्योग की मुश्किलें सुलझाने तथा गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए कुछ रियायतें देने का फैसला किया है। सरकार ने प्रधानमंत्री गन्ना किसानों के भुगतान के लिए छह हजार करोड़ की मंजूरी दे दी है। वैसे तो इस राशि को पहले ही मंजूर किया जा चुका था पर इसकी शर्तो में पर्याप्त ढाल का फैसला अब किया गया।
सीसीईए के ताजा फैसले में दो बड़े प्रावधान किए गए हैं। पहले की शर्तों के मुताबिक इनमें 30 जून, 2015 तक 50 फीसद गन्ना मूल्य बकाया भुगतान करने वाली मिलों को ही इस रियायती कर्ज को प्राप्त करने की छूट थी। अब इसकी अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त, 2015 कर दी गई है। इससे सुविधा का लाभ 90 फीसद से अधिक चीनी मिलें उठा सकेंगी।
दूसरी छूट के मुताबिक अब उन चीनी मिलों को भी यह रियायती कर्ज मिल सकेगा, जिन्होंने गन्ना बकाये का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। उनके लिए सरकार ने दरवाजा खोल दिया है। इससे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मिलों को अपना कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों के भुगतान में तेजी आने की पूरी संभावना है। सीसीइए के फैसले में कहा गया है कि किसानों को गन्ने का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा। चीनी मिलों को उन किसानों की सूची बैंकों को मुहैया करानी होगी।

12 August 2015

पहली तिमाही में बासमती चावल का निर्यात घटा, गैर बासमती का बढ़ा


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान देष से बासमती चावल के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 19.28 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 6,779.89 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि इस दौरान गैर-बासमती चावल के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 6.79 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
उद्योग एंव वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बासमती चावल के निर्यात में कमी आई है। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान केवल 6,779.89 करोड़ रुपये मूल्य का ही बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2014-15 की समान अवधि में 8,399.44 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था।
उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में गैर-बासमती चावल के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 6.79 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 3,864.36 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 3,618.70 करोड़ रुपये का हुआ था।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में देष से बासमती के साथ ही गैर बासमती चावल के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई है। एपिडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों में 7.80 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6.22 लाख टन का हुआ था। इस दौरान देष से 10.48 लाख टन गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 9.29 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ था।
उत्पादक मंडियों में पूसा बासमती 1,121 धान की कीमतें 2,300 से 2,450 रुपये और बासमती धान की कीमतें 2,300 से 3,200 रुपये प्रति क्विंटल रही। महीने भर में इनकी कीमतों में करीब 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रौपाई बढ़कर 277.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 265.90 लाख हैक्टेयर में ही इसकी रौपाई हो पाई थी।......आर एस राणा

07 August 2015

केंद्र सरकार ने गेहूं के आयात पर 10 फीसदी का आयात षुल्क लगाया


षुल्क लगाने से आयात पड़ते समाप्त, एफसीआई के गेहूं की बढ़ेगी बिक्री
आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गेहूं केे आयात पर 10 फीसदी का आयात षुल्क लगा दिया है इससे नए आयात सौदे नहीं हो पायेंगे तथा केंद्रीय पूल से डेडीकेट मूवमेंट वाले गेहूं का मध्य प्रदेष से उठाव बढ़ जायेगा। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेष से डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर गेहूं का बिक्री भाव 1,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इसमें परिवहन एवं अन्य खर्च रोलर फ्लोर मिलर्स को उठाने होंगे।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गेहूं के आयात को रोकने के लिए सरकार ने आयात पर 10 फीसदी षुल्क लगा दिया गया है इससे आयातित गेहूं की कीमतें उंची हो जायेगी तथा नए आयात सौदे नहीं हो पायेंगे। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में दक्षिण भारत की रोलर फ्लोर मिलें अभी तक करीब 5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे कर चुकी हैं।
दक्षिण भारत की एक फ्लोर मिल के अधिकारी ने बताया कि आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं के भाव बंगलुरु में 1,800 से 1,840 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि मध्य प्रदेष से एफसीआइ
के डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर खरीदे गए गेहूं के पहुंच भाव 1,765 से 1,780 रुपये प्रति क्विंटल हैं। अब सरकार ने 10 फीसदी का आयात षुल्क लगा दिया है इससे आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं की कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो जायेगी। इसलिए मिलें अब एफसीआई से गेहूं की खरीद ज्यादा करेंगी। उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया और यूक्रेन से अभी तक करीब 5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे हुए हैं जबकि 4.6 लाख टन गेहूं भारत आ चुका है। इसमें यूक्रेन से केवल 25 हजार टन गेहूं के आयात सौदे हुए है बाकि गेहूं आस्ट्रेलिया से आया है। उन्होंने बताया कि फ्रांस से भी 10 हजार गेहूं तुतीकोरन बंदरगाह पहुंचने वाला है, यह सौदा बंगलादेष के लिए था लेकिन वहां खरीददार ने सौदा कैंसिल कर दिया, इसलिए अब यह गेहूं भारत आ रहा है।
भारतीय खाद्य निगम ने चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 280.87 लाख टन गेहूं की खरीद की हो जोकि पिछले साल हुई कुल खरीद 280.23 लाख टन से ज्यादा है। हालांकि चालू रबी विपणनप सीजन में केंद्र सरकार ने कुल खरीद का लक्ष्य 300 लाख टन का तय किया था। केंद्रीय पूल में पहली जुलाई को गेहूं का स्टॉक 386.80 लाख टन का है जोकि तय मानकों बफर स्टाक से ज्यादा ही है। तय मानकों के अनुसार पहली जुलाई को केंद्रीय पूल में 245.80 लाख टन गेहूं का बफर स्टॉक होना चाहिए। इसके अलावा 30 लाख टन गेहूं का रिजर्व स्टॉक होना चाहिए।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल वर्ष 2014-15 में गेहूं की कुल पैदावार घटकर 907.8 लाख टन होने का अनुमान है। पिछले साल इसकी रिकार्ड पैदावार 958.5 लाख टन की हुई थी।.....आर एस राणा

खरीफ में दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी


धान की रोपाई पिछले साल से ज्यादा हुई
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में दलहन के साथ ही तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ फसलों की बुवाई बढ़कर 847.40 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 808.40 लाख हैक्टेयर से ज्यादा है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में बढ़कर 277.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान  अवधि में इसकी रोपाई्र 265.90 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से दलहन की बुवाई चालू सीजन में बढ़कर 92.64 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 81.24 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। हालांकि खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई में थोड़ी कम आई है। अरहर की बुवाई अभी तक 29.82 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 30.24 लाख हैक्टेयर मेें बुवाई हुई थी। उड़द की बुवाई अभी तक 23.56 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 20.19 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंग की बुवाई पिछले साल के 17.71 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 21.24 लाख हैक्टेयर में हुई है।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 158.62 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 141.43 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। बाजरा की बुवाई अभी तक 63.16 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 52.25 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से मक्का की बुवाई 70.36 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 66.69 लाख हैक्टयेर में बुवाई हुई थी।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 157.43 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 152.31 लाख हैक्टेयर में तिलहनों की बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोेयाबीन की बुवाई 110.71 लाख हैक्टेयर में  हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 104.02 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंगफली की बुवाई पिछले साल से पिछड़ी है। चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई 31.06 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक  लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 32.36 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 47.36 लाख हैक्टेयर मेें और कपास की बुवाई्र 105.68 लाख हैक्टेयर में हुई है।.....आर एस राणा

06 August 2015

हल्दी उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिष की कमी, भाव सुधरने की उम्मीद


आर एस राणा
नई दिल्ली। हल्दी के प्रमुख उत्पादक राज्यों तेलंगाना, आंध्रप्रदेष, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में मानसूनी बारिष कम होेने का असर कीमतों में पर पड़ सकता है। जून महीने में अच्छी बारिष से हल्दी की बुवाई तो बढ़ी है लेकिन जुलाई-अगस्त महीने में कम बारिष हुई है जबकि इस समय फसल को पानी की जरुरत है। निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव 7,300 से 7,400 रुपये प्रति क्विंटल और इरोड मंडी में 7,500 से 7,600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
हल्की कारोबारी पी सी गुप्ता ने बताया कि चालू सीजन में हल्दी की बुवाई अच्छी हुई है लेकिन प्रमुख उत्पादक क्षे़त्रों में महीने भर से बारिष कम हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में हल्दी की कीमतों में तेजी-मंदी काफी हद तक मानसूनी बारिष पर भी निर्भर करेगी। उन्होंने बताया कि अच्छी क्वालिटी की हल्दी में निर्यातकों के साथ ही उत्तर भारत की मांग अच्छी है जिससे भाव में सुधार आने का अनुमान है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में हल्दी का करीब 38 से 40 लाख बोरी (एक बोरी-70 किलो) का स्टॉक है जबकि नई फसल तक खपत 15 से 16 लाख बोरी होने का अनुुमान है। ऐसे में 24 से 25 लाख बोरी हल्दी का बकाया स्टॉक बचने का अनुमान है।
सूत्रों के अनुसार चालू खरीफ में तेलंगाना और आंध्रप्रदेष में हल्दी की बुवाई 42,873 हैक्टेयर में हो चुकी है। तेलंगाना के हल्दी उत्पादक क्षेत्रों निजामाबाद, वारंगल, करीमनगर, अलिाबाद और रंगारेड्डी के साथ ही आध्रप्रदेष के गुंटूर, कुरनुल और कड्प्पा क्षेत्रों में जुलाई-अगस्त में सामान्य से कम बारिष हुई है। फसल सीजन 2014-15 में देष में हल्दी की पैदावार तो कम हुई थी लेकिन पिछले साल का बकाया स्टॉक ज्यादा बचा हुआ था जिससे कुल उपलब्धता मांग के मुकाबले ज्यादा थी।
हल्दी कारोबारी राजीव जैन ने बताया कि निजामाबाद मंडी में हल्दी की दैनिक आवक घटकर 800 बोरी की हुई तथा भाव 7300 से 7,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। उधर इरोड़ मंडी में हल्दी की आवक 8,000 बोरी की हुई तथा भाव 7,500 से 7,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे। नांनदेड मंडी में बढ़िया क्वालिटी की हल्दी के भाव     6,700 से 7,500 रुपये और पाउडर के भाव 6,300 से 7,200 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित वर्ष 2014-15 के दौरान हल्दी का निर्यात बढ़कर 86,000 टन का हुआ है जबकि वित वर्ष 2013-14 में इसका निर्यात 77,500 टन का हुआ था। मसाला बोर्ड ने वित वर्ष 2014-15 में हल्दी के निर्यात का लक्ष्य 80,000 टन का रखा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी का भाव 3.53 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले साल की समान अवधि में भी विष्व बाजार यही भाव थे।......आर एस राणा

जुलाई महने में खली के निर्यात में 86 फीसदी की भारी गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने के कारण देष से खली के निर्यात में भारी गिरावट बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के जुलाई महीनें में देष से खली का निर्यात 86 फीसदी घटकर केवल 18,410 टन का ही हुआ है। घरेलू बाजार में कीमतें उंची होने के साथ ही विष्व बाजार में दाम नीचे है जिससे सोया खली का निर्यात घटकर जुलाई महीने में न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जुलाई महीने में देष से केवल 18,410 टन खली का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल जुलाई महीने में 132,102 टन खली का निर्यात हुआ था। जुलाई में देष से केवल 928 टन सोयाबीन खली का निर्यात ही हुआ है। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान खली के निर्यात में 35 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 492,086 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 757,907 टन खली का निर्यात हुआ था।
निर्यात मांग कमजोर होने के कारण खली की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। भारतीय बंदरगाह पर सोयाखली के भाव घटकर जुलाई महीने में 507 डॉलर प्रति टन रह गए जबकि जून महीने में इसके भाव 553 डॉलर प्रति टन थे। इसी तरह से सरसों खली के भाव इस दौरान 277 डॉलर से घटकर 272 डॉलर और मूंगफली खली के भाव 463 डॉलर से घटकर 450 डॉलर प्रति टन रह गए। ईरान के साथ ही वियतनाम की आयात मांग खली में सबसे ज्यादा कम क्रमषः 91.94 और 82.21 फीसदी कम रही है।.........आर एस राणा

05 August 2015

इलायची में निर्यात मांग बढ़ी, भाव में और गिरावट की संभावना कम


आर एस राणा
नई दिल्ली। इलायची में साउदी अरब के साथ ही अन्य खाड़ी देषों की आयात में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में नीलामी केंद्र पर आवक बढ़ने के बावजूद भी इलायची की कीमतों में चल रही गिरावट रुकेगी। नीलामी केंद्रों पर साप्ताहिक इलायची की आवक बढ़कर 5 से 6 लाख किलो की हो गई है।
इलायची की निर्यातक फर्म के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साउदी अरब के साथ ही अन्य खाड़ी देषों की आयात मांग इलायची में बढ़ी है। जून-जुलाई में देष से करीब 400 टन इलायची का निर्यात हो चुका है। मौजूदा मांग को देखते हुए चालू वित्त वर्ष 2015-16 में इलायची के निर्यात में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। विष्व बाजार में भारतीय इलायची का भाव 10 से 15.50 डॉलर प्रति किलो है जबकि ग्वाटेमाला की इलायची का भाव 8 से 14 डॉलर प्रति किलो है। ग्वाटेमाला के पास बोल्ड किस्म की इलायची का स्टॉक कम है जबकि ग्वाटेमाला में नई इलायची की फसल नवंबर-दिसंबर महीने में आयेगी। ऐसे में अगले 3-4 महीनों में भारत से निर्यात में और भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
कार्डमम ग्रोवर एसासिएषन के सचिव के के देवसिया ने बताया कि चालू फसल सीजन में देष में इलायची की पैदावार 23,000 से 24,000 टन होने का अनुमान है जबकि इस समय नीलामी केंद्रों पर दैनिक आवक 80,000 से 1,00,000 किलो की हो रही है। उन्होंने बताया कि बोल्ड क्वालिटी की इलायची की आवक ज्यादा हो रही है तथा नीलामी केंद्रों पर पिछले दस दिनों में इलायची की कीमतों में करीब 40 से 50 प्रति किलो की गिरावट आई है।
इलायची व्यापारी राजकिषोर ने बताया कि त्यौहारी सीजन के कारण उत्तर भारत की मांग इलायची में बढ़ेगी, साथ ही निर्यात मांग को देखते हुए मौजूदा कीमतों में और गिरावट की संभावना कम है। नीलामी केंद्रों पर 8 एमएम की इलायची के भाव 880 से 930 रुपये और एक्ट्र बोल्ड क्वालिटी के भाव 950 से 980 रुपये प्रति किलो रहे।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में देष से 4,460 टन इलायची का निर्यात हुआ है।......आर एस राणा

04 August 2015

ओएमएसएस के तहत गेहूं की कीमतों में कटौती का प्रस्ताव नहीं - खाद्य मंत्रालय


डेडीकेट मूवमेंट के आधार पर मध्य प्रदेश और पंजाब से गेहूं की बिक्री शुरु
आर एस राणा
नई दिल्ली। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की कीमतों में कटौती का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओएमएसएस के तहत पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से 1,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की बिक्री जारी रहेगी तथा परिवहन एवं अन्य खर्च स्वयं फ्लोर मिलर को ही वहन करना होगा।
उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं की कीमतों में पिछले पंद्रह दिनों में करीब 25 से 30 डॉलर प्रति टन की तेजी आई है इसलिए दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों ने मध्य प्रदेश से ओएमएसएस के तहत गेहूं की खरीद शुरु कर दी है। आस्ट्रलियाई गेहूं के भाव उंचे होने के कारण नए आयात सौदे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में गेहंूं की दैनिक आवक कम हो रही है ऐसे में उम्मीद है कि आगामी दिनों में पंजाब और हरियाणा से भी ओएमएसएस के तहत गेहूं का उठाव शुरु हो जायेगा।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जुलाई महीने में मध्य प्रदेश से डेडीकेट मूवमेंट के तहत 4.37 लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसमें से 21,200 टन गेहूं की बिक्री हुई। पंजाब से 12.91 लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए निविदा आमंत्रित की थी जिसमें से 5300 टन गेहूं का उठाव हुआ। हरियाणा से 4.90 लाख टन गेहूं बेचने के लिए निविदा आमंत्रित की थी लेकिन यहां से गेहूं का उठाव नहीं हुआ।
गेहूं कारोबारी राजेश गुप्ता ने बताया कि आवक कम होने से मंडियों में गेहूं की कीमतों में महीने भर से तेजी बनी हुई है। दिल्ली की लारेंस रोड़ मंडी में गेहूं के भाव बढ़कर मंगलवार को 1,565 से 1,570 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। गुजरात की राजकोट मंडी में गेहूं के भाव 1,600 से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार हो गए। राजस्थान की कोटा मंडी में गेहूं के भाव 1,525 से 1,700 रुपये और मध्य प्रदेश की रतलाम मंडी में 1,325 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।.......आर एस राणा

03 August 2015

उत्तर भारत की मांग से हल्दी की कीमतों में और तेजी की संभावना


आर एस राणा
नई दिल्ली। हल्दी में इस समय निर्यातकों की मांग तो कमजोर है लेकिन उत्तर भारत के राज्यों की अच्छी मांग बनी हुई है जिससे हल्दी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। प्रमुख उत्पादक राज्यों हल्दी की बुवाई जोरों पर है तथा चालू महीने में होने वाली बारिष से पैदावार का अनुमान आयेगा। इसीलिए स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम है जिससे मौजूदा कीमतों में और भी तेजी की संभावना है।
हल्दी कारोबारी पी सी गुप्ता ने बताया कि हल्दी में उत्तर भारत के राज्यों की मांग अच्छी है, जबकि स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आ रही है। इसीलिए हल्दी की कीमतों में तेजी आई है। आंध्रप्रदेष और तेलंगाना में हल्दी की बुवाई अच्छी हुई है लेकिन उत्पादन का अनुमान चालू महीने  में होने वाली बारिष की स्थिति पर निर्भर करेगा। आंध्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव सोमवार को 7,300 से 7,400 रुपये प्रति क्विंटल रहे तथा मंडी में दैनिक आवक 1,500 बोरी (एक बोरी-70 किलो) की हुई। नांनदेड मंडी में हल्दी के भाव 6,700 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
आंध्रप्रदेष में हल्दी की बुवाई 6,135 हैक्टेयर में और तेलंगाना में 35,548 हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। तेलंगाना में करीब 65 फसीदी बुवाई का कार्य पूरा हो चुका है। जुलाई महीने में उत्पादक राज्यों में कम बारिष हुई ऐसे मंे चालू महीने में मानसूनी बारिष से भी हल्दी की कीमतों में तेजी-मंदी का असर पड़ेगा। बारिष फसल के अनुकूल रही तो कीमतों में गिरावट भी आ सकती है लेकिन अगर बारिष कम रही तो, फिर भाव में तेजी जारी रह सकती है। हल्दी कारोबारी राजेंद्र जैन ने बताया कि आगामी दिनों में हल्दी में निर्यातकों की मांग भी बढ़ेगी, साथ ही घरेलू मसाला कंपनियों की मांग में भी इजाफा होगा। जिससे भाव में तेजी आने का अनुमान है।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में हल्दी का निर्यात बढ़कर 86,000 टन का हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में इसका निर्यात 77,500 टन का हुआ था।.........आर एस राणा

कमजोर वैश्विक रुख से चांदी टूटी

श्विक बाजारों में नरमी के रुख के बीच सटोरियों के सौदे काटने से आज वायदा बाजार में चांदी 0.35 प्रतिशत टूटकर 34,660 रूपए प्रति किलो पर आ गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दिसंबर डिलिवरी के लिए चांदी का भाव 123 रुपये या 0.35 प्रतिशत घटकर 34,660 रुपये प्रति किलो पर आ गया और इसमें 29 लॉट में कारोबार हुआ। इसी तरह, सितंबर डिलिवरी के लिए चांदी का भाव 100 रुपये या 0.29 प्रतिशत घटकर 33,925 रुपये प्रति किलो पर आ गया और इसमें।,615 लॉट में कारोबार हुआ।

जिंस और स्टॉक एक्सचेंजों में समान शुल्क

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह प्रस्ताव रखा है कि पंजीकरण और लेन-देन शुल्क के मामले में जिंस एक्सचेंजों के ब्रोकरों पर भी वहीं शर्तें लागू होनी चाहिए, जो शेयर बाजार के ब्रोकरों पर लगी हुई हैं। इस समय जिंस ब्रोकर सीधे वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के नियंत्रण में नहीं हैं। अब एफएमसी का विलय सेबी में किया जा रहा है। जिंस ब्रोकिंग समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ हाल की एक बैठक में सेबी ने कहा कि जिंस ब्रोकरों पर वहीं नियम लागू होने चाहिए, जो इक्विटी ब्रोकरों पर लगे हुए हैं। सेबी ने कहा कि इक्विटी ब्रोकर 50,000 रुपये का पंजीकरण शुल्क चुकाते हैं, इसलिए जिंस ब्रोकरों पर भी इतना ही पंजीकरण शुल्क लगना चाहिए।

इसके अलावा सेबी ने यह भी कहा कि लेन-देने फीस बराबर होनी चाहिए, इसलिए जिंस ब्रोकरों को 0.02 फीसदी ट्रांजेक्शन शुल्क चुकाना चाहिए। इक्विटी ब्रोकर वायदा में कारोबार के लिए इतना ही ट्रांजेक्शन शुल्क लगाते हैं। इसका मतलब है कि वायदा प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़ रुपये के लेन-देन पर 200 रुपये ट्रांजेक्शन शुल्क लगेगा। इस समय सेबी खुद में एफएमसी के प्रस्तावित विलय से पहले जिंस ब्रोकरों के पंजीकरण के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। जिंस ब्रोकरों का पंजीकरण अगस्त के अंत तक शुरू होने के आसार हैं, जबकि सेबी में एफएमसी का विलय सितंबर तक पूरा होने की संभावना है।

हालांकि जिंस ब्रोकरों ने सेबी को सिफारिश दी है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय जिंस एक्सचेंजों के सदस्यों में विभेद किया जाना चाहिए। वहीं जिंसों में सीटीटी (जिंस लेन-देन क र) और गैर-सीटीटी सेगमेंट को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि जिंस ब्रोकरों ने प्रस्ताव रखा है कि राष्ट्रीय स्तर के ब्रोकर से 50,000 और क्षेत्रीय ब्रोकर से 25,000 रुपये पंजीकरण शुल्क वसूला जाए, जबकि सेबी 50,000 रुपये के एकसमान पंजीकरण शुल्क के पक्ष में है। उन्होंने कहा, 'हमने कहा है कि क्षेत्रीय एक्सचेंजों के सदस्यों की वित्तीय क्षमता कमजोर होती है और इसलिए उन्हें कम फीस चुकाने की मंजूरी दी जाए। एक राष्ट्रीय ब्रोकर के लिए 50,000 रुपये का पंजीकरण शुल्क ठीक है।' दरअसल संपूर्ण बाजार के विकास के लिए सिस्टम में क्षेत्रीय ब्रोकरों का होना जरूरी है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि क्षेत्रीय ब्रोकरों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।  (BS Hindi)

खाद्यान्न उत्पादन 26.41 करोड़ टन उत्पादन अनुमान का लक्ष्य तय


दलहन के साथ ही तिलहन उत्पादन में ज्यादा बढ़ोतरी का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फसल सीजन 2015-16 में देष में 26.41 करोड टन खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है जोकि चालू फसल सीजन 2014-15 के तीसरे आरंभिक अनुमान 25.11 करोड़ टन से ज्यादा है। नए फसल सीजन में दलहन के साथ ही तिलहन की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में खाद्यान्न के उत्पादन का लक्ष्य 26.41 लाख टन का तय किया है तथा इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य सरकारों के सहयोग से किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध करायें जा रहे हैं, साथ ही किसानों तक खाद और बिजली की सप्लाई को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में दलहन के साथ ही तिलहन के उत्पादन का लक्ष्य ज्यादा तय किया गया है। इससे खाद्य तेलों के साथ ही दलहन के आयात में कमी लाना है।
उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में दलहन के उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 200.5 लाख टन का तय किया गया है जबकि फसल सीजन 2014-15 में 173.8 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से तिलहनों की पैदावार का लक्ष्य चालू फसल सीजन में 330 लाख टन का तय किया गया है जबकि पिछले साल 273.80 लाख टन तिलहनों की पैदावार हुई थी। उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2015-16 में चावल की पैदावार का लक्ष्य 10.61 करोड़ टन का तय किया गया है जबकि फसल सीजन 2014-15 में 10.25 करोड़ टन चावल की पैदावार हुई थी।
गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 2015-16 में 947.5 लाख टन का लक्ष्य किया गया है जबकि फसल सीजन 2014-15 के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार 907.8 लाख टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय ने फसल सीजन 2015-16 में 58.5 लाख टन ज्वार की पैदावार का लक्ष्य तय किया है जबकि 237.5 लाख टन मक्का उत्पादन का लक्ष्य है। इसी तरह से बाजरा की पैदावार बढ़ाकर 95 लाख टन उत्पादन का अनुमान तय किया है। जौ की पैदावार का अनुमान 17.8 लाख टन और 18 लाख टन रागी उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। कपास के उत्पादन का लक्ष्य 2015-16 में 351.5 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का तय किया है जबकि फसल सीजन 2014-15 के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार 353.28 लाख कपास उत्पादन का अनुमान है।.......आर एस राणा