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30 June 2016

मॉनसून

मॉनसून पूरे देश में जोर पकड़ चुका है। मध्य जून में जो बारिश में कमी करीब 30 फीसदी की थी, वह घटकर महज 11 फीसदी रह गई है। खासतौर से दक्षिण भारत में जोरदार बारिश हो रही है।

दिल्ली में चना दाल बेचेगी सरकार, दलहन आयात बढ़ायेगी सरकार

दिल्ली में चना दाल बेचेगी सरकार
दलहन आयात बढ़ायेगी सरकार
आर एस राणा
नई दिल्ली। चना की कीमतों मंे आई तेजी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली में 60 रुपये प्रति किलो की दर से चना दाल बेचने का फैसला किया है। नेषनल कंजूमर कॉआपरेटिव फैडरेषन (एनसीसीएफ) मोबाईल आउटलेट के माध्यम से चना दाल की बिक्री करेगी। एनसीसीएफ पहले ही अरहर और उड़द दाल की बिक्री 120 रुपये प्रति किलो की दर से कर रही है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय, भारत सरकार से सचिव हेम पांडे ने बताया कि 5,000 टन चना और 2,500 टन मसूर का आयात सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से और किया जायेगा। इससे पहले एमएमटीसी 2,500 टन मसूर की निविदा जारी कर चुकी है। उन्होंने बताया कि अभी तक एमएमटीसी 46,000 टन दलहन के आयात सौदे कर चुकी है जिसमें से 14,321 टन दलहन की आवक भी हो चुकी है।
उन्होनें बताया कि चालू रबी में सरकारी एजेंसियां अभी तक 68,000 टन दलहन की खरीद कर चुकी हैं तथा 51 हजार टन दालों की खरीद खरीफ सीजन में की थी।..............आर एस राणा

29 June 2016

मोजांबिक से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दाल खरीदने की पेशकश

 भारत ने अगले पांच साल के लिए मोजांबिक से न्यूनतम समर्थन मूल्य और अतिरिक्त परिवहन लागत पर अरहर की दाल खरीदने की पेशकश की है। देश में लगातार दो साल से सूखे के कारण उत्पादन घटने के बीच घरेलू बाजार में दाल की कीमत 198 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक भारत ने मोजांबिक सरकार से कहा है कि क्या वह दोनों सरकारों के बीच अनुबंध के आधार पर अगले पांच साल के लिए अरहर की दाल की आपूर्ति कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत ने न्यूनतम समर्थन मूल्य और परिवहन एवं ढुलाई लागत के आधार पर अरहर की दाल खरीदने की पेशकश की है। मोजांबिक को इस संबंध में एक प्रस्ताव का मसौदा पेश किया जा चुका है।    अरहर की दाल का न्यनूतम समर्थन मूल्य 5,050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जिसमें फसल वर्ष 2016-17 (जुलाई-जून) के लिए 200 रुपये का बोनस शामिल है। उपभोक्ता मामलों के सचिव हेम पांडे की अध्यक्षता वाले भारतीय दल ने हाल ही में मोजांबिक का दौरा किया ताकि अरहर की दाल की आपूर्ति पर दीर्घकालिक समझौते पर वार्ता की जा सके। इस यात्रा के बाद पांडे ने कहा, 'शिष्टमंडल दीर्घकालिक समाधान के साथ लौटा है। अंतिम दस्तावेज को मोजांबिक सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है। भारत सरकार को जल्द से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद है।' मोजांबिक में करीब 70,000 टन दाल का उत्पादन होता है जिसमें ज्यादातर अरहर और कुछ उड़द शामिल है। वहां उत्पादित पूरी दाल का निर्यात भारत और विश्व के अन्य हिस्सों में प्रवासी भारतीयों की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है। (BS Hindi)

कपास निर्यात बढ़ाने का भारत के पास मौका

पाकिस्तान का कपास आयात जुलाई 2017 में समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान रिकॉर्ड उच्च स्तर पर रह सकता है। उद्योग जगत के अधिकारियों के मुताबिक, विश्व के इस चौथे बड़े उत्पादक देश (पाकिस्तान) में मौसम ठीक न रहने की वजह से किसानों को इस फसल का रकबा घटाना पड़ रहा है। पाकिस्तान में कपास की किल्लत ऐसे समय पैदा हुई है जब इस जिंस के सबसे बड़े उत्पादक भारत में लगातार दो साल सूखे से उत्पादन घटा है। इससे कपास की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इस साल दोनों देश घरेलू मांग पूरी करने के लिए एक-दूसरे से कपास की खरीदारी कर चुके हैं।  ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन (एपीटीएमए) के कार्यकारी सचिव सलीम सालेह के मुताबिक 'पाकिस्तान में कपास का रकबा 15 फीसदी घटा है। सरकार और उद्योग की कोशिशों के बावजूद सबसे अधिक उत्पादन करने वाले पंजाब सूबे के किसानों ने कपास का रकबा घटा दिया है।'   पिछले साल के अंत में बाढ़ और हाल के महीनों में कमजोर बारिश जैसे अप्रत्यााशित मौसम के कारण उत्पादकता को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे किसान कपास की बुआई से दूरी बना रहे हैं। पाकिस्तान कॉटन जिनर्स एसोसिएशन के चैयरमेन शाहजाद अली खान ने कहा, 'कि सान को अन्य फसलें फायदेमंद नजर आ रही हैं।' एपीटीएमए के मुताबिक, पाकिस्तान में 2015 में कपास का उत्पादन एक तिहाई गिरकर 97 लाख गांठ रह गया। इस वजह से उसे 40 लाख गांठ का रिकॉर्ड आयात करना पड़ा।   यह पिछले साल से 12 लाख गांठ अधिक था। खान ने बताया कि 1 अगस्त से शुरू हुए सीजन में भी मौसम का साथ नहीं मिला। मई और जून में कम बारिश से पंजाब में फसल को पहले ही नुकसान पहुंच चुका है। पाकिस्तान में कपास की बुआई अप्रैल से शुरू होती है और इसकी कटाई जुलाई में शुरू होती है।  हालांकि पाकिस्तान ने नए सीजन में 1.41 करोड़ गांठों के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। लेकिन उद्योग जगत के अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल उत्पादन लक्ष्य से कम रहेगा और अगले कुछ सप्ताह के दौरान होने वाली बारिश से उत्पादन तय होगा। पड़ोसी देश पाकिस्तान में कम उत्पादन से भारत के पास निर्यात का अवसर है। इस सीजन में भारत ने कपास की करीब 65 लाख गांठों का निर्यात किया जिसमें पाकिस्तान ने 20 लाख गांठों का आयात किया।  कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष धीरेन सेठ  ने कहा, 'पाकिस्तान को निर्यात में भारत को अन्य आपूर्तिकर्ता देशों पर बढ़त हासिल है क्योंकि भारत से निर्यात का भाड़ा कम पड़ता है। जब पाकिस्तान के खरीदार आयात शुरू करेंगे तो वे निश्चित रूप से भारत को सबसे ज्यादा तरजीह देंगे।' हालांकि भारत ने इस महीने पाकिस्तान से 20 हजार गांठ के आयात का अनुबंध किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत मेंं भी कपास की आपूर्ति कम है। (BS Hindi)

महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन घटकर 45 लाख टन होने का अनुमान-इस्मा

आर एस राणा
नई दिल्ली। आगामी पेराई सीजन 2016-17 में महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन घटकर 45 लाख टन होने का अनुमान है। इंडियन षुगर मिल्स एसोसिएषन (इस्मा) के अनुसार सूखे के कारण महाराष्ट्र में गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। चालू पेराई सीजन 2015-16 में महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 84 लाख टन का हुआ है जबकि इसके पिछले पेराई सीजन 2014-15 में महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 105 लाख टन का हुआ था।
मिलें चीनी का नीचे भाव पर बेच नहीं रही है जबकि आगे त्यौहारी और ब्याह षादियों के सीजन के कारण चीनी की मांग बढ़ोतरी होगी इसलिए चीनी की कीमतों में आगे 50 से 75 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने का अनुमान है। दिल्ली में चीनी के भाव 3,700 से 3,750 रुपये प्रति क्विंटल रहे जबकि उत्तर प्रदेष में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 3,450 से 3,575 रुपये, बिहार में 3,500 से 3,550 रुपये, महाराष्ट्र में 3,300 से 3,375 रुपये और कर्नाटका में भाव 3,300 से 3,350 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्हाईट षुगर के भाव बढ़कर 565 से 570 डॉलर और रॉ-षुगर के भाव 520 से 525 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात षुल्क लगा रखा है इसलिए मौजूदा भाव में निर्यात की संभावना नहीं है।.........आर एस राणा

बारिश की स्थिति सुधरी, मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार

करीब एक हफ्ते से 10 दिनों तक की देरी के बाद मॉनसून रफ्तार पकड़ने लगा है। कल तक बारिश में कमी का स्तर जो 16 फीसदी का था, अब घटकर 13 फीसदी के स्तर पर आ गया है। खास तौर से पश्चिम भारत में हालात तेजी से सुधर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में गुजरात, कोंकण और गोवा में भारी बारिश का अनुमान है। महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में भी तेज बारिश हो सकती है। वहीं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश में भी बारिश की संभावना है। हालांकि बारिश की स्थिति भले सुधर रही है, लेकिन गुजरात में हालात चिंताजनक है। 1-28 जून तक राज्य में करीब 80 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं इस अवधि में मध्य महाराष्ट्र में 34 फीसदी और विदर्भ में 29 फीसदी बारिश की कमी देखी जा रही है। पूरे मध्य भारत में अबतक 23 फीसदी कम बारिश हुई है। अब तक पूरे देश में बारिश के वितरण पर अगर नजर डालें तो 1-28 जून के दौरान 50 फीसदी इलाकों में सामान्य बारिश हुई है। 20 फीसदी ऐसे इलाके हैं, जहां सामान्य से भी ज्यादा बारिश हुई है। यानि कुल 70 फीसदी इलाकों को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है। लेकिन 30 फीसदी इलाकों में अभी भी सूखे जैसे हालात हैं, इसमें ज्यादातर पश्चिम और मध्य भारत से हैं। जहां तिलहन, दाल और कपास की खेती होती है।

28 June 2016

चने की तेज चाल, दाल में भी उछाल

चने के बढ़ते दामों पर सरकार की सख्ती का भी कोई असर नहीं पड़ा है। मंडियों में कम आवक और उत्पादन घटने की आशंका के चलते चने का भाव 7,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। खुदरा बाजार में चना दाल 100 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई है। कारोबारियों का कहना है कि थोक बाजार में चना 9,000 रुपये प्रति क्विंटल और खुदरा बाजार में चना दाल 120 रुपये तक पहुंच सकती है। इस महीने चने के दाम 1,500 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुके हैं। 
 इस महीने की शुरुआत में हाजिर बाजार में चना 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था। चने की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सेबी ने 16 जून से चना वायदा कारोबार पर रोक लगा दी है। उस दिन वायदा बाजार में इसके दाम 6,844 रुपये प्रति क्विंटल बोले जा रहे थे। सेबी या सरकार की कोशिशों के बावजूद चने के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन ब्रोकिंग एजेंसी के विशेषज्ञ इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि सेबी के फैसले पर वह कुछ नहीं बोल सकते हैं लेकिन एक बात साफ हो गई है कि महंगाई का वायदा कारोबार से कोई संबंध नहीं है। थोक बाजार में चने की बढ़ती कीमतों का असर चना दाल पर भी देखने को मिल रहा है। सरकारी भावों में चना दाल का अधिकतम मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम बताया जा रहा है। खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खुदरा बाजार में चने की दाल 100 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच चुकी है, जो एक जून को 84 रुपये प्रति किलोग्राम थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में चना दाल का औसत भाव 80 रुपये प्रति किलोग्राम बताया जा रहा है लेकिन खुदरा बाजार में दाम इससे बहुत अधिक हैं। मुंबई के खुदरा बाजारों में चना दाल 110-120 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। 
 देश के कई हिस्सों में सूखा पडऩे की वजह से इस साल देश में चने सहित दूसरी दलहन फसलों का उत्पादन कम होने के अनुमान जताए जा रहे हैं,  जिससे दालों के दाम तेजी से बढ़े हैं। उत्पादन कम होने की आशंका के चलते इस साल फरवरी से चने के दाम बढऩे लगे थे। ïफरवरी में वायदा बाजार में चने की कीमत 4,200 रुपये प्रति क्विंटल बोली जा रही थी, जबकि वायदा बाजार में चना 4,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था यानी इस साल अभी तक चने के दामों में 3,700 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हो चुका है। चना कारोबारी सतीश राठौड़ के मुताबिक आने वाले महीनों में आपूर्ति और घटने की आशंका के कारण किसान और छोटे कारोबारी फिलहाल माल नहीं बेच रहे हैं। फिलहाल बाजार में आपूर्ति बढऩे के आसार भी नहीं दिखाई दे रहे हैं। बारिश शुरू होने के कारण मंडियों में आवक और भी कमजोर हो सकती है जिससे कीमतें और बढ़ेगी। चना कारोबारियों ने कहा कि विदेश से सस्ता चना बाजार में आने में अभी करीब तीन महीने लगेंगे और खरीफ सीजन की दलहन फसल भी तीन महीने बाद ही बाजार में आएगी। इसे देखते हुए चने के दाम बढ़कर 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हंै।
 चने की कीमत बढऩे की सबसे बड़ी वजह उत्पादन कम होने की आशंका को माना जा रहा है लेकिन सरकारी अनुमान में इस बार चना पिछले साल की अपेक्षा अधिक होने की उम्मीद दिखाई जा रही है। तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक वर्ष 2015-16 में देश में चने का उत्पादन 74.80 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है जबकि फरवरी महीने में जारी किए गए दूसरे अग्रिम फसल उत्पादन अनुमान में चना उत्पादन 80.9 लाख टन होने की बात कही गई थी। (BS Hindi)

पश्चिम भारत में मॉनसून सक्रिय

देश के पश्चिमी हिस्से में मॉनसून जोर पकड़ने लगा है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में तेज बारिश हो सकती है। इसके अलावा दक्षिणी गुजरात के कई इलाकों में भी बारिश होने का अनुमान है। हालांकि कर्नाटक, कोंकण और गोवा के अलावा पूर्व में छत्तीसगढ़ में भारी से भारी बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में भी अगले 24 घंटे के दौरान अच्छी बारिश हो सकती है।

धनिया का स्टॉक ज्यादा, लंबी तेजी की उम्मीद कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में धनिया की पैदावार ज्यादा होने के साथ ही आयात भी ज्यादा हुआ है जिससे घरेलू बाजार में धनिया का स्टॉक ज्यादा है। ऐसे में आगामी दिनों में धनिया की कीमतों में सुधार तो आयेगा, लेकिन बड़ी तेजी की संभावना नहीं है। राजगंज मंडी में बादामी धनिया के भाव 6,300 रुपये, ईगल के 6,400 रुपये तथा स्कूटर के 6,700 रुपये और बेस्ट के भाव 8,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे जबकि दैनिक आवक 3,000 बोरी की हुई।
जानकारों के अनुसार आगामी दिनों में धनिया में घरेलू मसाला कंपनियों की मांग बढ़ेगी जिससे भाव में सुधार आने का अनुमान है। हालांकि स्टॉक ज्यादा होने से बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2015-16 में धनिया की पैदावार 5.57 लाख टन होने का अनुमान है जोकि इसके पिछले साल की तुलना में ज्यादा है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार वित वर्ष 2015-16 में देष में 25,925 टन धनिया का आयात हुआ है जोकि पिछले साल की तुलना में 125 फीसदी ज्यादा है। आयात मुख्यतः रुस, इटली, यूक्रेन और बुलगारिया से हुआ है। भारत विष्व में धनिया उत्पादन में पहले स्थान पर है लेकिन घरेलू खपत ज्यादा होने के कारण कुल उत्पादन का केवल 10 से 15 फीसदी ही निर्यात करता है। भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित वर्ष 2015-16 में 45,000 टन धनिया के निर्यात का लक्ष्य तय किया था लेकिन निर्यात केवल 30,868 टन का ही हो पाया। विष्व बाजार में भारतीय धनिया का भाव 1.32 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका भाव 1.98 डॉलर प्रति किलो था।............आर एस राणा

केंद्रीय पूल में 326.38 लाख टन गेहूं का स्टॉक

आर एस राणा
नई दिल्ली। खाद्य मंत्रालय के अनुसार पहली जून को केंद्रीय पूल में 326.38 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सालाना 240 लाख टन गेहूं की जरुरत होती है।
खाद्य मंत्रालय के अनुसार जुलाई से खुले बाजारा बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री की जायेगी। ओएमएसएस में 50 से 55 लाख टन गेहूं की बिक्री होने का अनुमान है।
हालांकि जानकारांे की माने तो एफसीआई के पास 326.38 लाख टन गेहूं का स्टॉक ही मौजूद है जबकि इसमें से पीडीएस में होने वाले आवंटन 240 लाख टन को निकाल दे तो केंद्र के पास केवल 86.38 लाख टन गेहूं का स्टॉक ही बचेगा। इसके अलावा पहली अप्रैल को तय मानकों के अनुसार 74.60 लाख टन गेहूं बफर स्टॉक के लिए चाहिए। ऐसे में ओएमएसएस में देने के लिए केंद्र के पास केवल 11 से 12 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है।............आर एस राणा

बारिश

भारतीय मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गोवा के अलावा गुजरात में भारी बारिश का अनुमान जताया है।

27 June 2016

राज्य दालों को खरीदने में नहीं दिखा रहे दिलचस्पी

केंद्र के बफर स्टॉक से दाल लेने का ऑर्डर अब तक सिर्फ 7 राज्यों ने दिया है। ताज्जुब ये है कि सस्ती दाल देने की मोदी सरकार की कोशिश में वो राज्य भी साथ नहीं दे रहे जहां बीजेपी की सरकार है। केंद्र सरकार ने दालों का बफर स्टॉक तो बना लिया है, लेकिन इसका फायदा कम कीमतों के रूप में कंज्यूमर्स को नहीं मिल रहा है। वजह है, ज्यादातर राज्य सरकारों की सुस्ती। जानकारी के मुताबिक अभी तक सिर्फ 7 राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार ने बफर स्टॉक से दाल मंगाई है। इन राज्यों को उनकी मांग के हिसाब से 8200 टन अरहर और 2000 टन उड़द दालें भेजी गई हैं। हालांकि ये खड़ी दाल है, और राज्यों को करीब 66 रुपये प्रति किलो के सब्सिडाइज दर पर यह मुहैया कराई जा रही है। साथ में केंद्र का कहना है कि इनकी मिलिंग के बाद इसे 120 रुपये किलो में बेचा जा सकता है। लेकिन कुछ चुनिंदा राज्यों को छोड़ कर बाकी तमाम राज्य इन दालों को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। गौर करने वाले बात ये है कि केंद्र की दाल ऐसे राज्यों में भी नहीं गल रही जहां बीजेपी की सरकार है। झारखंड जैसे कुछ राज्यों की दलील है कि उनके पास दालों की प्रोसेसिंग के लिए मिलें नहीं हैं। वहीं कुछ राज्यों का कहना है कि केंद्र से मिल रही कीमत पर दालें खरीद कर उसे बाजार में 120 रुपये के भाव पर बेचना मुमकिन नहीं है क्योंकि प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च मिलाने पर दाल की कीमत बढ़ जाती है।

खली बाजार से भारत जल्द हो जाएगा बाहर

भारत धीरे-धीरे 70 अरब डॉलर के खली बाजारों से बाहर होता जा रहा है। इसकी वजह पेराई के लिए तिलहनों का अभाव और कई देशों के खली आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरना है। तिलहन पेराई मिलों ने तत्काल सरकारी नियमों को नरम बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने ही भारत को वैश्विक तिलहन बाजार में अपना खोया मुकाम हासिल कर सकता है। 
 तीन साल पहले तक भारत का वैश्विक खली कारोबार में 5 फीसदी से अधिक योगदान था। उस समय घरेलू स्रोतों से तिलहन की भरपूर आपूर्ति थी। लेकिन अब भारत के खली निर्यात में भारी गिरावट आई है। यह मई 2016 में 94 फीसदी की भारी गिरावट के साथ महज 7,737 टन रहा, जो पिछले साल के इसी महीने में 1,21,339 टन था।  खली के घटते निर्यात से भारतीय तिलहन पेराई मिलों की वित्तीय हालत बिगड़ी है। इस वजह से ज्यादातर मिलों ने अपना घाटा कम करने के लिए अपनी परिचालन क्षमता 50 फीसदी से कम कर दी है। अभी उन्हें प्रत्येक एक टन तिलहन पेराई पर करीब 1,000 से 1,500 रुपये का नुकसान हो रहा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, 'अगर देश के निर्यात में आगे भी यही रुझान बना रहा तो वह जल्द ही वैश्विक खली बाजारों से बाहर हो जाएगा।'
 वैश्विक कारोबारी माहौल में तेजी से बदलाव के कारण पिछले 3 साल में भारत के खली निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। भारत का खली निर्यात 2013-14 में 43.8 लाख टन था, जो 2014-15 में घटकर 24.7 लाख टन और 2015-16 में 12.1 लाख टन पर आ गया। कारोबारी सूत्रों ने चालू वित्त वर्ष यानी 2016-17 में भारत से खली का निर्यात 10 लाख टन से कम रहने का अनुमान है। भारतीय खली निर्यातक कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है। तिलहनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किए जाने से मिलें किसानों से एमएसपी से नीचे तिलहन नहीं खरीद पाती हैं, जिससे खली की ज्यादा लागत आ रही है। 
 वनस्पति तेल की कीमतें कमजोर बनी हुई हैं, इसलिए घरेलू पेराई मिलों महंगे दामों पर तिलहन की खरीदारी नहीं कर सकतीं। घरेलू मिलें घरेलू स्तर पर पैदा होने वाले तिलहनों की पेराई के बजाय सीधे रिफाइंड तेल का आयात कर रही हैं और इसकी पैकेजिंग कर बेच रही हैं। वे तेल और खली बनाने के बजाय तेल के कारोबार पर ध्यान दे रही हैं। विश्व के तीन प्रमुख सोयाबीन उत्पादक देशों-अर्जेन्टीना, ब्राजील और अमेरिका में इस जिंस के भारी उत्पादन से स्थितियां बदल गई हैं। चीन जैसे देशों ने सोयाबीन का आयात कर घरेलू स्तर पर पेराई शुरू कर दी है। इससे चीन की खली के आयात पर निर्भरता कम हो गई है। 
 वर्ष 2013-14 तक भारतीय खली का सबसे बड़ा आयात ईरान कुछ समय पहले तक वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों से जूझ रहा था। इससे ईरान की खली के आयात के लिए भारत पर निर्भरता बढ़ गई थी। लेकिन अब पश्चिमी देशों ने ईरान पर प्रतिबंध हटा लिए हैं, इसलिए ईरान ने भारत से खली का आयात लगभग बंद कर दिया है। (BS Hindi)

मध्य भारत में कमजोर मॉनसून से बढ़ी चिंता

मॉनसून राजस्थान तक दस्तक दे चुका है। हालांकि इस सीजन देश में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे ज्यादा चिंता, मध्य भारत को लेकर है, जहां 1-26 जून तक सामान्य से 30 फीसदी कम बारिश हुई है। इसमें भी गुजरात की स्थिति बेहद खराब है, जहां सामान्य से करीब 80 फीसदी कम बारिश हुई है। मॉनसून में देरी का असर बारिश पर पड़ा है। वहीं दाल और तिलहन की खेती के लिहाज से अहम माने जाने वाले विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में सामान्य से 30-40 फीसदी तक कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्सप्रदेश और ओडिशा में भी स्थिति चिंताजनक है।

25 June 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
09811470207

केस्टर सीड की बुवाई में कमी की आषंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में केस्टर सीड की बुवाई में 10 से 15 फीसदी की कमी आने की आषंका है। माना जा रहा है कि किसान केस्टर सीड के बजाए दलहन की फसलों की बुवाई ज्यादा करेंगे, ऐसे में केस्टर सीड की बुवाई इसकी खेती वालें राज्यों में अगले दस दिनों में बारिष कैसी होती है, उस पर ज्यादा निर्भर करेगी। अतः केस्टर सीड की कीमतों में तेजी-मंदी का गणित मध्य जुलाई के बाद ही तय होगा।
जानकारों के अनुसार चालू खरीफ में मानूसनी बारिष अच्छी होने का अनुमान है तथा केस्टर सीड के भाव काफी नीचे रहे हैं, ऐसे में किसान केस्टर के बजाए अरहर, मूंग और उड़द के साथ ही अन्य फसलों की बुवाई ज्यादा करेंगे। पिछले साल केस्टर सीड की बुवाई 11 लाख हैक्टेयर में हुई थी जबकि इस बार 9 से 9.5 लाख हैक्टेयर में ही इसकी बुवाई होने का अनुमान है।
साबुन कंपनियों की मांग निकलने से चालू सप्ताह मंे केस्टर तेल और सीड की कीमतांें में हल्का सुधार आया है। केस्टर सीड के भाव उत्पादक मंडियों में 3,100 से 3,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि केस्टर तेल कार्मिषयल ग्रेड के भाव 675 रुपये प्रति 10 किलो हो गए।
चालू महीने के दूसरे सप्ताह में केस्टर तेल का निर्यात 9.13 फीसदी बढ़कर 16,541.37 टन का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 15,157.48 टन का निर्यात हुआ था। इस समय केस्टर तेल के निर्यात सौदे 1,189.06 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार वित्त वर्ष 2015-16 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान 4.34 लाख टन केस्टर तेल का निर्यात हुआ है जोकि वित्त वर्ष 2014-15 की समान अवधि के 4 लाख टन से अधिक है।.............आर एस राणा

चावल निर्यात 18 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के तीसरे सप्ताह 12 से 19 जून के दौरान देष से चावल के निर्यात में 18 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 2,65,492.57 टन का निर्यात हुआ है जबकि इसके पिछले सप्ताह में 2,25,163.89 टन चावल का निर्यात हुआ था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार तीसरे सप्ताह में हुए चावल के कुल निर्यात में बासमती चावल की हिस्सेदारी 38.51 फीसदी और गैर-बासमती चावल की हिस्सेदारी 61.48 फीसदी है। इस दौरान देष से 1,02,258.13 टन बासमती चावल का और 1,63,234.44 टन गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ है।
चालू खरीफ में मानूसनी बारिष अच्छी होने का अनुमान है जिससे धान की रोपाई बढ़ेगी, हालांकि घरेलू मार्किट में चावल का स्टॉक अच्छा है लेकिन निर्यात मांग में हो रही बढ़ोतरी के कारण धान और चावल की कीमतों में जुलाई महीने में हल्का सुधार आने का अनुमान है।
करनाल मंडी में 1,121 पूसा धान का भाव 2,550 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि पूसा 1,121 चावल सेला का भाव 4,500 रुपये, रॉ चावल का भाव 5,800 रुपये और स्टीम का भाव 5,600 रुपये प्रति क्विंटल है।.............आर एस राणा

महाराष्ट्र में चना का स्टॉक 50 फीसदी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में चना की पैदावार में आई कमी के कारण महाराष्ट्र की मंडियों में चना का स्टॉक पिछले साल की तुलना में करीब 50 फीसदी कम है। जानकारों के अनुसार महाराष्ट्र की लातूर मंडी में चना की दैनिक आवक केवल 1,000 से 1,500 बोरी की हो रही है तथा भाव 6,850 से 6,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे। माना जा रहा है कि आगामी महीने में चना दाल में मांग ज्यादा रहेगी, इसलिए भाव में अभी और भी तेजी आने का अनुमान है। आस्ट्रेलिया से आयातित चना का भाव मुंबई में 7,050 रुपये प्रति क्विंटल रहा.................आर एस राणा

ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 24.8 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के तीसरे सप्ताह 13 जून से 19 जून के दौरान देष से ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 24.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान 7,761 टन ग्वार गम उत्पादों ग्वार पाउडर, स्पलिट और मील का निर्यात हुआ है जबकि इसके सप्ताह में 6,219 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था। इस दौरान ग्वार गम पाउडर के निर्यात मंे 36 फीसदी और ग्वार मील के निर्यात में 16.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है लेकिन ग्वार स्पलिट के निर्यात में 6 फीसदी की कमी आई है।
ग्वार गम पाउडर के निर्यात सौदे इस दौरान औसतन 1,303 डॉलर प्रति टन की दर से हुए हैं जबकि ग्वार स्पलिट के निर्यात सौदे 819.87 डॉलर प्रति टन और ग्वार मील के सौदे 496.37 डॉलर प्रति टन की दर से हुए हैं।
चालू सीजन में ग्वार सीड की बुवाई में कमी आने की आषंका है तथा ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए ग्वार सीड की कीमतों में हल्का सुधार आने का अनुमान है। जोधपुर मंडी में ग्वार सीड के भाव 3,150 से 3,175 रुपये तथा ग्वार गम के भाव 5,650 रुपये प्रति क्विंटल रहे।........आर एस राणा

24 June 2016

खरीफ तिलहन की बुवाई में भारी कमी, कपास और दलहन की बुवाई भी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में एक सप्ताह मानसून की देरी का सबसे ज्यादा असर खरीफ तिलहनों की बुवाई पर पड़ा है। चालू खरीफ में तिलहनों की बुवाई अभी तक केवल 6.97 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 27.85 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से दलहन की बुवाई अभी तक केवल 9.66 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 12.19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 19.17 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 34.87 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 124.94 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 164.10 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 19.96 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 21.86 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 17.60 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 18.19 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 44.38 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 41.58 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।.............आर एस राणा

जुलाई में बढ़ सकती हैं हल्दी की कीमतें

आर एस राणा
नई दिल्ली। हल्दी में इस समय निर्यातकों की मांग तो अच्छी है लेकिन घरेलू मसाला कंपनियों की मांग कम है जिससे भाव स्थिर बने हुए हैं। जुलाई में रमजान समाप्त होने के बाद निर्यात मांग में और तेजी आने के साथ ही घरेलू मांग भी हल्दी में बढ़ेगी जिससे भाव में 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आने का अनुमान है। आंध्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में हल्दी के भाव 8,500 रुपये और इरोड़ मंडी में 7,800 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
जानकारों के अनुसार इस समय हल्दी का करीब 40 से 42 लाख बोरी (एक बोरी-70 किलो) का स्टॉक बचा हुआ है जबकि नई फसल की आवक फरवरी महीने में बनेगी। अतः नई फसल तक करीब 25 से 27 लाख बोरी हल्दी की खपत हो जायेगी तथा नई फसल के समय बकाया स्टॉक करीब 15 लाख बोरी का बचेगा जोकि पिछले साल की तुलना में कम है। हल्दी के उत्पादक राज्यों में मानूसनी बारिष षुरु हो चुकी है लेकिन हल्दी के उतपादक क्षेत्रों में अभी तक बारिष सामान्य से कम हुई है जिससे बुवाई की गति में तेजी नहीं आ रही है। हल्दी का बुवाई का सीजन मध्य जुलाई तक चलेगा। ऐसे में अगर उत्पादक क्षेत्रों में बारिष की कम रही हो मौजूदा कीमतों में और ज्यादा तेजी बन सकती है। वैसे भी हल्दी का स्टॉक किसानों के बजाए स्टॉकिस्टों के पास ज्यादा है तथा स्टॉकिस्ट नीचे भाव में बिकवाली नहीं कर रहे हैं।
प्रमुख उत्पादक मंडी इरोड़ में हल्दी का स्टॉक करीब 12 लाख बोरी है जबकि निजामाबाद में 6 लाख बोरी है जोकि पिछले साल की तुलना में कम है। इरोड मंडी में सीजन के षुरु से 17 जून तक 4,88,700 बोरी हल्दी की आवक हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 7,91,500 बोरी की हुई थी। ......आर एस राणा
चालू महीने के दूसरे सप्ताह 6 जून से 12 जून के दौरान हल्दी का निर्यात 2,754 टन का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 3,345 टन का हुआ था। विष्व बाजार में हल्दी का भाव 3.31 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका भाव 3.53 डॉलर प्रति किलो था।

23 June 2016

मसाला निर्यात पर मिलावट भारी

वैश्विक मसाला बाजार में भारत का 45 फीसदी हिस्सा है, लेकिन मिलावट और अत्यधिक कीटनाशक से हमारे इस मुकाम पर संकट मंडरा रहा है। बहुत से आयातक देश पहले ही जीरा, मिर्च और काली मिर्च में गुणवत्ता और मिलावट की शिकायतें कर चुके हैं। इंडियन स्पाइस ऐंड फूडस्टफ एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (आईएसएफईए) के चेयरमैन भास्कर शाह ने कहा, 'अगर सरकार और उद्योग ने कड़ी कार्रवाई के जरिये कीटनाशक और मिलावट की समस्या हल नहीं की तो हम अपना बाजार खो देंगे।' बहुत से आयातक देश पहले ही भारत को चेतावनी दे चुके हैं कि या तो वह गुणवत्ता युक्त उत्पादों का निर्यात करे और नियम कड़े अन्यथा वे आयात बंद कर देंगे। भारतीय मसाला बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2012-13 में निर्यात 25 फीसदी बढ़ा था, लेकिन यह वर्ष 2014-15 में महज 9 फीसदी ही बढ़ा।  भारतीय मसाला बोर्ड के चेयरमैन ए जयतिलक ने कहा, 'यह सही है कि खाद्य उद्योग और व्यापार बाजार पर मिलावट और कीटनाशक के मसले का असर पड़ रहा है। सभी आयातक देशों के अपने सख्त कड़े खाद्य कानून और नियमन हैं ताकि वे अपने नागरिकों की सुरक्षा और सेहत सुनिश्चित कर सकें। इसलिए निर्यातकों को इन नियमों का पालन करना चाहिए।' वह कहते हैं कि हमारे मसालों की अच्छी गुणवत्ता के चलते इनकी लगातार मांग आ रही है। भारत आयातक देशों की शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई कर अपनी साख बनाए रखने में सफल रहा है। विशेष रूप से अमेरिका, यूरोप और जापान में आयातित मसालों पर नियामकीय नियंत्रण कड़े हो गए हैं। ये नियम सभी मसाला निर्यातक देशों पर लागू हैं और इस क्षेेत्र में भारत सबसे बड़ा निर्यातक है।    जयतिलक ने कहा, 'हर देश में आयातित उत्पादों के लिए खाद्य मानक, दिशानिर्देश अलग-अलग हैं, इसलिए भारतीय निर्यातकों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है।' बोर्ड का कहना है कि उसने उन 7 जगहों पर आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं, जहां से माल का निर्यात होता है। वहीं, बोर्ड ने मसालों की अनिवार्य जांच का कार्यक्रम भी शुरू किया है, जो कीटनाशकों के अवशेष, माइकोटॉक्सिन और अवैध डाइ जैसे खाद्य सुरक्षा से संबंधित मसलों को हल करता है। बोर्ड की मुंबई स्थित प्रयोगशाला में कीटनाशक अवशेष एवं माइक्रोबायोलॉजिकल मिलावट के विश्लेषण के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जा रहा है।    उद्योग का मानना है कि इस दिशा में उद्योग से ज्यादा सरकार को कदम उठाने की जरूरत है। स्पाइक्जिम के प्रबंध निदेशक योगेश मेहता ने कहा, 'मिलावट और कीटनाशक सबसे बड़ी चिंताएं हैं। अब तक आयातक देशों ने नियम कड़े करने के अलावा भारत के खिलाफ कोई बड़े कदम नहीं उठाए हैं। अगर हम गुणवत्तायुक्त उत्पादों की  आपूर्ति नहीं करेंगे तो निर्यात पर असर पड़ेगा।' इस समस्या का समाधान निकालने के लिए हाल में कारोबारियों और निर्यातकों की बैठक हुई थी। मसालों में कीटनाशक की समस्या कम करने के लिए उद्योग ने किसानों को सहयोग देने और उन्हें शिक्षित करने के लिए वैज्ञानिकों को नियुक्त करने की योजना बनाई है। (BS Hindi)

महाराष्ट्र में 50 फीसदी तक घटेगा चीनी का उत्पादन

देश के कुल चीनी उत्पादन में करीब एक-तिहाई का योगदान देने वाले महाराष्ट्र में 2016-17 पेराई सत्र में उत्पादन करीब 50 फीसदी तक कम हो सकता है। करीब 200 मिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले महाराष्ट्र के सहकारी चीनी मिल संघ के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 2016-17 में राज्य में चीनी का उत्पादन 45 लाख टन रह सकता है जबकि 2015-16 में 84 लाख टन का  और 2014-15 में 1.05 करोड़ टन उत्पादन हुआ था। उत्पादन में इतनी ज्यादा गिरावट मुख्य रूप से प्रमुख गन्न उत्पादक क्षेत्रों में भीषण सूखे के वजह से आएगी क्योंकि इन इलाकों में गन्ने की बुआई भी कम हुई है।   फेडरेशन के अनुमान के मुताबिक 2016-17 पेराई सत्र में 4.6 करोड़ टन गन्ने की पैदावार होगी, जो 2015-16 में 7.43 करोड़ टन थी। महाराष्ट्र में 1.35 करोड़ हेक्टेयर में खरीफ फसल की बुआई होती है, जिनमें से गन्ने का रकबा 1.02 करोड़ हेक्टेयर है और 8.2 करोड़ टन गन्ने की पैदावार का अनुमान है। संगठन के प्रबंध निदेशक संजीव बाबर ने  बताया, 'सूखे से गन्ने की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे अंतत: आगामी पेराई सत्र में चीनी के उत्पादन में 50 फीसदी की कमी आ सकती है। शुरुआती अनुमान के अनुसारा राज्य में 45 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है।    इसके साथ ही सूखा प्रभावित जिलों में कम से कम 40 सहकारी चीनी मिलें गन्ने की किल्लत की वजह से परिचालन करने की स्थिति में नहीं होंगी। 2015-16 के दौरान सभी 176 चीनी मिलों (99 सहकारी और 77 निजी) में पेराई की गई थी। उन्होंने कहा कि आगामी पेराई सत्र में परिचालन नहीं कर पाने वाली मिलों की वित्तीय स्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शुगर मिल्स एसोसिएशन और नैशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के मुताबिक 2015-16 के 2.52 करोड़ टन उत्पादन की तुलना में 2016-17 में 2.35 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान है। (BS Hindi)

चीनी निर्यात 5 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के तीसरे सप्ताह में देष से 32.5 हजार टन चीनी का निर्यात हुआ है जोकि इसके पहले सप्ताह के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा है। हालांकि चालू महीने के पहले सप्ताह    में 53.8 हजार टन चीनी का निर्यात हुआ था।............आर एस राणा

दलहन आयात 72 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के तीसरे सप्ताह (13 जून से 19 जून) में दलहन के आयात में 72 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 105 हजार टन का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में केवल 61 हजार टन दलहन का आयात हुआ था। इस दौरान चना, मोठ, मसूर और पीली मटर के आयात में बढ़ोतरी हुई है।......आर एस राणा

गेहूं की कीमतों में तेजी-मंदी मध्य प्रदेष के गेहूं की निविदा पर निर्भर

गेहूं  की कीमतों में तेजी-मंदी मध्य प्रदेष के गेहूं की निविदा पर निर्भर
गेहूं  आयात पर 25 फीसदी षुल्क की अवधि बढ़ाने के बाद आयात सौदे बंद
आर एस राणा
नई दिल्ली। जुलाई में केंद्र सरकार खुले बाजार बिक्री योजना के तहत गेहूं की बिक्री षुरु करेगी तथा सरकार ने गेहूं का बिक्री भाव 1,640 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है इसमें परिवहन लागत एवं अन्य खर्च अलग है। ऐसे में आगामी दिनों में गेहूं की तेजी-मंदी मध्य प्रदेष में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा जारी निविदा की मात्रा पर निर्भर करेगी। अगर मध्य प्रदेष में गेहूं की निविदा की मात्रा एक लाख टन की हुई तो फिर गेहूं की कीमतों में करीब 100 रुपये की गिरावट आयेगी। उधर केंद्र सरकार द्वारा गेहूं पर आयात ष्षुल्क की अवधि को 3 महीने बढ़ाने के बाद से नए आयात सौदे आयातकों ने रोक दिए हैं।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एफसीआई 4 जुलाई को प्रमुख उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेष, पंजाब और हरियाणा में पहली निविदा जारी करेगी। पंजाब और हरियाणा से दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें गेहूं की खरीद नहीं करना चाहती इसलिए तेजी-मंदी मध्य प्रदेष में जारी होने वाली निविदा की मात्रा पर ही निर्भर करेगी। मध्य प्रदेष से 1,640 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद करने पर बंगलुरु पहुंच गेहूं का भाव 1,950 रुपये प्रति क्विंटल बैठेगा, जबकि हरियाणा से खरीद करने पर 2,070 रुपये प्रति क्विंटल बैठेगा।
केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के आयात पर 25 फीसदी षुल्क की अवधि को 3 महीने बढ़ा देने के बाद से आयातकों ने नए आयात सौदे बंद कर दिए है। चालू रबी में अभी तक 5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे किए है तथा आस्ट्रेलिया से गेहूं का आखिरी आयात सौदा 252 डॉलर प्रति टन (भारतीय बंदरगाह पहुंच) की दर से किया था। आस्ट्रेलिया से अभी तक करीब 33 हजार टन गेहूं ही भारत पहुंचा है जबकि फ्रांस से एक लाख टन गेहूं मध्य जुलाई तक पहुंचेगा। इस समय फ्रांस से आयातित गेहूं का भाव दक्षिण भारत में 2,030 से 2,040 रुपये प्रति क्विंटल है तथा यह लाल गेहूं है। आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं का भाव दक्षिण भारत में 2,260 से 2,270 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच बैठेगा।
एफसीआई ने चालू रबी विपणन सीजन 2016-17 में 229.30 लाख टन गेहूं ही खरीदा है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में खरीद 278.85 लाख टन की हुई थी।.............आर एस राणा

22 June 2016

देष में चीनी का पर्याप्त स्टॉक-केंद्र सरकार

नए पेराई सीजन में चीनी उत्पादन घटकर 230 से 240 लाख टन रहने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। इस समय देष में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। खाद्य मंत्रालय (भारत सरकार) के अनुसार पेराई सीजन 2015-16 के ष्षुरु में 90 लाख टन चीनी का स्टॉक बचा हुआ था जबकि चीनी का उत्पादन चालू पेराई सीजन में 251 लाख टन का हुआ है। चालू सीजन में चीनी की खपत 255 लाख टन होने का अनुमान है। ऐसे में देष में चीनी का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
मंत्रालय के अनुसार अगले पेराई सीजन 2016-17 में चीनी का उत्पादन 230 से 240 लाख टन होने का अनुमान है जबकि नए पेराई सीजन के समय देष में चीनी का करीब 70 से 75 लाख टन चीनी का भंडार मौजूद होगा। ऐसे मंे कुल उपलब्धता करीब 310 लाख टन की होगी जबकि अगले साल देष में चीनी की खपत 260 लाख टन होने का अनुमान है।
केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए रॉ-षुगर के साथ ही व्हाईट षुगर के निर्यात पर 20 फीसदी का निर्यात षुल्क लगाया हुआ है, साथ ही चीनी पर स्टॉक लिमिट लगाई हुई है।
जानकारों के अनुसार देष में चीनी का पर्याप्त स्टॉक तो मौजूद है लेकिन मिलों के साथ ही स्टॉकिस्ट नीचे भाव में बिकवाली नहीं कर रहे हैं इसलिए चीनी की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान नहीं है।.........आर एस राणा

इंडोनेशिया ने मूंगफली आयात बंद किया

भारत से निर्यात होने वाली मूंगफली की गुणवत्ता पर वियतनाम के सवाल उठाने के बाद अब इंडोनेशिया ने इसमें एफ्लाटॉक्सिन पाए जाने की वजह से भारत से आयात बंद कर दिया है। एफ्लाटॉक्सिन जहरीले और कैंसर जैसी बीमारी पैदा करने वाले रसायन हैं, जो फफूंदी से पैदा होते हैं। ये फफूंदी मिट्टी, मृत वनस्पति, घास और अनाज में पैदा होती हैं। इंडोनेशिया ने भारत से आने वाली मूंगफली की खेप में एफ्लाटॉक्सिन और कीटनाशक के अवशेष की जांच के लिए कहा है। लेकिन उनकी संबंधित संस्थाओं ने हमारे कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के पास पंजीकृत 21 प्रयोगशालाओं में से केवल छह को मान्यता दी है।    इंडोनेशिया के संबंधित विभागों ने बहुत कम प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी है, इसलिए निर्यातकों को अपने कंटेनरों के लिए प्रमाणपत्र हासिल करने में तीन सप्ताह तक की देरी हो रही है। एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने इंडोनेशियाई प्राधिकरणों से हमारे पास पंजीकृत 21 प्रयोगशालाओं में से कुछ और को मंजूरी देने को कहा है। हमने यह पाया है कि निर्यातकों को मूंगफली की खेप भेजने में देरी हो रही है।'   देश का मूंगफली निर्यात वर्ष 2015-16 में 5,36,929 टन पर स्थिर रहा। मूंगफली के निर्यात में 2013-14 के बाद भारी गिरावट आई है। उस समय निर्यात 7,08,386 टन रहा था, जिसकी कीमत 76 करोड़ डॉलर थी। वियतनाम के बाद भारत का दूसरा सबसे ज्यादा मूंगफली निर्यात इंडोनेशिया को होता है। एपीडा के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2015-16 के पहले 11 महीनों में इंडोनेशिया को मूंगफली का निर्यात 1,73,966 टन (20.2 करोड़ डॉलर) रहा, जो पिछले साल 1,83,355 टन (19.1 करोड़ डॉलर) था। कुछ खेप में 'ओलिवियर' ऌबग पाए जाने की वजह से वियतनाम को निर्यात में दिक्कत पैदा हुई है। एपीडा ने एपीडा के प्राधिकरणों से आग्रह किया है कि वे एक बार और कंटेनर का फ्यूमिगेशन करने के बाद खेप स्वीकार करें।    मुंबई के एक मूंगफली निर्यातक संजय शाह ने कहा, 'इंडोनेशियाई प्राधिकरणों ने खेप में कीटनाशकों के अवशेष के अतिरिक्त प्रमाणन का निर्देश दिया है। इससे अब एक कंटेनर के प्रमाणन की लागत 14,000 हो गई है, जो इन जांचों को अनिवार्य बनाए जाने से पहले 3,000 रुपये प्रति कंटेनर थी।' पहले बोरियों की रैंडम टेस्टिंग होती थी, लेकिन अब इंडोनेशियाई प्राधिकरणों ने सभी बोरियों के अलग-अलग जांच के प्रमाणन का निर्देश दिया है। अगर भारतीय निर्यातक गुणवत्ता के वैश्विक मानक नहीं अपनाते हैं तो निर्यात पर वास्तविक असर अगले कुछ महीनों में दिखेगा। इंडियन ऑयलसीड ऐंड प्रोड्युस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (आईओपीईपीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सरकार ने अग्रणी मूंगफली निर्यातकों की 23 जून को मुंबई में बैठक बुलाई है।    आईओपीईपीसी के चेयरमैन संजीव सावला ने पहले भी कहा था कि घरेलू बाजार में मूंगफली की कीमतें विदेशी बाजारों से अधिक हैं, जिससे हमारे निर्यात पर संकट बना हुआ है। पिछले साल कमजोर मॉनसून की वजह से उत्पादन भी गिरा है। 2015 के खरीफ सीजन में मूंगफली का उत्पादन 32 लाख टन रहा, जो 2014 के खरीफ सीजन में 35 लाख टन रहा था। कम उत्पादन से घरेलू बाजार में कीमतें 15 फीसदी बढ़कर 80,000 से 95,000 रुपये प्रति टन हो गई हैं। (BS Hindi)

मॉनसून

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में बिहार, बंगाल और असम में जोरदार बारिश हो सकती है। इसके अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा के अलावा पूरे दक्षिण भारत में अच्छी बारिश होने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के भी कुछ इलाकों में बारिश होने का अनुमान है। सोयाबीन की खेती वाले कमाबेश 95 फीसदी इलाकों में मॉनसून की मौजूदगी दर्ज हो चुकी है।

21 June 2016

मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश सरकार ने दाल की खेती का लक्ष्य 26 फीसदी बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने 21.5 लाख हेक्टेयर में दाल की खेती का लक्ष्य रखा है। हालांकि सरकार ने सोयाबीन की खेती का लक्ष्य करीब 5 फीसदी घटा दिया है। फिलहाल मध्यप्रदेश में मॉनसून पहुंच चुका है।

मूंग की कीमतों में और गिरावट की संभावना

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों झारखंड, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेष, मध्य प्रदेष, गुजरात तथा राजस्थान की मंडियों में समर मूंग की आवक हो रही है जबकि मांग कमजोर चल रही है इसलिए मौजूदा कीमतों में और मंदा आने का अनुमान है। दिल्ली में मूंग के भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
मध्य प्रदेष की डाबरा मंडी में नई मूंग की आवक हो रही है तथा नए मालों में 15 से 16 फीसदी नमी आ रही है। मंगलवार को मंडी में नई मूंग की दैनिक आवक 500 से 700 बोरी की हुई तथा भाव 5,600 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल रहे। समर मूंग की आवक मध्य जुलाई तक चलेगी तथा जुलाई में प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीफ मूंग की बुवाई भी षुरु हो जायेगी।.............आर एस राणा

देश के 70% इलाकों में मॉनसून ने दी दस्तक

एक हफ्ते की देरी से चल रहा मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। फिलहाल देश के करीब 70 फीसदी इलाकों में मॉनसून अपनी पहुंच दर्ज करा चुका है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश में पहुंचने के बाद जल्द ही ये गुजरात में दस्तक दे देगा। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 घंटों में मॉनसून गुजरात पहुंच जाएगा।  इस बीच पूर्वोत्तर के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है। पश्चिम बंगाल के भी पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी है। अगले चौबिस घंटे में गोवा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, और दक्षिण भारत के कई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। वहीं उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के भी कुछ इलाकों में भी हल्की बारिश होने की संभावना है

गेहूं की सरकारी खरीद 229.30 लाख टन पर अटकी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन 2016-17 में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद 229.30 लाख टन ही हो पाई है जबकि खरीद का लक्ष्य 304.85 लाख टन का था। पिछले साल एमएसपी पर गेहूं की खरीद 280.87 लाख टन की हुई थी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार सरकारी खरीद केद्रों पर गेहूं की आवक बंद हो चुकी है। चालू रबी में अभी तक हुई खरीद में पंजबा की हिस्सेदारी 106.44 लाख टन, हरियाणा की 67.21 लाख टन, उत्तर प्रदेष की 8.02 लाख टन, मध्य प्रदेष की 39.90 लाख टन, राजस्थान की 7.61 लाख टन है।
पिछले रबी विपणन सीजन में पंजाब से 103.46 लाख टन, हरियाणा से 66.91 लाख टन, उत्तर प्रदेष से 22.67 लाख टन, मध्य प्रदेष से 71.94 लाख टन और राजस्थान से 12.88 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
केंद्र सरकार के पास केंद्रीय पूल में गेहूं का 350 लाख टन का स्टॉक मौजूद है जबकि इसमें से करीब 240 लाख टन गेहूं का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में होगा। अतः सरकार के पास 110 लाख टन गेहूं का स्टॉक बचेगा, जिसमें से पहली अप्रैल 2017 को बफर स्टॉक के लिए 74.6 लाख टन गेहूं चाहिए। ऐसे में खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) में देने के लिए केंद्र सरकार के पास केवल 35.4 लाख टन गेहूं का स्टॉक बचेगा। हाल ही में खाद्य मंत्रालय ने कहां था कि ओएमएसएस के लिए 62 लाख टन गेहूं का आवंटन कर दिया है अतः गेहूं कहां से आयेगा समझ से परे है। पिछले साल ओएमएसएस के तहत 71 लाख टन गेहूं का उठाव हुआ था। खाद्य मंत्रालय जुलाई से ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री षुरु करेगी जबकि इस समय उत्पादक मंडियों में दैनिक आवक कम है तथा मांग बराबर बनी हुई है जिससे भाव में तेजी बनी हुई है।.............आर एस राणा

20 June 2016

मॉनसून

मॉनसून एक हफ्ते की देरी से पूरे महाराष्ट्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। अगले 24 घंटे में इसे गुजरात में दस्तक देने की उम्मीद है। आज असम और मेघालाय के अलावा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण के कई इलाकों में भारी बारिश होने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के भी कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है।

केस्टर सीड की बुवाई में कमी की आषंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई में कमी आने की आषंका है। जानकारों के अनुसार खरीफ में मानूसनी बारिष अच्छी होने के कारण गुजरात के साथ ही राजस्थान में किसान दलहन के साथ अन्य फसलों की बुवाई को प्राथमिकता देंगे जिससे केस्टर सीड की बुवाई में करीब 10 से 15 फीसदी की कमी आने की आषंका है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार पिछले साल खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई 11.38 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इस समय उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड के भाव 3,050 से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। गुजरात की प्रमुख मंडी दिसा में केस्टर सीड का करीब 3.5 लाख बोरी का स्टाक बचा हुआ है जोकि पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। हालांकि चालू सीजन में केस्टर तेल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है लेकिन घरेलू मंडियों में स्टॉक ज्यादा होने के कारण अभी तेजी की संभावना नहीं है।.....आर एस राणा

मॉनसून

एक हफ्ते देरी से चल रहा मॉनसून अब तेजी से आगे बढ़ने लगा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में मॉनसून ने दस्तक दे दी है और जल्द ही इसे पूरे राज्य में सक्रिय होने के लिए माहौल अनुकूल है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में दोनों राज्यों के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। खास तौर से मध्यप्रदेश के बुरहानपुर औ खंडवा में आज जोरदार बारिश होने की संभावना है।  वहीं महाराष्ट्र के विदर्भ में भी बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा गोवा और दक्षिण भारत के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है। पिछले हफ्ते बिहार और झारखंड में दस्तक देने के बाद मॉनसून दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। अगले 24 घंटे में दिल्ली और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

19 June 2016

व्यापारियों ने किया 30 लाख टन दाल आयात का अनुबंध

नई दिल्ली  दलहन कीमतों में उछाल पर अंकुश लगाने में मदद के लिए निजी व्यापारियों ने इस वर्ष अब तक करीब दो अरब डॉलर मूल्य के 30 लाख टन दलहनों के आयात करने के लिए अनुबंध किया है। घरेलू उत्पादन में कमी और मांग पूर्ति में बढ़ते अंतर के बीच कुछ दालों के भाव इस समय 200 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। फसल वर्ष 2015-16 (जुलाई से जून) में वर्षा की कमी से दलहन उत्पादन गिर कर एक करोड़ 70.6 लाख टन रहने का अनुमान है।    भारतीय दलहन एवं अनाज संघ के उपाध्यक्ष बिमल कोठारी ने पीटीआई से कहा, 'पिछले वर्ष व्यापारियों ने रिकॉर्ड 57.9 लाख टन दलहन आयात का अनुबंध किया था। इस साल व्यापारियों ने 30 लाख टन दलहनों के आयात का अभी तक अनुबंध किया है जिनके अगस्त से लेकर दिसंबर तक आने की उम्मीद है। इनमें पीली मटर, चना, मसूर और अरहर शामिल हैं।' उन्होंने कहा कि पीली मटर कनाडा और यूरोपीय देशों से आएगी जबकि चना ऑस्ट्रेलिया से, मसूर कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से और अरहर पूर्वी अफ्रीका और म्यांमार से आएगी। उन्होंने कहा कि आयातित दलहनों का कुल मूल्य दो अरब डॉलर के लगभग होगा।   व्यापारियों ने 12 से 15 लाख टन पीली मटर, पांच से सात लाख टन चना, चार लाख टन मसूर और दो से तीन लाख टन तुअर के आयात के लिए अनुबंध किए हैं।  चालू वित्तवर्ष में कुल आयात के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह कुल बुवाई के रकबे पर निर्भर करेगा जिसके बेहतर मॉनसून रहने की भविष्यवाणी और अधिक समर्थन मूल्य की वजह से बढऩे की संभावना है।

18 June 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
09811470207

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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केस्टर तेल के निर्यात में 9.13 फीसदी की बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह में केस्टर तेल के निर्यात में 9.13 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 16,541.37 टन का हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 15,157.48 टन केस्टर तेल का निर्यात हुआ था। इस दौरान केस्टर तेल के निर्यात सौदे 1,189.06 डॉलर प्रति टन की दर से हुए हैं। केस्टर तेल के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है लेकिन घरेलू बाजार में उपलब्धता ज्यादा होने के कारण केस्टर सीड की कीमतों मंे तेजी नहीं आ पा रही है। गुजरात की मंडियों में केस्टर सीड के भाव 3,050 से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे है.................आर एस राणा

दालों का आयात घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह 6 जून से 12 जून के दौरान देष में केवल 61 हजार टन दालों का आयात हुआ है जोकि इसके पहले सप्ताह के मुकाबले 40 फीसदी कम है। चालू महीने के पहले सप्ताह 30 मई से 5 जून के दौरान में देष में 1.01 लाख टन दालों का आयात हुआ था। दूसरे सप्ताह में चना, हरी मटर, उड़द, और मूंग का आयात ज्यादा हुआ है जबकि मसूर, मोठ और पीली मटर का आयात कम हुआ है..........आर एस राणा

वियतनाम से कालीमिर्च का निर्यात बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। विष्व के बड़े कालीमिर्च निर्यात देष से चालू वर्ष 2016 के पहले चार महीनों में 24 फीसदी निर्यात बढ़ा है। वियतनाम पिपर एसोसिएषन के अनुसार चालू वर्ष के पहले चार महीनों में देष से 70,000 टन कालीमिर्च का निर्यात हुआ है।..........आर एस राणा

कालीमिर्च की कीमतों में सुधार की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों में कालीमिर्च का स्टॉक कम है जिसकी वजह से इसकी दैनिक आवक कम हो गई। गत सप्ताह केरल की कुमली मंडी में कालीमिर्च की आवक घटकर केवल 34 टन की हुई। आवक कम होने के कारण आगामी दिनों में इसकी कीमतों में सुधार आने का अनुमान है।
केरल की कुमली मंडी में अनर्गाबल्ड कालीमिर्च के भाव 68,000 रुपये, ग्रेड नं0 1 के भाव 71,000 रुपये और बोल्ड के भाव 74,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कालीमिर्च का भाव घटकर 10.69 डॉलर प्रति किलो हो गया है जबकि पिछले महीने इसका भाव 10.80 डॉलर प्रति किलो था। पिछले साल जून महीने में विष्व बाजार में कालीमिर्च का भाव 11.14 डॉलर प्रति किलो था।....आर एस राणा

17 June 2016

हफ्ते की सुस्ती के बाद मॉनसून फिर से सक्रिय

करीब एक हफ्ते की सुस्ती के बाद मॉनसून फिर से सक्रिय होने लगा है। दक्षिण और पूर्वोत्तर के कई इलाकों में बारिश जारी है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना के अलावा ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। वहीं पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल, असम और पूरे पूर्वोत्तर के साथ मध्य प्रदेश के अलावा पश्चिम भारत में विदर्भ और गोवा में भारी बारिश होने का अनुमान है। माना ये जा रहा है कि इस बारिश के साथ ही मध्य और पश्चिम भारत में अगले दो दिनों में मॉनसून दस्तक दे सकता है।

मानसूनी की देरी का सबसे ज्यादा असर कपास, दलहन और तिलहन की बुवाई पर

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मानसून की देरी का सबसे ज्यादा असर खरीफ की कपास, दलहन के साथ ही तिलहन की फसलों पर पड़ा है। चालू खरीफ में अभी तक देषभर में दलहन की केवल 3.32 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 4.53 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से तिलहन की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 1.88 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 2.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 12.25 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 19.66 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 84.21 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 93.63 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 9.17 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 10.19 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 6.01 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.19 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 44.38 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 41.58 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।...................आर एस राणा

16 June 2016

अब मोजांबिक उगाएगा आपके लिए दाल!

हो सकता है कि कुछ अरसे बाद आपकी थाली में मोजांबिक की दाल का जायका हो। दाल तो मोजांबिक की होगी, लेकिन खास तौर पर भारत के लिए ही उगाई गई होगी। दरअसल दालों के भाव में कमोबेश हर साल आने वाली तेजी से निपटने तथा दालों का बफर स्टॉक बढ़ाने के लिए सरकार इस तरह की योजना बना रही है। सरकार 8 लाख टन दालों के इस स्टॉक का बड़ा हिस्सा आयात के जरिये ही पूरा करेगी और इसी के लिए मोजांबिक में केवल भारतीयों के लिए दाल उगाने पर विचार किया जा रहा है। 
 अधिकारियों ने बताया कि शीर्ष अधिकारियों की आज हुई उच्च स्तरीय बैठक में दालों का 8 लाख टन बफर स्टॉक तैयार किया जाएगा, जिसमें से करीब 6.5 लाख टन आयात से आएगा। बाकी देसी खरीद के जरिये तैयार होगा। जिन 6.5 लाख टन दालों का आयात होगा, उनमें 3 लाख टन मूंग, 1 लाख टन मसूर और 2 लाख टन चने की दाल होगी। एक वरिष्ठï सरकारी अधिकारी ने कहा, 'आयात से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि सरकारी खरीद बढऩे पर भी देसी बाजार में दालों की आपूर्ति कम न हो।' लेकिन बैठक में सबसे दिलचस्प योजना मोजांबिक के बारे में ही बनी। योजना के मुताबिक उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय तथा वाणिज्य विभाग के अधिकारी कृषि विशेषज्ञों के साथ जल्द ही मोजांबिक और म्यांमार जाएंगे। वे दोनों देशों से लंबे अरसे तक दालों के आयात के करार करने की संभावनाएं तलाशेंगे। यदि वहां जमीन मिल जाएगी तो वहां के किसानों को भारत के लिए दालें उगाने को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस बीच सरकार ने चीनी पर 20 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया और गेहूं पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क तीन महीने के लिए बढ़ा दिया। इस शुल्क की अवधि 30 जून को समाप्त हो रही थी। सरकार ने चने का वायदा कारोबार फिलहाल रोकने का भी फैसला किया है। (BS Hindi)

एमसीएक्स में और नए कृषि जिंस अनुबंध

देश का अग्रणी जिंस एक्सचेंज एमसीएक्स विवादों के झमले से बाहर आ चुका है। एक्सचेंज ने कृषि जिंसों के कारोबार में भी अपने को मजबूत करने की योजना तैयार की है। एक्सचेंज में जल्द ही कुछ कृषि जिंसों के चार-पांच अनुबंधों का वायदा कारोबार शुरू होगा। एमसीएक्स अरंडी और काली मिर्च वायदा की शुरुआत करने की पूरी तैयारी कर चुका है। हालांकि एक्सचेंज ने नियामक नियमों का हवाला देते हुए जिंसों का नाम नहीं बताया। 
 अक्टूबर 2013 के बाद पहली बार एमसीएक्स के अधिकारी खुलकर मीडिया के सामने आए। एमसीएक्स के अध्यक्ष पीके सिंघल ने कहा कि एक्सचेंजअक्टूबर 2013 से मार्च 2015 तक के बुरे दौर से पूरी तरह उबर चुका है। एक्सचेंज का औसत दैनिक कारोबार समय के साथ स्थिर हुआ और नवंबर 2013 के निम्रतम से मई 2016 में 61 फीसदी अधिक हो चुका है। सिंघल ने कहा कि हमारे पास सबसे बेहतर तकनीक और कुशल कर्मचारी हैं जिनके बल पर हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। एक्सचेंज का भविष्य अब पूरी तरह से सुरक्षित है। एक्सचेंज ने पहले बड़े कारोबारी सेंगमेंट पर ध्यान दिया जिनमें बुलियन, मेटल और एनर्जी शामिल हैं, अब हम कृषि सेंगमेंट को भी मजबूत करेंगे। एमसीएक्स में अरंडी और काली मिर्च वायदा कारोबार जल्द ही शुरू होगा। एससीएक्स के प्रतिस्पर्धी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स में इन दोनों कृषि जिंसों के वायदा कारोबार इसी साल निलंबित कर दिए गए। एमसीएक्स ने इन दोनों कृषि जिंसों का वायदा कारोबार शुरू करने का आवेदन पहले से ही नियामक को दिया है। 
 एमसीएक्स पर पिछले 13 सालों से मेंथा, कच्चा तेल, क्रूड पाम तेल, इलायची और कपास का वायदा कारोबार हो रहा है। जबकि ग्वार सीड और ग्वार गम एवं चीनी के अनुबंधों को शुरू किया तो गया था जो फिलहाल बंद हैं। जिन कृषि जिंसों का कारोबार एमसीएक्स पर हो रहा है उनमें अभी भी एक्सचेंज की पकड़ मजबूत बनी हुई है। इसी आधार पर एक्सचेंज नए अनुबंधों की शुरुआत करने की तैयारी में है। 
 एमसीएक्स के नव नियुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी मृगांक परांजपे ने कहा कि हमने अपने कृषि जिंसों के सेगमेंट को मजबूत करने के लिए जल्दी चार पांच अनुबंधों पर ट्रेडिंग शुरू करने की योजना तैयार की है। इन जिंसों के वायदा कारोबार शुरू करने की अनुमति नियामक से मांगी गई है, उम्मीद है कि जल्द ही हमें ट्रेङ्क्षडग शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी क्योंकि एक्सचेंज सभी पहलुओं को पूरा करने में सक्षम है। 
 वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के सेबी में विलय ने भारत में कमोडिटी बाजार का परिदृश्य बदल दिया है। इस विलय से कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में नए उत्पादों का मार्ग खुला है । इस मार्केट मेंं बैंकों, म्युचुअल फंड और बीमा जैसी कंपनियों की भागीदारी बढऩे की संभावना है। उन्होंने कहा कि एक्सचेंज को कारोबारी स्तर पर मजबूत करने के लिए हमने तकनीक और कुशल लोगों को शामिल किया है। पिछले एक साल में पांच वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारियों की नियुक्ति के साथ कर्मचारियों की संख्या में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की है। फिलहाल टेक्नोलजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एमसीएक्स का फाइनैंशियल टेक्नोलजी के साथ 2022 तक टेक्नोलजी प्रदाता के रूप में करार है। एक्सचेंज नए उत्पादों के लॉन्च के लिए पूरी तरह से तैयार है। ऑप्शंस और इंडाइसेस जैसे नए डेरिवेटिव उत्पादों का कारोबार एक्सचेंज में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। क्लियरिंग कॉर्पोरेशन शुरू करने के सवाल पर परांजपे ने कहा कि हालांकि सेबी ने इसे शुरूकरने के लिए तीन साल का समय दिया है। इसके लिए टेक्नोलजी और पर्याप्त नकदी के साथ एक्सचेंज इसे अनिवार्य समय से पहले अच्छी तरह परिचालित करने के लिए तैयार है। 
 बीएसई और एनएसई एक्सचेंजों को कमोडिटी सेगमेंट में कारोबार के बारे में सेबी के अनुमोदन के बारे में परांजपे कहते हैं कि हम प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हैं। प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं और भारतीय अर्थव्यवस्था का फायदा होगा। अगले कुछ महीनों में जीएसटी लागू होता है तो कमोडिटी डेरिवेटिव्स की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी। परांजपे ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी टीम उच्च विकास के रास्ते पर चलने में सक्षम है और एमसीएक्स भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज होने के नाते कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में प्रभावशाली गहनता और हेजिंग की संभावनाओं को व्यापक और समग्र बनाने में प्रभावी ढंग से योगदान कर सकता है जिससे कि बाजार में समावेशन को बल मिलेगा।   (BS Hindi)

दालों के बढ़ते दाम

दालों के बढ़ते दामों को देखते हुए अब जमाखोरों के खिलाफ सख्ती और बढ़ने वाली है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के सचिव, आईबी और सभी राज्यों के पुलिस अफसरों के बीच कल अहम बैठक हुई है। इस बैठक में दालों का 8 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने और दाल इंपोर्ट और खरीदारी पर चर्चा हुई। बैठक में पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र में जमाखोरों पर कार्रवाई करने रका निर्णय लिया गया।  इस मुद्दे पर दूसरी बैठक उपभोक्ता मामलो के सचिव ने बुलाई जिसमें जमाखोरों पर सख्त निगरानी के निर्देश दिेए गए, ट्रेड के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर भी चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में दालों की खेती के विकल्प तलाशने के लिए एक समूह को म्यांमार भेजने का निर्णय लिया गया।

गेहूं पर आयात षुल्क की अवधि बढ़ाई

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गेहूं पर आयात षुल्क की अवधि को बढ़ा दिया है। गेहूं के आयात पर इस समय 25 फीसदी आयात षुल्क है तथा इसकी अवधि 30 जून 2016 को समाप्त हो रही थी। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए आयात षुल्क की अवधि को बढ़ाया है। हालांकि अभी तक सरकार ने इसका नोटिफिकेषन जारी नहीं किया है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही इसका नोटिफिकेषन जारी कर देगी। इससे गेहूं की कीमतों में और भी तेजी की संभावना है। एक अनुमान के अनुसार दक्षिण भारत के फलोर मिलर्स करीब 5.5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे आस्ट्रेलिया और फ्रांस से कर चुके हैं।........आर एस राणा

चना के नए वायदा सौदों पर रोक

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महंगाई को काबू में करने के लिए वायदा में चना के नए वायदा अनुबंध पर रोक लगा दी है। चना वायदा मंे भारी तेजी के बाद केंद्र सरकार के कहने पर सेबी ने यह कदम उठाया है। इतना ही नहीं मौजूदा वायदा अनुबंध में भी ताजा पोजिषन पर रोक लगा दी गई है। इससे चना की कीमतों में एक बार को गिरावट आ सकती है लेकिन हाजिर में माल की कमी के कारण लंबी अवधि में मंदा रहने की संभावना नहीं है।.....आर एस राणा

चीनी पर 20 फीसदी निर्यात षुल्क

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार चीनी की कीमतों को काबू करने लिए इसके निर्यात पर 20 फीसदी का निर्यात षुल्क लगा दिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम यानि सीबीईसी के मुताबिक घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए रॉ षुगर के साथ ही व्हाईट ष्षुगर के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से 20 फीसदी निर्यात षुल्क लगाया गया है। यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इससे चीनी कीमतों मंे घरेलू बाजार में हल्की नरमी आने का अनुमान है।......आर एस राणा

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाये, कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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3-4 दिन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र पहुंचेगा मॉनसून

करीब एक हफ्ते की देरी से चल रहे मॉनसून को आने में अभी 3-4 दिन का और वक्त लग सकता है। मॉनसून में देरी की वजह से इस महीने अबतक सामान्य से 22 फीसदी कम बारिश हुई है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि महाराष्ट्र और मध्य भारत में फिर से माहौल अनुकूल होने लगा है। अगले 3-4 दिनों में इन इलाकों में मॉनसून के पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान गोवा और दक्षिण भारत में मॉनसून पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा।  इससे पहले पिछले 24 घंटों से पूर्वोत्तर के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है। कल पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में बिहार और बंगाल समेत, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

मक्का की कीमतों में और तेजी संभव, हालांकि निर्यात घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में मक्का की कीमतों में आई तेजी का असर मक्का के निर्यात पर पड़ा है। चालू महीने के दूसरे सप्ताह 6 जून से 16 जून के दौरान देष से मक्का के निर्यात में कमी आकर कुल निर्यात 4,500 टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में निर्यात 6,192 टन का हुआ था। सूत्रों के अनुसार इस दौरान मक्का के निर्यात सौदे औसतन 215.35 डॉलर प्रति टन एफओबी की दर से हुए हैं तथा प्रमुख आयातक देषों में नेपाल और मलेषिया हैं।
उत्तर प्रदेष के साथ ही पंजाब में समर मक्का की आवक चल रही है जबकि अगले सप्ताह में हिमाचल में भी आवक षुरु हो जायेगी। उत्तर भारत में इस समय पोल्ट्री फीड निर्माताओं की मांग तो कमजोर है लेकिन स्टॉकिस्ट खरीद कर रहा है इसलिए भाव तेज बने हुए हैं। दिल्ली में मक्का के भाव गुरुवार को 1,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
दक्षिण भारत में मक्का का स्टॉक कमजोर है जबकि मानसूनी बारिष के बाद से स्टार्च और पोल्ट्री की मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए दक्षिण भारत में मक्का की की कीमतों मंे और तेजी आने का अनुमान है। इस समय बिहार की मंडियों मंे भी मक्का की दैनिक आवक कम हो गई है। बिहार की गुलाबबाग मंडी में मक्का के भाव 1,350 से 1,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि आंध्रप्रदेष की निजामाबाद मंडी में 1,560 से 1,605 रुपये, दावणगिरी 1,690 रुपये, करीमनगर 1,640 रुपये, सांगली 1,750 रुपये, जलगांव 1,670 रुपये और मल्कापुर में भाव 1,670 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।.......आर एस राणा

15 June 2016

एनसीडीईएक्स में जिंस डिलिवरी के समय गुणवत्ता की परख

 नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) पर किसानों की भागीदारी बढ़ रही है। इसे देखते हुए एक्सचेंज ने गोदामों से जिंसों की डिलिवरी के समय उनके नमूनों एवं परीक्षण को अनिवार्य किया है। इसकी शुरुआत सरसों के सभी अनुबंधों के साथ की गई है। एक्सचेंज ने आज इसकी घोषणा की। एक्सचेंज ने परीक्षण के तौर पर अगले आदेश तक सरसों के सभी अनुबंधों में अनिवार्य नमूनों एवं परीक्षण का फैसला किया है।    भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के मुताबिक अच्छी डिलिवरी सुनिश्चित करना एक्सचेंज की जिम्मेदारी है। अगर खरीदार या लिवाल एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर दिए जाने वाले माल की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं है तो नियमों के मुताबिक यह एक्सचेंज की जिम्मेदारी है। इसे लागू करने के लिए एक्सचेंज ने आज एक परिपत्र जारी किया। कुछ कारोबारियों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि एक्सचेंज से मान्यता प्राप्त गोदामों में भंडारित सरसों में ज्यादा नमी होने की शिकायतें आई थीं।    एक्सचेंज ने परिपत्र में कहा गया है, 'जब हम किसी जिंस की डिलिवरी से पहले अनिवार्य रूप से नमूने लेने एवं परीक्षण की अधिसूचना जारी करते हैं तो यह काम एक्सचेंज द्वारा नियुक्त स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षणकर्ता से कराया जाएगा। डिलिवरी से पहले अनिवार्य रूप से नमूने लेने और जांच करने की लागत का खर्च लिवाल को वहन नहीं करना पड़ेगा। अगर जिंस की गुणवत्ता डिलिवरी के समय उसे जमा कराए जाने जैसी नहीं रहती है तो गोदाम सेवा प्रदाता को लिवाल के साथ यह विवाद सुलझाना होगा।' (BS Hindi)

दालों के आयात की संभावना तलाशने के लिए म्यांमार और अफ्रीका में टीम भेजने की योजना

सरकार ने बाजार में और अनाज उतारने और दालों के आयात की संभावना तलाशने के लिए म्यांमार और अफ्रीका में टीम भेजने की योजना बनाई है। यह खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार की बहुआयामी रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी का रुझान दिखा है। टमाटर जैसी सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी पर अधिकारियों ने कहा कि मोदी सरकार के शीर्ष मंत्रियों और अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह आम राय बनी कि यह तेजी मौसमी है और कुछ कुछ सप्ताह बाद कीमतें घट जाएंगी। यह उच्च स्तरीय बैठक वित्त मंत्री अरुण जेटली के आवास पर हुई। इसमें कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, खाद्य मंत्री राम विलास पासवान, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारामन और शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने हिस्सा लिया। करीब एक घंटे तक चली चर्चा में वित्त सचिव अशोक लवासा, आर्थिक मामलों केसचिव शक्तिकांत दास, राजस्व सचिव हसमुख अधिया और मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी हिस्सा लिया। 
 
बैठक में केंद्र की खरीद नीति और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा क्या कदम उठाए जाएं, इस पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक की चर्चा के बारे में जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'करीब 10,000 टन दालें पहले ही बफर स्टॉक से जारी कर दी गई हैं। हम राज्यों की मांग के आधार पर और दालें जारी करेंगे।'
 
अधिकारियों ने कहा कि बैठक में चर्चा का मुख्य विषय दालों की समस्या और इनकी बढ़ती कीमतें रहा क्योंकि खाद्य महंगाई बढ़ाने में इसका सबसे ज्यादा योगदान है। बाद में खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने बताया कि उनके मंत्रालय को सीधे किसानों से खरीद और आयात के जरिये दालों की उपलब्धता बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि इस साल बफर स्टॉक के लिए 1.5 लाख टन दालें खरीदने का लक्ष्य है और अब तक खरीफ और रबी सीजन में 1.15 लाख टन दालें खरीदी जा चुकी हैं। रबी सीजन की खरीद अब भी चल रही है। (BS Hindi)

नकली कीटनाशकों का बढ़ता धंधा, किसान बेहाल

बगैर रेगुलेशन का बाजार कैसा होगा, अगर ये देखना है तो एक बार देश में कृषि कीटनाशकों के बाजार पर नजर डाल लीजिये। बड़ी अजीबोगरीब स्थिति होती है, जब भी किसी इलाके में फसलों पर किसी बीमारी या कीटों का प्रकोप आता है, इलाके के बाजार अनजाने ब्रांड वाले कीटनाशकों से सज जाते हैं। अखबार और दुसरे प्रसार माध्यमों से किसानों को कीटनाशकों के इस्तेमाल के सुझाव दिए जाने लगते हैं और यहीं से शुरू होता है नकली जहर का काला कारोबार। क्योंकि ज्यादातर इन दवाओं के इस्तेमाल के बाद किसान अपनी फसल से हाथ धो बैठता है। अब यूएन की संस्था एफएओ ने कहा है कि देश के कीटनाशक बाजार में 25 फीसदी नकली उत्पाद हैं।
देश में अच्छे मॉनसून के अनुमान से खेती की तस्वीर सुधरने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। राज्य सरकारों ने अपने यहां खरीफ का लक्ष्य भले बढ़ा दिया है लेकिन नकली दवाओं और केमिकल्स के इस्तेमाल से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। जी हां, संयुक्त राष्ट्र की संस्था एफएओ ने कहा है कि देश में बिकने वाले पेस्टीसाइड और कृषि केमिकल्स में 25 फीसदी तक नकली हैं। इसका खेती और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि नकली कीटनाशकों को बाजार लगातार बढ़ रहा है और इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। नकली कीटनाशकों के चलते 2007 से किसानों के करीब 12000 करोड़ रुपये डूब गए हैं। दरअसल रजिस्ट्रेशन में छूट से नकली उत्पादों का बाजार बढ़ रहा है। देश में करीब 19000 करोड़ रुपये का कीटनाशक कारोबार है और नकली कीटनाशकों का बाजार करीब 5000 करोड़ रुपये का है।
वहीं फिक्की की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 30 फीसदी कीटनाशक नकली हैं और सालाना आधार पर नकली कीटनाशकों का कारोबार 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। नकली कीटनाशकों से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और कर्नाटक का नाम आगे है। (Hindimoneycantrol.com)

दिल्ली वालों को सस्ती दाल

 केंद्र सरकार ने दिल्ली वालों को सस्ती दाल देने की योजना शुरू की। दिल्ली वालों के लिए सरकार दाल वाली वैन चलाएगी और इस वैन से लोग 120 रुपये प्रति किलो दाल ले पाएंगे।  खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि राज्यों को कम कीमत पर दाल मुहैया कराएंगे, जिससे बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके। वहीं खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने सब्जियों के बढ़ते दामों पर कहा कि सरकार मूल्य वृध्दि को लेकर काफी गंभीर है और इसके लिए राज्यों को भी सचेत किया गया है।

कपास का निर्यात घटा, लेकिन भाव में अभी तेजी की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह 6 जून से 12 जून के दौरान देष से कपास के निर्यात में जरुर कमी आई है लेकिन घरेलू यार्न मिलों की अच्छी मांग के कारण अभी भाव में और तेजी आने का अनुमान है। महाराष्ट्र की मंडियों में कपास के भाव 39,700 से 40,200 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) हो गए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार 6 मई से 12 मई के दौरान देष से 0.526 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) का ही निर्यात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 0.619 लाख गांठ कपास का निर्यात हुआ था। इस दौरान कपास का सबसे ज्यादा निर्यात बंगलादेष को 0.347 लाख गांठ का हुआ है। इसके अलावा वियतनाम और पाकिस्तान ने आयात किया है।
सूत्रों के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुवाई पिछले साल की तुलना में कम होने की आषंका है। उद्योग के अनुसार चालू खरीफ में मानसूनी बारिष अच्छी होने के साथ ही पिछले साल बीमारी से फसल को नुकसान हुआ था, जिसकी वजह से किसान कपास के बजाए अन्य फसलों की बुवाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।.....................आर एस राणा

निर्यात मांग अच्छी होने से जीरा में तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। जीरा में निर्यातकों की अच्छी मांग बनी हुई है जिससे इसकी कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। उंझा मंडी में जीरा की दैनिक आवक 8 से 9 हजार बोरी की हो रही है जबकि दैनिक मांग करीब 10 हजार बोरी की बनी हुई है। उंझा मंडी में जीरा के भाव बुधवार को 3,100 से 3,500 रुपये प्रति 20 किलो रहे।
सूत्रों के अनुसार चालू सीजन में जीरा की क्वालिटी काफी अच्छी है जबकि पिछले साल हार्वेस्टिंग के समय हुई बारिष से क्वालिटी प्रभावित हुई थी। यही कारण है कि चालू सीजन में जीरा के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। एक जीरा निर्यातक के अनुसार पिछले साल चीन के करीब 12,000 हजार टन जीरा का आयात किया था लेकिन चालू वित वर्ष में मौजूदा मांग को देखते हुए निर्यात 14 से 15 हजार टन का चीन को ही होने का अनुमान है।
मसाला बोर्ड के अनुसार विष्व बाजार में भारतीय जीरा का दाम चालू महीने में 3.19 डॉलर प्रति किलो रहा जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका भाव 3.75 डॉलर प्रति किलो था। वित वर्ष 2015-16 के पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान देष से 93,539 टन जीरा का निर्यात हुआ था।
गुजरात सरकार के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार राज्य में जीरा की पैदावार 2.13 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल की तुलना में 7 फीसदी अधिक है। पिछले साल गुजरात में जीरा की पैदावार 1.97 लाख टन की हुई थी।.......आर एस राणा

14 June 2016

गेहूं से आयात षुल्क हटायेगी सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार गेहूं पर से 25 फीसदी आयात षुल्क को हटायेगी। गेहूं पर आयात षुल्क की अवधि 30 जून 2016 तक है इसके बाद सरकार इसे आगे नहीं बढ़ायेगी। ऐसे में 30 जून 2016 के बाद स्वतः ही आयात षुल्क समाप्त हो जायेगा, जिससे गेहूं की कीमतों में जुलाई में नरमी आ सकती है।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सरकार ने आयात षुल्क आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है इसलिए 30 जून 2016 के बाद आयात षुल्क स्वतः ही समाप्त हो जायेगा। अभी तक दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें आस्ट्रेलिया और फ्रांस से करीब 5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे कर चुकी है आयात षुल्क हटने के बाद जुलाई से आयातित गेहूं की आवक बढ़ जायेगी। दक्षिण भारत की गेहूं की सालाना खपत करीब 22 से 25 लाख टन की होती है। अतः आयात षुल्क हटने के बाद आयात में तेजी आयेगी, तथा दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों द्वारा करीब 20 लाख टन से ज्यादा गेहूं का आयात करने की संभावना है जिससे दक्षिण भारत की मांग उत्तर भारत से कम हो जायेगी। अतः गेहूं की कीमतों में जुलाई महीने मंे मंदा आ सकता है। इस समय आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं का भाव तमिलनाडु में 2,150 से 2,160 रुपये प्रति क्विंटल है।....आर एस राणा

पश्चिम भारत में मॉनसून की चाल कमजोर

पश्चिम भारत में मॉनसून की चाल कमजोर पड़ गई है। मॉनसून गोवा से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। महाराष्ट्र में दस्तक कब देगा मौसम विभाग इसकी जानकारी नहीं दे पा रहा है। ऐसे में मौसम विभाग की एडवायजरी एजेंसी एग्रीमेट ने मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र के किसानों को आगाह किया है कि वे मॉनसून और बारिश को देखकर ही खेती करें। बगैर बारिश हुए महंगे बीज और खाद का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।  मौसम विभाग ने कहा है महाराष्ट्र में मॉनसून अब 16 जून के बाद ही आ सकेगा। आपको बात दें मॉनसून एक हफ्ते की देरी से चल रहा है। फिलहाल केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में मौजूदगी दर्ज कराने के बाद दक्षिण गोवा तक ही पहुंच सका है। आमतौर पर 12 जून तक इसे मुंबई पहुंच जाना चाहिए, लेकिन अभी महाराष्ट्र में ही आने में एक हफ्ते की देरी की आशंका है।

सरकारी एजेंसियों ने रबी में की 64,000 टन दालों की खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्रीय एजेंसियों ने चालू रबी में अभी तक 64,000 टन दलहन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की है जबकि खरीफ में भी 51,000 टन दालों की खरीद एमएसपी पर की थी। अतः चालू फसल सीजन में अभी तक 1,15,000 टन दलहन की खरीद बफर स्टॉक के लिए सार्वजनिक कंपनियां कर चुकी है।
खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव श्री हेम पांडेय ने मंगलवार को खाद्यान्न की कीमतों में तेजी पर अधिकारियों की बैठक के बाद बताया कि सार्वजनिक कंपनिया करीब 12,000 टन दलहन के आयात आर्डर जारी कर चुकी है इनमें 10 हजार टन उड़द और 2,500 टन मसूर है। इसके अलावा सार्वजनिक कंपनियों अभी तक 14,321 टन दालो का आयात भी कर चुकी है। उन्होंने बताया कि बफर स्टॉक से आंध्रप्रदेष, तमिलनाडु, तेलंगाना और दिल्ली को दालों की सप्लाई षुरु की जा चुकी है।   
उन्होंने बताया कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास गेहूं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तथा सरकारी आयात षुल्क को हटाने पर विचार कर रही है।......आर एस राणा

मई में खाद्य तेलों का आयात 25 फीसदी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। महीने में देष में खाद्य तेलांे के आयात में 25 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 1,024,878 टन का ही हुआ है जबकि मई 2015 में इनका आयात 1,371,662 टन का हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2015-16 के पहले सात महीनों (नवंबर-15 से मई-2016) के दौरान खाद्य तेलों के आयात में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 8,593,587 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष 2014-15 की समान अवधि में 7,833,524 टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था।
मई महीने में आयातित आरबीडी पामोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर 708 डॉलर प्रति टन रहा जबकि मई 2015 में इसका भाव 667 डॉलर प्रति टन था। हालांकि अप्रैल 2016 के मुकाबले इसमें कमी आई थी। अप्रैल 2016 में आरबीडी पामोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर 739 डॉलर प्रति टन हो गया था। क्रुड पाम तेल का भाव मई 2016 में भारतीय बंदरगाह पर 706 डॉलर प्रति टन रहा जबकि मई 2015 में इसका भाव 647 डॉलर प्रति टन था। अप्रैल 2016 में इसका भाव भारतीय बंदरगाह पर 738 डॉलर प्रति टन था।
आरबीडी पामोलीन और क्रुड पाम तेल की कीमतों में अंतर कम होने के कारण आरबीडी पामोलीन के आयात में बढ़ोतरी हो रही है। एसईए के अनुसार चालू तेल वर्ष के पहले 7 महीनों में देष में आरबीडी पामोलीन का आयात बढ़कर 15.87 लाख टन का हो गया जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इसका आयात 7.66 लाख टन था।....आर एस राणा

13 June 2016

एमएसपी पर 229.30 लाख टन गेहूं की खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2016-17 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 229.30 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में 276.53 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी में अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 106.44 लाख टन, हरियाणा की 67.21 लाख टन, उत्तर प्रदेष की 8.02 लाख टन, मध्य प्रदेष की 39.90 लाख टन और राजस्थान की 7.61 लाख टन है। इसके अलावा उत्तराखंड से 2,355 टन तथा चंडीगढ़ से 7,461 टन और गुजरात से 109 टन गेहूं की खरीद हुई है।.....आर एस राणा

विष्व बाजार में भारतीय लालमिर्च के दाम बढ़े

आर एस राणा
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय लालामिर्च की कीमतें बढ़ी है। चालू महीने में लालमिर्च के भाव बढ़कर 3.85 डॉलर प्रति किलो हो गए जबकि पिछले महीने इसकी कीमतें 3.75 डॉलर प्रति किलो थी।
सूत्रों के अनुसार इस उत्पादक मंडियों में लालमिर्च का करीब 83 लाख बोरी (एक बोरी-40 किलो) का है। कुल स्टॉक में गुटूर मंे 43 लाख बोरी, करनूल में 3 लाख बोरी, खम्मम में 7.5 लाख बोरी, वारंगल में 8.5 लाख बोरी, प्रकाषम में 6 लाख बोरी का स्टाक मौजूदा है। इसके अलावा अन्य मंडियों मंे करीब 13 से 14 लाख बोरी लालमिर्च का स्टॉम मौजूद है।
चालू खरीफ में प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिष अच्छी होने का अनुमान है इसलिए लालमिर्च की बुवाई में बढ़ोतरी की संभावना है। इस समय लालमिर्च में निर्यातकों के साथ घरेलू मांग कम है इसलिए भाव में अभी तेजी की संभावना नहीं है।......आर एस राणा

कपास की कीमतों में तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। कपास की कीमतों में महीनेभर में करीब 10 फीसदी की तेजी आ चुकी है। महाराष्ट्र की मंडियों में कपास के भाव बढ़कर 39,700 से 40,000 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) हो गए।
इस समय उत्पादक राज्यों में कपास की दैनिक आवक घटकर 15 हजार गांठ (एक गांठ-170 किलो) से भी कम हो गई है जबकि घरेलू यार्न मिलों की मांग अच्छी बनी हुई है। मानसूनी की देरी का असर कपास की बुवाई पर भी पड़ा है तथा चालू खरीफ में कपास की बुवाई में अभी तक करीब 35 फीसदी की कमी आई है तथा अभी तक 10 लाख हैक्टेयर से कम क्षेत्रफल में कपास की बुवाई हो पाई है। उत्तर भारत के राज्यों पंजाब और हरियाणा में तो लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया है। हालांकि पष्चिमी राज्या में बुवाई अभी चल रही है। माना जा रहा है कि तेलंगाना और आंध्रप्रदेष में भी बुवाई में कमी आ सकती है। ऐसे में लगातार चौथे साल देष में कपास की पैदावार में कमी आने की आषंका है। इसलिए कीमतों में अभी और भी सुधार आ सकता है। ....आर एस राणा

11 June 2016

इलायची के निर्यात में आई कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के पहले सप्ताह में इलायची का निर्यात घटकर 116 टन का ही रह गया जबकि इसके पहले सप्ताह में 324 टन इलायची का निर्यात हुआ था। इस दौरान प्रमुख आयात देषों में अमेरिका, यूके, कनाड़ा, कतर हैं। माना जा रहा है कि क्वालिटी हल्की होने के कारण निर्यात में कमी आई है।
केरल की कुमली मंडी में 8 एमएम इलायची के भाव 1,010 से 1,040 रुपये तथा बेस्ट क्वालिटी के भाव 1,100 से 1,150 रुपये, 7 एमएम की क्वालिटी की इलायची के भाव 770 से 810 रुपये और 6 एमएम की क्वालिटी इलायची के भाव 620 से 650 रुपये प्रति किलो रहे। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसूनी बारिष के कारण तुड़ाई अभी बंद है इसलिए केवल स्टॉक के माल आ रहे हैं। निर्यात मांग कम होने से भाव में अभी तेजी की संभावना नहीं है।....आर एस राणा

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाये, कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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केस्टर तेल के निर्यात में 5.78 फीसदी की बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के पहले सप्ताह में देष से केस्टर तेल के निर्यात में 5.78 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 15,157.48 टन का हुआ है। इस दौरान केस्टर तेल के निर्यात सौदे औसतन 1,126.76 डॉलर प्रति टन की दर से हुए है। घरेलू बाजार में कीमतें कम होने के कारण केस्टर तेल का निर्यात लगातार बढ़ रहा है।....आर एस राणा

मटर आयात में भारी बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में स्टॉक कम होने के कारण मटर के आयात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। चालू वित वर्ष 2016-17 के पहले महीने अप्रैल में फ्रांस से 42.16 हजार टन मटर का आयात हुआ है जबकि इसके पिछले महीने में केवल 13.60 हजार टन मटर का आयात हुआ था।.....आर एस राणा

एमएमटीसी 5 हजार टन चना आयात करेगी

आर एस राणा
नई दिल्ली। सार्वजनिक कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड ने 5 हजार टन चना आयात करने के लिए निविदा मांगी है। कंपनी के अनुसार कनाडा और आस्ट्रेलिया से चना का आयात किया जायेगा तथा चना नई फसल का होगा। चना की षिपमेंट पहली अगस्त से 15 सितंबर 2016 के दौरान ली जायेगी तथा कम से कम 2,500 टन की निविदा स्वीकार की जायेगी। इसकी षिपमेंट चैन्नई और नवासेवा-जेएनपीटी बंदरगाह पर ली जायेगी। निविदा भरने की अंतिम तिथि 22 जून 2016 है।....आर एस राणा

10 June 2016

आगे बढ़ा मॉनसून, कई इलाकों में तेज बारिश

मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में दस्तक देने के बाद अब मॉनसून का अगला पड़ाव गोवा है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून को आगे बढ़ने के लिए माहौल अनुकूल है और अगले 48 घंटों में ये महाराष्ट्र में दस्तक दे सकता है।  इस बीच देश के पूर्वी इलाकों में भी बारिश जारी है। पश्चिम बंगाल के  कई इलाकों में भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में पूर्वोत्तर के कमोबेश सभी राज्यों में भारी बारिश की आशंका जताई है।

मानसून की देरी से खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। मानसून की देरी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ा है। चालू खरीफ में अभी तक खरीफ फसलों की 71.24 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 76.65 लाख हैक्टेयर में तुलना में कम है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रोपाई अभी तक 5.75 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 6.42 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह खरीफ दलहन की बुवाई अभी तक केवल 1.46 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.32 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मोटे अनाजों की बुवाई 2.01 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 3.82 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 0.72 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.22 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 44.38 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 41.01 लाख हैक्टेयर में हुई थी। कपास की बुवाई चालू खरीफ में 9.87 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 14.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। ......आर एस राणा

देश में बिकने वाली कीटनाशक दवाओं में 25% नकली

देश में अच्छे मॉनसून के अनुमान से खेती की तस्वीर सुधरने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। राज्य सरकारों ने अपने यहां खरीफ का लक्ष्य भले बढ़ा दिया है लेकिन नकली दवाओं और केमिकल्स के इस्तेमाल से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। जी हां, संयुक्त राष्ट्र की संस्था एफएओ ने कहा है कि देश में बिकने वाले पेस्टीसाइड और कृषि केमिकल्स में 25 फीसदी तक नकली हैं। इसका खेती और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।  भारत में एफएओ के प्रतिनिधि श्याम खड़का ने हमारी सहयोगी नेहा आनंद से खास बातचीत में बताया कि पूर्वी राज्यों में कृषि को लेकर सरकारों में काफी उदासीनता है, इसका देश के कुल कृषि उपज पर असर पड़ रहा है। (HindiMoneycantrol.com)

09 June 2016

चीनी निर्यात 13 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। विष्व बाजार में कीमतों में आई तेजी से देष से चीनी का निर्यात बढ़ा है। चालू महीने के पहले सप्ताह में देष से 53.8 हजार टन चीनी का निर्यात हुआ है। इसमें ज्यादातर रॉ-षुगर चीनी का निर्यात हुआ है। इसके पहले सप्ताह में देष से केवल 47.8 हजार टन चीनी का निर्यात हुआ था।.....आर एस राणा

इलायची के निर्यात में आई कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के पहले सप्ताह में इलायची का निर्यात घटकर 116 टन का ही रह गया जबकि इसके पहले सप्ताह में 324 टन इलायची का निर्यात हुआ था। इस दौरान प्रमुख आयात देषों में अमेरिका, यूके, कनाड़ा, कतर हैं। माना जा रहा है कि क्वालिटी हल्की होने के कारण निर्यात में कमी आई है।
केरल की कुमली मंडी में 8 एमएम इलायची के भाव 1,010 से 1,040 रुपये तथा बेस्ट क्वालिटी के भाव 1,100 से 1,150 रुपये, 7 एमएम की क्वालिटी की इलायची के भाव 770 से 810 रुपये और 6 एमएम की क्वालिटी इलायची के भाव 620 से 650 रुपये प्रति किलो रहे। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसूनी बारिष के कारण तुड़ाई अभी बंद है इसलिए केवल स्टॉक के माल आ रहे हैं। निर्यात मांग कम होने से भाव में अभी तेजी की संभावना नहीं है।......आर एस राणा

चीनी एक्सपोर्ट पर 25% ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव

आर एस राणा
चीनी की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार इसके एक्सपोर्ट को महंगा करने जा रही है। खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि चीनी के एक्सपोर्ट पर 25 फीसदी ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा है कि ग्लोबल मार्केट में चीनी की कीमतों में तेजी देखकर कारोबारी एक्सपोर्ट बढ़ा सकते हैं। ऐसे में घरेलू बाजार में कीमतों पर काबू के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया है। आपको बता दें अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का दाम पिछले करीब 3 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है।......आर एस राणा

मॉनसून

मॉनसून केरल और तमिलनाडु तक पहुंचने के बाद कर्नाटक में भी दस्तक दे चुका है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून को आगे बढ़ने के लिए माहौल अनुकूल है और ये तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले 24 घंटे में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के अलावा गोवा में भी बारिश की संभावना है। 12 जून तक मॉनसून के महाराष्ट्र पहुंचने की भी उम्मीद है।

08 June 2016

सौंफ के निर्यात में आई कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। सौंफ के निर्यात में पिछले सप्ताह गिरावट दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार पिछले सप्ताह देष से केवल 540 टन सौंफ का ही निर्यात हुआ है जबकि उसके पहले सप्ताह में 850 टन सौंफ का निर्यात हुआ है। इस दौरान सबसे ज्यादा सौंफ का आयात यूएसए, यूके और नेपाल तथा संयुक्त अरब अमीरात ने किया है।
गुजरात की उंझा मंडी में सौंफ की दैनिक आवक 8 से 9 हजार बोरी की हो रही है जबकि भाव 1,000 से 1,400 रुपये तथा बेस्ट क्वालिटी के 2,200 रुपये प्रति 20 किलो चल रहे हैं।......आर एस राणा

मई में मक्का निर्यात में हुई बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। मई महीने में देष से मक्का का निर्यात बढ़कर 18,557 टन का हो गया जबकि अप्रैल महीने में देष से केवल 6,346 टन मक्का का निर्यात हुआ था। मई महीने के दौरान औसतन 217.35 डॉलर प्रति टन की दर से मक्का के निर्यात सौदे हुए। इस दौान सबसे ज्यादा मक्का का निर्यात नेपाल, यमन और मलेषिया को हुआ है।....आर एस राणा

मई में दलहन आयात 35 फीसदी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक लिमिट लगाने का सीधा असर दलहन आयात पर देखा गया। स्टॉक लिमिट के कारण आयातकों ने आयात सौदे सीमित मात्रा में ही किए जिससे मई महीने में देष में दलहन का आयात घटकर 2.29 लाख टन का ही हुआ जबकि अप्रैल में आयात 3.51 लाख टन का हुआ है। इस दौरान जहां उड़द और मूंग के आयात में बढ़ोतरी देखी गई वहीं अरहर, पीली मटर, मसूर और चना का आयात पिछले महीने की तुलना में कम हुआ।.....आर एस राणा

मॉनसून

मॉनसून केरल और तमिलनाडु के बाद कर्नाटक में दस्तक दे चुका है। इसे आगे बढ़ने के लिए माहौल पुरी तरह से अनुकूल है और अगले 24 घंटे में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और गोवा में भारी बारिश का अनुमान है। चने की तेजी पर काबू के लिए एनसीडीईएक्स ने इसके खरीद सौदे पर 10 फीसदी का स्पेशल कैश मार्जिन लगा दिया है। कल से इसमें कुल 55 फीसदी मार्जिन देनी होगी।

केरल में मॉनसून की दस्तक

गर्मी और चिलचिलाती धूप से परेशान लोगों को आखिरकार बारिश से राहत मिलने वाली है। मॉनसून ने आज केरल में दस्तक दे दी है। केरल के कई इलाकों में आज झमाझम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक कल से केरल में मॉनसून और सक्रिय हो जाएगा। आम लोगों के साथ किसानों के लिए भी राहत की बरसात होगी।  यही नहीं, मौसम विभाग ने इस साल केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भारी बारिश का अनुमान दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक 48 घंटे में पूरे दक्षिण भारत में मॉनसून सक्रिय हो जाएगा। मॉनसून को आगे बढ़ने के लिए माहौल अनुकूल है और इस हफ्ते के अंत में मॉनसून महाराष्ट्र पहुंचेगा। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और सिक्किम सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी बारिश की उम्मीद जताई गई है।

मौसम अपडेट- आज की जानकारी

केरल में मानसून की फुहारें 9 जून को दस्तक दे सकती हैं. हालांकि केरल के कुछ हिस्सों में अभी भी बारिश हो  रही है. अगर आज के मौसम की बात करें…तो भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक केरल, उपहिमालयी पश्चिम बंगाल, तटीय कर्नाटक, सिक्किम के कुछ हिस्सों में बहुत तेज बारिश के आसार हैं. जबकि अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, रायलसीमा, आंतरिक कर्नाटक के भीतरी हिस्से और लक्षद्वीप के कुछेक हिस्सों में बारिश हो सकती है. तो वहीं, तेलंगाना में भी कुछेक जगरों पर तेज हवाओं के साथ बरसात होने की संभावना बनी हुई है. उधर दूसरी तरफ, पश्चिमी राजस्थान में कई जगहों पर लू चलने की संभावना है. जबकि पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछेक हिस्सों में भी लू चल सकती है. तो वहीं, हरियणा, चंडीगढ़, दिल्ली और गुजरात के भी कुछेक हिस्सों में लू चलने की संभावना भारत मौसम विज्ञान विभाग ने जताई है.

07 June 2016

कृषि बाजार में नहीं आएगा ऊंझा का जीरा

हालांकि केंद्र सरकार देश भर में राष्ट्रीय कृषि बाजार को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन गुजरात में एशिया की सबसे बड़ी जीरा मंडी- ऊंझा कृषि उपज विपणन समिति ने इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुडऩे से इनकार दिया है। मंडी ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उसकी इतनी क्षमता नहीं है कि वह इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रखने के लिए जीरे की भारी आवक को संभाल सके। मंडी के अधिकारियों ने कहा कि जब जीरे का सीजन होता है, उस समय रोजाना औसतन 1 लाख बोरी की आवक होती है। मंडी के लिए इतनी बड़ी मात्रा के नमूने लेना, प्रयोगशाला में परीक्षण और ग्रेडिंग करना संभव नहीं है। ऊंझा में जीरे के अलावा सौंफ, धनिये और ईसबगोल की भी बड़ी मात्रा में आवक होती है।
ऊंझा मंडी के चेयरमैन गौरांग पटेल ने कहा, 'गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से 5,000 से अधिक किसान अपनी जिंसों विशेष रूप से जीरे की बिक्री के लिए ऊंझा मंडी में आते हैं। सबसे अधिक आवक के सीजन में जीरे की दैनिक आवक 1 से 1.5 लाख बोरी तक पहुंच जाती है। फिलहाल इतनी बड़ी मात्रा के नमूने लेना, प्रयोगशाला में जांच करवाना और ग्रेडिंग करना हमारे लिए संभव नहीं है। इसलिए हमने राष्ट्रीय कृषि बाजार के तहत ऑनलाइन होने से इनकार कर दिया है।' दिलचस्प है कि पहले गुजरात सरकार ने देश में ऊंझा से पहला ऑनलाइन बाजार शुरू करने की योजना बनाई थी। लेकिन ऊंझा मंडी के अधिकारी पहले ही एक रिपोर्ट में गुजरात सरकार को यह बता चुके थे कि यह मंडी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुडऩे में सक्षम नहीं है। 
ऊंझा को वैश्विक स्तर पर जीरा कारोबार के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस समय मंडी में रोजाना जीरे की करीब 20,000 बोरियां आ रही हैं। ऊंझा मंडी में सौंफ, धनिये और इसबगोल की भी बड़ी मात्रा में आवक होती है। इस मंडी में हर साल विभिन्न जिंसों की 3 लाख टन से अधिक आवक होती है। हालांकि जब इस मंडी का बुनियादी ढांचा मजबूत हो जाएगा तो मंडी को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जाएगा। पटेल ने कहा, 'जब बुनियादी ढांचा इतना मजबूत हो जाएगा कि हम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं तो हम निकट भविष्य में निश्चित रूप से राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुडेंगे। ऐसा राष्ट्रीय कृषि बाजार के दूसरे चरण में हो सकता है। अगर हम बिना तैयार के जुड़े तो राष्ट्रीय कृषि बाजार का मकसद हासिल नहीं हो पाएगा।' ऊंझा मंडी के राष्ट्रीय कृषि बाजार से न जुडऩे की एक वजह कारोबारियों में कमीशन छिनने का डर भी है। मंडी के एक अधिकारी ने कहा, 'हमने राष्ट्रीय कृषि बाजार के तहत ऊंझा में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बारे में बातचीत की, लेकिन कारोबारी कमीशन छिनने के डर से इसके पक्ष में नहीं थे।' (BS Hindi)

मॉनसून

मॉनसून की राह देख रहे लोगों को अब कुछ वक्त और इंतजार करना पड़ेगा। मौसम विभाग के पिछले अनुमान से मॉनसून आ जाना चाहिए था, लेकिन नए अनुमान के मुताबिक अब मॉनसून 1 दिन की देरी से केरल में दस्तक देगा। हम आपको बता दें कि भारत में इस साल पहले ही मॉनसून के 10 दिनों की देरी से आने का एलान हुआ था और अब गर्मी से बेहाल लोगों को 1 दिन और रुकना पड़ेगा।

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाये, कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
09811470207

एमएसपी पर 229.27 लाख टन गेहूं की खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2016-17 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 229.27 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई जबकि पिछले रबी विपणन सीजन की समान अवधि में 274.89 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। खरीद केंद्रों पर अब गेहूं की आवक ना के बराबर हो रही है इसलिए खरीद 230 लाख टन से भी कम ही रहेगी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अनुसार चालू रबी में अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 106.44 लाख टन, हरियाणा की 67.21 लाख टन, उत्तर प्रदेष की 8.01 लाख टन, मध्य प्रदेष की 39.90 लाख टन और राजस्थान की 7.59 लाख टन है। इसके अलावा उत्तराखंड से 2,355 टन तथा चंडीगढ़ से 7,461 टन और गुजरात से 109 टन गेहूं की खरीद हुई है।.....आर एस राणा

सरकारी एजेंसियों ने 13 हजार टन दलहन का आयात किया

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से 13,000 हजार टन दलहन का आयात किया है जोकि भारतीय बदरगाह पर पहुंच चुकी है इसके अलावा 6,000 टन दलहन और आ रही है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार 13,000 टन दलहन में 11,000 टन अरहर है और 2,000 टन उड़द है। इसके अलावा सार्वजनिक कंपनियां अभी तक करीब 38,500 टन दलहन के आयात सौदे कर चुकी है तथा सरकारी एजेंसियों ने चालू खरीफ में 51,000 टन दालों की खरीद की थी जबकि रबी में भी करीब 60 हजार टन दालों की खरीद की है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में दलहन की कीमतों की समीक्षा बैठक के बाद उन्होनंे बताया कि राज्य सरकारों को दलहन की आपूर्ति रिजर्व स्टॉक से की जायेगी, तथा सभी राज्यों को इसके लिए पत्र लिखा गया है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना को दलहन की खेप जारी भी कर दी है। ......आर एस राणा

06 June 2016

जिंस वायदा के नए नियम जल्द

संशोधित जोखिम प्रबंधन नीति के तहत भारतीय प्रतिभूति एïवं विनिमय बोर्ड (सेबी) जिंस वायदा में संशोधित जोखिम प्रबंधन नीति के लिए नियम तैयार कर रहा है। इनमें तरलता से संबंधित शुरुआती मार्जिन, कॉन्संट्रेशन मार्जिन, सदस्यों के डिफॉल्ट से निपटने के तरीके शामिल हैं। नियामक के एक अधिकारी के मुताबिक सेबी जिंस डेरिवेटिव में मार्जिन इक्विटी डेरिवेटिव के समान कर रहा है।
 
जिंसों में ज्यादातर जिंसों पर शुरुआती मार्जिन लगभग एकसमान होता है। हालांकि बहुत सी जिंसों को तुरंत बेचकर नकदी में बदलना आसान नहीं है। किसी प्रतिकूल रिपोर्ट या असामान्य खरीद या बिक्री से कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है। इससे निपटने के लिए सेबी मार्जिन में बढ़ोतरी करेगा ताकि 2 दिन का जोखिम कवर किया जा सकेगा। इस समय एक दिन का जोखिम कवर किया जाता है। 
 
हालांकि इस कदम को अपने आप में अच्छा माना जा रहा है, लेकिन सेबी में जिस मसले पर विचार-विमर्श हो रहा है वह यह है कि दो प्रमुख जिंस एक्सचेंजों में तरलता का स्तर अलग-अलग है और अगर सभी एक्सचेंजों में तरलता से संबंधित मार्जिन एकसमान नहीं हुआ तो इससे लोग नियामकीय आर्बिट्राज का फायदा उठाएंगे।  उदाहरण के लिए एनसीडीईएक्स में खाद्य तेल खंड तरल (तुरंत बेचकर नकदी हासिल करना) है, जबकि एमसीएक्स पर धातु एवं ऊर्जा खंड तरल हैं। इसलिए एक जिंस को किसी एक्सचेंज पर आसानी से खरीद-फरोख्त की जा सकती है, जबकि दूसरे पर ऐसा करना संभव नहीं हो सकता है। कृषि जिंसों में सीजन के हिसाब से खरीद-फरोख्त होती है। सेबी अंतिम फैसला लेने से पहले इन मसलों पर विचार-विमर्श कर रहा है। सेबी जल्द कॉन्संट्रेशन मार्जिन पर भी जल्द ही कोई फैसला ले सकता है। यह भी जिंस को तुरंत बेचकर नकदी हासिल करने से ही संबंधित है। जब यह पाया जाता है कि कुछ जिंसों या अनुबंधों में अत्यधिक खरीद या बिकवाली हो रही है तो इन्हें फिर से बेचने या खरीदने में जोखिम पैदा होता है और इसलिए ऐसे मामलों में कॉन्संट्रेशन मार्जिन भी लगाया जा सकता है। जब जनवरी में एनसीडीईएक्स ने अरंडी अनुबंध स्थगित किया था तब उसने उन लोगों का कुछ गिरवी रखा था, जिन्हें बाद में डिफॉल्टर घोषित किया गया। हालांकि एक्सचेंज ने उन गिरवी रखी संपत्तियों का इस्तेमाल वास्तविक हेजर्स को भुगतान में किया जिन्हें अनुबंध स्थगित होने से नुकसान हुआ था। इसलिए अब सेबी डिफॉल्टरों से निपटने के तरीके के बारे में विचार कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि इन सभी मसलों पर बहुत जल्द फैसला लिया जाएगा। 
 
सेबी और नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) ने इस साल 27 जनवरी को अरंडी में वायदा कारोबार के स्थगन से कुछ सबक सीखे हैं। दोनों अपने स्तर पर जोखिम प्रबंधन एवं निगरानी तंत्र को मजूबत बना रहे हैं। सेबी ने कार्यदल और जोखिम प्रबंधन समिति का गठन किया है, जो सदस्यों के डिफॉल्ट को रोकने के तरीकों के बारे में विचार कर रहे हैं। वहीं एनसीडीईएक्स ने मंडियों के स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत किया है, जिसका वायदा कारोबार पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य और इस नियामक में जिंस डेरिवेटिव के प्रभारी राजीव कुमार अग्रवाल ने कहा, 'सेबी ने कई कदम उठाए हैं। नियामक ने इस मसले की प्रणालीगत जोखिम, एक्सचेंज के प्रशासन, बाजार समन्वय और निवेशकों की परेशानियों की दृष्टि से जांच की है। एक्सचेंजों में जोखिम प्रबंधन सहित व्यवस्थागत मसलों की जांच के लिए एक कार्यदल गठित किया गया था।' (BS Hindi)

मॉनसून

करीब एक हफ्ते की देरी से चल रहा मॉनसून अगले 24 घंटे में केरल पहुंच सकता है। केरल समेत दक्षिण भारत के कई इलाकों में पिछले दो दिनों से बारिश जारी है। मौसम विभाग ने इन इलाकों में कल से बारिश को और जोर पकड़ने की उम्मीद जताई है। इस बीच अमेरिकी वेदर एजेंसी ने केरल के अलावा जल्द ही गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश की आशंका जताई है। अमेरिकी मौसम विभाग का मानना है कि 10 जून से 12 जून के बीच गोवा और मुंबई के अलावा दक्षिणी गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

05 June 2016

मई में डीओसी निर्यात 94 फीसदी घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। विष्व बाजार में दाम कम होने के कारण भारत से डीओसी निर्यात में भारी गिरावट बनी हुई है। मई महीने मंे देष से डीओसी के निर्यात में 94 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल     7,737 टन का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल मई महीने में 1,21,339 टन डीओसी का निर्यात हुआ था।
साल्वेंट एक्ट्रेक्षन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित वर्ष 2016-17 के पहले दो महीनों अप्रैल मई में देष से केवल 97,779 टन डीओसी का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों में 303,977 टन डीओसी का निर्यात हुआ था। इस दौरान सोया डीओसी का निर्यात 2,457 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित वर्ष के पहले दो महीनों में 32,063 टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ था। सरसों डीओसी का निर्यात चालू वित वर्ष के पहले दो महीनों में 17,253 टन का हुआ था जबकि पिछले वित वर्ष की समान अवधि में 1,04,586 टन सरसों डीओसी का निर्यात हुआ था। राइसब्रान के साथ केस्टर डीओसी के निर्यात में भी गिरावट आई है।
सोया डीओसी के भाव भारतीय बंदरगाह पर 497 डॉलर प्रति टन है जबकि मार्च महीने में इसके भाव 480 डॉलर प्रति टन थे। इसी तरह से सरसों डीओसी के भाव इस दौरान 247 डॉलर से बढ़कर 272 डॉलर प्रति टन हो गए।.........आर एस राणा

03 June 2016

कपास की फसल पर धान पड़ रहा भारी

धान और गेहूं के अलावा दूसरी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर निश्चित खरीद की गारंटी या किसी तरह का प्रोत्साहन न मिलने की वजह से पंजाब में फसलों में विविधता नहीं दिख रही है। इसके बजाय एक व्यापक क्षेत्र में गर्मी के दिनों में ज्यादा पानी वाली फसल धान और सर्दियों में गेहूं की खेती का चलन है। सरकार केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही खरीदारी करती है ऐसे में ये दो फसलें राज्य के एक बड़े क्षेत्र में क्रमश: खरीफ और रबी फसल में शामिल है जबकि अन्य फसलें लगभग हाशिये पर हैं। राज्य कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों से भी यह बात स्पष्ट हो जाती है। बासमती सहित धान के तहत शामिल क्षेत्र वर्ष 2010-11 में 28.30 लाख हेक्टेयर था जो सरकार के विविधीकरण के दावे के बावजूद वर्ष 2014-15 में 28.94 लाख हेक्टेयर के स्तर पर पहुंच गया।
मालवा में कभी कपास एक प्रमुख फसल हुआ करती थी लेकिन इसका रकबा 2010-11 के 48,4000 हेक्टेयर से कम होकर 420,000 हेक्टेयर रह गया और इस साल भी इसमें कमी आई और यह करीब आधा रह गया। मक्के की फसल का भी यही हाल रहा और पंजाब में इसका रकबा 2010-11 के 134,000 हेक्टेयर से कम होकर महज 126,000 हेक्टेयर क्षेत्र तक सिमट गया। रबी फसल में गेहूं सबसे बड़ी फसल है जिसे 2010-11 में 3510 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाया गया था लेकिन यह 2014-15 में 3514 लाख हेक्टेयर के स्तर तक चला गया। कपास की फसल में कमी आने की वजह से इस साल धान और बड़े क्षेत्र में उगाया जाएगा। 
 भारतीय किसान यूनियन एकता उग्रहण के महासचिव सुखदेव सिंह कोकड़ी कलां कहते हैं, 'किसान सभी तरह की फसलें उगाने को तैयार हैं लेकिन वे चाहते हैं कि उनकी फसलें निश्चित तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ खरीदी जाएं। उन्होंने सूर्यमुखी, बागवानी, सब्जियों और कई दूसरी फसलों के साथ प्रयोग किया है ताकि फसलों में विविधता आए लेकिन उन्हें असफलता मिली।' वह कहते हैं, 'फसलों की विविधता को खत्म करने के लिए हरित क्रांति भी जिम्मेदार है। इससे पहले सभी किसान अपने खेतों में तीन से चार फसलें उगाया करते थे।' गुरुवार को फसल विविधीकरण पर सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक राज्य में इस कार्यक्रम पर 2013-14 से ही अमल किया जा रहा है और इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैकल्पिक फसलों की उत्पादन तकनीक को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में पहल के तहत किसानों के खेतों में मक्का, कपास, चिनार और यूकलिप्टस आदि दिखाए जा रहे हैं। वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता की पहल करते हुए सीड ड्रिल, बुवाई यंत्र, स्प्रे पंप, थ्रेशर, और फसल की कटाई के बाद वाली मशीन आदि भी मुहैया कराई जा रही हैं।