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30 September 2016

ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने चौथे सप्ताह 19 से 25 सितंबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों ग्वार गम पाउडर, ग्वार स्पलिट और ग्वार मील के निर्यात में कमी आई है। साथ विष्व बाजार में इनकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
सितंबर के चौथे सप्ताह में 6,820 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 8,791 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था। चौथे सप्ताह में ग्वार गम पाउडर का निर्यात 5,007 टन का हुआ है तथा इसका निर्यात औसतन 1,350 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है जबकि इसके पिछले सप्ताह में 5,253 टन ग्वार गम पाउडर का निर्यात हुआ था।
19 से 25 सितंबर के दौरान ग्वार स्पलिट का निर्यात केवल 280 टन का ही हुआ है जबकि इसके पहले सप्ताह में 1,184 टन का हुआ था। चौथे सप्ताह में जहां ग्वार स्पलिट का निर्यात औसतन 968.06 डॉलर प्रति टन की दर से हुआ है वहीं, तीसरे सप्ताह में इसके निर्यात सौदे 983.4 डॉलर प्रति टन की दर से हुए थे। ग्वार मील का निर्यात चौथे सप्ताह में घटकर 1,533 टन का हुआ है जिसका निर्यात औसतन 556.69 डॉलर प्रति टन की से हुआ है।
ग्वार सीड की नई फसल की आवक षुरु हो चुकी है, गुरुवार को उत्पादक मंडियों इसकी दैनिक आवक करीब 25,000 बोरी की हुई। प्रमुख उत्पादक राज्यों राजस्थान और हरियाणा में ग्वार उत्पादक क्षेत्रों में बारिष नहीं होने से उत्पादन अनुमान में कमी आने की आषंका है। पहले चालू सीजन में ग्वार सीड का उत्पादन अनुमान सवा करोड़ बोरी का लगाया जा रहा था जोकि अब घटाकर 75 से 80 लाख बोरी ही होने का अनुमान है। हालांकि ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग कम है, साथ ग्वार सीड का बकाया स्टॉक भी मंडियों में खपत से ज्यादा है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता से भाव में तेजी आने की संभावना है।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात घटकर 1,30,922 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,42,629 टन का हुआ था। मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 40.63 फीसदी घटकर केवल 988.37 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,664.87 करोड़ रुपये का हुआ था।............आर एस राणा

चावल निर्यात में हुई बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त में बासमती के साथ ही गैर-बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 17,75,684 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 16,78,797 टन का हुआ था।
गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान बढ़कर 30,08,238 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 29,83,915 टन का हुआ था।
हालांकि मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बासमती चावल में 5.81 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान देष से 9,368.23 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 9,945.81 करोड़ रुपये का हुआ था। गैर-बासमती चावल के निर्यात में इस दौरान मूल्य के हिसाब से 5.94 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल 7,394.67 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6,979.80 करोडऋ रुपये का हुआ था।..........आर एस राणा

इस बार सामान्य से 3 फीसदी कम हुई बारिश

आज मॉनसून सीजन का अंतिम दिन है और इस पूरे सीजन के दौरान देश में सामान्य से 3 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि करीब 80 फीसदी इलाकों में सामान्य या इससे ज्यादा बारिश हुई है। लेकिन बारिश की सबसे ज्यादा कमी पंजाब, हरियाणा और केरल में रही है। इन राज्यों में 25-35 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं राजस्थान में इस साल सबसे ज्यादा बारिश रिकार्ड की गई है।  मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी अच्छी बारिश हुई है। पूरे देश में बारिश की स्थिति के बारे में बात करें तो देश के 64 फीसदी इलाकों में इस साल सामान्य बारिश हुई है। जबकि 17 फीसदी इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। वहीं 19 फीसदी ऐसे इलाके हैं जहां सामान्य से कम बारिश हुई है।

29 September 2016

सरकार 1.70 लाख टन और दलहन का आयात करेगी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बफर स्टॉक के लिए 1.70 लाख टन और दलहन का आयात करेगी। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव हेम पांडे ने बताया कि 80 हजार मसूर और 90 हजार अरहर का आयात सार्वजनिक कपंनियों के माध्यम से किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि बफर स्टॉक के लिए सार्वजनिक कंपनियों अभी तक 1.81 लाख टन दलहन के आयात सौदे कर चुकी हैं जिसमें से 36,000 टन दलहन भारत पहुंच भी चुकी है। इसके अलावा सार्वजनिक कंपनियां अभी तक 1.20 लाख टन दलहन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कर चुकी हैं।
चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 में एमएसपी पर खरीद के लिए प्रमुख उत्पादक राज्यों में 417 खरीद केंद्र खोले जायेंगे, तथा आवष्यकता पड़ी तो इसमें और बढ़ोतरी की जायेगी। केंद्र सरकार ने 20 लाख टन दलहन का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया है, इसमें 10 लाख टन दलहन की खरीद घरेलू मंडियों से की जायेगी, जबकि 10 लाख टन दलहन का आयात किया जायेगा।.........आर एस राणा

कमोडिटी बाजार

जुलाई सितंबर तिमाही का आज अंतिम कारोबारी दिन है और इस तिमाही में बेस मेटल ने शानदार रिटर्न दिया है। खास करके लेड में सबसे ज्यादा 16 फीसदी की तेजी आई है। वहीं जिंक और निकेल भी 11 फीसदी की बढ़त बनाने में कामयाब रहे। हालांकि कॉपर और एल्युमीनियम सपाट रहे। वहीं पूरे तिमाही के दौरान सोने में करीब 1 फीसदी की गिरावट रही। जबकि नैचुरल गैस सपाट रहा।

इस बीच कल की भारी तेजी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में गिरावट आई है। ब्रेंट का दाम 49 डॉलर के नीचे आ गया है। हालांकि इस हफ़्ते के दौरान क्रूड में करीब 7 फीसदी की तेजी आ चुकी है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है और 1 डॉलर की कीमत 66.65 रुपये के पास आ गई है।

मॉनसून

आज मॉनसून सीजन का अंतिम दिन है और इस पूरे सीजन के दौरान देश में सामान्य से 3 फीसदी कम बारिश हुई है। बारिश की सबसे ज्यादा कमी पंजाब, हरियारणा और केरल में रही है। इन राज्यों में 25 से 35 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि राजस्थान में इस साल सबसे ज्यादा बारिश हुई है। वहीं मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी अच्छी बारिश हुई है।

क्रूड पर ओपेक डील, अंतिम फैसला होना मुश्किल!

ओपेक देशों के बीच भले ही कच्चे तेल के उत्पादन में कमी का समझौता हुआ हो लेकिन नवंबर में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम फैसला होना काफी मुश्किल लगता है। जानकारों के मुताबिक तेल उत्पादन घटाने का ओपेक का फैसला लागू होना मुश्किल है। ईरान, लीबिया, नाइजीरिया पहले ही समझौते से बाहर हैं। वहीं तेल उत्पादन घटाने से ओपेक को नुकसान होगा ओपेक के पास दुनिया के कुल उत्पादन का सिर्फ 34 फीसदी है। तेल के दाम बढ़ने से गैर-ओपेक देशों जैसे अमेरिका, ब्राजील, कनाडा को ज्यादा फायदा होगा। शेल क्रूड का उत्पादन इन देशों का मार्केट शेयर बढ़ाएगा। अमेरिका पहले ही क्रूड का एक्सपोर्ट शुरू कर चुका है।
बता दें कि ओपेक की बैठक में पास मसौदे के तहत सऊदी अरब करीब 3.5 लाख बैरल क्रूड का प्रोडक्शन घटाएगा और प्रति दिन 3.25 करोड़ बैरल क्रूड प्रोडक्शन की योजना है। जबकि ईरान, नाइजीरिया और लीबिया को कटौती से छूट दी गई है। हालांकि ये सप्लाई बढ़ा नहीं सकेंगे। आपको बता दें दुनिया में कच्चे तेल के कुल उत्पादन में ओपेक की हिस्सेदारी 34 फीसदी की है। हालांकि अभी उत्पादन में कटौती को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बारे में 30 नवंबर को विएना में ओपेक की बैठक पर फैसला होगा।

कमोडिटी ऑप्शन ट्रेडिंग को मंजूरी

घरेलू कमोडिटी बाजार नए दौर में जा रहा है। सेबी-एफएमसी विलय के ठीक 1 साल के बाद मार्केट रेग्यूलेटर ने कमोडिटी में ऑप्शन ट्रेडिंग की इजाजत दे दी है। कमोडिटी मार्केट को लेकर सेबी ने बड़े फैसले किए है। इस बारे में गाइडलाइंस जल्द जारी हो सकती है। एक्सचेंज ऑप्शंस ट्रेडिंग की अर्जी दे सकेंगे। ऑप्शंस ट्रेडिंग के पहले एक्सेंज के अर्जी देनी होगी। कॉन्ट्रैक्ट्स की पूरी जानकारी बाद में देनी होगी। सेबी ने कहा है कि ऑप्शंस की पूरी गाइडलाइंस जल्द जारी की जाएगी। कमोडिटी डेरिवेटिव एडवाइजरी कमिटी के सुझाव पर ये फैसला लिया गया है। बता दें कि अब तक सिर्फ कमोडिटी फ्यूचर्स में ट्रेडिंग की सुविधा थी।
इसके अलावा सेबी ने 6 नई कमोडिटी में वायदा वायदा शुरू करने की भी मंजूरी दी है जिसमें हीरा, चाय, अंडा, कोकोआ, पिग आयरन और पीतल शामिल हैं। इस तरह अब वायदा की लिस्ट में कुल 91 कमोडिटी शामिल हो गई हैं।
कमोडिटी के कारोबार में कमोडिटी एक्सचेंजों के मार्केट शेयर की बात करें तो 2015-2016 में 2.9 लाख करोड़ रुपये के कमोडिटी बाजार में एमसीएक्स की हिस्सेदारी 84.5 फीसदी, एनसीडीईएक्स की हिस्सेदार 15 फीसदी और एनएमसीई की हिस्सेदारी 0.5 फीसदी रही है। 

28 September 2016

चीनी का उत्पादन 234 लाख टन होने का अनुमान-इस्मा

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से षुरु होने वाले नए पेराई सीजन 2016-17 में चीनी का उत्पादन 233.7 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 251 लाख टन से कम होगा। हालांकि नए पेराई सीजन के समय बकाया स्टॉक 75 लाख टन का बचा हुआ है। अतः कुल उपलब्धता देष की सालाना खपत 265 लाख टन से ज्यादा ही होगी।
इंडियन षुगर मिल्स एसोसिएषन (इस्मा) के अनुसार सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 25 फीसदी कम होकर 62.70 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन 2015-16 में 84.11 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से कर्नाटका में भी चालू पेराई सीजन में उत्पादन में 22 फीसदी की कमी आकर कुल उत्पादन 31.90 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 40.70 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
उत्तर प्रदेष में बुवाई में हुई बढ़ोतरी के साथ ही अनुकूल मौसम से पेराई सीजन 2016-17 में चीनी का उत्पादन 12 फीसदी बढ़कर 76.65 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में 68.40 लाख टन का उत्पादन हुआ था। तमिलनाडु में भी चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन में 12 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल उत्पादन 15.60 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 13.90 लाख टन का उत्पादन हुआ था।
अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेष में 8.11 लाख टन, बिहार में 5.79 लाख टन, पंजाब में 6.91 लाख टन, हरियाणा में 5.39 लाख टन, मध्य प्रदेष में 3.83 लाख टन, उड़ीसा में 0.62 लाख टन, उत्तरांचल में 2.73 लाख टन तथा अन्य राज्यों में 0.15 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है।............आर एस राणा

कमोडिटी बाजार

ओपेक पिछले 8 साल में पहली बार कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती पर सहमत हुआ है। इस फैसले के बाद कल कच्चे तेल का दाम करीब 5 फीसदी उछल गया था। ब्रेंट का दाम 48 डॉलर के पार चला गया है। मसौदे के तहत सऊदी अरब करीब 3.5 लाख बैरल क्रूड का प्रोडक्शन घटाएगा और प्रति दिन 3.25 करोड़ बैरल क्रूड प्रोडक्शन की योजना है। जबकि ईरान, नाइजीरिया और लीबिया को कटौती से छूट दी गई है। हालांकि ये सप्लाई बढ़ा नहीं सकेंगे। आपको बता दें दुनिया में कच्चे तेल के कुल उत्पादन में ओपेक की हिस्सेदारी 40 फीसदी की है। हालांकि अभी उत्पादन में कटौती को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बारे में 30 नवंबर को विएना में ओपेक की बैठक पर फैसला होगा।
दूसरी ओर एलएमई पर लेड का दाम पिछले 16 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। निकेल में भी तेजी है और कॉपर भी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। वहीं कल की गिरावट के बाद सोना संभलता दिखा है। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी आई है।

27 September 2016

दलहन की खरीद के लिए 200 केंद्र बनायेगी सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार खरीफ में दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए 200 खरीद केंद्र बनायेगी। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में आज हुई बैठक में दलहन की खरीद के लिए नेफैड के साथ भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) तथा एसएफको को भी जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक कंपनिया सीधे किसानों से एमएसपी पर दलहन की खरीद करेंगी। अक्टूबर-नवंबर में उड़द की आवक बढ़ेगी, इसकी खरीद के लिए प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों कर्नाटका, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेष तथा राजस्थान में खरीद केंद्र खोले जायेंगे।......आर एस राणा

एमसीएक्स पर ट्रेडिंग हुई महंगी

एमसीएक्स पर ट्रेडिंग महंगी हो गई है। एक्सचेंज ने ट्रांजैक्शन चार्ज करीब 25 फीसदी तक बढ़ा दिया है। अब 350 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर पर प्रति लाख रुपये 60 पैसे ट्रांजैक्शन चार्ज देना होगा। पहले ये 2.10 रुपये था। वहीं 350 करोड़ रुपये के ऊपर के टर्नओवर पर प्रति लाख 1.75 रुपये ट्रांजैक्शन चार्ज देना होगा जो पहले 1.40 रुपये था।

स्टॉक लिमिट के खिलाफ चीनी मिलें कोर्ट की षरण में

आर एस राणा
नई दिल्ली। स्टॉक लिमिट के खिलाफ महाराष्ट्र की चीनी मिलें हाईकोर्ट की ष्षरण में चली गई हैं। पहले से ही केंद्र सरकार के स्टॉक लिमिट का विरोध कर रही यह मिलें सितंबर अंत तक 37 फीसदी स्टॉक करने के सरकारी निर्देष के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में चली गई हैं। हालांकि कोर्ट के मामले की सुनवाई की अभी तक कोई तिथि तय नहीं की है। चीनी मिलों का कहना है कि 30 सितंबर तक इतनी चीनी नहीं बेच सकती जिससे सरकार की मंषा पूरी हो सके।
महाराष्ट्र में कई चीनी मिलें ऐसी हैं जिनके पास 37 फीसदी से बहुत ज्यादा स्टॉक है। मिलों ने मांग की है कि या तो इस आदेष को समाप्त किया जाये या फिर चीनी मिलों को चीनी बेचने के लिए 3 से 4 महीने का समय और दिया जाए। मिलों ने कहा है कि मौजूदा स्टॉक लिमिट के तहत चीनी बेचने से उन्हें बड़ा नुकसान उठाना होगा।......आर एस राणा

26 September 2016

धान खरीद के लिए 26,000 करोड़ रुपये की नकद साख सीमा मंजूर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चुनाव की तैयारी कर रहे पंजाब में धान खरीदारी के लिए 26,000 करोड़ रुपये की नकद उधारी सीमा (सीसीएल) को मंजूरी दी है जिसे शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। इस गठबंधन को अनाज खरीदने के लिए कोष जारी करने के संदर्भ में अतीत में संघर्ष का सामना करना पड़ा है। पंजाब मंडी बोर्ड के उप-चेयरमैन रविंदर सिंह चीमा ने कहा, 'आरबीआई ने पंजाब से धान खरीदारी के लिए 26,000 करोड़ रुपये की सीसीएल को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है।' चीमा ने कहा, 'अब राज्य सरकार धान खरीदारी के लिए कोष जारी करवाने के लिए आरबीआई की स्वीकृति पत्र भेजकर केंद्र से भी मंजूरी की संभावना तलाशेगी।'
 पंजाब में धान खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होगी और इस राज्य से 150 लाख टन धान की संभावित खरीद का अनुमान है। सीसीएल के लिए आरबीआई की मंजूरी को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि शिरोमणि अकाली-भाजपा गठबंधन विधानसभा चुनाव को देखते हुए सीसीएल जारी होने में किसी तरह का विलंब पसंद नहीं करेगा। शिरोमणि अकाली-भाजपा गठबंधन को अनाज के पारंपरिक भंडारों की वैल्यू और गेहूं एवं धान खरीदारी के लिए सीसीएल के जरिये खर्च की गई रकम के बीच असमानता की वजह से कई अवसरों पर सीसीएल जारी किए जाने में विलंब का सामना करना पड़ा। 
कड़ी आलोचनाओं के बाद शिरोमणि-भाजपा गठबंधन ने तब अनाज खरीदारी के संबंध में कोष जारी कराने के लिए नरेंद्र मोदी-नीत केंद्र सरकार से अनुरोध किया था। पिछले रबी विपणन सत्र में, जब सीसीएल में विलंब हुआ था तो कांग्रेस ने प्रकाश सिंह बादल-नियंत्रित सरकार पर 12,000 करोड़ रुपये के 'अनाज घोटाले' से जुड़े होने का आरोप लगाया था।  चीमा ने तत्कालीन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पर पंजाब के लिए सीसीएल जारी करने में अनावश्यक अवरोध पैदा करने का आरोप लगाया था। 18 सितंबर को जालंधर की यात्रा पर आए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सीसीएल को लेकर पैदा हुए विवाद को 'ऐतिहासिक समस्या' करार दिया था और कहा था कि राज्य और केंद्र, दोनों इस समस्या को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।

कमोडिटी बाजार

अमेरिका में आज कंज्यूमर कॉन्फिडेंस के आंकड़े जारी होंगे और इससे पहले सोने की चाल छोटे दायरे में सिमट गई है। 2 दिन से सोना 1335 डॉलर के आसपास ही कारोबार कर रहा है। दरअसल आज से अमेरिका में ट्रंप और हिलेरी क्लिंटन के बीच बहस शुरू होने वाली है, जिसपर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में चांदी भी कमजोरी के साथ 19.5 डॉलर के नीचे कारोबार कर रही है। एमसीएक्स पर सोना 0.4 फीसदी की कमजोरी के साथ 31190 रुपये पर कारोबार कर रहा है। वहीं चांदी करीब 0.4 फीसदी टूटकर 46330 रुपये के निचले स्तरों पर आ गई है।  
बेस मेटल्स में आज एलएमई पर निकेल में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई है और ये 1 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। वहीं एमसीएक्स पर कॉपर भी 0.6 फीसदी की कमजोरी के साथ 325 रुपये के नीचे कारोबार कर रहा है। लेकिन बाजार की नजर अल्जीरिया में चल रही इंटरनेशनल एनर्जी फोरम की बैठक पर है, जहां कच्चे तेल के प्रोडक्शन को लेकर ओपेक और नॉन ओपेक के बीच कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि इस बीच आज जारी होने वाले अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की इन्वेंट्री रिपोर्ट से पहले कच्चा तेल दबाव में आ गया है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल करीब 0.7 फीसदी फिसलकर 3062 रुपये के स्तर पर आ गया है। वहीं ग्लोबल मार्केट में नैचुरल गैस करीब 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती आई है और डॉलर की कीमत 66.5 रुपये के नीचे आ गई है।


त्यौहारी मांग से कालीमिर्च की कीमतों में हल्का सुधार संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में कालीमिर्च की पैदावार कम जरुर हुई है लेकिन निर्यात मांग कम होने के साथ ही पुराना स्टॉक ज्यादा बचा हुआ है इसलिए भाव में बड़ी तेजी की संभावना तो नहीं है लेकिन त्यौहारी मांग से आगे भाव में थोड़ा सुधार जरुर आ सकता है। कोची में अनर्गाबल्ड के भाव 68,600 रुपये और ग्रेड वन के भाव 71,600 रुपये तथा बोल्ड के भाव 74,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
चालू सीजन में उत्पादक राज्यों मंे प्रतिकूल मौसम से कालीमिर्च की पैदावार में कमी आने का अनुमान है। जानकारों के अनुसार देष में कालीमिर्च की पैदावार घटकर 50 हजार टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 65 हजार टन की हुई थी।
उधर श्रीलंका में कालीमिर्च की पैदावार 19,000 टन होने की संभावना है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 24,000 टन की हुई थी।
आईपीसी के अनुसार विष्व में कालीमिर्च की कुल पैदावार 2016-17 में घटकर 4.15 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 4.63 लाख टन की हुई थी।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले तीन महीनों में कालीमिर्च का निर्यात घटकर 4,300 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 10,350 टन का हुआ था। विष्व बाजार में भारतीय कालीमिर्च का भाव 8.82 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले महीने इसका भाव 9.04 डॉलर प्रति किलो था..........आर एस राणा

हल्दी की फसल को अभी नुकसान नहीं

आर एस राणा
नई दिल्ली। तेलंगाना, आंध्रप्रदेष और महाराष्ट्र में हाल में हुई बारिष से हल्दी की फसल को अभी नुकसान नहीं है, स्टॉकिस्ट नुकसान बताकर भाव तेज करना चाहते हैं। इसलिए भाव में तेजी आये तो स्टॉक बेचकर ही चलना चाहिए, क्योंकि मौसम साफ होते ही भाव में गिरावट आयेगी। वैसे भी हल्दी का बकाया स्टॉक उत्पादक मंडियों में ज्यादा हुआ है।........आर एस राणा

सभी एक्सचेंज अब स्टॉक एक्सचेंज माने जाएंगे

अलग से कमोडिटी एक्सचेंज का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। 29 सितंबर को सेबी यूनिफाइड एक्सचेंज लाइसेंस शुरू करने जा रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि कमोडिटी और शेयर बाजार के लिए अलग-अलग एक्सचेंज नहीं होंगे। एक ही प्लैटफॉर्म पर कमोडिटी और शेयर ट्रेडिंग संभव होगा। सिक्योरिटीज एक्ट के लागू होने के बाद ये संभव हुआ है।
बीएसई और एनएसई जैसे इक्विटी एक्सचेंज भी कमोडिटी में ट्रेडिंग करा सकेंगे। वहीं एनसीडीईएक्स, एमसीएक्स और एनएमसीई जैसे कमोडिटी एक्सचेंज भी शेयर में ट्रेडिंग करा सकेंगे। एफएमसी और सेबी के मर्जर के ठीक एक साल बाद मार्केट रेगुलेटर ये कदम उठाने जा रहा है।

25 September 2016

कमोडिटी मार्केट

अल्जीरिया में आज से इंटरनेशनल एनर्जी फोरम शुरू होने जा रहा है, जहां ओपेक के अलावा दुनिया भर के प्रमुख तेल उत्पादक देश जुटेंगे। माना ये जा रहा है कि इस बैठक में ओपेक और गैर ओपेक देशों के बीच कच्चे तेल के प्रोडक्शन में कटौती या किसी स्तर पर स्थिर रखने पर भी बात हो सकती है। इसमें अल्जीरिया और वेनेजुएला इस बैठक को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं। ऐसे में पिछले हफ्ते की तेज गिरावट के बाद आज ग्लोबल मार्केट में क्रूड का दाम करीब 1 फीसदी उछल गया है और ब्रेंट का दाम दोबारा 46 डॉलर के पार चला गया है। हालांकि ओपेक का सबसे बड़ा सदस्य सऊदी अरब इस तरह के प्रस्ताव पर सहमति की संभावना से इनकार किया है। 
इस बीच डॉलर में आई गिरावट से सोने पर ऊपरी स्तर से दबाव दिख रहा है। ग्लोबल मार्केट में चांदी का दाम भी करीब 0.5 फीसदी गिर गया है। लेकिन सप्लाई की किल्लत की आशंका से निकेल का दाम एलएमई पर करीब 1 फीसदी बढ़ गया है। पिछले हफ़्ते निकेल में करीब 6 फीसदी की तेजी आई थी। सरकार ने गेहूं और खाने के तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी है। 

24 September 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे

---------------------खरीफ फसलों में अरहर,  किन भाव पर स्टॉक करने से मिलेगा फायदा, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, केस्टर सीड और ग्वार सीड का भविष्य कैसा रहेगा, इनके निर्यात-आयात की क्या हैं संभावनाएं, इन सभी की स्टीक जानकारी कें लिए हमसे जुड़े। अगले सप्ताह इनकी विस्तृत खबरें मिलेंगी, केवल ई-मेल के माध्यम से।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........
आर एस राणा
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गेहूं के साथ खाद्य तेलों पर भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम की

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गेहूं पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है, साथ ही क्रुड पॉम तेल पर इम्पोर्ट डयूटी को 12 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी और  रिफाइंड तेल के आयात इम्पोर्ट ड्यूटी को 20 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया, यह फैसला बुधवार को यानि 20 सितंबर 2016 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया था। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के अनुसार के अनुसार गेहूं पर इम्पोर्ट ड्यूटी की अवधि 29 फीसदी 2017 तक जबकि खाद्य तेलों पर इम्पोर्ट डयूटी की अवधि अगले आदेष तक है।
खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन और मूंगफली की आवक अब मंडियों में बनेगी, चालू खरीफ में इनकी पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। लेकिन जिस तरह से सरकार ने स्टॉक लिमिट की अवधि को तो बढ़ाया ही है, साथ ही इम्पोर्ट ड्यूटी भी कम कर दी, ऐसे में सोयाबीन और मूंगफली में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। सोयाबीन के भाव अक्टूबर महीने में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि (एमएसपी) 2,775 रुपये प्रति क्विंटल से भी नीचे जाने की आषंका है। इसी तरह से मूंगफली के भाव भी 4,220 रुपये प्रति क्विंटल जोकि चालू खरीफ सीजन 2016-17 के लिए मूंगफली का एमएसपी तय किया है उसे नीचे चले जाए तो कोई ताजूब नहीं होना चाहिए।,..............आर एस राणा

नाफेड बफर स्टॉक के लिए सात लाख टन दलहन की खरीद करेगी

नई दिल्ली। कृषि सहकारिता संस्था नाफेड सरकार की ओर से बफर स्टॉक तैयार करने के लिए फसल वर्ष 2016-17 के खरीफ और रबी सत्रों के दौरान सात लाख टन दलहनों की खरीद करने का लक्ष्य कर रही है। दलहन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जररत पडऩे पर बाजार में हस्तक्षेप करने के लिहाज से सरकार घरेलू खरीद और आयात के जरिए 20 लाख टन दलहन का बफर स्टॉक स्थापित कर रही है। अपने वार्षिक आम सभा की बैठक में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन महासंघ लिमिटेड नाफेड के अध्यक्ष वी आर पटेल ने कहा कि सरकार ने उससे बफर स्टॉक के लिए दलहनों की खरीद करने को कहा है।

23 September 2016

गेहूं पर आयात षुल्क में की कटौती

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने त्यौहारी सीजन में गेहूं की कीमतों को काबू में रखने के लिए आयात षुल्क में कटौती कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार गेहूं पर आयात ष्षुल्क अब 25 फीसदी के बजाए 10 फीसदी लगेगा। इसका असर घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों पर पड़ेगा, क्योंकि आयातित गेहूं की आवक ज्यादा होगी, जिससे दक्षिण भारत की गेहूं की मांग उत्तर भारत से कम हो जायेगी।......आर एस राणा

आंध्रप्रदेष और तेलंगाना में कपास की बुवाई कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। आंध्रप्रदेष के साथ ही तेलंगाना में चालू खरीफ में कपास की बुवाई में कमी आई है। आंध्रप्रदेष कृषि निदेषालय के अनुसार राज्य में चालू खरीफ में कपास की बुवाई केवल 4.35 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 6.12 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी।
उधर तेलंगाना में चालू खरीफ में कपास की बुवाई 1.24 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.69 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी।
मौसम खराब होने से कपास की कीमतांें में अभी तेजी बनी हुई है, लेकिन जैसे ही मौसम साफ होगा आवक बढ़ जायेगी, और कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है। माना जा रहा है कि अक्टूबर महीने में कपास की कीमतों में अच्छी गिरावट आयेगी, साथ ही खल और बिनौला के भाव भी कम होंगे।.....आर एस राणा

हरियाणा में 192 मंडियां व खरीद-केन्द्र शुरू

हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री श्री कर्णदेव काम्बोज ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश भर में बाजरा खरीद के लिए 26 तथा धान खरीद के लिए 192 मंडियां व खरीद-केन्द्र शुरू किये गये हैं। इनमें खरीद प्रक्रिया एक अक्टूबर से प्रारम्भ की जाएगी।
खाद्य मंत्री ने बताया कि इस सीजन के दौरान विभिन्न एजेंसियों द्वारा खरीदी जाने वाली धान का अनुपात भी तय किया है जिसके तहत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा कुल आवक का 33 प्रतिशत तथा हैफेड द्वारा भी 33 प्रतिशत धान की खरीद की जाएगी। इसी प्रकार भारतीय खाद्य निगम 12 फीसदी, हरियाणा एग्रो 10 फीसदी तथा हरियाणा वेयर हाऊस कॉरपोरेशन द्वारा 12 प्रतिशत आवक धान की खरीद की जाएगी।
श्री काम्बोज ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान इस बार अम्बाला में 14 मंडियां एवं केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जबकि फरीदाबाद में 3 मंडियां व केन्द्र बनाये गये हैं। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार फतेहाबाद में 38, गुरूग्राम में एक, हिसार में 8, झज्जर में 2, जीन्द में 13, कैथल में 21, करनाल में 15, कुरूक्षेत्र में 18, मेवात में 2, पंचकूला में 3, पानीपत में 8, पलवल में 5, रोहतक में एक, रेवाड़ी में एक, सिरसा में 18, सोनीपत में 6, यमुनानगर में 13 तथा भिवानी में 2 मंडियां व केन्द्र बनाये गये हैं।
खाद्य मंत्री ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम के मानकों के अनुसार ग्रेड-ए धान की समर्थन मूल्य 1510 रुपये तथा सामान्य श्रेणी की धान का 1470 रुपये प्रति किवंटल तय किया गया है। इसी प्रकार, बाजरे का समर्थन मूल्य 1330 रुपये, ज्वार का समर्थन मूल्य 1625 रुपये तथा मक्का का 1365 रुपये प्रति किवंटल तय किया गया है

लालमिर्च और हल्दी की बुवाई ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अनुकूल मौसम जहां लालमिर्च और हल्दी की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मौसम अनुकूल होने से फसल अच्छी है। माना जा रहा है कि चालू सीजन में हल्दी की पैदावार बढ़कर 90 लाख बोरी होने का अनुमान है जबकि लालमिर्च की पैदावार 3 करोड़ बोरी होने की संभावना है। उत्पादक मंडियों में बकाया स्टॉक भी ज्यादा है इसलिए इनकी कीमतों में अभी बढ़ी तेजी की संभावना नहीं है।
आंध्रप्रदेष में लालमिर्च की बुवाई बढ़कर चालू खरीफ में अभी तक 1,21,000 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 98,000 हैक्टेयर में ही हुई थी। तेलंगाना में अभी तक लालमिर्च की बुवाई 58,000 हैक्टेयर में हो चुकी है तथा पिछले साल इस समय तक 36,000 हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
हल्दी की बुवाई तेलंगाना अभी तक 46,000 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 41,000 हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। आंध्रप्रदेष में हल्दी की बुवाई 14 हजार हैक्टेयर में हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15,000 हैक्टेयर से कम है।.......आर एस राणा

22 September 2016

कमोडिटी मार्केट

अमेरिका में बेरोजगारों की संख्या में कुछ कमी आई है, ऐसे में डॉलर हल्का बढ़ गया है। जिसका असर कमोडिटी बाजार पर पड़ा है। सोने पर ऊपरी स्तर से अब दबाव दिख रहा है। हालांकि गिरावट ज्यादा नहीं है, इसमें 1330 डॉलर के ऊपर ही कारोबार हो रहा है। इस हफ्ते के दौरान सोने में पिछले 2 महीने की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त देखने को मिली है। वहीं चांदी में भी गिरावट शुरु हो गई है और इसका दाम करीब 0.5 फीसदी गिर गया है।
डॉलर में रिकवरी से कच्चे तेल में भी करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि गिरावट के बावजूद ब्रेंट 47 डॉलर के ऊपर टिका हुआ है। इस बीच निकेल में इस हफ्ते सबसे ज्यादा तेजी आई है। इसका भाव करीब 8.5 फीसदी बढ़ गया है। फिलीपिंस में खदानों पर रोक की आशंका से दुनिया में निकेल की किल्लत की संभावना जताई जा रही है आज भी एलएमई पर इसमें करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी है।

मौसम

अगले 3-4 दिन मुंबई और आसपास के इलाकों पर भारी पड़ने वाले हैं। कोंकण और गोवा में अगले 4 दिन भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने इसके लिए लाल रंग की चेतावनी जारी की है। मुंबई कोंकण इलाके में ही आता है। पिछले एक हफ्ते से यहां भारी बारिश हो रही है। मुंबई के अलावा पूरे महाराष्ट्र में तेज बारिश का अनुमान है। इसके अलावा कर्नाटक और तेलंगाना में भी भारी बारिश हो सकती है। इससे पहले पिछले 24 घंटे में कोंकण और गोवा इलाके में सामान्य से करीब पांच गुना ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।

खरीफ में रिकार्ड 13.50 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान

दलहन का उत्पादन 87 लाख टन होने की संभावना
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अनुकूल मौसम से बुवाई में बढ़ोतरी हुई, साथ ही बारिष अच्छी होने से खाद्यान्न की रिकार्ड पैदावार होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार फसल सीलन 2016-17 खरीफ सीजन कुल खाद्यान्न की पैदावार बढ़कर 13.50 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 12.40 करोट टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी। खरीफ की प्रमुख फसल चावल का उत्पादन चालू खरीफ में 938.8 लाख टन होने का अनुमान है।
मंत्रालय के अनुसार दलहन की पैदावार चालू खरीफ में रिकार्ड 87 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 55.4 लाख टन की हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन 42.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि उड़द की पैदावार 20.1 लाख टन होने की संभावना है।
मोटे अनाजों में बाजरा की पैदावार बढ़कर 85.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 80.6 लाख टन की हुई थी। इसी तरह से मक्का की पैदावार चालू खरीफ में बढ़कर 193 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 152.40 लाख टन की पैदावार हुई थी। ज्वार की पैदावार चालू खरीफ में 242 लाख टन होने का अनुमान है।
खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की पैदावार चालू खरीफ में 142.23 लाख टन होने का अनुमान है। हालांकि जानकारों के अनुसार सोयाबीन की पैदावार इससे काफी कम रहेगी। माना जा रहा है कि सोयाबीन की पैदावार 100 लाख टन ही होगी। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार मूंगफली की पैदावार 64.98 लाख टन होने का अनुमान है जबकि केस्टर सीड की पैदावार 17.31 लाख टन होने की संभावना है। कपास की पैदावार चालू खरीफ में 321.23 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है।........आर एस राणा

फेड के फैसले के बाद सोना चमका

अमेरिका में ब्याज दरें नहीं बढ़ीं, और फेड के इस फैसले के बाद सोने की चमक बढ़ गई है। साथ ही पूरे कमोडिटी और करेंसी बाजार पर इसका असर पड़ा है। कच्चे तेल में जोरदार तेजी आई है। साथ ही बेस मेटल भी उछल गए हैं। येन के मुकाबले डॉलर जहां एक महीने के निचले स्तर पर आ गया है। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हो गया है।
दरअसल फेडरल रिजर्व ने अमेरिका में ब्याज दर 0.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। हालांकि फेड ने कहा है कि अमेरिकी इकोनॉमी तेजी से सुधर रही है और रोजगार के बेहतर आंकड़ों से इस साल के अंत में ब्याज दर बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। वहीं अगले साल फेड ने दो बार और उसके बाद से दो सालों में 3-3 बार दरें बढ़ाने का संकेत दिया है।

21 September 2016

कमोडिटी बाजार

यूएस फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इस बात का मजबूत संकेत दिया है कि दिसंबर में ब्याज दरें बढ़नी तय हैं। इसके अलावा अगले साल दो बार और उसके बाद के दो सालों में 3-3 बार दरें बढ़ सकती हैं। ऐसे में कल के फैसले के बाद सोने में जोरदार तेजी आई थी, लेकिन कल 1.5 फीसदी के उछाल के बाद सोना अब प्रेशर में आ गया है। इसमें अब करीब 4 डॉलर की गिरावट आई है और ये 1332 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है।

दरअसल येन के मुकाबले डॉलर एक महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है। वहीं डॉलर में गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला है और ये मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है। लेकिन डॉलर के गिरने से और अमेरिका में भंडार करीब 62 लाख बैरल गिरने से कच्चे तेल में आज भी तेजी आई है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट करीब 1 फीसदी उछलकर 46 के पास पहुंच गया है। वहीं एलएमई पर कॉपर में भी बढ़त पर कारोबार हो रहा है।

इस बीच महाराष्ट्र में जोरदार बारिश हो रही है और भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि राज्य में बारिश का दौर इस पूरे हफ्ते के दौरान जारी रह सकता है। पिछले 24 घंटे में मध्य भारत में सामान्य से 63 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबकि दक्षिण भारत में सामान्य से 38 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वहीं सरकार ने दाल और खाने के तेल पर स्टॉक लिमिट अगले एक साल के लिए बढ़ा दी है।

दलहन और तिलहन पर स्टॉक लिमिट की अवधि बढ़ाई

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दलहन के साथ ही तिलहन और खाद्य तेलों पर स्टॉक लिमिट की अवधि को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दलहन के साथ ही तिलहन और खाद्य तेलों पर स्टॉक लिमिट की अवधि को 30 सितंबर 2017 तक बढ़ा दिया है। मालूम हो कि दलहन, तिलहन और खाद्य तेलों पर स्टॉक लिमिट की अवधि 30 सितंबर 2016 तक थी।
चालू खरीफ में दलहन की रिकार्ड पैदावार होने का अनुमान है इसलिए कुछ संगठनों ने दलहन के साथ ही तिलहन और खाद्य तेलों पर स्टॉक लिमिट हटाने की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने स्टॉक लिमिट को हटाने के बजाए बढ़ा दिया है। इसका असर दलहन के साथ ही तिलहन की कीमतों पर पड़ने की आषंका है। आवक बढ़ने पर जहां खरीफ दलहन मूंग, उड़द और अरहर की कीमतों में गिरावट आयेगी, वहीं सोयाबीन और मूंगफली की कीमतों में भी आगे मंदा आने की आषंका है।......आर एस राणा

मौसम अपडेट- आज की जानकारी

अगर आज दिनभर रहने वाले मौसम की बात करें…तो अरुणाचल प्रदेश, असम,मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मध्य महाराष्ट्र के कुछेक हिस्सों में भारी बारिश होने के आसार हैं. इसके अलावा तेलंगाना, कोंकण और गोवा,में भी बारिश की संभावना है. विदर्भ, बिहार, उपहिमालयी, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मराठवाड़ा, तटीय आंध्र प्रदेश के भी कुछे हिस्सों में बारिश हो सकती है.  स्रोत- भारत मौसम विज्ञान विभाग

चीनी पर मार्जिन का डंडा

चीनी में आई तेजी पर सेबी ने मार्जिन का डंडा चलाया है। इसके वायदा में खरीद सौदों पर कैश मार्जिन लगा दी गई है। अक्टूबर वायदा में खरीद सौदों पर कल से 10 फीसदी कैश मार्जिन देनी होगी। जबकि बाकी के वायदा में खरीद सौदों पर 25 फीसदी कैश मार्जिन देनी होगी। मार्जिन की नई दरें कल यानि 22 सितंबर से लागू होंगी। इस फैसले के बाद आज चीनी वायदा में तेज गिरावट आई है। दरअसल पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में तेजी देखी गई थी ऐसे में सेबी ने इस पर मार्जिन बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे पहले चीनी मिलों पर सरकार स्टॉक लिमिट लगा चुकी है।

20 September 2016

कमोडिटी बाजार

बैंक ऑफ जापान ने कहा है कि पॉलिसी ढांचे में बदलाव करेंगे। बैंक ने कहा है कि लंबी अवधि की ब्याज दरों का लक्ष्य तय करेगा। वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक का आज अंतिम दिन है और फैसले से पहले सोना और चांदी बेहद छोटे दायरे में सिमट गए हैं। कॉमेक्स पर सोना करीब 1315 डॉलर के पास है। जबकि चांदी में करीब 0.5 फीसदी की गिरावट आई है। एसपीडीआर गोल्ड की होल्डिंग में भी गिरावट आई है और ये करीब 0.5 फीसदी गिरकर 938 टन के स्तर पर आ गई है। वहीं कच्चे तेल में जोरदार तेजी आई है। ग्लोबल मार्केट में क्रूड का दाम करीब 2 फीसदी उछल गया है। दरअसल कल अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक अमेरिका में क्रूड का भंडार करीब 75 लाख बैरल गिर गया है। हालांकि मांग में कमी के अनुमान से लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर 1 महीने के ऊपरी स्तर से फिसल गया है। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में फिर से कमजोरी देखी जा रही है। एक डॉलर की कीमत 67 रुपये के पार चली गई है।

एमएसपी पर 3,273 टन मूंग की खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अभी तक 3,273.16 टन मूंग की खरीद सार्वजनिक कंपनियों नेफैड और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) कर चुकी हैं। खाद्य मंत्रालय के अनुसार एफसीआई और नेफैड ने मूंग की एमएसपी पर खरीद के लिए 200 केंद्र स्थापित किए हैं।
इस समय मूंग की खरीद कर्नाटका, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेष और आंध्रप्रदेष के अलावा तेलंगाना से की जा रही है। जानकारों के अनुसार जब तक सार्वजनिक कपंनियों की खरीद जारी रहेगी, तब तक भाव में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं है लेकिन सरकारी खरीद बंद होने के बाद भाव में मंदा आ सकता है। सार्वजनिक कपंनियों मूंग की खरीद 5,225 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही हैं।..............आर एस राणा

पैकेज्ड दाल पर लगाम, सरकार ने उठाया कदम

दाल में मुनाफाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। पैकेट में बिकने वाली दाल के लिए सरकार अब कीमत तय करेगी। इसके लिए बकायदा नियम तय करने के लिए कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार का मानना है कि कंपनियां पैकेट में दाल बेचकर ज्यादा मुनाफाखोरी कर रही हैं। ऐसे हालात पर लगाम लगाना जरूरी है। ये नोटिफिकेशन लीगल मेट्रोलॉजी विभाग की ओर से जारी किया गया है। इसके जरिए डिब्बा बंद दूध और पैकेज्ड दाल की कीमत तय की जा सकेगी।

पैदावार बढ़ने की संभावना से मूंगफली तेल में और गिरावट संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई में हुई बढ़ोतरी से इसकी पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है जिससे मूंगफली सीड के साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है। राजकोट में इस समय मूंगफली तेल का भाव 1,150 रुपये प्रति 10 किलो है जबकि मूंगफली सीड का भाव 5,000 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल है।
सूत्रों के अनुसार इस समय स्टॉक कम होने के कारण मूंगफली की दैनिक आवक कम है, लेकिन चालू खरीफ में पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है इसलिए मिलर्स भी खरीददारी सीमित मात्रा में ही कर रहे हैं। इस समय मंडियों मूंगफली की दैनिक आवक केवल 15 से 18 हजार बोरी की ही हो रही है। महीने भर में राजकोट मंडी में मूंगफली तेल की कीमतों में करीब 100 से 150 रुपये प्रति 10 किलो की गिरावट आ चुकी है तथा अक्टूबर महीने में मूंगफली की नई फसल आने के बाद मौजूदा कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति 10 किलो की और गिरावट आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 46.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 36.26 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में बुवाई बढ़कर 16.43 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल केवल 12.96 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह से राजस्थान में पिछले साल के 4.13 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 6.17 लाख हैक्टेयर में, कर्नाटका में पिछले साल के 3.41 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 5.22 लाख हैक्टेयर में तथा आंध्रप्रदेष में 6.70 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 9.24 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई है।
मंत्रालय के चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2015-16 खरीफ सीजन में मूंगफली का उत्पादन 53.40 लाख टन का हुआ था जोकि इसके पिछले साल के 59.30 लाख टन से कम था। हालांकि जानकारों की माने तो पिछले साल उत्पादन सरकारी अनुमान से काफी कम हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान मूंगफली दाने का निर्यात बढ़कर 1,91,978 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,45,633 टन का ही हुआ था।............आर एस राणा

ग्वार सीड की पैदावार में कमी का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में देष के सबसे बड़े ग्वार सीड उत्पादक राज्य राजस्थान में बुवाई कम होने से पैदावार तो कम होने का अनुमान है ही, साथ ही बारिष नहीं होने से ग्वार सीड की फसल को नुकसान होने की आषंका बढ़ गई है इसलिए ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में तेजी की संभावना है।
राज्य के कृषि निदेषालय के अनुसार चालू खरीफ में राजस्थान में ग्वार सीड की बुवाई का लक्ष्य 36 लाख हैक्टेयर का रखा था, जबकि बुवाई केवल 29.83 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है इसलिए पैदावार पिछले साल की तुलना में कम होगी।
जानकारों के अनुसार इस समय ग्वार सीड की फसल को पानी की जरुरत है तथा जिस तरह से राजस्थान से मानसून की विदाई हो चुकी है, उसे देखते हुए अभी बारिष की उम्मीद कम है इसलिए स्टॉकिस्टों की सक्रियता तेज हो गई है। अतः ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों मंे स्टॉकिस्टों के कारण तेजी बनने का अनुमान है।
ग्वार सीड के एक कारोबारी के अनुसार पिछले साल 1.5 करोड़ बोरी ग्वार का उत्पादन हुआ था जबकि चालू सीजन में उत्पादन घटकर 80 लाख बोरी से भी कम होने की आषंका है, जोकि सालाना खपत से भी कम होगा। हालांकि यह सही है कि ग्वार सीड का पिछला स्टॉक मंडियों में अच्छा-खासा बचा हुआ है, तथा ग्वार गम उत्पादों की निर्यात मांग भी एक सीमित दायरे में ही है इसलिए मांग के हिसाब से ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है लेकिन स्टॉकिस्टों की सक्रियता है इसलिए भाव तेज होंगे।........आर एस राणा

मानसून की वापसी

मानसून की वापसी हो रही है. राजस्थान के अनूपगढ़, बीकानेर और जैसलमेर के रास्ते मानसून का बाहर जाना जारी है. पिछले 24 घंटों के बारिश के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो गुजरात, कोंकण और गोवा में भारी बारिश दर्ज की गई है. साथ ही पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी बारिश दर्ज की गई... अगर आज दिनभर रहने वाले मौसम की बात करें... तो बिहार, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम,मेघालय, कोंकण और गोवा एवं मराठवाड़ा वे तेलंगाना के कुछेक हिस्सों में बारिश हो सकती है. स्रोत- भारत मौसम विज्ञान विभाग

19 September 2016

कमोडिटी मार्केट मे कहां लगाएं दांव

अमेरिका में आज से फेडरल रिजर्व की दो दिनों की बैठक शुरू होगी। इस बैठक से पहले सोने की चाल सुस्त पड़ गई है। सोने में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। इसका भाव कल के लेवल के पास 1315 डॉलर पर है। अमेरिका में ब्याज दरों पर फेड के रुख पर बाजार की नजर है। चांदी भी कल के लेवल के आसपास ही बनी हुई है। लेकिन कच्चे तेल में कल की तेजी गायब हो गई है। दरअसल वेनेजुएला ने कहा है कि ग्लोबल मार्केट में क्रूड की करीब 10 फीसदी ओवर सप्लाई है। ऐसे में नायमैक्स  क्रूड 43 डॉलर के स्तर पर आ गया है। जबकि ब्रेंट में 46 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। बाजार की नजर आज जारी होने वाले अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की इन्वेंट्री रिपोर्ट पर भी है। इस बीच लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल्स में कमजोर हैं कल की तेजी के बाद निकल भी थोड़ा कमजोर दिख रहा है। हालांकि कॉटन की बात करें तो गुजरात में पिछले 4 दिनों से जारी बारिश के बाद अब नए कॉटन की आवक में देरी की संभावना दिख रही है। ऐसे में हाजिर में कॉटन का दाम बढ़ गया है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी है।

महाराष्ट्र, गुजरात में पिछले 24 घंटे जमकर बारिश

महाराष्ट्र और गुजरात में पिछले 24 घंटे के दौरान जमकर बारिश हुई है। खास करके सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में करीब चार गुना ज्यादा बारिश हुई है। वहीं कोंकण और गोवा इलाके में सामान्य से करीब पांच गुना ज्यादा बारिश हुई है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान गुजरात के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। हालांकि इस बीच राजस्थान से मॉनसून की वापसी भी शुरू हो गई है। इस साल अबतक पूरे देश में सामान्य से 5 फीसदी कम बारिश हुई है।

18 September 2016

कमोडिटी बाजार: कहां लगाएं दांव

कच्चे तेल के उत्पादन पर ओपेक और नॉन ओपेक के बीच सहमति बनने की उम्मीद से क्रूड की कीमतों में जोरदार तेजी आई है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम करीब 2 फीसदी तक उछल गया है। दरअसल वेनेजुएला ने इस महीने के अंत तक दोनो पक्षों में सहमति बन जाने का संकेत दिया है। ओपेक के महासचिव ने भी कहा है कि इस महीने के अंत में अल्जीरिया में एक्सट्रा ऑर्डिनरी बैठक बुलाई जा सकती है।
इसके साथ ही पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद सोने में हल्की रिकवरी आई है। हालांकि भाव पिछले दो हफ्ते के निचले स्तर के पास है। इसमें बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। दरअसल इस हफ्ते 20 और 21 तारीख को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है। माना ये जा रहा है कि इसमें ब्याज दरों को लेकर कुछ संकेत मिल सकता है। वहीं बैंक ऑफ जापान की भी बैठक है, जिसमें राहत पैकेज पर फैसले की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सोने के साथ चांदी भी बेहद छोटे दायरे में है। इस बीच बेस मेटल्स में भारी उठापटक हो रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है जबकि निकेल का दाम करीब 2 फीसदी उछल गया है। जिंक में भी करीब 1 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी है।

17 September 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर

 एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे

---------------------खरीफ फसलों में अरहर, मूंग, उड़द की कीमतें कैसे रहेंगी, किन भाव पर स्टॉक करने से मिलेगा फायदा, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, केस्टर सीड और ग्वार सीड का भविष्य कैसा रहेगा, इनके निर्यात-आयात की क्या हैं संभावनाएं, इन सभी की स्टीक जानकारी कें लिए हमसे जुड़े। अगले सप्ताह इनकी विस्तृत खबरें मिलेंगी, केवल ई-मेल के माध्यम से। 

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आर एस राणा
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09811470207

दलहन आयात में 60 फीसदी की कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू महीने के दूसरे सप्ताह 5 सितंबर से 11 सितंबर के दौरान दलहन आयात में 60.61 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान दलहन का आयात घटकर केवल 51,458 टन का ही हुआ है जबकि चालू महीने के पहले सप्ताह में 1,30,625 टन का आयात हुआ था। इस दौरान अरहर का आयात 68.69 फीसदी घटकर केवल 3,693 टन का ही हुआ जबकि हरी मटर का आयात 41.51 फीसदी घटकर 2,597 टन का ही हुआ है। मुंबई में लेमन अरहर के भाव घटकर 975 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) रह गए। मुंबई में लेमन अरहर का कारोबार 7,200 रुपये प्रति क्विंटल पर हुआ, तथा इसमें 100 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।.......आर एस राणा

16 September 2016

विष्व बाजार में चीनी के दाम तेज

आर एस राणा
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। मांग और आपूर्ति के बीच की खाई और चौड़ी होने के पूर्वानुमान के बाद से तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में और तेजी आई है। बेंचमार्क इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर रॉ-षुगर की मार्च डिलीवरी के अनुबंध का कारोबार बढ़कर 21.16 डॉलर प्रति पाउंड हो गया जोकि 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर है। अक्टूबर में डिलीवरी के लिए नजदीकी महीने का अनुबंध 20.47 डॉलर प्रति पाउंड पर है। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम 23 डॉलर प्रति पाउंड से अधिक होने पर भारत से निर्यात षुल्क देने के बाद भी चीनी का निर्यात लाभकारी हो जायेगा।
जानकारों के अनुसार विष्व बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी का पहला कारण भारत, चीन और थाईलैंड सहित पूरे एषिया में फसल ठीक नहीं होना है, जबकि दूसरा ब्राजील के उत्पादकों पर कम एथेनॉल और ज्यादा चीनी उत्पादन का कृत्रिम दबाव नहीं होना है। पिछले 12 महीनों में वहां कीमत नीति को बदलकर मुक्त बाजार व्यवस्था लागू की गई है। तेल के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल होने से एथनॉल की कीमतें अपने सर्वाेच्च स्तर पर हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन (आईएसओ) ने मांग की तुलना में कम आपूर्ति का पूर्वानुमान जताया है। अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन ने मई के अपने पूर्वानुमान में कहा था कि 2016-17 में 38 लाख टन चीनी की कमी रहेगी, जिसकी मुख्य वजह विष्व के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देष भारत में उत्पादन घटने के आसार थे। इसके बाद इस एजेंसी ने चीनी की कमी का अपना अनुमान 38 लाख टन से बढ़ाकर 66.5 लाख टन कर दिया। वैष्विक सलाहकार कंपनी किंग्समैन ने 2016-17 में 54.6 लाख टन चीनी की कमी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयर ने अनुमान जताया है कि चीनी सीजन 2016-17 में दुनियाभर में चीनी की खपत 17.4 करोड़ टन रहेगी, जो वैष्विक उत्पादन 16.9 करोड़ टन से अधिक है। केयर ने कहा घरेलू बाजार में 2016-17 में पिछले साल के कम बचे स्टॉक 72 लाख टन, गन्ने का रकबा घटकर 50 लाख हैक्टेयर से कम होने के अनुमान के साथ ही खपत में लगातार हो रही बढ़ोतरी से बफर स्टॉक खाली होने के आसार हैं।.............आर एस राणा

भारी बारिश से पूरा महाराष्ट्र सराबोर

बारिश से पूरा महाराष्ट्र सराबोर है। विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के साथ कोंकण और गोवा में भी कल से ही भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने कल भी इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। मराठवाड़ा के लातूर इलाके में जोरदार बारिश हो रही है। जबकि महाराष्ट्र से सटे कर्नाटक में भी बारिश अच्छी है। गुलबर्गा में पुल के ऊपर से पानी गुजर रहा है। पिछले 24 घंटे में मराठवाड़ा में सामान्य से 5 गुना ज्यादा बारिश हुई है। जबकि मध्य महाराष्ट्र में 3 गुना और विदर्भ में 1.5 गुनी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। इस दौरान गोवा और मुंबई में करीब दोगुनी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले चौबिस घंटे के दौरान पूरे महाराष्ट्र के साथ गोवा में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात में भी बारिश जारी रहने का अनुमान है।

खरीफ दलहन की रिकार्ड बुवाई, तिलहन और धान की बुवाई भी ज्यादा

केस्टर के साथ ही कपास की बुवाई में कमी, पैदावार रहेगी कम
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में दलहन के साथ ही तिलहन और धान की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है जिससे इनकी पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है। मूंग और उड़द की कटाई चल रही है तथा महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेष और मध्य प्रदेष के कई इलाकों में हुई बारिष से मूंग और उड़द की फसल दागी होने की आषंका है इसीलिए इनकी कीमतों में तेजी बनने की संभावना है। कपास के साथ ही केस्टर सीड की बुवाई में कमी आई है इसलिए इनकी पैदावार में कमी आयेगी, जिससे आगे इनकी कीमतों में तेजी ही आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार देषभर में अभी तक 144.96 लाख हैक्टेयर में दलहन की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 112.43 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई बढ़कर 52.40 लाख हैक्टेयर में, मूंग की बुवाई 33.87 लाख हैक्टेयर में और उड़द की बुवाई 35.31 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इनकी बुवाई क्रमषः 37.52 लाख हैक्टेयर, 25.49 लाख हैक्टेयर और 28.21 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 1,059.48 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,022.61 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो पाई थी। तिलहन की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 188.33 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 183.21 लाख हैक्टेयर में ही तिलहनों की बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 114.71 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 116.22 लाख हैक्टेयर में ही चुकी थी। हालांकि मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 46.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 36.26 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 382 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 371.74 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 188.62 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 182.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 102.23 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 115.20 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 45.77 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 49.60 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह से केस्टर सीड की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 8.15 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 10.83 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.............आर एस राणा

दालों पर सुब्रमणियम कमिटी ने सौंपी रिपोर्ट

दालों की पैदावार बढ़ाने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं इस मुद्दे पर मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम के अध्यक्षता वाली कमिटी वित्त मंत्री को रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खरीद की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। दालों की सरकारी खरीद की साप्ताहिक रिपोर्ट सौंपी जाए। इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि दालों पर एक्शन के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी बने। वित्त मंत्री और कृषि मंत्री इस कमिटी के सदस्य होने चाहिए। इस कमिटी में उपभोक्ता मामलों के मंत्री और पीएम के प्रिंसिपल सचिव भी शामिल होने चाहिए।  अरविंद सुब्रमणियम कमिटी की रिपोर्ट में दालों की भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दालों की भंडारण क्षमता बढ़ाकर 20 लाख टन की जानी चाहिए। रबी 2016 के लिए चना दाल की एमएसपी 40 रुपये प्रति किलो, खरीफ 2016 के लिए उड़द, अरहर की एमएसपी 60 रुपये प्रति किलो और 2018 में खरीफ उड़द की एमएसपी 70 रुपये प्रति किलो तय की जाए।  इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी सिफारिश की है कि किसानों को 10-15 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी मिलनी चाहिए। दालों पर स्टॉक लिमिट हटाई जानी चाहिए। दालों के निर्यात पर से भी पाबंदी हटाई जानी चाहिए। इसके अलावा खरीद, भंडारण के लिए पीपीपी मॉडल पर कंपनी बनाई जानी चाहिए जो दालों के वितरम का काम भी देखे।
आर एस राणा
नई दिल्ली। बासमती चावल में निर्यात मांग कम होने के कारण बासमती धान पूसा 1,121 और पूसा 1,509 की कीमतों में आगामी दिनों में गिरावट आने की संभावना है। नरेला मंडी में पूसा 1,121 बासमती धान का भाव 2,150 रुपये और 1,509 बासमती धान नए का भाव 2,021 रुपये प्रति क्विंटल रहे। आगामी दिनों में दैनिक आवक बढ़ने पर इनकी कीमतों में और गिरावट आने का अनुमान है।
अगस्त महीने में 8.33 लाख टन चावल का निर्यात हुआ है तथा इसमें बासमती चावल की हिस्सेदारी 23.46 फीसदी और गैर-बासमती चावल की 76.53 फीसदी रही है। जानकारों के अनुसार इस समय खासकर के बासमती चावल की निर्यात मांग कमजोर है इसलिए बासमती चावल के निर्यात में पिछले दो महीने से कमी देखी जा रही है। कुल चावल के निर्यात में पहले जहां बासमती की हिस्सेदारी 35 से 40 फीसदी होती थी वहीं, अब इसकी हिस्सेदारी 25 फीसदी से भी कम हो गई है। अगस्त महीने में बासमती चावल का निर्यात जहां 1.95 लाख टन का हुआ है, वहीं गैर-बासमती चावल का निर्यात 6.37 लाख टन का हुआ है।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई में देष से बासमती चावल का निर्यात 15.49 लाख टन का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 14.07 लाख टन का निर्यात हुआ था। सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में बासमती चावल का निर्यात बढ़ा था लेकिन अब इसमें कमी देखी जा रही है।

15 September 2016

कमोडिटी बाजार: क्या हो रणनीति

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल में गिरावट बढ़ गई है। लीबिया और नाइजीरिया से सप्लाई बढ़ने के अनुमान से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। आज यूएस में रिग काउंट के आंकड़े भी जारी होंगे, इस पर भी बाजार की नजर है। नायमैक्स पर क्रूड का दाम 44 डॉलर के नीचे बना हुआ है। वहीं ब्रेंट में 46 डॉलर के स्तर पर कारोबार हो रहा है।   सोना भी दबाव में है। पिछले महीने भारत में सोने का इंपोर्ट करीब 70 फीसदी गिर गया है। लगातार सातवें हफ्ते इंपोर्ट में गिरावट देखी गई है। वहीं गोल्ड ईटीएफ की होल्डिंग भी लगातार गिर रही है। हालांकि बेस मेटल्स में भारी उठापटक हो रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर जहां तीन हफ्ते की ऊंचाई पर चला गया है। वहीं निकेल में इस हफ्ते करीब 6 फीसदी की भारी गिरावट आई है। दरअसल चीन में रिकवरी के संकेतों से कॉपर की डिमांड सुधरने की संभावना है। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में शानदार रिकवरी आई है और 1 डॉलर की कीमत 66.90 रुपये के नीचे आ गई है।

गेहूं पर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी नहीं घटाएगी

खबर है कि गेहूं पर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी नहीं घटाएगी। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने साफ कर दिया है कि सरकार के पास गेहूं की कोई कमी नहीं है। सरकारी गोदामों में गेहूं का भारी भंडार है। उन्होंने कहा कि कुछ कारोबारियों ने गलत तरीके देश में गेहूं की कमी होने की चिंता जताई थी। फिलहाल सरकार इंपोर्ट ड्यूटी में किसी तरह की कटौती के पक्ष में नहीं है।   उधर अच्छी बारिश और बुआई बढ़ने से सरकार को इस साल देश में रिकॉर्ड अनाज पैदा होने का अनुमान है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि बारिश से कमोबेश सभी इलाकों में खरीफ की अच्छी बुआई हुई है और रबी की बुआई भी बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में रिकॉर्ड पैदावार की संभावना बढ़ गई है। सरकार ने इस साल के लिए 27 करोड़ टन अनाज पैदावार का टार्गेट दिया है। इससे पहले 2013-14 में 26.5 करोड़ टन अनाज का रिकॉर्ड पैदावार हुआ था। हालांकि इसके बाद लगातार सूखे की वजह से पैदावार में कमी देखी गई।

अगस्त में वनस्पति तेलों का आयात घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में स्टॉक ज्यादा होने के कारण अगस्त महीने में वनस्पति तेलों के आयात में कमी आई है। अगस्त महीने में 1,261,827 टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ है जबकि पिछले साल अगस्त महीने में 1,374,049 टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार अगस्त महीने में खाद्य तेलों का आयात 1,248,951 टन का हुआ है जबकि 12,876 टन अखाद्य तेलों का आयात हुआ है। चालू तेल वर्ष 2015-16 के पहले दस महीनों में वनस्पति तेलों का आयात 4 फीसदी बढ़कर 12,165,555 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में 11,725,065 टन वनस्पति तेलों का आयात हुआ था।
जुलाई के मुकाबले अगस्त महीने में आयाति तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। जुलाई महीने में जहां आरबीडी पामोली तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर 643 डॉलर प्रति टन था वहीं अगस्त महीने में इसका भाव बढ़कर 735 डॉलर प्रति टन हो गया। इसी तरह से क्रुड पाम तेल का भाव 642 डॉलर से बढ़कर 730 डॉलर प्रति टन हो गया। क्रुड पाम तेल और रिफाइंड तेल की कीमतों में अंतर कम होने के कारण रिफाइंड तेल का आयात लगातार बढ़ रहा है।......आर एस राणा

मॉनसून

अगस्त के बाद से सुस्त चाल दिखा रहा मॉनसून पश्मिची भारत में फिर से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में पूरे महाराष्ट्र में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा गोवा, गुजरात और तेलंगाना में भी भारी बारिश का अनुमान है। खास करके मुंबई और गोवा में बारिश ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा मध्य महाराष्ट्र और मराठवाडा में भी तेज बारिश का अनुमान है। हालांकि इस सीजन के दौरान पूरे देश में सामान्य से करीब 5 फीसदी कम बारिश हुई है।

14 September 2016

कमोडिटी बाजार में कहां लगाएं दांव

कमोडिटी बाजार में कहां लगाएं दांव 
कच्चा तेल आज संभलने की कोशिश कर रहा है लेकिन कल इसमें भारी गिरावट आई थी और पिछले 5 दिनों में क्रूड का दाम करीब 8 फीसदी फिसल गया है। नायमैक्स पर फिलहाल ये 44 डॉलर के नीचे है। जबकि ब्रेंट में 46 डॉलर के स्तर पर कारोबार हो रहा है। दरअसल लीबिया और नाइजीरिया से कच्चे तेल का सप्लाई बढ़ने का अनुमान है ऐसे में इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। भंडार में 6 लाख बैरल की कमी के बावजूद कल क्रूड में गिरावट तेज थी। अमेरिका में आज कई अहम आंकड़े आने वाले हैं और इससे पहले ग्लोबल मार्केट में सोना और चांदी कल के स्तर के आसपास ही कारोबार कर रहे हैं।  कमोडिटी बाजार पर सबसे ज्यादा असर डालने वाला मॉनसून को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दरअसल इस सीजन के दौरान अबतक पूरे देश में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं इस महीने के दौरान सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश का अनुमान है। ऐसे में इस साल सामान्य बारिश की संभावना कमजोर पड़ गई है।

सोया खली निर्यात बढ़ाने की योजना

पिछले कुछ सालों में सोयाबीन की खली और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात में तेज गिरावट की वजह से उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय ने दक्षिण पूर्व एशिया (एसईए) के आयात करने वाले देशों में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया ताकि आयातकों की समस्याएं समझी जा सकें। छह सदस्यों वाली समिति की अध्यक्षता दाविश जैन कर रहे हैं जो भारतीय सोयाबीन प्रसंस्करण संघ (सोपा) के अध्यक्ष हैं। सोपा के मुकाबले देश के सोयाबीन खली निर्यात में अगस्त महीने में 66 फीसदी की गिरावट आई और यह महज 10,615 टन पर सिमट गया जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 31,157 टन था। इस साल अप्रैल से अगस्त तक की पांच महीने की अवधि के दौरान देश के सोयाबीन खली निर्यात में 62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह पिछले साल के 168,054 टन से घटकर 63,522 टन हो गया।   सोपा के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक का कहना है, 'हम दुनिया के बाजार में प्रतिस्पद्र्धी नहीं हैं क्योंकि देश में कच्चे माल की कीमत ज्यादा है जबकि खली निर्यात से होने वाली प्राप्तियां कम हैं। सोयाबीन की कीमतें घरेलू किसानों द्वारा तय होती हैं जबकि रिफाइंड सोया तेल (आरएसओ) और सोयाखली की कीमतें, आरएसओ के सस्ते आयात की वजह से ब्राजील में पेराई करने वालों द्वारा तय की जाती है।'   इस बीच वाणिज्य मंत्रालय द्वारा एक पत्र जापान, वियतनाम, फिलीपींस और थाईलैंड के दूतावास को भेजा गया है और इन देशों में 18-30 सितंबर के बीच छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की आगामी यात्रा के दौरान इनके सहयोग की मांग की गई है ताकि बाजार की संभावनाएं तलाशने के साथ ही संभावित खरीदारों से मुलाकात की जा सके। देश में सोयाखली की पेराई कम रही है क्योंकि सोयाखली के उत्पादन में तेज गिरावट दर्ज की गई। सोपा के मुताबिक देश का सोयाबीन उत्पादन 2015-16 के फसल वर्ष में 75.4 करोड़ टन रहा जो 2014-15 में 1.03 करोड़ टन था। इस तरह इसमें करीब 27 फीसदी की गिरावट देखी गई। सोयाबीन उत्पादन 2015-16 में 11 सालों के मुकाबले सबसे कम रहा क्योंकि सोयाबीन के बड़े उत्पादक राज्यों मसलन महाराष्ट्र और गुजरात में सूखे की स्थिति थी।

अब दाल की कीमत नहीं बढ़ेगी हद से ज्यादा

अब दाल की कीमत एक हद से ज्यादा नहीं बढ़ेगी। सरकार ने खुदरा व्यापारियों को चेतावनी दी है कि अगर थोक और खुदरा कीमतों में ज्यादा अंतर हुआ तो सरकार रिटेल भाव की सीमा तय करेगी। इससे ज्यादा कीमत पर दाल बेचना गैरकानूनी होगा।  दाल की महंगाई से लगातार हो रही बदनामी अब सरकार झेलना नहीं चाहती है। शायद यही वजह है कि सरकार ने अब वो हथियार चलाने का फैसला किया है जो अब तक सिर्फ कानून के कागजों में दबे थे। सरकार ने कहा है कि अगले कुछ दिन तक वो दाल की कीमतों की समीक्षा करेगी। अगर रिटेल स्टोर यानी किराना दुकानों पर दाल की कीमतें थोक बाजार के मुकाबले बहुत ज्यादा बनी रही तो इशेंसियल कमोडिटीज एक्ट के तहत कदम उठाएगी। और ये तय करेगी कि दाल की अधिकतम कीमतें क्या होनी चाहिए। यानी उस तय कीमत से ज्यादा दाम पर दाल बेचना गैर कानूनी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि थोक बाजार में मुकाबले रिटेल में 15 फीसदी से ज्यादा दाम नहीं होने चाहिए।   दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में थोक बाजार में तो दाल सस्ती हुई है लेकिन खुदरा बाजार में महंगी बनी हुई है। दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में तो ये अंतर 30  फीसदी तक है। इसलिए सरकार अब रिटेलर्स पर शिकंजा कसना चाहती है। साथ में सरकार ने इस बार से सबक सीखते हुए 20 लाख टन दाल का बफर स्टॉक बनाने का भी फैसला लिया है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार दाल का बफर स्टॉक बनाएगी।

अरहर की पैदावार 37.1 लाख टन होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में हुई रिकार्ड बुवाई से अरहर की पैदावार रिकार्ड 37.1 लाख टन होन का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक उत्पादक राज्यों में मौसम फसल के अनुकूल है तथा चालू खरीफ में बिजाई में हुई बढ़ोतरी से पैदावार रिकार्ड होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2015-16 में अरहर की पैदावार 24.6 लाख टन की हुई थी जबकि फसल सीजन 2013-14 में रिकार्ड पैदावार 31.7 लाख टन की हुई थी।
चालू खरीफ में अरहर की बुवाई बढ़कर 52.19 लाख हैक्टेयर में हुई है तथा पिछले साल इसकी बुवाई 37.33 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अरहर की उत्पादकता प्रति हैक्टेयर 725 किलोग्राम होने का अनुमान है।......आर एस राणा

उड़द का उत्पादन 18.2 लाख टन होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में उड़द का रिकार्ड पैदावार 18.2 लाख टन होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू खरीफ में अनुकूल मौसम से उड़द की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता 541 किलोग्राम होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ में बुवाई में तो बढ़ोतरी हुई ही है, साथ ही अनुकूल मौसम से उत्पादकता भी बढ़ी है, इसीलिए रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान है।
नई उड़द की आवक उत्पादक मंडियों मंे अगले महीने बढ़ जायेगी, तथा मौसम साफ रहा तो मंडियों में इसके भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2015-16 खरीफ सीजन में उड़द की पैदावार 13.9 लाख टन की हुई थी जबकि फसल सीजन 2012-13 खरीफ में रिकार्ड पैदावार 14.3 लाख टन की हुई थी। चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए केंद्र सरकार उड़द का एमएसपी 5,000 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित तय किया हुआ है।

13 September 2016

कमोडिटी बाजार में क्या हो रणनीति

कल करीब 3 फीसदी की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में रिकवरी आई है। ग्लोबल मार्केट में क्रूड करीब 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है। हालांकि चांदी बेहद छोटे दायरे में है। दरअसल अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुताबिक अमेरिका में पिछले हफ्ते क्रूड का भंडार करीब 14 लाख बैरल बढ़ गया है। वहीं इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने कहा है कि अगले साल यानि 2017 की पहली छमाही तक ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की ओवर सप्लाई बनी रह सकती है। ऐसे में इसकी कीमतों में गिरावट की आशंका और बढ़ गई है।

इस बीच सोना संभलने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इसके भाव 1320 डॉलर के नीचे बने हुए हैं। दरअसल अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना से सोने में बिकवाली हावी है। एसपीडीआर गोल्ड की होल्डिंग में भी काफी गिरावट आ चुकी है। फिलहाल ये 935 टन के स्तर पर आ गया है। चीन के फैक्ट्री आउटपुट और रिटेल सेल्स के शानदार आंकड़ों से सोने का सेंटीमेंट और खराब हुआ है। इस बीच आज डॉलर के मुकाबले रुपए में हल्की कमजोरी है।

12 September 2016

पूर्वानुमान से कम रहेगी बारिश

भारत में बारिश के लिए आम तौर पर जिम्मेदार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौर में इस साल अब तक सामान्य से 5 फीसदी कम बारिश हुई है लेकिन अगले कुछ दिनों में पश्चिमोत्तर और मध्य भारत में बारिश के दोबारा रफ्तार पकडऩे की संभावना है।  भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल मॉनसून की दीर्घावधि औसत बारिश (एलपीए) के 106 फीसदी रहने का पूर्वानुमान जताते हुए कहा था कि उसके अनुमान में 4 फीसदी की घट-बढ़ हो सकती है। इसके आसपास पहुंचने के लिए बारिश के सितंबर में फिर से जोर पकडऩा जरूरी है। 
 हालांकि मौसम विभाग ने एलपीए में कटौती की संभावना से इनकार किया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि एलपीए पूर्वानुमान के निचले स्तर यानी 102 फीसदी तक पहुंच जाएगा। अगर औसत बारिश 102 फीसदी के स्तर पर रहती है तो भी वह सामान्य से 2 फीसदी ज्यादा होगी। इसके लिए उनकी उम्मीदें सितंबर के दूसरे पखवाड़े में बारिश के फिर से जोर पकडऩे पर टिकी हुई हैं। 
 मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वी तट पर निम्न दबाव का क्षेत्र बन रहा है जिससे अगले तीन-चार दिनों में ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और तेलंगाना में अच्छी बारिश हो सकती है। लेकिन इससे एलपीए के सामान्य स्तर तक भी पहुंच पाना मुमकिन नहीं हो पाएगा। मॉनसूनी बारिश के सामान्य स्तर तक भी पहुंचने के लिए यह जरूरी है कि सितंबर में बारिश औसत स्तर से 50 फीसदी ज्यादा हो। यह अलग बात है कि सितंबर के पहले 10 दिनों में बारिश औसत से 18-19 फीसदी कम रही है। 
 ऐसी स्थिति में मौसम विभाग को तगड़ा झटका लग सकता है। एक वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक ने कहा, 'सितंबर में भी बारिश के रफ्तार नहीं पकडऩे पर कुल बारिश एलपीए का 97-98 फीसदी ही रह सकती है। अगर ऐसा होता है तो इस साल मौसम विभाग का पूर्वानुमान सांख्यिकीय गलती की गुंजाइश वाले स्तर से भी कम रह जाएगा।' यह पिछले एक दशक में तीसरा मौका होगा जब मौसम विभाग पूर्वानुमान लगाने में बुरी तरह नाकाम रहा। इससे पहले वर्ष 2009 में मौसम विभाग ने बारिश के सामान्य रहने का अनुमान जताया था लेकिन उस साल भयंकर सूखा पड़ा था। उसके बाद 2011 में भी मौसम विभाग बारिश के स्तर को लेकर मात खा गया। माना जाता है कि हिंद महासागर पर ला नीना के असर का ठीक से अंदाजा नहीं लगा पाने से ऐसी स्थिति पैदा हुई थी। 
 बहरहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि बारिश के सामान्य स्तर पर भी रहने का खरीफ फसलों की बुआई पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। देश के अधिकांश इलाकों में फसलों की बुआई का काम जुलाई में ही पूरा कर लिया गया था और अब तक फसलों का विकास भी अच्छे तरीके से होता आ रहा है। इस साल बुआई का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी अधिक रहा है। (BS Hindi)

सोने की चमक पड़ी फीकी, क्या करें

सोने की चमक फीकी पड़ गई है। अमेरिका में दरें बढ़ने की आशंका से सोने में दबाव देखने को मिल रहा है और इसकी चमक फीकी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का दाम 1230 डॉलर के करीब हैं। जबकि घरेलू बाजार में इसका दाम 31,200 रुपये के करीब हैं। चांदी की कीमतों पर भी दबाव देखा जा रहा है। घरेलू बाजार में चांदी के दाम करीब 600 रुपये गिरे हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी में 19 डॉलर के करीब कारोबार हो रहा है।
उधर अमेरिका में रिग की संख्या बढ़ने से कच्चे तेल पर दबाव देखा जा रहा है। नायमैक्स पर कच्चा तेल 1.75 फीसदी की फिसला है। वहीं ब्रेट के दाम फिसलकर 47 डॉलर के करीब पहुंच गए हैं। घरेलू बाजार में भी कच्चे तेल में करीब 1.75 फीसदी की गिरावट है।
एफआरपी बढ़ने की संभावना और हाजिर मांग बढ़ने से चीनी वायदा में आज तेजी देखी जा रही है। एमसीडीईएक्स पर चीनी वायदा करीब 0.5 फीसदी बढ़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और सुस्त घरेलू मांग से सोया तेल में गिरावट आई है। अमेरिकी कृषि विभाग की रिपोर्ट से पहले सीबॉट पर सोया तेल के दाम गिरे हैं। वहीं मलेशिया के पॉम तेल निर्यात में कमी से पॉम तेल पर दबाव है जिसका असर सोया तेल पर दिख रहा है।
गेहूं की कीमतों में आज कमजोरी देखी जा रही है। बाजार में सप्लाई अच्छी है लेकिन मिलर्स की डिमांड कम है जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा है। दालों के थोक और खुदरा दामों में भारी अंतर के मद्देनजर सरकार खुदरा कारोबारियों पर शिकंजा कस सकती है।  उपभोक्ता मामलों के सचिव हेम पांडेय ने कहा कि होल सेल और रिटेल कीमतों में अधिकतम 15 फीसदी का अंतर होना चाहिए। उनके मुताबिक अगर जरूरी हुआ तो सरकार रिेटेल कीमतें भी तय कर सकती है। पांडेय का कहना है कि सरकार का पास जरूरी चीजों के अधिकतम मूल्य तय करने का अधिकार है।
हाजिर मांग बढ़ने के कारण कपास खली वायदा में आज खासी तेजी देखने को मिली है। सितंबर वायदा करीब 1 फीसदी बढ़ा है जबकि सबसे ज्यादा एक्टिव दिसंबर वायदा में करीब 1.75 फीसदी की तेजी है। सप्लाई में कमी का असर भी कीमतों पर दिख रहा है। ग्वार सीड और ग्वार गम में आज खासी तेजी देखी जा रही है। उत्पादन में कमी की चिंता के कारण एनसीडीईएक्स पर ग्वार वायदा के दाम बढ़े हैं। वहीं निचले स्तर पर मांग बेहतर होने से राजस्थान के हाजिर बाजारों में भी तेजी देखी जा रही है।..... स्रोत : CNBC-Awaaz

रबी फसलों के एमएसपी में 10 फीसदी की बढ़ोतरी संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी सीजन 2016-17 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है। माना जा रहा है खरीफ में दलहन की बुवाई में हुई भारी बढ़ोतरी से उत्साहित केंद्र सरकार रबी दलहन की प्रमुख फसलों चना और मसूर के एमएसपी में बढ़ोतरी के अलावा बोनस की घोषणा भी कर सकती है। सूत्रों के अनुसार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने दलहन के एमएसपी पर बोनस ज्यादा बढ़ाने का सुझाव दिया है।
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार रबी में दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी हो इसके लिए चना के साथ मसूर के एमएसपी में बढ़ोतरी तो करेगी ही साथ 250 से 450 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी घोषित कर सकती है। इसके अलावा गेहूं, जौ, सरसों और सनफलावर के एमएसपी में 5 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है।
रबी विपणन सीजन 2015-16 के लिए केंद्र सरकार ने चना का एमएसपी 3,425 रुपये, मसूर का एमएसपी 3,325 रुपये, सरसों का एमएसपी 3,350 रुपये, सनफलावर का 3,300 रुपये, गेहूं का 1,525 रुपये और जौ का एमएसपी 1,225 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।..............आर एस राणा

गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी संभव

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार आगामी गन्ना पेराई सीजन के लिए गन्ने का एफआरपी 30 से 40 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा सकती है। सूत्रों के अनुसार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने एफआरपी बढ़ाने की सिफारिष की है। खाद्य मंत्रालय जल्दी ही अंतिम प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजेगा।
सूत्रों के अनुसार एफआरपी बढ़ाने की वजह यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव है। केंद्र सरकार चुनाव से पहले किसानों को लुभाने की कोषिष करेंगी। मालूम कि पिछले साल केंद्र सरकार ने गन्ने के एफआरपी में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी।......आर एस राणा

केंद्र सरकार 20 लाख टन दलहन का बफर स्टॉक बनायेगी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार 20 लाख टन दलहन का बफर स्टॉक बनायेगी। बफर स्टॉक के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से जहां 10 लाख टन दलहन का आयात करेगी, वहीं 10 लाख टन दालों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सीधे किसानों से की जायेगी।
अतः ऐसे में चालू खरीफ में दलहन की आवक खासकर के मूंग और उड़द की आवक ष्षुरु हो गई है तथा मूंग की एमएसपी पर खरीद भी षुरु कर दी है तथा अगले महीने से उड़द की खरीद ष्षुरु की जायेगी। चालू खरीफ में दलहन की बंपर पैदावार होने का अनुमान है जबकि सरकारी एजेंसियों की खरीद तय मात्रा में होगी, इसलिए कई राज्यों की मंडियों में मूं और उड़द एमएसपी से नीचे भाव पर बिक सकती है।.....आर एस राणा

10 September 2016

एग्री कमोडिटी में मुनाफे का अच्छा अवसर


एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
 
खरीफ फसलों में अरहर, मूंग, उड़द की कीमतें कैसे रहेंगी, किन भाव पर स्टॉक करने से मिलेगा फायदा, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, केस्टर सीड और ग्वार सीड का भविष्य कैसा रहेगा, इनके निर्यात-आयात की क्या हैं संभावनाएं, इन सभी की स्टीक जानकारी कें लिए हमसे जुड़े। अगले सप्ताह इनकी विस्तृत खबरें मिलेंगी, केवल ई-मेल के माध्यम से।
 
............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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महाराष्ट्र से मूंग की खरीद षुरु

आर एस राणा
नई दिल्ली। सार्वजनिक कंपनी नेफैड ने महाराष्ट्र की मंडियों से 8 सितंबर से मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,225 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) में खरीद ष्षुरु कर दी है। हालांकि जानकारों की माने तो पिछले दो दिनों में नेफैड ने केवल 25 से 30 क्विंटल मूंग की खरीद ही की है। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में मूंग की आवक बढ़ेगी, जिससे सरकारी खरीद में भी बढ़ोतरी होगी।....आर एस राणा

अगस्त में मक्का का निर्यात घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। अगस्त महीने में मक्का का निर्यात घटकर केवल 8,337 टन का ही हुआ है जबकि जुलाई महीने में इसका निर्यात 14,483.8 टन का हुआ था। अगस्त महीने में मक्का के निर्यात सौदे 254.44 डॉलर प्रति टन की दर से हुए हैं। इस समय मक्का का निर्यात केवल नेपाल, यमन और यूएई को डिप्लोमेटिक आधार पर ही हो रहा है क्योंकि विष्व बाजार में मक्का के भाव नीचे बने हुए हैं।..........आर एस राणा

केंद्रीय भंडारण के स्टोरों पर दाल की कीमतों में कटौती का फैसला

अरहर की कीमतों में आई गिरावट से सरकार ने सफल और केंद्रीय भंडारण के स्टोरों पर दाल की कीमतों में कटौती का फैसला लिया है। ये स्टोर अब 105 रुपये किलो के भाव अरहर दाल बेच रही हैं। दरअसल मंडियों में अरहर की कीमतें करीब 7 हजार रुपए क्विंटल का भाव पर आ गया है। वहीं थोक में अरहर दाम 10 हजार रुपए क्विंटल के नीचे है। वहीं मूंग की कीमतों में आई गिरावट से मूंग दाल 60 रुपए किलो के स्तर पर आ गई है। माना ये जा रहा है कि अगले महीने से दाल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है।

कपास खली का स्टॉक एनसीडीईएक्स के मानकों पर खरा

आकोला और कड़ी के गोदामों में कपास खली का स्टॉक एनसीडीईएक्स के तय मानकों पर खरा उतरा है। एक्सचेंज ने इसकी जांच पूरी करा ली है। एनसीडीईएक्स ने कहा है कि इसमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं पाई गई है। हैदराबाद के फर्स्ट सोर्स लैब ने इसकी जांच की है। करीब 5500 टन कपास खली के स्टॉक में से नमूने लिए गए थे। ये सभी नमूने अकोला और कड़ी के गोदामों से लिए गए थे।

09 September 2016

अरहर, उड़द और मूंग की रिकार्ड पैदावार का अनुमान

केस्टर के साथ ही कपास की बुवाई में कमी
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में दलहन की प्रमुख फसलों अरहर, उड़द और मूंग की रिकार्ड बुवाई हुई तथा अभी तक मौसम भी फसल के अनुकूल है। इसलिए इनकी रिकार्ड पैदावार होने का अनुमान है। चालू खरीफ में दलहन के साथ ही तिलहन, मोटे अनाजों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं केस्टर सीड के साथ कपास की बुवाई पिछड़ी है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार देषभर में अभी तक 143.95 लाख हैक्टेयर में दलहन की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 111.48 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई बढ़कर 52.19 लाख हैक्टेयर में, मूंग की बुवाई 33.64 लाख हैक्टेयर में और उड़द की बुवाई 34.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इनकी बुवाई क्रमषः 37.33 लाख हैक्टेयर, 25.35 लाख हैक्टेयर और 27.83 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंग और उड़द की नई फसल की आवक षुरु हो गई है, हालांकि मूंग की एमएसपी पर खरीद भी षुरु हो गई है मौसम साफ रहा तो आगामी दिनों में आवक बढ़ेगी, जिससे इनके भाव में और गिरावट आने का अनुमान है।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 1,054.49 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,012.35 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो पाई थी। तिलहन की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 186.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 181.70 लाख हैक्टेयर में ही तिलहनों की बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 114.66 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 116.16 लाख हैक्टेयर में ही चुकी थी। हालांकि मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 46.57 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 35.76 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 380.28 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 370.04 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 187.86 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 177.05 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 102.13 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.75 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 45.77 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 49.60 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह से केस्टर सीड की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 7.45 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 10.24 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.............आर एस राणा


08 September 2016

कमोडिटी बाजार में क्या हो रणनीति

कल की जोरदार तेजी के बाद कच्चे तेल की चाल बदल गई है और इसमें करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है। ब्रेंट 50 डॉलर के नीचे है। दरअसल एपीआई के बाद कल अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट ने भी अपनी रिपोर्ट में कह दिया कि क्रूड के भंडार में करीब 1.5 करोड़ बैरल की कमी आई है। ऐसे में कच्चे तेल की तेजी को और हवा मिल गई और ब्रेंट का दाम 50 डॉलर तक पहुंच गया। इस बीच कल की तेज गिरावट के बाद सोना संभलने की कोशिश में है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1340 डॉलर के नीचे है।

कल अमेरिका में रोजगारों की संख्या में गिरावट से डॉलर में रिकवरी आई थी जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया था। हालांकि आज डॉलर फिर से दबाव में है। लेकिन इस दबाव के बावजूद डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर है और एक डॉलर की कीमत 66.55 रुपये के पार चली गई है।....स्रोत : CNBC-Awaaz

निर्यात मांग अच्छी होने से जीरा में फिर आयेगी तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। जीरा में इस समय घरेलू मसाला कंपनियों के साथ ही निर्यात मांग अच्छी बनी हुई है जिससे इसकी कीमतों में फिर तेजी आने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार चालू फसल सीजन में अप्रैल से अगस्त तक उत्पादक मंडियों में केवल 69,675 टन जीरा की ही आवक हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी आवक 1,00,000 टन की हुई थी।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले तीन महीनों में जीरा का निर्यात बढ़कर 41,000 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 26,529 टन का ही हुआ था। इस दौरान भारत से सबसे ज्यादा जीरा का आयात वियतनाम ने किया है, इसके संयुक्त अरब अमीरात और यूएसए है।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार जून में जीरा का निर्यात 9,859 टन का हुआ है जोकि मई के मुकाबले तो कम हुआ है लेकिन पिछले साल जून के 7,064 टन से ज्यादा निर्यात हुआ है। ......आर एस राणा

राजस्थान में 19.62 लाख टन ग्वार सीड उत्पादन का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में राजस्थान में ग्वार सीड की पैदावार 19.62 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में इसकी पैदावार 22.23 लाख टन की हुई थी।
राजस्थान के कृषि निदेषालय द्वारा जारी अग्रिम अनुमान 2016-17 के अनुसार राज्य में ग्वार सीड की बुवाई 35.76 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 47.87 लाख हैक्टेयर में हुई थी। चालू खरीफ में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता 549 किलोग्राम होने का अनुमान लगाया है जबकि पिछले साल प्रति हैक्टेयर उत्पादकता 465 किलोग्राम हुई थी। हालांकि राज्य सरकार के कृषि निदेषालय के अनुसार जैसलमैर, बूंदी, गंगानगर, अजमेर, झालावाड़, कोटा और नागौर जिलों से सूचना प्राप्त नहीं हुई है तथा कृषि निदेषालय ने पिछले पांच साल के आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान जारी किया है।
जानकारों की माने तो राज्य सरकार ने ग्वार सीड के उत्पादन आंकड़े बढ़ाकर पेष किए हैं जबकि चालू सीजन में राजस्थान में ग्वार सीड की पैदावार में 40 से 45 फीसदी की कमी आने की आषंका है।.......आर एस राणा

मसालों में क्या करें

एग्री कमोडिटी मार्केट में मसालों में भारी एक्शन है। जीरे में आज भी गिरावट हावी है। वायदा में इसका दाम करीब 1.5 फीसदी गिर गया है। इसमें फिलहाल करीब 250 रुपये नीचे कारोबार हो रहा है। वहीं हल्दी का दाम 14 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। ग्वार में भी बिकवाली हावी है और कारोबार के पहले डेढ़ घंटे में ही इसका दाम करीब 2.5 फीसदी टूट गया है। मजबूत शुरुआत के बाद सोयाबीन भी दबाव में आ गया है। ग्लोबल मार्केट में रिकवरी के दम पर इसकी शुरुआत 0.5 फीसदी ऊपर हुई थी लेकिन फिर से दबाव बढ़ गया है।

नॉन एग्री कमोडिटी की बात करें तो कच्चे तेल में आज जोरदार तेजी आई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका दाम करीब 1.5 फीसदी उछल गया है। कल भी इसमें 1.5 फीसदी की तेजी आई थी। दरअसल कल अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 1 करोड़ 21 लाख बैरल घट गया है। भंडार में ये गिरावट पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा है। वैसे आज वहां इन्वेंट्री की सरकारी रिपोर्ट भी जारी होगी जिसपर बाजार की नजर टिकी हुई है।
उधर सोना एक छोटे दायरे में सिमट गया है। इसमें 1345 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। चांदी भी 20 डॉलर के नीचे है। आज यूरोपीय सेंट्रल बैठक की बैठक है और साथ ही अमेरिका में बेरोजगारी के साप्ताहिक आंकड़े भी जारी होंगे इस पर बाजार की नजर है। घरेलू बाजार में सिर्फ कमजोर रुपये से सोने और चांदी को सपोर्ट मिला है। दूसरी तरफ बेस मेटल्स में आज उठापटक देखने को मिल रही है। एल्युमीनिमयम और लेड को छोड़कर सभी मेटल में मजबूती दिख रही है।
घरेलू बाजार की बात करें तो एमसीएक्स पर सोना 0.03 फीसदी की हल्की बढ़त के साथ 31310 रुपये ऊपर कारोबार कर रहा है। जबकि चांदी 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 47210 रुपये के ऊपर कारोबार कर रही है। वहीं कच्चा तेल 1.75 फीसदी की उछाल के साथ 3075 रुपये आसपास दिख रहा है। जबकि नैचुरल गैस 0.7 फीसदी की बढ़त के साथ 180 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।
बेस मेटल्स की बात करें तो एल्युमीनियम 0.09 फीसदी घटकर 105 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है जबकि कॉपर 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ 315 रुपये आसपास दिख रहा है। वहीं लेड में 0.3 फीसदी की कमजोरी दिख रही है तो निकेल 0.3 फीसदी की बढ़त के साथ 680 रुपये ऊपर कारोबार कर रहा है। जबकि जिंक 0.06 फीसदी की कमजोरी के साथ 150 रुपये के करीब दिख रहा है।
एग्री कमोडिटीज में एनसीडीईएक्स पर जीरा का सितंबर वायदा 1.2 फीसदी टूटकर 17595 रुपये पर दिख रहा है। जबकि सोया तेल का सितंबर वायदा 0.02 फीसदी कमजोरी के साथ 645 रुपये के आसपास दिख रहा है।
इस बीच सेबी ने नॉन एग्री में ट्रेडिंग आसान बना दिया है। सोना समेत सभी नॉन एग्री कमोडिटी में डेली प्राइस लिमिट 4 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी कर दी गई है। हालांकि सोना वायदा के डेली प्राइस लिमिट में 3-3 फीसदी के तीन स्लैब होंगे। जबकि बाकी नॉन एग्री कमोडिटी में डेली प्राइस लिमिट का पहला स्लैब 4 फीसदी का होगा। नए नियम 29 सितंबर से लागू होंगे।..........स्रोत : CNBC-Awaaz

07 September 2016

कमोडिटी बाजार में कहां लगाएं दांव

कच्चे तेल में जोरदार तेजी आई है। ग्लोबल मार्केट में इसका दाम करीब 1.5 फीसदी उछल गया है। कल भी इसमें 1.5 फीसदी की तेजी आई थी। दरअसल कल अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 1 करोड़ इक्कीस लाख बैरल घट गया है। भंडार में ये गिरावट पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा है। वैसे आज वहां इन्वेंट्री की सरकारी रिपोर्ट भी जारी होगी जिस पर बाजार की नजर टिकी हुई है। इस बीच सोना एक छोटे दायरे में सिमट गया है। इसमें 1345 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। चांदी भी 20 डॉलर के नीचे है।
आज यूरोपीय सेंट्रल बैठक की बैठक है और साथ ही अमेरिका में बेरोजगारी के साप्ताहिक आंकड़े भी जारी होंगे। इस पर बाजार की नजर है। ऐसे में कॉपर लगातार मजबूती दिखा रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कल इसमें करीब 1 फीसदी की तेजी के बाद आज भी हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया आज कमजोर पड़ गया है और 1 डॉलर की कीमत फिर से 66.5 रुपये के पास पहुंच गई है।
घरेलू बाजार की बात करें तो एमसीएक्स पर सोना 0.03 फीसदी की हल्की बढ़त के साथ 31310 रुपये ऊपर कारोबार कर रहा है। जबकि चांदी 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 47210 रुपये के ऊपर कारोबार कर रही है। वहीं कच्चा तेल 1.75 फीसदी की उछाल के साथ 3075 रुपये आसपास दिख रहा है। जबकि नैचुरल गैस 0.7 फीसदी की बढ़त के साथ 180 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।
बेस मेटल्स की बात करें तो एल्युमीनियम 0.09 फीसदी घटकर 105 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है जबकि कॉपर 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ 315 रुपये आसपास दिख रहा है। वहीं लेड में 0.3 फीसदी की कमजोरी दिख रही है तो निकेल 0.3 फीसदी की बढ़त के साथ 680 रुपये ऊपर कारोबार कर रहा है। जबकि जिंक 0.06 फीसदी की कमजोरी के साथ 150 रुपये के करीब दिख रहा है।
एग्री कमोडिटीज में एनसीडीईएक्स पर जीरा का सितंबर वायदा 1.2 फीसदी टूटकर 17595 रुपये पर दिख रहा है। जबकि सोया तेल का सितंबर वायदा 0.02 फीसदी कमजोरी के साथ 645 रुपये के आसपास दिख रहा है।......स्रोत : CNBC-Awaaz

नैफेड राजस्थान, मध्य प्रदेष और तेलंगाना से करेगी मूंग की खरीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। कृषि मंत्रालय ने चालू खरीफ में मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की पूरी तैयारी कर ली है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेष और तेलंगाना से नैफेड मूंग की एमएसपी पर खरीद करेगी, तथा खरीद की सभी तैयारी पूरी है, केवल राज्य सरकार के प्रस्ताव का इंतजार किया जा रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार अन्य राज्यों को भी पत्र लिखा गया है, तथा जिस भी राज्य से खरीद के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास आयेगा, वहीं से एमएसपी के साथ ही तय बोनस पर मूंग की खरीद षुरु की जायेगी।.......आर एस राणा

अगस्त महीने में डीओसी के निर्यात में 38 फीसदी की गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली। अगस्त महीने में डीओसी के निर्यात में 38 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 56,597 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अगस्त महीने में 91,834 टन डीओसी का निर्यात हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जुलाई के मुकाबले अगस्त महीने में जहां सरसों डीओसी के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, वहीं सोयाबीन डीओसी के निर्यात में भारी कमी आई है। अगस्त महीने में सरसों डीओसी का निर्यात बढ़कर 32,371 टन का हुआ है जबकि जुलाई महीने में इसका निर्यात केवल 4,197 टन का ही हुआ था। सोयाबीन डीओसी का निर्यात जुलाई महीने में घटकर 1,726 टन का हुआ है जबकि जुलाई महीने में सोयाबीन डीओसी का निर्यात 3,290 टन का हुआ था।
एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान डीओसी का कुल निर्यात 46 फीसदी कम होकर 3,30,834 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 6,09,748 टन का हुआ था।
भारतीय बंदरगाह पर सोयाबीन डीओसी का भाव घटकर अगस्त महीने में 486 डॉलर प्रति टन रह गया जबकि जुलाई महीने में इसका भाव 494 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से सरसों डीओसी का भाव इस दौरान 293 डॉलर प्रति टन से घटकर 288 डॉलर प्रति टन रह गया। विष्व बाजार में इस समय सोयाबीन डीओसी का भाव 383 डॉलर प्रति टन है जबकि सरसों डीओसी का भाव 219 डॉलर प्रति टन है। विष्व बाजार में सोयाबीन के साथ सरसों डीओसी के भाव भारत की तुलना में नीचे बने हुए है, जिसका असर निर्यात पर पड़ रहा है। .....आर एस राणा

06 September 2016

कमोडिटी बाजार में क्या हो रणनीति

अमेरिका में कल आए खराब आंकड़ों से सोने की चमक बढ़ गई है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1350 डॉलर के पार चला गया है। सोने में सिर्फ 3 दिन में करीब 50 डॉलर की तेजी आई है और घरेलू बाजार में भी इस दौरान सोना करीब 900 रुपये उछल चुका है। हालांकि इसी बीच एबीएन एमरो ने सोने पर अपना अनुमान घटा दिया है। बैंक ने कहा है कि दिसंबर में अमेरिका में 25 बेसिस प्वाइंट ब्याज दर बढ़ सकती है और इसके बाद हर 6 महीने में इसमें बढ़त जारी रहेगी। ऐसे में दिसंबर तिमाही में सोने का औसत भाव 1325 डॉलर रहने का अनुमान है। साथ ही इस पूरे साल के दौरान सोने का औसत भाव 1272 डॉलर रह सकता है। फिलहाल एमसीएक्स पर सोना 0.18 फीसदी की मजबूती के साथ 31430 रुपये के ऊपर कारोबार कर रहा है।
एबीएन एमरो ने चांदी पर भी अनुमान घटाया है। बैंक का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरें घटने से डॉलर मजबूत होगा और ऐसे में कमोडिटी बाजार के समीकरण पर इसका असर पड़ेगा। फिलहाल एमसीएक्स पर चांदी 0.25 फीसदी टूटकर 47490 रुपये के आसपास दिख रही है।
कच्चे तेल की बात करें तो एमसीएक्स पर कच्चा तेल 1.4 फीसदी की उछाल के साथ 3000 रुपये के ऊपर कारोबार कर रहा है। जबकि नैचुरल गैस 0.18 फीसदी की बढ़त के साथ 180 रुपये के ऊपर कारोबार कर रहा है।
इस दौरान डॉलर में आई गिरावट से एलएमई पर कॉपर को सपोर्ट मिला है। साथ ही कच्चे तेल में भी करीब 0.5 फीसदी बढ़त पर कारोबार हो रहा है। हालांकि अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की आज इन्वेंट्री रिपोर्ट भी आएगी जिसपर बाजार की नजर टिकी हुई है। हालांकि डॉलर में आई गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला है और रुपया करीब 0.25 फीसदी मजबूत हो गया है।
बेस मेटल्स की बात करें तो एमसीएक्स पर एल्युमीनियम 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ 105 रुपये के आसपास नजर आ रहा है। जबकि कॉपर कराब 1 फीसदी की तेजी के साथ 315 रुपये के करीब कारोबार कर रहा है। जबकि निकेल में 0.35 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार हो रहा है।........ स्रोत : CNBC-Awaaz

चीनी का निर्यात मूल्य में बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान चीनी का निर्यात मूल्य के हिसाब से 23.23 फीसदी बढ़कर 2,990.22 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2,426.59 करोड़ रुपये का ही निर्यात हुआ था।...........आर एस राणा

कमोडिटी बाजार: कच्चे तेल की तेजी हवा, क्या करें

कच्चे तेल की शुरुआती तेजी हवा हो गई है। घरेलू बाजार में कच्चे तेल में अब सिर्फ 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है। दरअसल ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट का दाम करीब 1 फीसदी गिर गया है। नायमैक्स पर भी क्रूड की बढ़त कम हो गई है। शुरुआती कारोबार में क्रूड में करीब 2 फीसदी की तेजी आई थी। वहीं सोने में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। रुपये में मजबूती से घरेलू बाजार में चांदी भी कमजोर है। जबकि बेस मेटल्स में भारी उठापटक हो रही है। कॉपर और निकेल में तेजी है। लेकिन जिंक और लेड का दाम करीब 0.5 फीसदी से 1 फीसदी गिर गया है।

रुपये में आई रिकवरी का असर घरेलू बाजार में कमोडिटी बाजार पर दिख रहा है। सोने पर दबाव बढ़ गया है। चांदी में भी दबाव दिख रहा है। हालाकि त्योहारों के सीजन में सोने की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सोने पर डिस्काउंट पिछले 3 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। फिलहाल 10 ग्राम पर सिर्फ 400 रुपये का ही डिस्काउंट मिल रहा है। बढ़ती मांग का असर सोने के इंपोर्ट पर भी पड़ा है और अगस्त में सोने का इंपोर्ट करीब 5 टन बढ़ गया है। घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर कॉपर 0.34 फीसदी बढ़कर 315 रुपये के करीब दिख रहा है। वहीं चांदी 0.03 फीसदी की कमजोरी के साथ 46450 के आसपास दिख रही है।

वहीं एग्री कमोडिटी में सोयाबीन का दाम करीब 1 फीसदी गिर गया है। लेकिन हल्दी और जीरे में करीब 1 से 1.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है। चीनी में भी आज तेजी आई है। वहीं ग्वार में 4 फीसदी का ऊपरी सर्किट लग चुका है। लेकिन कपास खली में बिकवाली हावी है। एनसीडीईएक्स पर हल्दी का सितंबर वायदा 0.25 फीसदी की कमजोरी के साथ 68.50 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि सोया तेल का सितंबर वायदा 0.6 फीसदी गिरकर 650 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।....स्रोत : CNBC-Awaaz

मूंगफली दाने का निर्यात 45 फीसदी ज्यादा

मूंगफली की बुवाई ज्यादा होने से उत्पादन बढ़ेगा
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान मूंगफली दाने का निर्यात 44.70 फीसदी बढ़कर 1,671.07 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,145.84 करोड़ रुपये का हुआ था।
चालू वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान 1,53,229 टन मूंगफली दाने का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में केवल 1,20,165 टन मूंगफली दाने का निर्यात हुआ था।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मंूगफली की बुवाई बढ़कर 44.24 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 35.70 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। प्रमुख मूंगफली उत्पादक राज्यों गुजरात, कर्नाटका और आंध्रप्रदेष में इसकी बुवाई में बढ़ोतरी हुई है जबकि राजस्थान में बुवाई पिछले साल की तुलना में कुछ कम है। इस समय उत्पादक मंडियांें में मूंगफली का भाव 5,000 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है तथा आगामी महीने में नई फसल की आवक बनने पर इसकी कीमतों मंे गिरावट आने की संभावना है।
गुजरात में चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 16.33 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 12.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। इसी तरह से कर्नाटका में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 5.19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल 3.30 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। आंध्रप्रदेष में चालू खरीफ में इसकी बुवाई 9.18 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 6.12 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। राजस्थान में चालू खरीफ में बुवाई केवल 4.40 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 4.75 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.......आर एस राणा

कच्चे तेल में शानदार तेजी, क्या करें

डॉलर के मुकाबले रुपये में शानदार रिकवरी आई है। 1 डॉलर की कीमत 66.5 रुपये के पास आ गई है। रुपया करीब 0.5 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 4 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। दरअसल अमेरिका में पिछले हफ्ते रोजगार के कमजोर आंकड़ों से वहां अब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कमजोर पड़ गई है। ऐसे में डॉलर में गिरावट आई है और इसी से रुपये को सपोर्ट मिला है।
उधर पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद आज कच्चे तेल में शानदार तेजी आई है। खबर है कि रूस और सऊदी अरब कच्चे तेल पर टास्क फोर्स बनाने के लिए सहमत हो गए हैं। हालांकि नैचुरल गैस में गिरावट का रुख है। एमसीएक्स पर कच्चा तेल 1.3 फीसदी बढ़कर 3020 रुपये के आसापसकारोबार कर रहा है। जबकि नैचुरल गैस 0.25 फीसदी की कमजोरी के साथ 185 रुपये के नीचे दिख रहा है।इस बीच रुपये में आई रिकवरी का असर घरेलू बाजार में कमोडिटी बाजार पर दिख रहा है। सोने पर दबाव बढ़ गया है। चांदी में भी दबाव दिख रहा है। हालाकि त्योहारों के सीजन में सोने की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सोने पर डिस्काउंट पिछले 3 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। फिलहाल 10 ग्राम पर सिर्फ 400 रुपये का ही डिस्काउंट मिल रहा है। बढ़ती मांग का असर सोने के इंपोर्ट पर भी पड़ा है और अगस्त में सोने का इंपोर्ट करीब 5 टन बढ़ गया है। एमसीएक्स पर सोना 0.10 फीसदी की कमजोरी के साथ 30955 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि चांदी 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 46385 रुपये के आसपास दिख रहा है।
इस बीच कॉपर और निकेल को छोड़कर बाकी मेटल में दबाव है। स्टैनचार्ट अब एल्युमीनियम में भी ओवर सप्लाई का अनुमान जता रहा है। वहीं जेपी मॉर्गन ने इस साल के अंत तक लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर को 4400 डॉलर तक गिरने का टार्गेट का दिया है। दरअसल कॉपर की सप्लाई लगातार बढ़ रही है। फिलहाल ये लंदन मेटल एक्सचेंज पर ये 3.25 लाख टन के पार चला गया है। एमसीएक्स पर एल्युमीनियम 0.25 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। जबकि कॉपर में 0.3 फीसदी की बढ़त पर करोबार हो रहा है। जबकि निकेल 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ 670 रुपये के आसपास दिख रहा है।
एग्री कमोडिटीज की बात करें तो रुपए में रिकवरी से खाने के तेलों में गिरावट आई है। वहीं सोयाबीन में बिकवाली से सोया तेल पर दोहरा दबाव पड़ा है। मसालों में जीरे का दाम करीब 1 फीसदी बढ़ गया है। वहीं ग्वार में भी करीब 2 फीसदी के ऊपर कारोबार हो रहा है।इधर खबरें हैं कि देश में इस साल प्याज की रिकॉर्ड पैदावार हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून तक प्याज की पैदावार करीब 11 फीसदी बढ़कर 2.1 करोड़ टन के पार चली गई है। जबकि पिछले साल पैदावार में करीब 18 फीसदी की गिरावट आई थी और 1.9 करोड़ टन से भी कम प्याज की पैदावार हुई थी। ज्यादा प्याज पैदा होने की वजह से ही इस साल प्याज की कीमतें करीब 7 रुपये किलो चल रही हैं। जबकि पिछले साल इस अवधि में प्याज 45 रुपये किलो बिक रही थी।(hindimoneycantrol.com)

05 September 2016

कमोडिटी बाजार में कहां लगाएं दांव

अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने में देरी के अनुमान से डॉलर में गिरावट आई है ऐसे में रुपया को जोरदार सपोर्ट मिला है और 1 डॉलर की कीमत करीब 30 पैसे गिरकर 66.5 रुपये के पास आ गई है। हालांकि डॉलर में गिरावट से ग्लोबल मार्केट में सोने की चमक बढ़ गई है और कॉमैक्स पर सोना 1325 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। इसके साथ चांदी का दाम भी बढ़कर 19 डॉलर के पार चला गया है। फिलहाल घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर सोना 0.1 फीसदी की कमजोरी के साथ 30955 रुपये के आसपास दिख रहा है। वहीं चांदी 1.5 फीसदी घटकर 46385 रुपये के आसपास कारोबार कर रही है। 
कच्चे तेल में भी तेजी आई है। कीमतों में स्थिरता लाने के लिए रुस और सऊदी अरब के बीच सहमति बनने की खबरों के बाद ब्रेंट का दाम 47 डॉलर के पार चला गया है। ग्लोबल मार्केट में नैचुरल गैस का दाम भी आज करीब एक परसेंट गिर गया है। घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर कच्चा तेल 1.3 फीसदी चढ़कर 3020 रुपये के आसपास दिख रहा है। वहीं नैचुरल गैस 0.3 फीसदी की कमजोरी के साथ 185 रुपये के नीचे दिख रहा है।
इस बीच बेस मेटल्स बेहद छोटे दायरे में है और लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में सपाट कारोबार हो रहा है। दरअसल जेपी मॉर्गन ने दिसंबर तिमाही तक कॉपर में ओवर सप्लाई बढ़ने से इसे 4400 डॉलर तक गिरने का टार्गेट दिया है। वहीं स्टैनचार्ट को एल्युमीनियम में भी ओवर सप्लाई की आशंका है। फिलहाल एमसीएक्स पर एल्यूमीनियम 0.25 फीसदी की बढ़त के साथ 105 रुपये के आसापस कारोबार कर रहा है। जबकि कॉपर 0.3 फीसदी की मजबूती के साथ 310 रुपये के ऊपर कारोबार कर रहा है। वहीं निकेल 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 670 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि लेड 0.4 फीसदी की कमजोरी के साथ 130 रुपये पर दिख रहा है। वहीं जिंक 0.7 फीसदी की कमजोरी के साथ 155 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।
एग्री कमोडिटीज में एनसीडीईएक्स पर जीरे का सितंबर वायदा 1.2 फीसदी की बढ़त के साथ 18250 रुपये के आसापस कारोबार कर रहा है। जबकि गेंहूं का सितंबर वायदा 0.06 फीसदी की हल्की कमजोरी के साथ 1750 रुपये के आसपास दिख रहा है। (hindimoneycantorl.com)

ग्वार गम उत्पादों का निर्यात मूल्य में 26 फीसदी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात मूल्य के हिसाब से 26.17 फीसदी कम हुआ है। इस दौरान देष से केवल 1,023.74 करोड़ रुपये मूल्य का ही ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,386.55 करोड़ रुपये मूल्य का ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था।......आर एस राणा

पहली तिमाही में धनिया का निर्यात 33 फीसदी कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान धनिया के निर्यात में 33 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 10,300 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 15,454 टन का हुआ था।
विष्व बाजार में भारतीय धनिया का भाव 1.32 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका भाव 1.98 डॉलर प्रति किलो था। सूत्रों के अनुसार उत्पादक मंडियांें में धनिया का स्टॉक ज्यादा है, साथ ही धनिया का आयात भी हो रहा है जिसकी वजह से इसकी कीमतों में अभी तेजी की संभावना नहीं है।
धनिया की पैदावार चालू सीजन में करीब 150 लाख बोरी (एक बोरी-40 किलो) की हुई थी। कुल उत्पादन में मध्य प्रदेष में मध्य प्रदेष में 50 लाख बोरी, गुजरात में 30 लाख बोरी और राजस्थान में 30 लाख बोरी का उत्पादन हुआ था। इसके अलावा दक्षिण भारत के राज्यों में भी करीब 25 से 30 लाख बोरी का उत्पादन हुआ। आगामी दिनों में धनिया की कीमतों में तेजी-मंदी काफी हद तक बुवाई की स्थिति पर भी निर्भर करेगी।....आर एस राणा

बासमती चावल का निर्यात मूल्य में घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान बासमती चावल के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 3.09 फीसदी की गिरावट आकर इस दौरान 8,140.06 करोड़ रुपये मूल्य का ही बासमती चावल का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 8,399.39 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल का निर्यात हुआ था।
हालांकि इस दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात मूल्य के हिसाब से 1.67 फीसदी बढ़कर कुल 5,698.48 करोड़ रुपये मूल्य का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 5,605.06 करोड़ रुपये मूल्य का गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ था।
नरेला मंडी में पूसा-1,509 बासमती धान की आवक षुरु हो गई है तथा मांग कम होने से भाव घटकर 1,825 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। चालू सीजन में धान की रौपाई में बढ़ोतरी हुई है तथा अभी तक मौसम भी फसल के अनुकूल है ऐसे में चावल की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है इसलिए धान की कीमतों में और गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि जानकारों का मानना है कि चालू सीजन में बासमती धान की पैदावार कम 8 से 10 फीसदी कम होने की आषंका है।......आर एस राणा

03 September 2016

बाजरा के साथ मक्का पैदावार का लक्ष्य ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। कृषि मंत्रालय ने चालू खरीफ में जहां बाजरा की पैदावार का लक्ष्य पिछले साल से ज्यादा तय किया है वहीं मक्का की पैदावार भी ज्यादा होने का अनुमान लगाया है। मंत्रालय ने फसल सीजन 2016-17 में 95 लाख टन बाजरा के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है वहीं खरीफ सीजन में मक्का की पैदावार 175 लाख टन होने का लक्ष्य तय किया गया है।
फसल सीजन 2015-16 में खरीफ सीजन में जहां मक्का की पैदावार 152.4 लाख टन की हुई थी वहीं बाजरा की पैदावार 80.6 लाख की हुई थी। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू खरीफ में बजारा के साथ ही मक्का के बुवाई क्षेत्रफल में तो बढ़ोतरी हुई है लेकिन पैदावार लक्ष्य किए गए लक्ष्य से कम होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक बाजरा की बुवाई बढ़कर 68.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 67.38 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। इसी तरह से खरीफ सीजन में मक्का की बुवाई बढ़कर 83.29 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 74.60 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए जहां बाजारा का एमएसपी 1,330 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है वहीं मक्का का एमएसपी 1,365 रुपये प्रति क्विंटल है। माना जा रहा है चालू खीरफ में मक्का की पैदावार ज्यादा होगी, तथा विष्व बाजार में भाव नीचे बने हुए हैं ऐसे में अक्टूबर में फसल की आवक का दबाव बनने पर उत्पादक मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे आने का अनुमान है। बाजरा की कीमतों में भी अक्टूबर में करीब 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आने का अनुमान है।........आर एस राणा

दलहन की पैदावार तय लक्ष्य से ज्यादा होने की संभावना

उड़द, मूंग और अरहर की कीमतों में तेजी की उम्मीद नहीं
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में दलहन की पैदावार कृषि मंत्रालय के तय लक्ष्य से भी ज्यादा होने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की पैदावार 72.5 लाख टन होने का लक्ष्य तय किया गया था लेकिन चालू खीरफ में हुई बुवाई में भारी बढ़ोतरी के साथ ही अनुकूल मौसम को देखते हुए पैदावार तय लक्ष्य से ज्यादा होने का अनुमान है।
मूंग और उड़द की नई फसल की आवक षुरु हो चुकी है तथा इनके भाव में गिरावट भी आई है लेकिन कर्नाटका और महाराष्ट्र में सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद षुरु करने की संभावना से भाव में कुछ सुधार आया है लेकिन पैदावार में बढ़ोतरी और सरकारी एजेंसियों द्वारा तय मात्रा में खरीद करने से तेजी की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में दैनिक आवक बढ़ने पर इनकी कीमतों में गिरावट ही आने का अनुमान है। अरहर की नई फसल की आवक दिसंबर-जनवरी में बनेगी, अतः इसकी कीमतों में भी तेजी की संभावना नहीं है।
फसल सीजन 2015-16 में खरीफ सीजन में 55.4 लाख टन दलहन की पैदावार हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख अरहर की पैदावार 2015-16 में 24.6 लाख टन की हुई थी जबकि चालू खरीफ में बुवाई में हुई भारी बढ़ोतरी को देखते हुए रिकार्ड पैदावार 35 से 38 लाख टन होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अरहर की बुवाई बढ़कर 51.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 35.22 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
इसी तरह से उड़द की पैदावार भी चालू खरीफ में पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है। फसल सीजन 2015-16 में खरीफ सीजन में उड़द की पैदावार 13.9 लाख टन की हुई थी जबकि चालू खरीफ में हुई बुवाई में बढ़ोतरी से इसकी पैदावार 14 से 16 लाख टन होने का अनुमान है। चालू खरीफ में उड़द की बुवाई बढ़कर 34.36 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 27 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
मूंग का उत्पादन भी चालू खरीफ में बढ़ने का अनुमान है। फसल सीजन 2015-16 में खरीफ सीजन में मूंग का उत्पादन 10.2 लाख टन का हुआ था जबकि चालू सीजन में इसकी पैदावार बढ़कर 15 से 16 लाख टन होने का अनुमान है। चालू खरीफ में मूंग की बुवाई बढ़कर 33.04 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 24.27 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। अरहर, उड़द के अलावा अन्य खरीफ की दलहन की पैदावार भी पिछले साल से ज्यादा होने का अनुमान है।
पिछले तीन साल से दलहन आयात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है लेकिन माना जा रहा है कि खरीफ के साथ ही रबी में भी दलहन की पैदावार ज्यादा होगी जिससे आयात में कमी आने की आषंका है। कृषि मंत्रालय ने फसल सीजन 2016-17 में दलहन की कुल पैदावार का लक्ष्य 207.5 लाख टन का रखा है इसमें जहां खरीफ की हिस्सेदारी 72.5 लाख टन की है, वहीं रबी में 135 लाख टन दलहन की पैदावार का लक्ष्य है।
वित्त वर्ष 2015-16 में दलहन का रिकार्ड आयात 54 लाख टन से ज्यादा का हुआ है जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2014-15 में आयात 45.84 लाख टन का और वित्त वर्ष 2013-14 में 36.54 लाख टन का हुआ था।
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए अरहर का एमएसपी 5,050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उड़द का एमएसपी 5,000 रुपये और मूंग का एमएसपी 5,225 रुपये प्रति क्विंटल (सभी बोनस सहित) तय किया हुआ है।............आर एस राणा