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12 December 2017

राजस्थान में चना की बुवाई तय लक्ष्य के करीब, सरसों की घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में राजस्थान में 8 दिसंबर 2017 तक जहां चना की बुवाई तय लक्ष्य के करीब पहुंच गई है वहीं सरसों की बुवाई में कमी आई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चना की बुवाई 99.5 फीसदी होकर कुल 14.91 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि लक्ष्य 15 लाख हैक्टेयर का तय किया गया था। हालांकि पिछले साल राज्य में चना की बुवाई 15.48 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
सरसों की बुवाई चालू रबी में राज्य में अभी तक केवल 19.43 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि राज्य के कृषि निदेशालय ने 26 लाख हैक्टेयर का लक्ष्य तय किया था। अतः कुल बुवाई तय लक्ष्य का केवल 74.8 फीसदी ही हो पाई है। पिछले साल राज्य में सरसों की बुवाई 25.04 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
अन्य फसलों में गेहूं की बुवाई चालू रबी में 8 दिसंबर 2017 तक राज्य में 23.67 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 24.55 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। जौ की बुवाई चालू सीजन में राज्य में 2.99 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि बुवाई का लक्ष्य 3 लाख हैक्टेयर का तय किया गया था। पिछले साल राज्य में इस समय तक 2.76 लाख हैक्टेयर में ही जौ की बुवाई हुई थी।.............  आर एस राणा

गुजरात में जीरा की बुवाई सामान्य से भी ज्यादा, धनिया की घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में जहां जीरा की बुवाई 11 दिसंबर 2017 तक बढ़कर 111 फीसदी क्षेत्रफल में हो चुकी है, वहीं धनिया की बुवाई केवल 62 फीसदी क्षेत्रफल में ही हो पाई है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में जीरा की बुवाई बढ़कर 3.11 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में केवल 2.26 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। सामान्यतः जीरा की बुवाई गुजरात में 2.80 लाख हैक्टेयर में होती है। चालू सीजन में जीरा की कीमतों में आई तेजी को देखते हुए किसानों ने इसकी बुवाई ज्यादा की है।
धनिया की बुवाई चालू सीजन में गुजरात में अभी तक केवल 63,600 हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 1 लाख हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में धनिया की बुवाई हो चुकी थी। सामान्यतः धनिया की बुवाई गुजरात में एक लाख हैक्टेयर में ही होती है।
अन्य फसलों में सौंफ की बुवाई चालू सीजन में राज्य में 11 दिसंबर 2017 तक 33 हजार हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 36,900 हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इसबगोल की बुवाई चालू सीजन में गुजरात में 16,700 हैक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9,700 हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।..............   आर एस राणा

कच्चे तेल में रिकवरी

कल की जोरदार गिरावट के बाद कच्चे तेल में आज रिकवरी आई है। दरअसल एपीआई की रिपोर्ट में अमेरिका में क्रूड का भंडार 74 लाख बैरल गिर गया है। ऐसे में ब्रेंट करीब 1 फीसदी ऊपर 64 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। आज अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट की भी इन्वेंट्री रिपोर्ट आएगी, जिस पर बाजार की नजर है। इस बीच डॉलर इंडेक्स एक महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। ऐसे में रुपये पर दबाव बढ़ गया है। एक डॉलर की कीमत 64.50 रुपये के पार चली गई है। रुपया कमजोर हो गया है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की बैठक का आज दूसरा दिन है। आज भारतीय समयानुसार देर रात फेड का फैसला आ जाएगा। जिसमें वहां ब्याज दरें बढ़ने की जोरदार संभावना है। इससे पहले कल घरेलू बाजार में सोने का दाम पिछले एक साल के निचले स्तर पर लुढ़क गया।

कपास का 377 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान-सीएबी

आर एस राणा
नई दिल्ली। कॉटन एडवाईजरी बोर्ड (सीएबी) के अनुसार चालू फसल सीजन 2017-18 में कपास का 377 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) के उत्पादन का अनुमान है। मंगलवार को टैक्सटाईल कमिश्नर आफ इंडिया की अध्यक्षता में हुई सीएबी की बैठक के अनुसार चालू फसल सीजन में पहली अक्टूबर को 47.81 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचा हुआ था जबकि 17 लाख गांठ कपास का आयात होने का अनुमान है। अतः कुल उपलब्धता करीब 441.81 लाख गांठ की बैठेगी।
सीएबी के अनुसार पिछले साल देश में कपास का उत्पादन 345 लाख गांठ का हुआ था, जबकि नई फसल की आवक के समय 36.44 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। पिछले फसल सीजन में देश में 30.94 लाख गांठ कपास का आयात हुआ था, अतः कुल उपलब्धता पिछले साल 412.38 लाख गांठ की बैठी थी।
सीएबी के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में 67 लाख गांठ कपास का निर्यात होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 2016-17 में 58.21 लाख गांठ कपास का निर्यात हुआ था। चालू सीजन में कपास की कुल खपत निर्यात को मिलाकर 401 लाख गांठ की होने का अनुमान है तथा आगामी सीजन के आरंभ में 40.81 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचेगा।
सीएबी के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में कपास का उत्पादन 104 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 85 लाख गांठ, तेलंगाना में 57 लाख गांठ, आंध्रप्रदेश में 22 लाख गांठ, कर्नाटका में 19 लाख गांठ, मध्य प्रदेश में 20 लाख गांठ, राजस्थान में 22 लाख गांठ, हरियाणा में 25 लाख गांठ और पंजाब में 12 लाख गांठ तथा तमिलनाडु में 6 लाख गांठ और उड़ीसा में 3 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान है।
विश्व बाजार में गत सप्ताह कपास का भाव बढ़कर 74 सेंट प्रति पाउंड हो गया था, जिससे घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में सुधार आया था, हालांकि अभी निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं तथा मंगलवार को विश्व बाजार में कपास का भाव घटकर 73 सेंट प्रति पाउंड रह गया। ऐसे में घरेलू बाजार में भी इसकी कीमतों में नरमी बन सकती है। उत्पादन मंडियों में दैनिक आवक मंगलवार को 1.85 लाख गांठ की हुई। चालू सीजन में कपास का उत्पादन तो ज्यादा है ही, साथ ही बकाया स्टॉक भी ज्यादा बचा हुआ है, ऐसे में आगामी दिनों में इसकी कीमतों में तेजी-मंदी निर्यात मांग पर निर्भर करेगी।.............  आर एस राणा

11 December 2017

कच्चे तेल में जोरदार तेजी

कच्चे तेल में जोरदार तेजी आई है और ब्रेंट का दाम पिछले ढाई साल के ऊपरी स्तर पर चला गया है। फिलहाल इसमें 65 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। फोर्टिस पाइपलाइन के फटने की वजह से इसे बंद कर दिया गया है। ऐसे में सप्लाई पर असर की आशंका है और इसी वजह से क्रूड की कीमतों में तेजी आई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 58 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। कल यूएस फेड की बैठक है और ब्याज दरें बढ़ाने पर फैसला हो सकता है।  सोने और चांदी में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। इस बीच चीन में बेस मेटल का भाव उछल गया है। कॉपर समेत सभी मेटल बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। इस बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में आज हल्की कमजोरी है। हालांकि इसके बावजूद डॉलर की कीमत 64.5 रुपये के नीचे है।

10 December 2017

गुजरात में जीरा की बुवाई बढ़ी, धनिया की घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में जहां जीरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं धनिया की बुवाई पिछड़ी है। राज्य सरकार के अनुसार राज्य में 4 दिसंबर तक जीरा की बुवाई 96 फीसदी पूरी हो चुकी है जबकि धनिया की बुवाई अभी तक केवल 57 फीसदी ही पूरी हो पाई है। सौंफ की बुवाई राज्य में अभी तक 75 फीसदी पूरी हो चुकी है। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में जीरा की कीमतों में आई तेजी से इसकी बुवाई बढ़ी है जबकि धनिया के भाव कम होने के कारण किसानों ने इसकी बुवाई कम की है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 4 दिसंबर 2017 तक जीरा की बुवाई बढ़कर 2.68 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.80 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। राज्य में जीरा की बुवाई सामान्यतः 2.80 लाख हैक्टेयर में जीरा की बुवाई होती है।
धनिया की बुवाई चालू सीजन में राज्य में अभी तक केवल 57,300 हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल राज्य में इस समय तक 69,000 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हो चुकी थी। सामान्यतः राज्य में धनिया की बुवाई एक लाख हैक्टेयर में होती है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार सौंफ की बुवाई चालू सीजन में राज्य में 4 दिसंबर तक 29,300 हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले 26,200 हैक्टेयर में ही हुई थी। सामान्यतः सौंफ की बुवाई गुजरात में 38,800 हैक्टेयर में होती है। .............   आर एस राणा

कच्चे तेल में गिरावट

अमेरिका में उत्पादन बढ़ने के अनुमान से कच्चे तेल में गिरावट बढ़ गई है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 0.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे हैं। दरअसल अमेरिका में तेल के कुओं की संख्या बढ़ गई है। वहीं डॉलर के मुकाबले आज रुपये में मजबूती आई है। एक डॉलर की कीमत 64.40 रुपये के नीचे आ गई है। ग्लोबल मार्केट में सोना 4.5 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है। सोना 1250 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। दरअसल इस हफ्ते फेडरल रिजर्व की अहम बैठक है, जिसमें अमेरिका में ब्याज दरें ब‍ढ़ाने का फैसला हो सकता है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका में रोजगार के आंकड़े काफी अच्छे आए थे। ऐसे में वहां ब्याज दरें बढ़ने की संभावना काफी मजबूत हो गई है। सोने के साथ चांदी में भी गिरावट आई है और ये भी करीब 4.5 महीने के निचले स्तर है। चांदी 16 डॉलर के काफी नीचे कारोबार कर रही है।


08 December 2017

रबी में गेहूं के साथ ही तिलहनों की बुवाई पिछड़ी, दलहन की बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में गेहूं के साथ ही तिलहनों की बुवाई पिछड़ी है जबकि दलहन की बुवाई आगे चल रही है। मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हो चुकी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में कुल फसलों की बुवाई अभी तक केवल 442.29 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल के समान अवधि में 448.48 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई घटकर 190.87 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 203.56 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रबी दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 127.62 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 119.13 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चना के साथ ही मसूर की बुवाई भी आगे चल रही है। चना की बुवाई बढ़कर 89.58 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 81.25 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। इसी तरह से मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में 14.84 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 13.98 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। उड़द के साथ ही मूंग की बुवाई जरुर चालू रबी में पिछड़ रही है।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में अभी तक 44.14 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय 44.05 लाख हैक्टेयर में हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार घटकर 27.61 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 28.82 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। जौ की बुवाई भी चालू रबी में घटकर 5.88 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 6.02 लाख हैक्टेयर में जौ की बुवाई हो चुकी थी। मक्का की बुवाई जरुर चालू रबी में बढ़कर 9.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक मक्का की बुवाई केवल 8.87 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।
चालू रबी में तिलहनों की बुवाई घटकर 67.79 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 72.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई अभी तक केवल 59.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 64.21 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी में मूंगफली की बुवाई 3.21 लाख हैक्टेयर में और अलसी की बुवाई 2.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है। धान की रौपाई चालू रबी में बढ़कर अभी तक 11.87 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.98 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।...............   आर एस राणा

07 December 2017

सोने का दाम 1250 डॉलर के नीचे

अमेरिका में आज नॉन फार्म पेरोल डाटा आएगा और इससे पहले सोना पिछले करीब 4.5 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1250 डॉलर के नीचे आ गया है। घरेलू बाजार में कल ही सोना 29000 रुपये के नीचे गिर गया था।  अमेरिका में इस साल ब्याज दरें बढ़ने के अनुमान और टैक्स रिफार्म से डॉलर में इस हफ्ते करीब 1 फीसदी की मजबूती आ चुकी है। ऐसे में चांदी पर दोहरी मार पड़ी है और इसका दाम इस साल के निचले स्तर के पास आ गया है। हाजिर में तो चांदी 37000 रुपये के भी नीचे का स्तर छू चुकी है। पिछले सिर्फ दो महीने में चांदी की कीमतें करीब 10 फीसदी तक टूट चुकी हैं। डॉलर में बढ़त का असर कच्चे तेल पर भी पड़ा है और ग्लोबल मार्केट में इसमें गिरावट पर कारोबार हो रहा है। नायमैक्स पर दाम 57 डॉलर के नीचे आ गया है। ब्रेंट में 62 डॉलर पर कारोबार हो रहा है। हालांकि डॉलर में बढ़त से रुपये पर दबाव पड़ा है और रुपया हल्की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है।

06 December 2017

राजस्थान में सरसों के साथ चना की बुवाई लक्ष्य से कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों के साथ ही चना की बुवाई लक्ष्य से कम हुई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 4 दिसंबर तक राज्य में सरसों की बुवाई केवल 20.15 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि लक्ष्य 26 लाख हैक्टेयर का था। पिछले साल इस समय तक राज्य में 25.04 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। अतः इस बार राज्य में सरसों के उत्पादन में कमी आना तय है।
चना की बुवाई भी चालू रबी में राजस्थान में 4 दिसंबर तक केवल 13.95 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 15.48 लाख हैक्टेयर में चना की बुवाई हो चुकी थी। चालू रबी में चना की बुवाई का लक्ष्य राज्य में 15 लाख हैक्टेयर का तय किया था।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार गेहूं की बुवाई अभी तक राज्य में 19.42 लाख हैक्टेयर में और जौ की बुवाई 2.75 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में इनकी बुवाई क्रमशः 22.77 लाख हैक्टेयर और 2.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में गेहूं की बुवाई का लक्ष्य 32 लाख हैक्टेयर है जबकि जौ की बुवाई का लक्ष्य 3 लाख हैक्टेयर तय किया है। .............   आर एस राणा

नवंबर में सोयाबीन की दैनिक आवक बढ़ी, डीओसी के निर्यात में भी बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। अक्टूबर के मुकाबले नवंबर महीने में सोयाबीन की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में ज्यादा हुई है। उत्पादक मंडियों में नवंबर में सोयाबीन की दैनिक आवक बढ़कर 19 लाख टन की हुई है जबकि अक्टूबर में केवल 15.50 लाख टन की ही आवक हुई थी। नवंबर में सोया डीओसी का निर्यात भी बढ़कर 2.48 लाख टन का हुआ है जबकि अक्टूबर में इसका निर्यात केवल 0.77 लाख टन का ही हुआ था।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2017-18 के पहले दो महीनों अक्टूबर-नवंबर में डीओसी का निर्यात 3.25 लाख टन का हुआ है जबकि इस दौरान सोया डीओसी का उत्पादन 14.18 लाख टन का हुआ है। चालू तेल वर्ष 2017-18 में सोया डीओसी का कुल निर्यात बढ़कर 24 से 25 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले तेल वर्ष में इसका निर्यात केवल 20 लाख टन का ही हुआ था।
सोपा के अनुसार उत्पादक मंडियों में चालू तेल वर्ष 2017-18 के पहले दो महीनों अक्टूबर-नवंबर के दौरान 34.50 लाख टन सोयाबीन की आवक हो चुकी है। चालू फसल सीजन में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 91.46 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि नई फसल के समय बकाया करीब 13.93 लाख टन को मिलाकर कुल उपलब्धता 105.39 लाख टन की बैठेगी।  ...............  आर एस राणा

कच्चे तेल में आज रिकवरी

कल की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में आज रिकवरी आई है। अमेरिका में उत्पादन बढ़ने से कल क्रूड का दाम पिछले 20 दिन के निचले स्तर पर फिसल गया था। हालांकि भंडार में कमी से निचले स्तर से आज रिकवरी लौटी है। रिकवरी के बावजूद ब्रेंट का दाम 62 डॉलर के नीचे है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड में 57 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। सोने की चमक फीकी पड़ गई है। ग्लोबल मार्केट में सोना 1265 डॉलर के भी नीचे आ गया है। साथ ही चांदी में 16 डॉलर के भी नीचे कारोबार हो रहा है। कल अमेरिका में जारी होने वाले नॉन फार्म पेरोल डाटा पर बाजार की नजर है। वहीं लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल में सुस्ती छाई हुई है। आज डॉलर के मुकाबले रुपया एकदम से सपाट है। एक डॉलर की कीमत 64.5 रुपये के पास है।

आस्ट्रेलिया ने चना उत्पादन अनुमान में की बढ़ौतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया ने चना उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है। चालू फसल सीजन में आस्ट्रेलिया में चना का उत्पादन 12.65 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पहले अनुमान में 11.88 लाख टन चना के उत्पादन का अनुमान था। हालांकि गत सप्ताह उत्पादक क्षेत्रों में मौसम खराब रहा है लेकिन अभी तक फसल को नुकसान की खबरें नहीं आई हैं। आस्ट्रेलिया में चना की कटाई चल रही है।
आस्ट्रेलिया में चना उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में उत्पादन कम होने का अनुमान है। पिछले साल फसल सीजन 2016-17 में आस्ट्रेलिया में 20.04 लाख टन चना का उत्पादन हुआ था। आस्ट्रेलिया में मसूर का उत्पादन फसल सीजन 2016-17 के 8.30 लाख टन से घटकर 4.79 लाख टन ही होने का अनुमान है।  .............   आर एस राणा

05 December 2017

डीओसी के निर्यात पर इनसेंटिव में 2 फीसदी की बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। उद्योग की मांग को मानते हुए केंद्र सरकार ने सोया डीओसी के निर्यात पर एनसेंटिव को 5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। हालांकि उद्योग इनसेंटिव को 10 फीसदी करने की मांग कर रहा था।
सोया प्रोससर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के अनुसार केंद्र सरकार ने सोया डीओसी के निर्यात पर मिलनें वाले इनसेंटिव को 5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है इसका सबसे ज्यादा फायदा सोयाबीन किसानों को होगा।
तेल वर्ष 2016-17 (अक्टूबर-16 से सितंबर-17) के दौरान देश से करीब 20 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ था, जबकि चालू तेल वर्ष 2017-18 में 24 से 25 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात होने का अनुमान है।
सोपा के अनुसार चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 91.46 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि नई फसल की आवक के समय बकाया स्टॉक 13.93 लाख टन का बचा हुआ था, ऐसे में कुल उपलब्धता 105.39 लाख टन की बैठेगी। चालू तेल वर्ष के पहले महीनें अक्टूबर में 0.67 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है। .............   आर एस राणा

सोने और चांदी की चमक फीकी

ग्लोबल मार्केट में सोना पिछले दो महीने का निचला स्तर छू चुका है। वहीं कल घरेलू बाजार में सोना 29000 रुपये के भी नीचे फिसल चुका है जो पिछले चार महीने का निचला स्तर है। वहीं चांदी भी 4.5 महीने के निचले स्तर पर आ चुकी है। इस महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का अनुमान है और कल वहां नॉन फार्म पेरोल डाटा जारी होने वाला है। ऐसे में डॉलर धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है जिससे सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ती जा रही है। अमेरिका में भंडार बढ़ने से कच्चे तेल में भी गिरावट आई है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दबाव में कारोबार कर रहे हैं। डॉलर में बढ़त और लंदन मेटल एक्सचेंज के गोदामों में भंडार बढ़ने से कॉपर का दाम पिछले दो महीने के निचले स्तर पर आ गया है। कल इसमें भारी गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि डॉलर में बढ़त से रुपये पर दबाव बढ़ गया है। एक डॉलर की कीमत 64.40 रुपये के पार चली गई है। आज आरबीआई पॉलिसी पर भी बाजार की नजर है।

नवंबर तक 39.51 लाख टन हो चुका है चीनी का उत्पादन

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरु हुए चालू पेराई सीजन 2017-18 में 30 नवंबर 2017 तक 39.51 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के मुकाबले 11.69 लाख टन ज्यादा है। पिछले पेराई सीजन में 30 नवंबर 2016 तक केवल 27.82 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में 443 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है जबकि पिछले साल 30 नवंबर तक केवल 393 चीनी मिलों में ही पेराई आरंभ हो पाई थी। महाराष्ट्र में 170 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है तथा राज्य में 30 नवंबर 2017 तक 14.90 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में केवल 9.42 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में अभी तक 13.59 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 8.48 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में 110 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 103 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो पाई थी।
कर्नाटका में चालू पेराई सीजन में 30 नवंबर तक 6.82 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 6.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। अन्य राज्यों में गुजरात में चालू पेराई सीजन में 1.80 लाख टन और अन्य राज्यों में 2.40 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है।
चालू पेराई सीजन के आरंभ में पहली अक्टूबर को 38.76 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, जबकि चालू पेराई सीजन में 251 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है। देश में चीनी की सालाना खपत करीब 250 से 252 लाख टन की होती है।..........   आर एस राणा

कालीमिर्च का आयात बंद करने की मांग

आर एस राणा
नई दिल्ली। कर्नाटका सरकार ने केंद्र सरकार से कालीमिर्च के आयात पर रोक लगाने की मांग की है। कर्नाटका के मुख्यमंत्री ने वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु से कालीमर्च के आयात पर जल्द से जल्द रोक लगाने के लिए पत्र लिखा है। राज्य सरकार ने अनुसार सस्ता आयात होने के कारण घरेलू बाजार में कालीमिर्च की कीमतों में लगातार गिरावट बनी हुई है जिसका नुकसान कालीमिर्च उत्पादकों को उठाना पड़ रहा है।
सालभर में कालीमिर्च के भाव में करीब 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। कुमली मंडी में अनर्गाब्लड कालीमिर्च का भाव घटकर 38,700 रुपये, ग्रेड-वन का भाव 41,700 रुपये और बोल्ड क्वालिटी का भाव 44,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। भारत में कालीमिर्च का बड़े पैमाने पर आयात श्रीलंका से हो रहा है।
विश्व बाजार में कालीमिर्च की उपलब्धता ज्यादा होने से हमारे से निर्यात सीमित मात्रा में ही पा रहा है जिसकी वजह से घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में लगातार मंदा बना हुआ है। भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान कालीमिर्च के निर्यात में 13 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 3,900 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इसका निर्यात 4,465 टन का हुआ था। विश्व बाजार में भारतीय कालीमिर्च का भाव घटकर 4.63 डॉलर प्रति किलो रह गया जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका भाव 7.71 डॉलर प्रति किलो था।.............   आर एस राणा

04 December 2017

डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती

आज डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती बढ़ गई है। रुपया ढाई महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। डॉलर की कीमत 64.25 रुपये के पास है। कल की गिरावट के बाद कच्चे तेल में हल्की रिकवरी आई है। आज अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की इन्वेंट्री रिपोर्ट आने वाली है, जिसमें अमेरिका में क्रूड का भंडार गिरने का अनुमान है। वहीं स्टील की कीमतें बढ़ने से चीन में निकेल का दाम करीब 0.5 फीसदी बढ़ गया है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर ये सपाट कारोबार कर रहा है।  सोने में कल का दबाव आज भी बरकरार है और ये कल के स्तर के आसपास ही बना हुआ है। कॉमैक्स पर सोने में 1275 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। इस महीने के अंत में अमेरिका में ब्याज दरें ब‍ढ़ने का अनुमान है। ऐसे में सोने में से निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं। चांदी भी सुस्त है और चार महीने के निचले स्तर के पास कारोबार कर रही है।


कर्नाटका और मध्य प्रदेश में चना की बुवाई बढ़ी, राजस्थान में घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में कर्नाटका, मध्य प्रदेश के साथ आंध्र्रप्रदेश और महाराष्ट्र में चना की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है जबकि राजस्थान में बुवाई पिछड़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी में अभी तक चना की कुल बुवाई बढ़कर 84.37 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 78.26 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। सामान्यतः रबी में चना की बुवाई 86.80 लाख हैक्टेयर में होती है।
मंत्रालय के अनुसार कर्नाटका में चालू रबी में चना की बुवाई बढ़कर 12.73 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 8.76 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। इसी तरह से मध्य प्रदेश में चना की बुवाई बढ़कर 30.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 26.23 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। उधर आंध्रप्रदेष में चना की बुवाई पिछले साल के 2.24 लाख हैक्टेयर में बढ़कर 4.04 लाख हैक्टेयर में और महाराष्ट्र में पिछले साल के 14.22 लाख हैक्टेयर की तुलना में 14.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
राजस्थान में चना की बुवाई घटकर चालू रबी में अभी तक केवल 12.30 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 15.79 लाख हैक्टेयर में चना की बुवाई हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश में चना की बुवाई चालू रबी में 5.01 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में गुजरात में 2.02 लाख हैक्टेयर में और छत्तीसगढ़ में 1.14 लाख हैक्टेयर में चना की बुवाई हो चुकी है।
उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश और राजस्थान में चना का बकाया स्टॉक ज्यादा है, साथ ही आयातित चना के आयात सौदे ज्यादा मात्रा में हो चुके हैं, इसीलिए घरेलू बाजार में चना की कीमतों में लगातार गिरावट बनी हुई है। व्यापारियों के अनुसार नीचे भाव में मांग निकलने से इसके भाव में हल्का सुधार तो आ सकता है, लेकिन भविष्य मंदे का ही है।  ...............  आर एस राणा

कॉफी के एक्सपोर्ट में 8% की बढ़ोतरी

भारत में इस साल जनवरी से नवंबर के बीच कॉफी का एक्सपोर्ट बढ़ा है। इस दौरान पिछले साल के मुकाबले 2017 के जनवरी-नवंबर के दौरान कॉफी एक्सपोर्ट में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है। कॉफी बोर्ड के मुताबिक भारत ने जनवरी से नवंबर 2017 के बीच 3.61 लाख टन कॉफी का एक्सपोर्ट किया। इस दौरान इटली, जर्मनी और रूस ने भारत से सबसे ज्यादा कॉफी का आयात किया है। आपको बता दें कि पिछले सीजन में कॉफी के उत्पादन में 10.34 फीसदी की कमी आई थी। कॉफी का उत्पादन 3.12 लाख टन ही रह गया था।

गेहूं की बुवाई मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश के साथ ही पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में गेहूं की बुवाई पिछड़ रही है जबकि उत्तर प्रदेश में बुवाई आगे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी में गेहूं की बुवाई अभी तक केवल 156.80 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 169.57 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। सामान्यतः रबी में गेहूं की बुवाई 301 लाख हैक्टेयर में होती है।
मंत्रालय के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश में अभी तक गेहूं की बुवाई 30.52 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में इसकी बुवाई 34.91 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। पंजाब में गेहूं की बुवाई घटकर चालू रबी में अभी तक केवल 28.19 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 31.36 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
हरियाणा में चालू रबी में गेहूं की बुवाई अभी तक केवल 18.45 लाख हैक्टयेर में ही हुई है, जबकि पिछले साल राज्य में इस समय तक 21.45 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से राजस्थान में गेहूं की बुवाई अभी तक केवल 15.06 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 18.07 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश में चालू रबी में गेहूं की बुवाई बढ़कर 44.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 43.02 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
सर्दियों का सीजन होने के बावजूद भी गेहूं उत्पादों में मांग कमजोर होने से गेहूं की कीमतों में नरमी आई है। दिल्ली में सोमवार को गेहूं का भाव घटकर 1,815 से 1,820 रुपये प्रति क्विटल रह गए। दक्षिण भारत की मंडियों में आयातित गेहूं सस्ता होने के कारण दक्षिण भारत की मांग उत्तर भारत से नहीं आ रही है, जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में गेहूं का बकाया स्टॉक ज्यादा है। ऐसे में गेहूं की कीमतों में आगे भी तेजी की संभावना नहीं है। .............   आर एस राणा

03 December 2017

डॉलर दो हफ्ते की ऊंचाई पर

अमेरिका में टैक्स बिल पास होने के बाद डॉलर दो हफ्ते की ऊंचाई पर चला गया है, ऐसे में सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ गई है। ग्लोबल मार्केट में सोना 1275 डॉलर के स्तर पर आ गया है। इसमें करीब 0.5 फीससदी नीचे कारोबार हो रहा है। चांदी में भी 0.5 फीसदी की गिरावट आई है और कॉमैक्स पर ये पिछले 4 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। फिलहाल इसमें 16.3 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। अमेरिका में उत्पादन बढ़ने के अनुमान से कच्चा तेल दबाव में आ गया है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में करीब 0.5 फीसदी नीचे कारोबार हो रहा है। ब्रेंट का दाम 63.5 डॉलर के नीचे है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 58 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है। ओपेक के उत्पादन कटौती अगले साल जारी रखने के फैसले के बाद अमेरिका में ऑयल रिग की संख्या बढ़ गई है। डॉलर के मुकाबले रुपये की शुरुआती कमजोरी खत्म हो गई है। डॉलर की कीमत 64.5 रुपये पर आ गई है।

30 November 2017

सोना 1275 डॉलर के स्तर पर

सोना 1275 डॉलर के स्तर पर आ गया है। इस हफ्ते सोने में करीब 1.5 फीसदी की गिरावट आई है। घरेलू बाजार में कल ये करीब 4 महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ।  चीन के खराब आंकड़ों से शंघाई में कॉपर पर दबाव दिख रहा है। हालांकि लंदन मेटल एक्सचेंज में पर इसमें सपाट कारोबार हो रहा है।  ओपेक और गैर ओपेक में अगले साल भी कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती जारी रखने पर सहमति बन गई है। हालांकि इसका असर क्रूड की कीमतों पर खास असर नहीं पड़ा है। अभी भी ब्रेंट 63 डॉलर और नायमैक्स क्रूड 57.5 डॉलर पर कारोबार कर रहे हैं। कल डॉलर में रिकवरी आई थी, ऐसे में कीमतों पर दबाव देखने को मिला।


प्याज हुई बेलगाम, सरकार ने भी खड़े किए हाथ

तमाम कोशिशों के बावजूद प्याज की कीमतें फिलहाल कम नहीं होंगी। कम से कम सरकार ने तो कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। देश भर में प्याज 50 रुपये किलो के ऊपर है। दिल्ली में इसका भाव 80 रुपये तक पहुंच गया है। यानि थोक के मुकाबले रिटेल में दोगुना भाव। चौंकाने वाली बात ये है कि इंपोर्ट शुरु हुआ, एक्सपोर्ट का दाम तय किया गया, सरकारी एजेंसी नैफेड खुद नासिक में प्याज खरीद रही है। इसके बावजूद प्याज की कीमतें आसमान पर हैं।
चौंकाने वाली बात ये भी है कि सरकार को ये सब बात पता है। इसके बावजूद कोई एक्शन नहीं। सरकार जानती है कि मंडियों में प्याज 30 रुपये किलो बिक रहा है और कैसे ये रिटेल में 60 से 80 रुपये किलो हो जा रहा है, ये भी पता है। लेकिन इससे निपटने के लिए करें क्या, ये नहीं मालूम। कम से कम केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान के बयान से तो यहीं संकेत मिल रहा है।
इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि सरकार प्याज के अपने हाथ खड़े कर दी है। नई फसल की जोरदार आवक हो रही है। इस महीने नासिक की मंडियों में आवक बढ़कर 3 गुनी हो गई है। इसके बावजूद कीमतों पर कोई असर नहीं और सबकुछ जानते हुए सरकार सिर्फ पब्लिक को बाजार की जानकारी दे रही है। खाद्य मंत्री राम विलास पासवान का बयान है कि कीमतों पर काबू पाना सरकार के हाथ में नहीं।

बासमती चावल के निर्यात में कमी, गैर बासमती का बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के अक्टूबर महीने में जहां बासमती चावल के निर्यात में हल्की गिरावट आई है, वहीं गैर-बासमती चावल का निर्यात इस दौरान दौगुने के करीब हुआ है। अक्टूबर महीने में बासमती चावल का निर्यात घटकर 2.34 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर महीने में इसका निर्यात 2.37 लाख टन का हुआ था। गैर बासमती चावल का निर्यात अक्टूबर में बढ़कर 7.46 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर में केवल 3.33 लाख टन गैर-बासमती चावल का निर्यात ही हुआ था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान बासमती चावल के कुल निर्यात में हल्की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान बासमती चावल का निर्यात 23.65 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इसका निर्यात 23.03 लाख टन का ही हुआ था।
गैर बासमती चावल का निर्यात चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान बढ़कर 48.87 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 37.49 लाख टन का हुआ था।..................   आर एस राणा

अक्टूबर में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 24 हजार टन ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के अक्टूबर महीने में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 24 हजार टन बढ़कर कुल निर्यात 56,000 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर में इनका निर्यात केवल 32,000 टन का ही हुआ था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 2.82 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 1.96 लाख टन का ही हुआ था।   ..........   आर एस राणा

29 November 2017

डॉलर में हल्की रिकवरी

डॉलर में आई हल्की रिकवरी से ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। कॉमैक्स पर इसमें 1285 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है।  आज डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.25 फीसदी कमजोर हो गया है। एक डॉलर की कीमत 64.5 रुपये के स्तर पर चली गई है। विएना में आज ओपेक की अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में अगले साल मार्च के बाद क्रूड उत्पादन में कटौती जारी रखने पर सहमति बन सकती है। इसीलिए कच्चे तेल में आज तेजी देखी जा रही है। हालांकि दूसरी ओर अमेरिका में क्रूड का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। और अगले महीने वहां रोजाना उत्पादन का स्तर 99 लाख बैरल तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में कच्चे तेल में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। वहीं उत्पादन कटौती पर सहमति को लेकर बाजार में अनिश्चितता भी है। इससे भी क्रूड की दिशा तय नहीं हो पा रही है।


गुजरात में जीरा की बुवाई 68 फीसदी पूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में जीरा की बुवाई 68 फीसदी पूरी हो चुकी है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 27 नवंबर तक राज्य में जीरा की बुवाई बढ़कर 1.91 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में केवल 1.41 हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। राज्य में सामान्यतः जीरा की बुवाई 2.80 लाख हैक्टेयर में होती है। मौसम में ठंड बढ़ने से गुजरात के साथ ही राजस्थान में भी जीरा की बुवाई में तेजी आई है। ...............   आर एस राणा

राजस्थान में चना के साथ सरसों की बुवाई कम, उत्पादन घटने की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में राजस्थान में चना के साथ ही सरसों की बुवाई में कमी आई है, इनकी बुवाई का समय भी अब लगभग समाप्त हो चुका है अतः चालू रबी सीजन में राज्य में इनकी पैदावार में कमी आने की आशंका है।
राजस्थान कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में 27 नवंबर तक चना की बुवाई 12.30 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 15.79 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। राज्य के कृषि निदेशालय ने बुवाई का लक्ष्य चालू रबी में 15 लाख हैक्टेयर में तय किया था।
सरसों की बुवाई भी चालू रबी में राजस्थान में घटकर केवल 19.92 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 24.88 लाख हैक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी थी। राज्य के कृषि निदेशालय ने बुवाई का लक्ष्य 26 लाख हैक्टेयर का तय किया है पिछले साल कुल बुवाई 25.04 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
अन्य फसलों में गेहूं की बुवाई चालू रबी में राजस्थान में अभी तक केवल 15.05 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 18.07 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में गेहूं की बुवाई का लक्ष्य 32 हजार का तय किया हुआ है। जौ की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 2.38 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 2.21 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। राज्य में जौ की बुवाई का लक्ष्य 3 लाख हैक्टेयर का है जबकि पिछले साल जौ की कुल बुवाई 2.21 लाख हैक्टेयर में हुई थी।....   आर एस राणा

28 November 2017

क्रूड की कीमतों में करीब 0.5 फीसदी की गिरावट



अमेरिका में भंडार बढ़ने से क्रूड की कीमतों में करीब 0.5 फीसदी की गिरावट आई है। कल एपीआई की इन्वेंट्री रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक अमेरिका में क्रूड का भंडार करीब 18 लाख बैरल बढ़ गया है। आज अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट की इन्वेंट्री रिपोर्ट पर भी बाजार की नजर है। पिछले दिनों की गिरावट के बाद आज लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर और निकेल में हल्की रिकवरी आई है। वहीं आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी है। हालांकि इसके बावजूद डॉलर की कीमत 64.5 रुपये के नीचे है। उत्तर कोरिया में फिर से मिसाइल परीक्षण से सोने की चमक बढ़ गई है। ग्लोबल मार्केट में इसका दाम 1295 डॉलर के पार चला गया है। इसमें करीब 1.5 महीने के ऊपरी स्तर पर कारोबार हो रहा है। वहीं कल की गिरावट के बाद चांदी में भी रिकवरी आई है। अमेरिका में कंज्यूमर कॉन्फिडेंस 17 साल के ऊपरी स्तर पर चला गया है। वहीं भारत में सोने की मांग घट गई है। ऐसे में यहां सोने पर 1 डॉलर प्रति औंस का डिस्काउंट चल रहा है।


एफसीआई ने 9.58 लाख टन गेहूं की मांगी निविदा

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत 9.58 लाख टन गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी है। ओएमएसएस के तहत गेहूं खरीदने के लिए निविदा भरने का न्यूनतम भाव 1,790 रुपये प्रति क्विंटल है।
ओएमएसएस के तहत सबसे ज्यादा गेहूं का आवंटन महाराष्ट्र के लिए 2.84 लाख टन, हरियाणा के लिए 2.69 लाख टन, मध्य प्रदेश के लिए 1.15 लाख टन, पश्चिमी बंगाल के लिए 60 हजार टन, उड़ीसा के लिए 50 हजार टन, तमिलनाडु के लिए 26 हजार टन, कर्नाटका के लिए 24,100 टन, उत्तर प्रदेश के लिए 15 हजार टन, केरल के लिए 12,200 टन, चंडीगढ़ के लिए 10,500 टन, जम्मू-कश्मीर के लिए 7,500 टन, आंध्रप्रदेश के लिए 6,500 टन, असम के लिए 3,000 टन का आवंटन किया है।
अन्य राज्यों में बिहार के लिए 2,000 टन, हिमाचल प्रदेश के लिए 1,500 टन, छत्तीसगढ़ के लिए 1,500 टन, गुजरात के लिए 1,500 टन, झारखंड के लिए 1,000 टन और गोवा के लिए 500 टन का आवंटन किया है।..... आर एस राणा

मूल्य के हिसाब से ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 57 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले सात महीनों अप्रैल से अक्टूबर के दौरान मूल्य के हिसाब से ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 56.87 फीसदी बढ़कर 2,269.07 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 1,446.47 करोड़ रुपये का ही हुआ था।............  आर एस राणा

27 November 2017

आज डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी

 आज डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी है। एक डॉलर की कीमत 64.5 रुपये के ऊपर है।  बेस मेटल में कल भारी गिरावट के बाद आज आज चीन में निकेल का दाम करीब 2.5 फीसदी लुढ़क गया है। हालांकि लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसमें सपाट कारोबार हो रहा है। लेकिन 1 साल के ऊपरी स्तर से निकेल का दाम करीब 10 फीसदी फिसल चुका है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1.5 महीने के ऊपरी स्तर पर है। कॉमैक्स पर इसमें 1295 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। वहीं चांदी भी 17 डॉलर के ऊपर है। एमसीएक्स पर सोना 0.07 फीसदी की कमजोरी के साथ 29475 रुपये के आसपास दिख रहा है। वहीं, चांदी 0.01 फीसदी की मामूली कमजोरी के साथ 39265 रुपये के करीब दिख रही है। ओपेक की बैठक से पहले कच्चे तेल में दबाव दिख रहा है। नायमैक्स पर क्रूड का दाम करीब 0.5 फिसल गया है। ब्रेंट में भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 173 फीसदी ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरु हुए चालू पेराई सीजन 2017-18 में उत्तर प्रदेश में 24 नवंबर 2017 तक चीनी का उत्पादन 173 फीसदी बढ़कर 9.93 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में केवल 5.74 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।
उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) के अनुसार राज्य में 100 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है तथा राज्य में अब केवल 19 चीनी मिलों में ही पेराई आरंभ होनी है। पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 84 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हुई थी। चालू पेराई सीजन में राज्य की चीनी मिलें अभी तक 1,091.49 क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी है तथा औसतन रिकवरी की दर 9.75 फीसदी है।
प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटका के अलावा अन्य राज्यों में भी गन्ने की पेराई में तेजी आई है, तथा आगे चीनी का उत्पादन और बढ़ेगा। केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2017 तक चीनी पर स्टॉक लिमिट लगा रखी है, जबकि चीनी के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना के कारण स्टॉकिस्टों की मांग काफी कमजोर है। ऐसे में आगे चीनी की कीमतों में और गिरावट आने का अनुमान है। दिल्ली में सोमवार को एम ग्रेड चीनी का भाव 3,825 से 3,875 रुपये प्रति क्विंटल रहा।.............   आर एस राणा

बजट: कमोडिटी सेक्टर की सीटीटी हटाने की मांग

बजट से पहले कमोडिटी एक्सचेंज में कारोबार करने वालों ने वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी सीटीटी हटाने की मांग की है। कारोबारियों ने मांग की है कि कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स यानि सीटीटी के हटाया जाए और इसको नॉन रिफंडेबल टैक्स का दर्जा मिले। फिलहाल सीटीटी को खर्च का दर्जा दिया जाता है। कारोबारियों ने ये भी मांग की है कि सीटीटी को सेक्शन 88ई के तहत लाया जाए। बता दें कि इसके 88ई के तहत आने पर टैक्स का बोझ कम होगा। कारोबारियों पर डबल टैक्सेशन का बोझ हटाने की मांग की गई है। इसके अलावा सभी डेरिवेटिव्स को नॉन स्पैक्यूलेटिव करने और बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने की भी मांग की गई है।

26 November 2017

डॉलर 2 महीने के निचले स्तर पर

डॉलर 2 महीने के निचले स्तर पर है। ऐसे में ग्लोबल मार्केट में सोने को सपोर्ट मिला है और कॉमैक्स पर सोने का दाम 1290 डॉलर के पास है। जबकि चांदी में 17 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। डॉलर में आई नरमी और चीन में फिर से मांग बढ़ने के अनुमान से मेटल में तेजी आई है। एलएमई पर कॉपर का दाम 1 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। इसमें 7 हजार डॉलर प्रति टन के ऊपर कारोबार हो रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है। एक डॉलर की कीमत 68.80 पैसे के पास है।  इस हफ्ते विएना में ओपेक की अहम बैठक है। इस बैठक से पहले कच्चे तेल का दाम पिछले 2 साल के ऊपरी स्तर के पास पहुंच गया है। ब्रेंट में 64 डॉलर के बेहद करीब कारोबार हो रहा है। जबकि नायमैक्स क्रूड का दाम 58.5 डॉलर के ऊपर है। हालांकि ऊपरी स्तर से कुछ दबाव भी दिख रहा है। दरअसल बैठक में मार्च के बाद भी क्रूड उत्पादन कटौती जारी रखने पर सहमति बनने की संभावना है। इस बीच कनाडा से अमेरिका को जाने वाली तेल की पाइपलाइन बंद होने से भी कीमतों को सपोर्ट मिला है।

25 November 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी।
............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........
एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के लिए ----------------हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

आर एस राणा
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एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी की दैनिक टिप्स

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धन्यवाद,
आर एस राणा
09811470207

चना की बुवाई मध्य प्रदेश और कर्नाटका में ज्यादा, राजस्थन और यूपी में कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई जहां मध्य प्रदेश, कर्नाटका और महाराष्ट्र में बढ़ी है, वहीं राजस्थान के साथ ही उत्तर प्रदेश में बुवाई पिछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार अभी तक चना की कुल बुवाई बढ़कर 72.98 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 62.83 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। सामान्यतः रबी में चना की बुवाई 86.80 लाख हैक्टेयर में होती है।
प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में चना की बुवाई बढ़कर अभी तक 27.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 19.60 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। इसी तरह से कर्नाटका में बुवाई बढ़कर चालू रबी में अभी तक 12.20 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में केवल 8.68 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। महाराष्ट्र में चना की बुवाई बढ़कर चालू रबी में 10.37 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 9.34 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
उधर राजस्थान में चालू रबी में चना की बुवाई घटकर अभी तक केवल 10.92 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 14.40 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश में भी चालू रबी में अभी तक केवल 4.50 लाख हैक्टेयर में ही चना की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5.38 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश में चना की बुवाई 3.31 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 1.71 लाख हैक्टेयर में और छत्तीसगढ़ में 44 हजार हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। ..........  आर एस राणा

24 November 2017

रबी फसलों की कुल बुवाई पिछड़ी, दलहन और मोटे अनजों की बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की कुल बुवाई पिछड़ी है जबकि दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई आगे चल रही है। रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई भी पिछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में कुल फसलों की बुवाई घटकर अभी तक केवल 315.86 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल के समान अवधि में 320.55 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार गेहूं की बुवाई घटकर 110.66 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 126.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रबी दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 101.43 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 89 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चना के साथ ही मसूर की बुवाई भी आगे चल रही है। चना की बुवाई बढ़कर 72.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 62.83 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। इसी तरह से मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में 11.73 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.72 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई बढ़कर भी चालू रबी में अभी तक 36.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय 33.93 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई बढ़कर 25.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 24.54 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में घटकर 3,70 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 3.92 लाख हैक्टेयर में जौ की बुवाई हो चुकी थी।
चालू रबी में तिलहनों की बुवाई घटकर 57.93 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 63.96 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई अभी तक केवल 51.37 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 57.86 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली और अलसी की बुवाई पिछले साल की तुलना में आगे चल रही है। रबी में मूंगफली की बुवाई 2.56 लाख हैक्टेयर में और अलसी की बुवाई 2.07 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।...  आर एस राणा

23 November 2017

प्याज निर्यात पर एमईपी की शर्त लगी

प्याज की बेलगाम कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उसने प्याज के निर्यात के लिए एमईपी यानी मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस तय कर दिया है।  31 दिसंबर के लिए एमईपी 850 डॉलर प्रति टन तय किया गया है। रुपए के लिहाज से इसे देखा जाए तो  करीब 55 रुपए  किलो बैठता है। यानी देश से अगर किसी को प्याज का निर्यात करना होगा तो कम से कम इस भाव पर करना पड़ेगा। इस भाव से नीचे प्याज का निर्यात नहीं किया जा सकेगा। दरअसल कुछ समय प्याज की रिटेल कीमतें बढ़ रही हैं और ज्यादातर शहरों में ये 50 रुपये किलो से ऊपर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमतों में हल्की कमजोरी

कच्चे तेल की कीमतों में हल्की कमजोरी आई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके दाम 2 साल की ऊंचाई पर बने हुए हैं। कनाडा की कीस्टोन पाइपलाइन बंद होने और अमेरिका में भंडार घटने से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 19 लाख बैरल घटा है। मार्च के ऊपरी स्तर से इसमें 15 फीसदी की गिरावट आई है। ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली के कारण सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के कारण कल कॉमेक्स पर सोने करीब 1 फीसदी बढ़ा है। चांदी पर आज ज्यादा दबाव है, कॉमेक्स पर इसके दाम 0.5 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं। बेस मेटल्स की बात करें तो शंघाई में एल्युमिनियम 0.75 फीसदी ऊपर है, वहीं कॉपर में भी हल्की बढ़त देखी जा रही है।

सोया डीओसी के निर्यात पर इनसेंटिव दौगुना करने की मांग - सोपा


आर एस राणा
नई दिल्ली। उद्योग ने केंद्र सरकार से सोया डीओसी के निर्यात पर इनसेंटिव को दौगुना करने की मांग की है। उद्योग के अनुसार सोया डीओसी के निर्यात पर इस समय 5 फीसदी इनसेंटिव मिल रहा है, तथा इसे बढ़ाकर 10 फीसदी करने के लिए पत्र लिखा है।
सोया प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर डीओसी पर मिलने वाले इनसेंटिव को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी करने की मांग की है, सोपा के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक के अनुसार इसका सीधा फायदा किसानों को होगा, उद्योग किसानों से सोयाबीन की ज्यादा खरीद करेगा, जिससे उन्हें उचित भाव मिलेगा। इसलिए केंद्र सरकार को इनसेंटिव को बढ़ा देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछले साल तेल वर्ष 2016-17 (अक्टूबर-16 से सितंबर-17) के दौरान करीब 20 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ था, जबकि चालू सीजन में घरेलू बाजार में भाव पिछले साल की तुलना में कम है, तथा सोयाबीन की उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही बैठेगी, ऐसे में चालू तेल वर्ष 2017-18 में डीओसी का निर्यात बढ़कर 24 से 25 लाख टन होने का अनुमान है।
सोपा के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन का उत्पादन 91.46 लाख टन होने का अनुमान है जबकि नई फसल की आवक के समय 13.93 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ था। अतः कुल उपलब्धता 105.39 लाख टन की बैठेगी। चालू तेल वर्ष के अक्टूबर महीने में सोयाबीन की आवक उत्पादक मंडियों में करीब 15.50 लाख टन की हुई है जबकि सोया डीओसी का उत्पादन 5.67 लाख टन का हुआ है। इसमें से 0.67 लाख टन का निर्यात हुआ है तथा 4.25 लाख टन की खपत फीड में और हुई है। ...............   आर एस राणा

22 November 2017

कच्चे तेल की कीमतों में हल्की कमजोरी

कच्चे तेल की कीमतों में हल्की कमजोरी आई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके दाम 2 साल की ऊंचाई पर बने हुए हैं। कनाडा की कीस्टोन पाइपलाइन बंद होने और अमेरिका में भंडार घटने से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 19 लाख बैरल घटा है। मार्च के ऊपरी स्तर से इसमें 15 फीसदी की गिरावट आई है। ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली के कारण सोने की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के कारण कल कॉमेक्स पर सोने करीब 1 फीसदी बढ़ा है। चांदी पर आज ज्यादा दबाव है, कॉमेक्स पर इसके दाम 0.5 फीसदी से ज्यादा गिरे हैं। बेस मेटल्स की बात करें तो शंघाई में एल्युमिनियम 0.75 फीसदी ऊपर है, वहीं कॉपर में भी हल्की बढ़त देखी जा रही है।

राजस्थान में सरसों के साथ ही चना की बुवाई में कमी आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में सरसों के साथ ही चना की बुवाई में कमी आने की आशंका है। राज्य में अभी तक सरसों के साथ ही चना की बुवाई पिछड़ रही है, जबकि बुवाई का समय अब लगभग पूरा हो चुका है।
राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में सरसों की बुवाई अभी तक केवल 17.68 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 23.05 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। राज्य के कृषि निदेशालय ने बुवाई का लक्ष्य 26 लाख हैक्टेयर का तय किया है जबकि पिछले साल कुल बुवाई 25.04 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
इसी तरह से राज्य में चना की बुवाई भी चालू रबी में घटकर अभी तक केवल 9.93 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 12.97 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू रबी में चना के बुवाई का लक्ष्य 15 लाख हैक्टेयर तय किया है जबकि पिछले साल कुल बुवाई 15.48 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
अन्य फसलों में गेहूं की बुवाई राज्य में अभी तक 6.44 लाख हैक्टेयर में और जौ की बुवाई 1.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में इनकी क्रमशः 7.99 लाख हैक्टेयर में और 1.22 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। .................  आर एस राणा

मौसम में ठंड बढ़ने से जीरा की बुवाई में आयेगी तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में मौसम में ठंड बढ़ने लगी है इससे जीरा की बुवाई में तेजी आने का अनुमान है। गुजरात राज्य कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में अभी तक 59,400 हैक्टेयर में जीरा की बुवाई हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 36,600 हैक्टेयर से ज्यादा है। सामान्यतः गुजरात में जीरा की बुवाई 2.80 लाख हैक्टेयर में होती है। उधर राजस्थान में बुवाई चालू हो गई है, आगे बुवाई में तेजी आने का अनुमान है।
उत्पादक राज्यों में जीरा का स्टॉक कम है जबकि इस समय निर्यात मांग अच्छी है, ऐसे में आगे इसके भाव में तेजी ही आने का अनुमान है। मंगलवार को उंझा मंडी में जीरा की दैनिक आवक 3,000 से 3,500 बोरी की हुई जबकि भाव 3,600 से 3,950 रुपये प्रति क्विंटल रहे। हालांकि वायदा में मुनाफावसूली से गिरावट दर्ज की गई, लेकिन हाजिर में भाव स्थिर बने रहे।
मसाला बोर्ड के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर के दौरान जीरा के निर्यात में 2.6 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 63,085 टन का ही हुआ है। विश्व बाजार में भारतीय जीरा का भाव 3.70 डॉलर प्रति किलो है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका भाव 3.53 डॉलर प्रति किलो था।  .............   आर एस राणा

21 November 2017

कच्चे तेल में जोरदार तेजी

कच्चे तेल में जोरदार तेजी आई है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम करीब 1 से 1.5 फीसदी उछल गया है। ब्रेंट 63 डॉलर के पार है। जबकि नायमैक्स क्रूड में 57.5 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। अगले हफ्ते ओपेक की अहम बैठक है। इससे पहले जेपी मॉर्गन ने कहा है कि मार्च के बाद अगर ओपेक प्रोडक्शन कटौती जारी रखता है तो अगले साल बाजार का संतुलना बना रहेगा और ब्रेंट 40 से 60 डॉलर का दायरा तोड़ सकता है। लेकिन सहमति नहीं बनी तो बाजार में ओवर सप्लाई तय है। इस बीच कल एपीआई की इन्वेंट्री रिपोर्ट आई थी, जिसके मुताबिक अमेरिका में क्रूड का भंडार करीब 64 लाख बैरल गिर गया है। अमेरिका में आज फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक का ब्यौरा जारी होगा और इससे पहले सोने की चाल सुस्त है। ये कल के लेवल के आसपास ही कारोबार कर रहा है। चांदी भी 17 डॉलर के नीचे है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती बढ़ गई है। एक डॉलर की कीमत 64.80 रुपये के नीचे आ गई है।

ओएमएसएस के तहत केवल 5 लाख टन गेहूं की हुई बिक्री

आर एस राणा
नई दिल्ली। खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) अभी तक केवल 5 लाख टन गेहूं की बिक्री ही कर पाई है। एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इसमें से 1.84 लाख टन गेहूं की खरीद रोलर फ्लोर मिलों ने की है, जबकि अन्य गेहूं राज्य सरकारों ने खरीदा है।
एफसीआई ने ओएमएसएस के तहत 10.88 लाख टन और गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी है, तथा गेहूं खरीदने के लिए न्यूनतम भाव एफसीआई ने 1,790 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उत्पादक राज्यों में भाव नीचे हैं, इसीलिए फ्लोर मिलें एफसीआई से खरीद कम कर रही हैं।
एफसीआई ओएमएसएस के तहत सबसे ज्यादा गेहूं का आवंटन महाराष्ट्र के लिए 2.92 लाख टन का किया है, इसके अलावा हरियाणा के लिए 2.77 लाख टन, पंजाब के लिए 1.45 लाख टन, मध्य प्रदेष के लिए 1.15 लाख टन और पश्चिमी बंगाल के लिए 60 हजार टन गेहूं का आवंटन किया है। इसके अलावा उड़ीसा के लिए 50 हजार टन, तमिलनाडु के लिए 25 हजार टन, कर्नाटका के लिए 23,700 टन तथा राजस्थान के लिए 20 हजार टन गेहूं का आवंटन किया है। दिल्ली के लिए 16 हजार टन, उत्तर प्रदेश के लिए 15 हजार टन, तथा चंडीगढ़ के लिए 12 हजार टन, केरल के लिए 10,700 टन, आंध्रप्रदेश के लिए 6,500 टन तथा उत्तराखंड के लिए 4,500 टन गेहूं का आवंटन किया है। ................   आर एस राणा

20 November 2017

अरहर और उड़द वायदा के लिए सेबी से मंजूरी मांगी

चना वायदा के बाद एनसीडीईएक्स पर जल्द ही अरहर और उड़द वायदा भी शुरू हो सकता है। एक्सचेंज ने इसके लिए सेबी से मंजूरी मांगी है। दूसरी तरफ सूत्रों से जानकारी मिली है कि दाल का एक्सपोर्ट खुलने के बाद सेबी इस मुद्दे पर तेजी से विचार शुरू कर दिया है।

कच्चे तेल में बेहद सुस्त कारोबार

कच्चे तेल में बेहद सुस्त कारोबार हो रहा है। बाजार की नजर 30 नवंबर को ओपेक की बैठक पर है। माना जा रहा है कि बैठक में अगले साल मार्च के बाद भी उत्पादन कटौती जारी रखने पर सहमति बन सकती है। हालांकि अमेरिका में क्रूड का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच चीन में स्टील की कीमतों में आई तेजी से निकेल का दाम करीब 1.5 फीसदी उछल गया है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की मजबूती आई है। अमेरिका में कल फेडरल रिजर्व की अक्टूबर मिटिंग का ब्यौरा जारी होगा और इससे पहले सोने की चाल फिर से सुस्त पड़ गई है। कल डॉलर में उछाल से इसमें भारी गिरावट आई थी और भाव 1280 डॉलर के नीचे आ गए थे। लेकिन आज फिर से निचले स्तर से सोना सपोर्ट ले रहा है। अमेरिका और उत्तर कोरिया को लेकर चल रहे तनाव से सोने को सहारा मिला है। सोने के साथ चांदी को भी सपोर्ट मिला है, लेकिन बढ़त के बावजूद चांदी सतरह डॉलर के नीचे बनी हुई है।


चालू पेराई सीजन में 13.73 लाख टन चीनी का हो चुका है उत्पादन

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2017 से शुरु हुए चालू पेराई सीजन 2017-18 में 15 नवंबर तक चीनी का उत्पादन बढ़कर 13.73 लाख टन का हो चुका है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में चीनी का उत्पादन केवल 7.67 लाख टन का ही हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन आफ इंडिया (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों में पेराई जल्दी आरंभ होने से चीनी के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। इस समय देशभर में 313 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस दौरान केवल 222 चीनी मिलों में ही पेराई आरंभ हुई थी। चालू पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है, जबकि केंद्र सरकार ने चीनी पर स्टॉक लिमिट की अवधि को 31 दिसंबर 2017 तक किया हुआ है, अतः इस्मा ने केंद्र सरकार से चीनी पर लगी स्टॉक लिमिट को हटाने की मांग की है, ताकि चीनी की कीमतों में चल रही गिरावट रुक जाए।  सोमवार को दिल्ली में चीनी के भाव घटकर 3,850 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में अभी तक 5.67 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 1.93 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य की 78 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 55 चीनी मिलों में ही पेराई आरंभ हुई थी। महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 15 नवंबर तक 3.26 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.92 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। राज्य में 137 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हो गई है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 95 चीनी मिलों में ही पेराई आरंभ हो पाई थी। ............  आर एस राणा

19 November 2017

केंद्र ने 85 हजार टन अरहर के आयात को दी मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 85 हजार टन अरहर के आयात को मंजूरी दे दी है। इसका आयात मौजाम्बिक से किया जायेगा, तथा आयातित अरहर मुंबई, कोलकत्ता, तूतीर्कोन और हजारी बंगदरगाह पर आयेगी।
केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सरकार ने मौजाम्बिक से 1.25 लाख टन अरहर के आयात को मंजूरी दी थी, इसमें से 40 हजार टन अरहर का आयात पहले ही हो चुका था, उसके बाद केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अरहर के आयात की 3 लाख टन की सीमा कर दी थी, जिसका आयात पहले ही हो चुका है। अतः अब 85 हजार टन अरहर के अरहर के आयात की अधिसूचना फिर से जारी की गई है।.........  आर एस राणा

डॉलर में सुस्ती के बावजूद ग्लोबल मार्केट में सोना 1 महीने के ऊपरी स्तर पर

डॉलर में सुस्ती के बावजूद ग्लोबल मार्केट में सोना 1 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। कॉमैक्स पर ये 1290 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। अब ऊपरी स्तर से दबाव है। वहीं पिछले हफ्ते की तेजी के बाद चांदी में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है। अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें ब‍ढ़ने का अनुमान है। ऐसे में सोने और चांदी की तेजी टिक नहीं सकी। कच्चे तेल में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। इस महीने के अंत में विएना में ओपेक की अहम बैठक है। जिस पर बाजार की नजर है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में सुस्ती है।

18 November 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी।
............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........
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आर एस राणा
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एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी की दैनिक टिप्स

प्रिय पाठकों,
एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में दैनिक आधार पर किस भाव पर खरीद करें, क्या स्टोप लोस लगाए तथा टारगेट क्या है। ट्रायल लेने के लिए हमें फोन करें या ई-मेल करें,। यह सर्विस मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से दी जायेगी। इस सेवा के लिए हमें ई मेल
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सरसों की बुवाई राजस्थान में पिछड़ी, हरियाणा और एमपी में बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई जहां प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में पिछे चल रही है, वहीं हरियाणा के साथ मध्य प्रदेश में बुवाई बढ़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में राजस्थान में सरसों की बुवाई अभी तक केवल 17.40 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 20.61 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
हरियाणा में चालू रबी में सरसों की बुवाई बढ़कर 5.12 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 4.83 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। उधर मध्य प्रदेश में सरसों की बुवाई बढ़कर चालू रबी सीजन में 6.32 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 5.21 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
उत्तर प्रदेश में सरसों की बुवाई 9.40 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 9.82 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में पश्चिमी बंगाल में 1.26 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 1.92 लाख हैक्टेयर में और असम में 1.16 लाख हैक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी है। मंत्रालय के अनुसार देशभर में सरसों की बुवाई अभी तक केवल 44.52 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 46.84 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।  ...............  आर एस राणा

मध्य प्रदेश के साथ कर्नाटका में चना की बुवाई बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के साथ ही कर्नाटका और महाराष्ट्र में चना की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि राजस्थान में बुवाई पिछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में मध्य प्रदेश में चना की बुवाई बढ़कर 23.63 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 14.43 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
कर्नाटका में चालू रबी में चना की बुवाई बढ़कर 11.56 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 8.37 लाख हैक्टेयर में ही चना की बुवाई हुई थी। सामान्यतः कर्नाटका में चना की बुवाई 10.15 लाख हैक्टेयर में ही होती है जबकि पिछले साल कुल बुवाई 8.97 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
महाराष्ट्र में चना की बुवाई बढ़कर चालू रबी में 7.60 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में केवल 5.23 लाख हैक्टेयर में ही चना की बुवाई हो पाई थी। राजस्थान में चना की बुवाई अभी तक केवल 9.65 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 10.16 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्या में उत्तर प्रदेश में चना की बुवाई 3.11 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 1.10 लाख हैक्टेयर में और आंध्रप्रदेश में 2.76 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में चना की कुल बुवाई बढ़कर 60.69 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 43.91 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।...............   आर एस राणा

17 November 2017

रबी में दलहन की बुवाई बढ़ीए तिलहनों के साथ गेहूं की घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई आगे चल रही है लेकिन तिलहनों के साथ ही गेहूं की बुवाई पिछे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार गेहूं की बुवाई घटकर 60ण्19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 75ण्05 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में कुल फसलों की बुवाई बढ़कर 230ण्36 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल के समान अवधि में केवल 219ण्47 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
रबी दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 81ण्24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 60ण्46 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चना के साथ ही मसूर की बुवाई भी आगे चल रही है। चना की बुवाई बढ़कर 60ण्69 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 43ण्91 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई बढ़कर भी चालू रबी में अभी तक 30ण्59 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय 26ण्11 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की बुवाई बढ़कर 22ण्90 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 20ण्88 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 2ए35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 1ण्44 लाख हैक्टेयर में ही जौ की बुवाई हो पाई थी।
चालू रबी में तिलहनों की बुवाई घटकर 49ण्78 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 51ण्30 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई अभी तक केवल 44ण्53 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 46ण्86 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। .....  आर एस राणा

राजस्थान में चना के साथ ही सरसों की बुवाई पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में चना के साथ ही सरसों की बुवाई भी पिछे चल रही है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार राज्य में चना की बुवाई अभी तक केवल 9.65 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 10.16 लाख हैक्टेयर में चना की बुवाई हो चुकी थी।
राज्य के कृषि निदेशालय ने चालू रबी में राज्य में चने की बुवाई का लक्ष्य 15 लाख हैक्टेयर का तय किया है जबकि पिछले साल राज्य में चना की बुवाई 15.48 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
सरसों की बुवाई चालू रबी में राज्य में अभी तक 17.24 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 19.88 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। राज्य के कृषि निदेशालय ने सरसों की बुवाई का लक्ष्य 26 लाख हैक्टेयर का तय किया है जबकि पिछले साल राज्य में 25.04 लाख हैक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई थी।
अन्य फसलों में जौ की बुवाई चालू रबी में अभी तक केवल 60 हजार हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल राज्य में एक लाख हैक्टेयर में जौ की बुवाई हो चुकी थी। गेहूं की बुवाई जरुर आगे चल रही है। राज्य में गेहूं की बुवाई बढ़कर 4.52 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.99 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
राज्य में रबी फसलों की कुल बुवाई 38.49 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 38.41 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।  ...................    आर एस राणा

16 November 2017

सोने का दाम 1280 डॉलर के ऊपर

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल में भारी उठापटक हो रही है। ब्रेंट में दबाव है, जबकि नायमैक्स क्रूड में मजबूती देखी जा रही है। वहीं सोने का दाम फिर से 1280 डॉलर के ऊपर चला गया है और चांदी में भी 17 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। लेकिन चीन में मेटल आज फिर से कमजोर पड़ गए हैं। शंघाई फ्यूचर एक्सचेंज पर निकेल में करीब 1.5 फीसदी की गिरावट आई है। मांग में कमी के अनुमान से कॉपर, एल्युमिनियम और जिंक भी कमजोर हैं। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में 1 फीसदी की जोरदार मजबूती आई है। डॉलर की कीमत 64.80 के नीचे आ गई है।

केंद्र सरकार ने सभी दलहन के निर्यात को दी मंजूरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मूंग के बाद चना और मसूर के निर्यात की अनुमति भी दे दी है। घरेलू बाजार में दलहन की कीमतों में गिरावट रोकने के लिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी की बैठक में सभी दलहन के निर्यात की अनुमति दे दी है। जानकारों के अनुसार चना की कीमतों में इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, मसूर की कीमतों में हल्का सुधार आ सकता है। मसूर का निर्यात बंगलादेश को होने का अनुमान है। छोटी मसूर की बंगलादेश में अच्छी खपत होती है। ..............   आर एस राणा

15 November 2017

कच्चे तेल में हल्की रिकवरी

कल की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में हल्की रिकवरी आई है। हालांकि रिकवरी के बावजूद ब्रेंट 62 डॉलर के नीचे है। वहीं नायमैक्स क्रूड में 55 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार करीब 19 लाख बैरल बढ़ गया है। साथ ही रोजाना उत्पादन का स्तर 96.5 लाख बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर चला गया है। पिछले 1.5 साल में अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन करीब 15 फीसदी बढ़ चुका है। ऐसे में ओपेक के उत्पादन में कटौती का असर अब कमजोर पड़ने लगा है। सोने में बेहद सुस्त कारोबार हो रहा है। इसका दाम 1280 डॉलर के नीचे है। चांदी भी 17 डॉलर के नीचे ही बनी हुई है। अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। चीन में आज भी बेस मेटल कमजोर हैं। एल्युमिनियम को छोड़कर सभी मेटल करीब 0.50 फीसदी नीचे है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में सुस्ती है।

महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज

आर एस राणा
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। राज्य के अहमदनगर जिले में आज किसान हिंसक हो गए और आगजनी भी की गई। किसानों को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
उधर राज्य की पैठण तहसील में भी किसानों ने चक्का जाम किया। पैठण में किसानों पर पुलिस ने फायरिंग भी की जिसमें दो किसान जख्मी हो गए।  ............  आर एस राणा

मध्य प्रदेश में अन्य राज्यों से आने वाली दाल पर हटा सकता है टैक्स

आर एस राणा
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार अन्य राज्य से आने वाली दाल पर से मंडी टैक्स हटाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कारोबारियों की मांग पर मंडी टैक्स को हटाने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार इसकी अधिसूचना जल्द ही जारी होने की संभावना है। मध्य प्रदेश में दूसरे राज्यों से आने वाली दाल पर 2.2 रुपये प्रति क्विंटल मंडी टैक्स अदा करना पड़ता है।  ............   आर एस राणा

नेफेड ने एक लाख टन मूंग और 47 हजार टन उड़द खरीदी

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ विपणन सीजन में नेफैड ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 1,03,865 टन मूंग और 47,762 टन उड़द की खरीद की है। उत्पादक मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे के कारण नेफैड राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटका के साथ ही महाराष्ट्र से मूंग और उड़द की खरीद कर रही हैं।
नेफैड के अनुसार मूंग की एमएसपी पर खरीद तेलंगाना से 2,759 टन, कर्नाटका से 19,702 टन, राजस्थान से 80,269 टन और महाराष्ट्र से 1,132 टन की खरीद हुई है। उड़द की खरीद राजस्थान से 16,789 टन की, तेलंगाना से 3,738 टन की, कर्नाटका से 2,966 टन की और महाराष्ट्र से 2,299 टन की हुई है।
सूत्रों के अनुसार नेफैड खरीफ सीजन 2016 में एमएसपी पर खरीद हुई मूंग की बिकवाली भी लगातार कर रही है। खरीफ 2016 में नेफैड ने एमएसपी पर 1,98,431 टन मूंग की खरीद की थी। ...........   आर एस राणा

14 November 2017

सोयाबीन का उत्पादन 91.46 लाख टन होने का अनुमान-सोपा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन 2017-18 में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 91.46 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 109.92 लाख टन का हुआ था। पिछले साल नई फसल की आवक के समय सोयाबीन का बकाया स्टॉक 4.41 लाख टन का ही बचा हुआ था जबकि चालू सीजन में बकाया स्टॉक 13.93 लाख टन का बचा हुआ है। अतः कुल उपलब्धता चालू सीजन में 105.39 लाख टन की बैठेगी, जबकि पिछले साल कुल उपलब्धता 114.33 लाख टन की थी।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के अनुसार चालू खरीफ सीजन 2017-18 में सोयाबीन की कुल उपलब्धता पिछले साल की तुलना में करीब 8.94 लाख टन कम रहेगी, इसके बावजूद उत्पादक मंडियों में सोयाबीन के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बने हुए हैं। उत्पादक मंडियों में सोयाबीन के भाव 2,400 से 2,700 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं जबकि चालू खरीफ के लिए एमएसपी 3,050 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। उत्पादक मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक 6 से 7 लाख क्विंटल की हो रही है। माना जा रहा है कि मौजूदा भाव में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा तो आ सकता है लेकिन बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में सोया डीओसी में निर्यात मांग बढ़ने पर सोयाबीन के भाव में सुधार आने का अनुमान है।
सोपा के अनुसार अक्टूबर में सोयाबीन की आवक 15.50 लाख टन की हुई है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में आवक 14 लाख टन की हुई थी। आगामी महीनों में सोयाबीन की आवक में कमी आयेगी। चालू फसल सीजन में करीब 85 लाख टन सोयाबीन की क्रेसिंग हो पायेगी, जबकि करीब 12 लाख टन की खपत बीज में होगी। अक्टूबर में सोया डीओसी का उत्पादन 5.67 लाख टन का हुआ है, जिसमें से केवल 0.67 लाख टन का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर में केवल 0.44 लाख टन ही निर्यात हुआ था।
सोपा के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में डीओसी का कुल निर्यात 17.57 लाख टन का ही हुआ था, जबकि चालू फसल सीजन 2017-18 में 19.50 लाख टन का निर्यात होने का अनुमान है। करीब 50 लाख टन सोया डीओसी की खपत घरेलू बाजार में होगी, जोकि पिछले साल के लगभग बराबर ही है। ..............  आर एस राणा

सप्लाई बढ़ने से कच्चे तेल में गिरावट

सप्लाई बढ़ने और मांग में कमी के अनुमान से कच्चे तेल में भी गिरावट बढ़ गई है। ब्रेंट 61.5 डॉलर के नीचे आ गया है। जबकि नायमैक्स क्रूड 55 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अगले साल दुनिया में कच्चे तेल की मांग करीब 13 लाख बैरल घटने की आशंका जताई है। साथ ही आईईए ने ओपेक का उत्पादन 14 लाख बैरल बढ़ने का भी अनुमान दिया है। चीन के खराब आंकड़े बेस मेटल पर बेहद भारी पड़ रहे हैं। आज शंघाई फ्यूचर एक्सचेंज पर निकेल में 6 फीसदी का निचला सर्किट लग गया है। दूसरे मेटल भी 2 से 3 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज पर भी कॉपर समेत सभी मेटल कमजोर हैं। कल भी बेस मेटल में भारी गिरावट आई थी। सोने में तेजी आई है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम 1280 डॉलर के पार चला गया है। वहीं चांदी में 17 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की मजबूती आई है। एक डॉलर की कीमत 65.30 रुपये के पास है।

ओएमएसएस के तहत 11.01 लाख टन गेहूं बेचने हेतु निविदा

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत 11,01,650 टन गेहूं बेचने के लिए निविदा आमंत्रित की है, निविदा भरने का न्यूनतम भाव 1,790 रुपये प्रति क्विंटल है। केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के आयात शुल्क को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने से गेहूं की कीमतों में 50 से 75 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार आया था, लेकिन स्टॉकिस्टों की बिकवाली बढ़ने से इसकी कीमतों में फिर गिरावट आई है। अतः घरेलू मंडियों में भाव नीचे होने के कारण फ्लोर मिलें ओएमएसएस के तहत गेहूं की खरीद नहीं कर रही हैं।
ओएमएसएस के तहत सबसे ज्यादा गेहूं का आवंटन महाराष्ट्र के लिए 2,95,000 टन, हरियाणा के लिए 2,93,050 टन, पंजाब के लिए 1,37,000 टन, मध्य प्रदेश के लिए 1,05,150 टन, पश्चिमी बंगाल के लिए 60,000 टन, उड़ीसा के लिए 50,000 टन, तमिलनाडु के लिए 31,500 टन, कर्नाटका के लिए 25,450 टन, राजस्थान के लिए 20,000 टन, दिल्ली के लिए 16,000 टन, उत्तर प्रदेश के लिए 15,000 टन का किया है। अन्य राज्यों में केरल के लिए 10 हजार टन, आंध्रप्रदेश के लिए 9,500 टन, चंडीगढ़ के लिए 9 हजार टन, जम्मू-कश्मीर के लिए 7,000 टन, उत्तराखंड क लिए 4,500 टन, गुजरात के लिए 3,500 टन गेहूं बेचने के लिए निविदा आमंत्रित की है।  .............   आर एस राणा

13 November 2017

अक्टूबर में वनस्पति तेलों का आयात घटा, कुल आयात बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। अक्टूबर में जहां वनस्पति तेलों के आयात में थोड़ी कमी आई है, वहीं चालू तेल वर्ष 2016-17 (नवंबर-16 से अक्टूबर-17 के दौरान कुल आयात में 5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अक्टूबर 2017 में वनस्पति तेलों का आयात 0.50 फीसदी घटकर 1,167,397 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल अक्टूबर में 1,173,254 टन हुआ था। चालू तेल वर्ष 2016-17 के नवंबर-16 से अक्टूबर-17 के दौरान वनस्पति तेलों का आयात बढ़कर 15,440,242 टन का हुआ है जबकि पिछले तेल की समान अवधि में इनका आयात 14,738,802 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार तेल वर्ष 2016-17 के दौरान खाद्य तेलों के साथ ही अखाद्य तेलों के आयात में भी बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 150.8 लाख टन और अखाद्य तेलों का आयात 3.6 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में खाद्य तेलों का आयात 145.7 लाख टन का और अखाद्य तेलों का आयात 1.7 लाख टन का ही हुआ था।
उत्पादक राज्यों में खरीफ तिलहनों की आवक बनने के साथ ही विश्व बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी आने से सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में आयातित तेलों की कीमतों में गिरावट आई है। आरबीडी पामोलीन के भाव भारतीय बंदरगाह पर अक्टूबर में घटकर 715 डॉलर प्रति टन रह गए जबकि सितंबर में इसके औसत भाव 729 डॉलर प्रति टन थे। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव सितंबर में 730 डॉलर प्रति टन था, जोकि अक्टूबर में घटकर 717 डॉलर प्रति टन रह गया। ................    आर एस राणा

कच्चे तेल की तेजी पर ब्रेक

कच्चे तेल की तेजी पर ब्रेक लग गया है। ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट का दाम 63 डॉलर के नीचे आ गया है। वहीं नायमैक्स पर क्रूड में 57 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि क्रूड को 60 डॉलर के ऊपर टिकना मुश्किल है। इस बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने कहा है कि इलेक्ट्रीक गाड़ियों के आने से क्रूड की मांग पर थोड़ी बहुत कमी देखने को मिल सकती है। बाजार की नजर अब 30 नवंबर को विएना में होने वाली ओपेक की बैठक पर है। माना ये जा रहा है कि इस बैठक में उत्पादन कटौती को अगले साल मार्च के बाद भी जारी रखने पर सहमति बन सकती है। अमेरिका में क्रूड का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज ग्लोबल मार्केट में सोने और चांदी में दबाव दिख रहा है। हालांकि चीन में निकेल का दाम करीब 2 फीसदी उछल गया है। इस साल निकेल में करीब 23 फीसदी की तेजी आ चुकी है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है और 1 डॉलर की कीमत 65 रुपये 30 पैसे के पास आ गई है।

12 November 2017

क्रूड की सप्लाई पर असर की आशंका

तेल उत्पादक देशों में तनाव से क्रूड की सप्लाई पर असर की आशंका है। ऐसे में कच्चे तेल में तेजी जारी है और आज ग्लोबल मार्केट में ये हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। हालांकि अमेरिका में क्रूड का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। पिछले हफ्ते वहां ऑयल रिग में बढ़तोरी देखने को मिली है। ऐसे में वहां उत्पादन बढ़ने की संभावना है। फिलहाल अमेरिका में क्रूड का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर है। ऐसे में ऊपरी स्तर से दबाव भी दिख रहा है। डॉलर में आई रिकवरी से सोने में हल्की गिरावट आई है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1280 डॉलर के काफी नीचे है। चांदी में भी 17 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर मेटल भी बेहद छोटे दायरे में हैं। बाजार की नजर चीन के आंकड़ों पर है। माना ये जा रहा है कि चीन में अक्टूबर के आर्थिक आंकड़े कमजोर आ सकते हैं। इस बीच डॉलर में आई कमजोरी से रुपया 0.25 फीसदी कमजोर पड़ गया है। 1 डॉलर की कीमत 65 रुपये के पार चली गई है।

11 November 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी।
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आर एस राणा
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एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी की दैनिक टिप्स

प्रिय पाठकों,

एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में दैनिक आधार पर किस भाव पर खरीद करें, क्या स्टोप लोस लगाए तथा टारगेट क्या है। ट्रायल लेने के लिए हमें फोन करें या ई-मेल करें,। यह सर्विस मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से दी जायेगी। इस सेवा के लिए हमें ई मेल
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