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28 February 2017

इस साल प्रचंड गर्मी पड़ने की आशंका

देश में इस साल प्रचंड गर्मी पड़ने की आशंका है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल गर्मी में पारा सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा रह सकता है। ये अनुमान मार्च से मई के लिए दिया गया है। खास तौर से उत्तर-पश्चिम भारत में ज्यादा गर्मी पड़ने की आशंका है। स्काईमेट के चीफ मेटरोलॉजिस्ट महेश पलावत ने कहा कि हीट वेव की स्थित शुरू हो चुकी है। इस बार गर्मियों में मौसमी हलचल काफी कम रहने की संभावना है, जब गर्मियों में मौसमी हलचल कम होती है तो सामान्य तौर पर गर्मी ज्यादा होती है।

अल-नीनो आशंका पर मौसम विभाग की शंका

 भले ही आस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो (एडब्ल्यूबी) ने 2017 के लिए अल नीनो पर अपने नजरिये में बदलाव किया है लेकिन भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि कम बारिश के लिए चर्चित इस आपदा से भारत के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार प्रभावित नहीं होगी। आईएमडी के महानिदेशक के जे रमेश ने बताया, 'दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत मार्च से ही हो जाती है और इस समय के दौरान और उसके बाद मई तक भी अल नीनो का प्रभाव नहीं दिखेगा। इसलिए, दक्षिण पश्चिम मॉनसून की चाल पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखेगा।' 
रमेश ने कहा कि भले ही वैश्विक मॉडल और विदेशी मौसम एजेंसियां यह भविष्यवाणी कर रही हैं कि अल नीनो जून के आसपास (जब भारतीय मॉनसून सीजन शुरू होता है) दिख सकता है, लेकिन अल नीनो के अलावा कई अन्य समस्याएं भी हैं जो दक्षिण पश्चिम मॉनसून को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा, 'कई ऐसे कारक हैं जो मॉनसून के दौरान बारिश को प्रभावित करते हैं जिनमें इंडियन ओशन डाईपोल (आईओडी), मैडन जूलियन ऑसिलेशन, पश्चिमी विक्षोभ आदि शामिल हैं और अल नीनो इनमें से एक है। इसलिए निश्चित तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि इसका मॉनसून पर कोई प्रभाव पड़ेगा।' 
अल नीनो का भारतीय बारिश पर बड़ा प्रभाव पड़ता है और देश में अल नीनो वाले 80 प्रतिशत वर्षों के दौरान बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई जबकि 60 प्रतिशत मौकों को सूखे वाले वर्ष के तौर पर घोषित किया गया। कुछ सप्ताह पहले तक, कई मौसम विशेषज्ञों ने अल नीनो के 50 प्रतिशत से कम पर रहने की भविष्यवाणी जताई जबकि वल्र्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन ने यह अनुमान 40 फीसदी बताया, लेकिन हरेक गुजरते सप्ताह के साथ अल नीनो की आशंका अधिक चिंताजनक होती जा रही है।
आस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो ने अपनी नियमित जानकारी में कहा है, 'इसके परिणामस्वरूप, ब्यूरो के ईएनएसओ आउटलुक स्टेटस को अपग्रेड कर अल नीनो वॉच कर दिया गया है जिसका मतलब है कि 2017 में अल नीनो बनने की आशंका लगभग 50 प्रतिशत है।' ब्यूरो द्वारा किए गए सर्वे में आठ अंतर्राष्ट्रीय मॉडलों में से सात अगले 6 महीनों के दौरान मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में तेज गर्मी का संकेत दे रहे हैं। 6 मॉडलों से यह संकेत मिलता है कि अल नीनो जुलाई 2017 तक दस्तक दे सकता है। आईएमडी ने कहा है कि अप्रैल के आसपास की जाने वाली उसकी पहली भविष्यवाणी में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। (BS Hindi)

कृषि मंत्रालय दलहन निर्यात खोलने के पक्ष में

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ के बाद रबी सीजन में भी दलहन की पैदावार में हुई बढ़ोतरी का असर दलहन की कीमतों पर पड़ा है। अरहर, मूंग के बाद अब मसूर की कीमतें भी उत्पादक मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आ गई है, ऐसे में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि सरकार दलहन निर्यात पर लगी रोक को हटा लें, जिससे दलहन किसानों को एमएसपी से नीचे भाव पर दलहन की बिक्री नहीं करनी पड़े। राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों में किसानों अरहर, मूंग और मसूर की बिक्री एमएसपी से नीचे भाव पर करनी पड़ रही है।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय दलहन निर्यात पर लगी रोक को हटाने पक्ष में है, तथा इस संबंध में अन्य मंत्रालयों से भी सलाह मशविरा करेगा। उन्होंने बताया कि फसल सीजन 2016-17 में दलहन की रिकार्ड पैदावार 221.4 लाख टन होने का अनुमान है। बंपर उत्पादन के कारण ही उत्पादक मंडियों में अरहर, मूंग और मसूर के भाव एमएसपी से नीचे आ गए हैं। हालांकि सार्वजनिक कंपनियां दलहन की एमएसपी पर खरीद कर रही है लेकिन खरीद सीमित मात्रा में होने के कारण मंडियों में भाव एमएसपी से नीचे ही बने हुए हैं। ऐसे में निर्यात पर लगी रोक हट जाती है तो दलहन का निर्यात चालू हो जायेगा, जिससे भाव में कुछ सुधार आयेगा। मालूम हो कि 10,000 टन काबूली चना को छोड़ अन्य दालों के निर्यात पर केंद्र सरकार ने रोक लगा रखी है। 28 जून 2006 से दलहन के निर्यात पर रोक लगी हुई है।
महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार से दलहन पर लगी स्टॉक लिमिट को हटाने के साथ ही राज्य की मंडियों में अरहर की खरीद एमएसपी पर करने की मांग की है। राज्य की मंडियों में अरहर और मूंग एमएसपी से नीचे बिक रही है। आयातित लेमन अरहर का भाव मुंबई में मंगलवार को 4,050 रुपये और मसूर का भाव 3,750 से 3,850 रुपये प्रति क्विंटल रहा। महाराष्ट्र की लातूर मंडी में अरहर का भाव 4,200 से 4,450 रुपये तथा मूंग का भाव 5,150 रुपये प्रति क्विंटल रहा। राज्य की नागपुर मंडी में अरहर का भाव 4,300 से 4,600 रुपये तथा अरहर का भाव 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
केंद्र सरकार खरीफ विपणन सीजन 2016-17 के लिए अरहर का एमएसपी 5,050 रुपये तथा मूंग का एमएसपी 5,225 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है।
उत्पादक मंडियों में रबी मसूर की दैनिक आवक चालू हो गई है तथा मंडियों में मसूर के भाव 3,700 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं, आगे दैनिक आवक बढ़ने पर इसकी कीमतों में और मंदा आने का अनुमान है जबकि केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2016-17 के लिए मसूर का एमएसपी 3,950 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है।.................आर एस राणा

27 February 2017

खाद्य निगम को भंडारण का गम!

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को पिछले दो वर्षों में अनाज के भंडारण की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा था लेकिन इस बार गेहूं का ज्यादा उत्पादन होने और उसकी सरकारी खरीद बढऩे पर निगम के सामने अनाज के भंडारण का गंभीर मसला खड़ा हो सकता है। संभावित स्थिति से निपटने के लिए निगम अभी से रणनीति बनाने में जुट गया है। केंद्रीय खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने 15 फरवरी को जारी एक बयान में कहा था कि अप्रैल से शुरू होने वाले गेहूं खरीद सत्र में सरकार ने 3.3 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। यह वर्ष 2016 में की गई 2.29 करोड़ टन खरीद से करीब 33 फीसदी अधिक है। हालांकि गेहूं खरीद का यह लक्ष्य पूरे साल के लिए रखा गया है लेकिन इसमें से बहुत बड़ा हिस्सा अप्रैल-जून की तिमाही के दौरान ही खरीद लिया जाएगा।
 इसी तरह खरीफ फसलों के विपणन वर्ष 2016-17 में सरकारी एजेंसियों ने 15 फरवरी तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 4.37 करोड़ टन धान की खरीद कर ली है। इसके अलावा एफसीआई ने छोटे किसानों के कंसोर्टियम एसएफएसी और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) के साथ मिलकर 15 फरवरी तक करीब 10 लाख टन दालें भी खरीदी हैं। सरकार ने पहले खरीफ सत्र में उपजे धान के लिए 3.3 करोड़ टन खरीद का लक्ष्य रखा था लेकिन बाद में उसमें 50 लाख टन की बढ़ोतरी कर दी गई।
 एफसीआई के एक सूत्र ने बताया कि सरकार ने उसे देश के अलग-अलग इलाकों से दालों की खरीद करने को कहा है लेकिन उसे रखने के लिए अतिरिक्त स्थान की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य भी करीब 1 करोड़ टन बढ़ा दिया है। उस अधिकारी ने कहा, 'ऐसी स्थिति में हमें इस साल खरीदे हुए अनाज को रखने के लिए अतिरिक्त स्थान की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए हम निजी गोदामों की सेवाएं ले सकते हैं।' पिछले दो वर्षों में तो अनाज उत्पादन कम रहने से सरकारी खरीद में भी उछाल नहीं आई थी। इस वजह से एफसीआई को भंडारण के लिए जगह की कमी महसूस नहीं हुई थी। उस दौरान निजी गोदामों की जरूरत ही नहीं पड़ी।
वैसे इस साल भी निजी गोदामों की जरूरत तभी पड़ेगी जब बड़ी बहुराष्ट्रीय अनाज कंपनियों की तरफ से किसानों की दी जाने वाली कीमतें सरकारी मूल्य से कम होंगी। एफसीआई के एक अधिकारी ने कहा, 'अगर कंपनियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक भाव दिया तो भरोसेमंद कंपनियां अधिक अनाज खरीद सकती हैं। इसके बावजूद एफसीआई ने मार्च के अंत से शुरू होने वाली खरीद प्रक्रिया में 2.55 करोड़ टन से लेकर 2.85 करोड़ टन गेहूं खरीदने की योजना बनाई है।'
 बहरहाल यह सच है कि पिछले कुछ वर्षों में अनाज की खरीद करने वाली सरकारी एजेंसियों ने अपनी भंडारण क्षमता में काफी सुधार किया है। केंद्र और राज्य सरकारों की खरीद एजेंसियों की कुल भंडारण क्षमता छह वर्षों में एक तिहाई बढ़कर 8.14 करोड़ टन हो गई है। इनके अलावा केंद्रीय भंडारण निगम, राज्य भंडारण निगम और निजी निवेशकों ने भी 1.33 करोड़ टन भंडारण की क्षमता का निर्माण किया है। एफसीआई ने इसमें से 1.24 करोड़ टन क्षमता वाले गोदामों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। 
 नैशनल कोलैटरल मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय कौल का कहना है कि परंपरागत अनाज बाजारों में भंडारण को लेकर कोई समस्या नहीं होगी लेकिन गैर-परंपरागत बाजारों में ऐसी समस्या खड़ी हो सकती है। दरअसल सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2016-17 के फसल सत्र में चावल और गेहूं दोनों का ही उत्पादन अच्छा रहेगा। कृषि मंत्रालय ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि इस बार चावल का उत्पादन 10.88 करोड़ टन और गेहूं का उत्पादन 9.66 करोड़ टन रह सकता है। (BS Hindi)

1 डॉलर की कीमत फिर से 66.80 रुपये के पार

डॉलर के मुकाबले रुपया 3.5 महीने के ऊपरी स्तर से फिसल गया है और 1 डॉलर की कीमत फिर से 66.80 रुपये के पार चली गई है। आज अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का भाषण है जिस पर बाजार की नजर है। वहीं अमेरिका में आज कंज्यूमर कॉन्फिडेंस के आंकड़े भी आएंगे। सिटी ग्रुप ने इस साल के अंत तक सोने को 1300 डॉलर तक जाने की संभावना जताई है, जो फिलहाल 1250 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। सिटी ग्रुप का मानना है कि ट्रंप की पॉलिसी में अनिश्चितता और नीदरलैंड, फ्रांस और जर्मनी में होने वाले चुनाव से सोने को सपोर्ट मिलेगा। गौर करने वाली बात ये है कि मौजूदा हालात में पिछले 1 हफ्ते के दौरान गोल्ड ईटीएफ की होल्डिंग करीब 63 टन बढ़ गई है। कच्चे तेल में आज मजबूती है और नायमैक्स पर इसका दाम 54 डॉलर के ऊपरी स्तर पर बना हुआ है। इस बीच फरवरी में मलेशिया से होने वाले पाम तेल एक्सपोर्ट में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई है।

26 February 2017

कॉमैक्स पर सोना 1250 डॉलर के ऊपर

सोने ने घरेलू बाजार में पिछले हफ्ते 4 महीने का ऊपरी स्तर छू लिया। वहीं ग्लोबल मार्केट में ये 3.5 महीने के ऊपरी स्तर पर है। हालांकि अब ऊपरी स्तर से कुछ दबाव दिख रहा है। लेकिन इसके बावजूद कॉमैक्स पर सोना 1250 डॉलर के ऊपर काराबार कर रहा है। दरअसल बाजार की नजर ट्रंप की पॉलिसी पर है। तस्वीर साफ न होने की वजह से पिछले हफ्ते तेजी आई थी। लेकिन ऊपरी स्तर पर कमजोर मांग से कीमतों पर दबाव भी है। इस बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है नायमैक्स पर क्रूड का दाम 54 डॉलर के पार चला गया है। दरअसल ओपेक का उत्पादन कटौती कमोबेश पूरी तरह से लागू होने के बाद आगे चलकर सप्लाई पर असर की आशंका है। ऐसे में कीमतों को सपोर्ट मिला है।

25 February 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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23 February 2017

पाम तेल की कीमतों में गिरावट

आर एस राणा
नई दिल्ली। मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन मार्च से बढ़ने का अनुमान है इसका असर पाम तेल की कीमतों पर पड़ना चालू हो गया है। गुरुवार को मलेशिया में पाम तेल का भाव 2,800 रिंगिट से भी नीचे आ गया है जोकि पिछले साढ़े तीन महीने का निचला स्तर है।
भारत में खाद्य तेलों के आयात में पाम तेल की हिस्सदेारी सबसे ज्यादा है इसलिए इसका असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर भी पड़ेगा। वैसे भी खरीफ के साथ ही रबी में भी घरेलू बाजार में तिलहनों की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है जिससे सरसों और मूंगफली की कीमतों में गिरावट आई है। सोयाबीन की कीमतों भी पिछले दस दिनों से मंदे का ही रुख बना हुआ है।
घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के भाव काफी नीचे आ चुके हैं, तथा आगे त्यौहारी मांग है इसलिए इनकी कीमतों में नीचे भाव में मांग निकलने से हल्का सुधार आ सकता है लेकिन आयात तेल सस्ते होने के कारण बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।.............आर एस राणा

22 February 2017

कच्चे तेल में उछाल

अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के अनुमान से सोने की चाल आज कमजोर पड़ गई है। कॉमैक्स पर सोना दबाव के साथ 1235 डॉलर के पास बेहद छोटे दायरे में कारोबार कर रहा है। चांदी में भी सुस्ती है। लेकिन भंडार में कमी से कच्चे तेल में उछाल है और ब्रेंट का दाम करीब 1 फीसदी उछल गया है। नायमैक्स पर भी क्रूड करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 54 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। जबकि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के अनुमान से एलएमई पर कॉपर कमजोर है। हालांकि डॉलर में नरमी से आज रुपये को हल्का सपोर्ट मिला है।

मार्च में आयेगा 2 लाख टन आयातित गेहूं

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में भले ही देश में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान हो, लेकिन सस्ता होने के कारण आयातक अभी भी गेहूं के आयात सौदे कर रहे हैं। चालू सीजन में अभी तक करीब 40 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है जबकि मार्च में करीब 2 लाख टन गेहूं का और आयात होने का अनुमान है।
आयातित गेहूं सस्ता होने के कारण दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें आयातित गेहूं का स्टॉक कर रही है तथा माना जा रहा है कि कुल आयात हुए 40 लाख टन गेहूं में से फ्लोर मिलों के पास करीब 18 से 20 लाख टन गेहूं का स्टॉक बचा हुआ है, जिसकी पिसाई मार्च-अप्रैल में होगी। आस्टेलिया से आयातित गेहूं का भाव तुतीकोरन बंदरगाह पर 1,665 से 1,710 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि लाल गेहूं का भाव 1,610 से 1,620 रुपये प्रति क्विंटल है। इस समय तुतीकोरन, चैन्नई और कोचीन बंदरगाह पर ही आयातित गेहूं आ रहा है।
चालू रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है तथा इन भावों में दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें गेहूं की खरीद उत्तर भारत के राज्यों से करती है तो दक्षिण भारत की मिलों में पहुंच इसका भाव करीब 2,000 प्रति क्विंटल होगा जबकि आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं दक्षिण भारत की मिलों में पहुंच 1,800 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रहा है इसीलिए मिलें आयात गेहूं का स्टॉक कर रही हैं।-----------------पूरी खबर के लिए जुड़े 

rsrana2001@gmail.com

21 February 2017

चीनी मिलों पर किसानों के 5,795 करोड़ रुपये बकाया

इस बार अच्छी कीमत के बावजूद उत्तर प्रदेश में फरवरी के दूसरे सप्ताह तक चीनी मिलों पर किसानों के गन्ने का 5,795 करोड़ रुपये बकाया था। यानी उद्योग के लिए अच्छा साल होने पर भी किसानों को अच्छा फल नहीं मिल पाया है। चालू चीनी सीजन 1 अक्टूबर से (यह सितंबर के आखिर तक चलता है) शुरू हुआ है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की देनदारी के 5,795 करोड़ रुपये में से कंपनियों का हिस्सा 92 प्रतिशत के साथ 5,320 करोड़ रुपये था। इस कुल बकाया में से 55 प्रतिशत केवल चार कंपनियों पर ही बाकी था।
 गन्ना किसानों को 14 दिनों के अंदर उनका भुगतान मिलना चाहिए। इसके बाद यह राशि बकाया की श्रेणी में आ जाती है। इस सीजन में पिछले सप्ताह तक उत्तर प्रदेश में 16,894 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था जिसमें से 66 प्रतिशत यानी 11,098 करोड़ रुपये ही दिए गए। राज्य में 116 मिलें चल रही हैं। इनमें से 91 मिलें निजी क्षेत्र में और 24 सहकारी क्षेत्र में हैं। एक सरकारी चीनी मिल है। 1 फरवरी तक मिलों पर किसानों का 9,649 करोड़ रुपये का बकाया था।
 उत्तर प्रदेश के बाद कर्नाटक में 910 करोड़ रुपये, गुजरात में 455 करोड़ रुपये, तमिलनाडु में 400 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र में 363 करोड़ रुपये का बकाया हैं। इन चारों राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा की गई उचित और लाभकारी मूल्य की अनुशंसा को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा स्वीकृत आधार पर बकाया का आकलन किया जाता है। उत्तर प्रदेश ने अपने किसानों के लिए ऊंची दर तय कर रखी है। सरकार ने 2016-17 में चीनी उत्पादन 2.2 करोड़ टन से कुछ कम रहने का अनुमान जताया है, जबकि निजी व्यापारियों का विचार है कि यह दो करोड़ टन से ज्यादा नहीं होगा। (BS Hindi)

कच्चे तेल में तेजी

अमेरिका में आज फेड की पिछली बैठक का ब्यौरा जारी होगा और इससे पहले सोना बिल्कुल ठहर गया है। इसमें कल के स्तर के आसपास 1235 डॉलर पर कारोबार हो रहा है। ऊपरी स्तर से कुछ दबाव भी है और चांदी में भी सुस्ती है। हालांकि कच्चे तेल में तेजी आई है और ब्रेंट का दाम 57 डॉलर के पास पहुंच गया है। जबकि इसमें नायमैक्स पर 54 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। दरअसल ओपेक ने उत्पादन कटौती को विस्तार देने का संकेत दिया है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों को सपोर्ट मिला है और कल 1.5 फीसदी की तेजी के बाद आज भी करीब 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है।

केंद्र सरकार गेहूं पर लगा सकती है आयात शुल्क

आर एस राणा
नई दिल्ली। गेहूं की कीमतों में गिरावट आई तो केंद्र सरकार आयात शुल्क लगा सकती है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री रामविलास पासवान ने कहां मार्च में नए गेहूं की आवक बढ़ जायेगी, ऐसे में भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आए तो सरकार किसानों के हितों को देखते हुए आयात शुल्क लगाने पर विचार करेगी, साथ ही गेहूं की एमएसपी पर खरीद भी सुनिष्चित करेगी।
उन्होंने बताया कि दलहन की कीमतों में आई गिरावट के कारण केंद्र सरकार सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से दलहन की खरीद कर रही है। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में गेहूं का उत्पादन 965 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान है जबकि केंद्र सरकार ने एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 330 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है।
केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए 8 दिसंबर 2016 को आयात शुल्क को शुन्य कर दिया था। आयात शुल्क घटने के बाद से 2 महीनों में करीब 30 से 40 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है जबकि कुल आयात अभी तक 55 लाख टन से भी ज्यादा का हो चुका है। उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद के लिए तैयारी की जा रही है, तथा किसानों को गेहूं एमएसपी से नीचे नहीं बेचना पड़े, इसकी हर संभव कदम उठायेंगे।
जानकारों का मानना है कि पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से तो गेहूं की एमएसपी पर खरीद अच्छी होगी, लेकिन उत्तर प्रदेश से खरीद कम रहेगी, साथ ही दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों के पास आयात गेहूं होने के कारण इनकी मांग भी मार्च-अप्रैल में कम रहेगी, ऐसे में उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं के भाव घटकर 1,450 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल बनने का अनुमान है।..............आर एस राणा

20 February 2017

ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों पर दबाव

डॉलर में उछाल से ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। कॉमैक्स पर सोना करीब 0.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। चांदी भी 18 डॉलर के नीचे आ गई है। हालांकि कच्चे तेल में तेजी आई है और नायमैक्स पर क्रूड का दाम 54 डॉलर के पास पहुंच गया है। इसमें करीब 0.5 फीसदी की तेजी है। अमेरिका में भंडार गिरने के अनुमान से कीमतों को सपोर्ट मिला है।  लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है।

केस्टर सीड का उत्पादन 25 फीसदी कम होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2016-17 में केस्टर सीड का उत्पादन 25 फीसदी घटकर 10.67 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 14.23 लाख टन का हुआ था।
सूत्रों के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में केस्टर सीड का उत्पादन 27 फीसदी घटकर 8.61 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि राजस्थान में 16 फीसदी घटकर 1.23 लाख टन का, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में 19 फीसदी घटकर 64,000 टन और अन्य राज्यों में 21 फीसदी घटकर 19,000 टन का उत्पादन होने का अनुमान है।
चालू फसल सीजन 2016-17 में गुजरात में केस्टर सीड की बुवाई 5.65 लाख हैक्टेयर में, राजस्थान में 1.70 लाख हैक्टेयर में, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में 78,000 हैक्टेयर में तथा अन्य राज्यों में 32,000 हैक्टेयर में केस्टर सीड की बुवाई हुई थी। पूरे देश में 8.45 लाख हैक्टेयर में सीड की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले साल गुजरात में 7.81 लाख हैक्टेयर में, राजस्थान में 1.99 लाख हैक्टेयर में को मिलाकर देशभर में 11.36 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
इस समय उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की दैनिक आवक 20 से 25 हजार बोरी की हो रही है तथा मार्च में दैनिक आवक बढ़ने पर केस्टर सीड की मौजूदा कीमतों में 150 से 200 रुपये की गिरावट आने पर खरीद करनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में इसकी कीमतों में तेजी ही आने का अनुमान है। सोमवार को दिसा मंडी में केस्टर सीड के भाव 3,750 से 3,775 रुपये प्रति क्विंटल रहे।........आर एस राणा

कपास उत्पादन 341 लाख गांठ होने का अनुमान -सीएआई

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर से शुरु हुए चालू सीजन में कपास का उत्पादन 341 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है जबकि पिछले साल कपास का उत्पादन 337.75 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था
कॉटन एसोसिएशन आफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार उत्पादक मंडियों में 31 जनवरी तक कपास की आवक 157.75 लाख गांठ की हो चुकी है तथा इस समय दैनिक आवक करीब पौने दो लाख गांठ की हो रही है।
सीआईए के अनुसार चालू सीजन के शुरु में 45 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचा हुआ था जबकि 341 लाख गांठ का उत्पादन होने का अनुमान है, इसके अलावा करीब 19 लाख गांठ का आयात भी हो जायेगा। ऐसे में कुल उपलब्धता 405 लाख गांठ की बैठेगी। चालू सीजन में कपास की कुल खपत 295 लाख गांठ की होने का अनुमान है इसके अलावा करीब 45 से 50 लाख गांठ का निर्यात होने की संभावना है। ऐसे में आगामी नए सीजन के समय कपास का बकाया स्टॉक चालू सीजन के मुकाबले ज्यादा रहेगा। पिछले साल कपास का 72 लाख गांठ का निर्यात हुआ था।
उत्पादक मंडियों में सोमवार को कपास के भाव 41,500 42,000 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रहे, सप्ताहभर में इसकी कीमतों में 1,000 से 1,500 रुपये प्रति कैंडी का मंदा आया है तथा माना जा रहा है मौजूदा कीमतों में और भी 500 से 1,000 रुपये का मंदा आ सकता है लेकिन यार्न मिलों के पास स्टॉक कम है इसलिए नीचे भाव में यार्न मिलों की मांग बढ़ने से भाव में फिर सुधार आयेगा। ..........आर एस राणा

19 February 2017

ग्लोबल मार्केट में सोने की तेजी पर ब्रेक

अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने के अनुमान से डॉलर में रिकवरी आई है और ऐसे में ग्लोबल मार्केट में सोने की तेजी पर ब्रेक लग गया है। कॉमैक्स पर सोना 1133 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। चांदी भी 18 डॉलर के नीचे आ गई है। हालांकि कच्चे तेल में कारोबार के शुरुआत से ही उठापटक जारी है। ओपेक के प्रोडक्शन कटौती की वजह से क्रूड को जहां सपोर्ट मिल रहा है, वहीं अमेरिका में उत्पादन बढ़ने के अनुमान से ऊपरी स्तर से दबाव भी शुरु हो जा रहा है। इस बीच सप्लाई की किल्लत से कॉपर में तेजी का रुख है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर का दाम 6000 डॉलर के पार है, ऐसे में दूसरे मेटल को भी सपोर्ट मिला है।

18 February 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
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मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी से भाव में गिरावट की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी में मक्का की बुवाई में हुई बढ़ोतरी से इसकी पैदावार भी ज्यादा होने का अनुमान है, जिससे मौजूदा कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है। मक्का के भाव दिल्ली में 1,570 से 1,575 रुपये, निजामाबाद मंडी में 1,400 से 1,480 रुपये, दावणगिरी में 1,630 रुपये और बिहार की गुलाबबाग मंडी में 1,500 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल हैं। मार्च में दक्षिण भारत की मंडियों में नई मक्का की आवक चालू हो जायेगी, जबकि अप्रैल में बिहार की मंडियों में आवकों का दबाव बन जायेगा, जिससे मक्का की कीमतों में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आने की आशंका है।
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू रबी में मक्का का उत्पादन बढ़कर 68.9 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रबी में इसकी पैदावार 65.1 लाख टन की हुई थी। रबी में मक्का की सबसे ज्यादा पैदावार बिहार में होती है, बिहार के अलावा आंध्रप्रदेश, गुजरात, कर्नाटका, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना में रबी सीजन में मक्का का उत्पादन होता है। चालू रबी में मक्का की बुवाई बढ़कर 16.50 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 15.07 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। हालांकि आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में बुवाई पिछले साल की तुलना में कम हुई है, लेकिन बिहार, महाराष्ट्र और तेलंगाना में बुवाई ज्यादा हुई है।
मार्च दक्षिण भारत के राज्यों की मंडियों में रबी मक्का की आवक चालू हो जायेगी, तथा अप्रैल में बिहार में मक्का की आवकों का दबाव बन जायेगा। होली के बाद पोल्ट्री फीड निर्माताओं की मांग भी मक्का में कम हो जायेगी। उधर विश्व बाजार में मक्का के भाव कम है इसलिए निर्यात की संभावना नहीं है। अतः ऐसे में आगामी महीने में घरेलू बाजार में मक्का की कीमतों में 200 से 300 रुपये क्विंटल की गिरावट आने की आशंका है। बिहार की मंडियों में मक्का के भाव घटकर नीचे में 1,200 से 1,250 रुपये प्रति क्विंटल बन सकते हैं जबकि केंद्र सरकार मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।.........आर एस राणा

17 February 2017

चालू पेराई सीजन में चीनी उत्पादन में 26.62 लाख टन की कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2016 से चालू हुए पेराई सीजन 2016-17 में 15 फरवरी 2017 तक चीनी का उत्पादन 26.62 लाख टन घटकर केवल 146.72 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका उत्पादन 173.34 लाख टन का हुआ था।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशसन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में 483 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हुई थी, जिनमें से 191 चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है। महाराष्ट्र में जहां 80 फीसदी चीनी मिलों में पेराई बंद हो चुकी है, वहीं कर्नाटका में 95 फीसदी मिलें बंद हो चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश में चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर से 15 फरवरी तक 54 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 45.55 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में 116 चीनी मिलों में पेराई चल रही है। सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन में 15 फरवरी तक 39.73 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 62.70 लाख टन का उत्पादन हो चुका था। राज्य की 153 चीनी मिलों में से इस समय केवल 31 चीनी मिलों में पेराई चल रही है।
उधर कर्नाटका में चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर से 15 फरवरी तक 20.25 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 32.31 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। राज्य में 58 चीनी मिलों में पेराई आरंभ हुई थी जबकि इस समय केवल 3 चीनी मिलों में पेराई चल रही है। आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में चालू पेराई सीजन में अभी तक 4 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5.50 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका था।
तमिलनाडु में 15 फरवरी तक 5.10 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जबकि पिछले साल 4 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। गुजरात में चालू पेराई सीजन में 7 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 8.08 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। अन्य राज्यों बिहार में 3.75 लाख टन, पंजाब में 3.80 लाख टन, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 3.30 लाख टन, हरियाणा में 3.20 लाख टन और उत्तराखंड में 2.10 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।
विश्व बाजार में चीनी के भाव उंचे है तथा चीनी पर आयात शुल्क 40 फीसदी है, ऐसे में जब तक केंद्र सरकार चीनी के आयात को शुल्क मुक्त नहीं करेगी, तब तक घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट आने की संभावना नहीं है।.........आर एस राणा

16 February 2017

डॉलर में आई गिरावट से सोने को सपोर्ट

डॉलर में आई गिरावट से सोने को सपोर्ट मिला है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम फिर से 1240 डॉलर के बेहद करीब पहुंच गया है। हालांकि ऊपरी स्तर से थोड़ा दबाव भी बनने लगा है। वहीं चांदी भी 18 डॉलर के ऊपर जाकर बिकवाली का शिकार हो गई है। इस साल सोने में करीब 7.5 फीसदी की तेजी आ चुकी है। कच्चे तेल में बढ़त देखी जा रही है। नायमैक्स पर क्रूड का भाव 53 डॉलर के पार है। खबर है कि ओपेक कीमतों को सपोर्ट देने के लिए उत्पादन कटौती को थोड़ा और विस्तार दे सकता है।  इसके लिए उसे फिर से सभी सदस्यों को सहमत करना होगा, लेकिन इस तरह की अटकलों से कच्चे तेल की की कीमतों को सपोर्ट मिला है।  सप्लाई की किल्लत की आशंका से बेस मेटल में भी तेजी का रुख है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में करीब 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है।

सरसों उत्पादन अनुमान में 12 फीसदी की बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार चालू रबी में सरसों का उत्पादन 79.12 लाख टन होने का अनुमान है जोकि पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल 67.97 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था।
जानकारों के अनुसार चालू रबी सीजन में सरसों का उत्पादन 70 से 72 लाख टन होने का अनुमान है जबकि देश में सरसों की सालाना खपत 50 से 55 लाख टन की होती है। अतः ऐसे में करीब 18 से 20 लाख टन सरसों का बकाया स्टॉक बचेगा।
सरसों की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में चालू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो जनवरी के प्रथम पखवाड़े में दैनिक आवक का दबाव बन जायेग। स्टॉकिस्ट अभी सरसों की खरीद नहीं करेंगे, ऐसे में माना जा रहा है कि उत्पादक मंडियों में 42 फीसदी कंडीशन की सरसों के भाव घटकर नीचे में 3,400 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल बनने का अनुमान है जबकि मंडियों में डेरी 3,100 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल बिकेंगी। भरतपुर मंडी में सरसों के भाव गुरुवार को 3,950 रुपये तथा अलवर मंडी में भाव 3,750 रुपये प्रति क्विंटल रहे। केंद्र सरकार रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 3,700 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है।
मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में तिलहन उत्पादन बढ़कर 335.96 लाख टन होने का अनुमान है जोकि अभी तक का रिकार्ड उत्पादन है। पिछले साल देश में 252.51 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ था।.......आर एस राणा

15 February 2017

अमेरिका में क्रूड का भंडार करीब 95 लाख बैरल बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर

अमेरिका में भंडार बढ़ने से कच्चे तेल में दबाव बढ़ गया है। कल अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट की रिपोर्ट आई थी, जिसके मुताबिक अमेरिका में क्रूड का भंडार करीब 95 लाख बैरल बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर चला गया है। भंडार में ये बढ़त बाजार के अनुमान का करीब तीन गुना है। यही नहीं गैसोलीन के भंडार में भी करीब 28 लाख बैरल की बढ़त देखी गई है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ग्लोबल मार्केट में चांदी का दाम 18 डॉलर के स्तर पर चला गया है। सोने में भी हल्की बढ़त है। हालांकि बढ़त के बावजूद सोना बेहद छोटे दायरे में कारोबार कर रहा है। दरअसल जनवरी में यूएस इकोनॉमी के शानदार आंकड़ों से अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना मजबूती हो गई है। यूएस फेड चेयरमैन के संकेत के बाद गोल्डमैन सैक्स ने इस साल की पहली छमाही में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना जताई है। वहीं जे पी मॉर्गन ने कहा है कि मई तक फेड दरें बढ़ा सकता है। इस बीच रुपये में हल्की कमजोरी है।

खाद्यान्न उत्पादन रिकार्ड 27.19 करोड़ टन होने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2016-17 में देश में खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन 27.19 करोड़ टन होने का अनुमान है। जबकि इससे पहले रिकार्ड खाद्यान्न की पैदावार 2013-14 में 26.50 करोड़ टन की हुई थी।
कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चावल का उत्पादन बढ़कर 10.88 करोड़ टन होने का अनुमान है जोकि रिकार्ड है। इसके अलावा गेहूं का उत्पादन भी चालू रबी में बढ़कर 966.4 लाख टन होने का अनुमान है। मोटे अनाजों का उत्पादन चालू फसल सीजन 2016-17 में 443.4 लाख टन होने का अनुमान है।
दलहन का उत्पादन चालू फसल सीजन 2016-17 में बढ़कर 221.4 लाख टन होने का अनुमान है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना का उत्पादन 91.2 लाख टन, अरहर का उत्पादन 42.3 लाख टन और उड़द का उत्पादन 28.9 लाख टन होने का अनुमान है।
इसी तरह तिलहनों का उत्पादन फसल सीजन 6 करोड़ टन होने का अनुमान है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन का उत्पादन 141.3 लाख टन, मूंगफली का 84.7 लाख टन होने का अनुमान है। कपास का उत्पादन चालू फसल सीजन में 325.1 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है।........आर एस राणा

एमएसपी पर 330 लाख टन गेहूं की खरीद करेगी एफसीआई

आर एस राणा
नई दिल्ली। पहली अप्रैल से शुरु होने वाले रबी विपणन सीजन 2017-18 में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) 330 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर करेंगी। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय की सचिव ने राज्य के खाद्य सचिवों के साथ बैठक के बाद यह जानकारी दी। पिछले रबी सीजन में एमएसपी पर केवल 229.61 लाख टन गेहूं की ही खरीद हुई थी। रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में 1,525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद हुई थी।
उन्होंने बताया कि चालू रबी में पंजाब से 115 लाख टन, हरियाणा से 75 लाख टन, मध्य प्रदेश से 85 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 30 लाख टन, राजस्थान से 17.50 लाख टन, बिहार से 5 लाख टन, उत्तराखंड से 1.50 लाख टन और गुजरात से 0.50 लाख टन तथा अन्य राज्यों से भी 0.50 लाख टन गेहूं की खरीद की जायेगी।
उन्होंने बताया कि रबी में एमएसपी पर 50 लाख टन चावल की खरीद भी की जायेगी। चावल की सरकारी खरीद आंध्रप्रदेश से 13 लाख टन, तेलंगाना से 15 लाख टन, तमिलनाडु से 5 लाख टन, केरल से 1 लाख टन, पश्चिमी बंगाल से 8 लाख टन और असम से 0.25 लाख टन तथा महाराष्ट्र से 0.75 लाख टन चावल की खरीद का लक्ष्य किया है।
खरीफ विपणन सीजन 2016-17 में चावल की सरकारी खरीद का लक्ष्य 330 लाख टन का तय किया था जिसमें से अभी तक 292.31 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हो भी चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 28 लाख टन ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि में 264.53 लाख टन चावल की सरकारी खरीद हुई थी।
कृषि सचिव, भारत सरकार के अनुसार चालू रबी में गेहूं का उत्पादन 950 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 935 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। हालांकि जानकारों का मानना है कि पिछले साल गेहूं की पैदावार 840 से 850 लाख टन ही हुई है।.............आर एस राणा

14 February 2017

डॉलर करीब एक महीने की ऊंचाई पर

अगली बैठक में यूएस फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इस बात का संकेत खुद फेड चेयरमैन जेनेट येलेन ने दिया है। उनके इस संकेत के बाद डॉलर करीब एक महीने की ऊंचाई पर चला गया है और इससे दुनिया भर में सोना, चांदी, कच्चा तेल और बेस मेटल पर दबाव बढ़ गया है। कच्चा तेल आज भी करीब 0.5 फीसदी नीचे है जबकि सोने और चांदी में हल्की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल भी गिरावट के बाद बिल्कुल सुस्त कारोबार कर रहे हैं। ग्लोबल मार्केट में सोयाबीन भी कमजोर है और इसका असर आज घरेलू कमोडिटी बाजार पर दिख सकता है। हालांकि डॉलर में बढ़त के बावजूद रुपया खुद को संभालने में कामयाब है और 1 डॉलर की कीमत अभी भी 67 रुपये के नीचे है।

खाद्य तेलों के आयात में लगातार तीसरे महीने में आई कमी

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ के साथ रबी में तिलहनों की पैदावार ज्यादा होने का असर खाद्य तेलों के आयात पर पड़ रहा है तथा लगातार तीसरे महीने में खाद्य तेलों के आयात में कमी आई है। जनवरी महीने में खाद्य तेलों का आयात 19 फीसदी घटकर 1,024,859 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी महीने में 1,258,054 टन खाद्य तेलों का आयात हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष नवंबर 2016 से जनवरी 2017 के दौरान खाद्य तेलों के आयात में 15 फीसदी की कमी आकर कुल आयात 3,410,008 टन का ही हुआ है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 4,016,391 टन का हुआ था। एसईए के अनुसार खरीफ में तिलहनों की पैदावार में हुई बढ़ोतरी से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा है, साथ ही नोटबंदी के कारण आम आदमी की खरीद में भी कमी आई है।
विश्व बाजार में भाव तेज होने के कारण जनवरी में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। आरबीडी पामोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर जनवरी में बढ़कर 788 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 773 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रुड पाम तेल का भाव जनवरी में बढ़कर 794 डॉलर प्रति टन हो गया जबकि दिसंबर में इसका भाव 772 डॉलर प्रति टन था। क्रुड सोयाबीन तेल की कीमतों में जरुर दिसंबर के मुकाबले जनवरी में गिरावट आई है। दिसंबर में क्रुड सोयाबीन तेल का आयात भाव भारतीय बंदरगाह पर 887 डॉलर प्रति टन था जोकि जनवरी में घटकर 857 डॉलर प्रति टन रह गया।........आर एस राणा

अलनीनो का खतरा सूखे की आशंका


पिछले साल अच्छी बारिश के बाद इस साल फिर से देश पर सूखे का खतरा मडरा रहा है। दुनिया भर की मौसम एजेंसियों ने आशंका जताई है कि ला-नीना, जो आमतौर पर अच्छी बारिश के लिए जाना जाता है। ये अब कमजोर पड़ गया है और आगे चलकर अलनीनो फिर मजबूत हो सकता है।
2014 और 2015 अलनीनो वर्ष था और तब देश में सूखा पड़ा था। इस साल भी अलनीनो की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से मौसम एजेंसियां ये कयास लगा रही हैं कि ये स्थिति अगर ऐसे ही रहता है तो सूखा पड़ सकता है। अलनीनो वर्ष में आमतौर पर सूखा पड़ता है और आशंका जताई जा रही है कि अगस्त के बाद अलनीनो मजबूत हो सकता है। हालांकि सही तस्वीर अप्रैल तक ही पता चल सकेगी।

डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती

कल की भारी गिरावट के बाद कच्चे तेल में रिकवरी आई है। ग्लोबल मार्केट में क्रूड का दाम करीब 0.25 फीसदी बढ़ गया है। नायमैक्स पर इसका भाव 53 डॉलर के पार है। जबकि ब्रेंट 56 डॉलर के नीचे है। आज अमेरिकी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट की भंडारण रिपोर्ट पर बाजार की नजर है। इसके साथ ही सोने और चांदी में भी हल्की मजबूती दिख रही है। सप्लाई किल्लत की आशंका से लंदन मेटल एक्ससेंज पर बेस मेटल में भी बढ़त पर कारोबार हो रहा है। यूरोजोन में आज इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के आंकड़े आने वाले हैं। हालांकि अमेरिकी संसद की बैंकिंग कमिटी के सामने आज फेड चेयरमैन जेनेट येलेन का भाषण भी होने वाला है। ऐसे में डॉलर काफी नर्वस है जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है और एक डॉलर की कीमत 67 रुपये के नीचे है। घरेलू बाजार में नए जीरे की आवक तेजी से बढ़ रही है। वहीं हल्दी और धनिया पर भी नई फसल का दबाव है। अगले महीने से नए गेहूं की आवक और बढ़ने की संभावना है।

13 February 2017

कपास में निर्यात पड़ते नहीं, भाव रुकने की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में आई तेजी से निर्यात पड़ते नहीं लग रहे हैं इसलिए कपास की कीमतों में चल रही तेजी रुकने की उम्मीद है। अहमदाबाद मंडी में सोमवार को शंकर 6 किस्म की कपास का भाव 43,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) रहा।
नोटबंदी के कारण नवंबर-दिसंबर में कपास की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में कम रही थी, जबकि निर्यातकों ने इस दौरान करीब 15 से 20 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) कपास के निर्यात सौदे भी कर दिए थे। घरेलू यार्न मिलों के पास कपास का स्टॉक कम था, अतः निर्यातकों के साथ ही घरेलू यार्न मिलों की मांग निकलने से भाव में तेजी आई है, लेकिन उंचे भाव में जहां कपास के नए निर्यात सौदे नहीं हो रहे हैं, वहीं यार्न मिलों की मांग भी कम हुई है। इसलिए भाव में चल रही तेजी रुकने की संभावना तो ही है, भाव में हल्की नरमी भी आ सकती है। हालांकि मौजूदा भाव में ज्यादा मंदे की उम्मीद इसलिए नहीं है कि यार्न मिलों के पास कुल स्टॉक कम है। विश्व बाजार में सोमवार को कपास का भाव 77.5 सेंट प्रति पाउंड रहा।
कॉटन कारर्पोरेषन आफ इंडिया (सीसीआई) एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू सीजन में पहली अक्टूबर से अभी तक उत्पादक मंडियों में 174.83 लाख गांठ कपास की ही आवक हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 185.25 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में कम आवक के कारण कपास का सीजन अप्रैल के अंत तक चलने का अनुमान है। ..............आर एस राणा

12 February 2017

कॉमैक्स पर सोने का दाम 1230 डॉलर के नीचे

डॉलर में आई रिकवरी से ग्लोबल कमोडिटी मार्केट पर दबाव बढ़ गया है। कच्चे तेल में सुस्ती है। वहीं सोने में हल्की गिरावट देखी जा रही है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1230 डॉलर के नीचे है। चांदी भी कमजोर है। लेकिन बेस मेटल में जोरदार तेजी आई है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर का  दाम 20 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। इसमें करीब 2 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं जिंक 9 साल के ऊपरी स्तर पर है। चीन में भी बेस मेटल की कीमतों में करीब 4 से 5 फीसदी की तेजी आई है। दरअसल चिली में बीएचपी बिलिटन की खदान में मजदूरों की हड़ताल से कॉपर की सप्लाई रुक गई है। ऐसे में किल्लत की आशंका से इसकी कीमतों में तेजी आई है। एलएमई पर कॉपर 6170 डॉलर के पार चला गया है। देखना होगा कि घरेलू बाजार में आज बेस मेटल किस तरह का रिएक्शन दिखाते हैं। इस बीच पिछले दिनों कीमतों में आई तेजी से कॉटन एक्सपोर्टर्स सौदे रद्द कर रहे हैं। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी आई है।

11 February 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
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आर एस राणा
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एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में दैनिक टिप्स

प्रिय पाठकों,
एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में दैनिक आधार पर किस भाव पर खरीद करें, क्या स्टोप लोस लगाए तथा टारगेट क्या है, इसका ट्रायल पीरियड समाप्त हो गया है, अब यह सर्विस केवल मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से दी जायेगी। इस सेवा के लिए हमें ई मेल  
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10 February 2017

केंद्रीय पूल में 10 लाख टन से ज्यादा है दलहन का स्टॉक

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्रीय पूल में 10.53 लाख टन से ज्यादा दलहन का स्टॉक है, तथा कुल स्टॉक में सबसे ज्यादा अरहर, मूंग और उड़द और मसूर का स्टॉक है। सार्वजनिक कंपनियों ने जहां खरीफ में 5.27 लाख टन दलहन की खरीद की है, वहीं 4.06 लाख टन दलहन के आयात सौदे हुए हैं।
खाद्य मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन 2016-17 में सार्वजनिक कंपनियों नेफैड, एफसीआई और एसएफएसी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 5,27,686 टन दलहन की खरीद की है जबकि खरीद का लक्ष्य 9.5 लाख टन का है। अभी तक कुल दलहन खरीद में सबसे ज्यादा नेफैड ने 3,39,443 टन खरीदी है, जबकि एफसीआई ने 1,31,216 टन और एसएफएसी ने 57,027 टन दलहन की खरीद की है।
नेफैड ने खरीफ में 1,28,425 टन मूंग, 58,993 टन उड़द और 1,52,024 टन अरहर की खरीद की है जबकि एफसीआई ने 56,212 टन मूंग, 18,135 टन उड़द और 56,867 टन अरहर की खरीद की है। उधर एसएफएसी ने 26,226 टन मूंग, 9,627 टन उड़द तथा 21,172 टन अरहर की खरीद की है। सार्वजनिक कंपनियों ने जहां मूंग और अरहर की खरीद एमएसपी पर की है वहीं उड़द की खरीद बाजार भाव पर की गई है।
मंत्रालय के अनुसार एमएमटीसी और एसटीसी ने 6 फरवरी 2017 तक 4,06,00 लाख टन दालों के आयात सौदे किए हैं जिनमें से 2,89,713 टन दालें भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच भी चुकी हैं। कुल आयात सौदों में अरहर के आयात सौदे 1,58,500 टन के हो चुके हैं तथा इसमें से 1,37,279 टन अरहर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है। इसके अलावा उड़द के आयात सौदे 42,500 टन के हुए हैं तथा इसमें 37,487 टन भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है। मसूर के आयात सौदे 1.35 लाख टन के किए जा चुके हैं जिसमें से 92,422 टन आ चुकी है। इसके अलावा चना के आयात सौदे 70 हजार टन के हुए हैं तथा 22,525 टन चने का आयात भी हो चुका है।......आर एस राणा

09 February 2017

डॉलर में रिकवरी से सोने की कीमतों पर दबाव

अमेरिका में रोजगार के अच्छे आंकड़ों और डॉलर में रिकवरी से सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। ग्लोबल मार्केट में सोने का भाव 3 महीने के ऊपरी स्तर से करीब 15 डॉलर गिर चुका है। दरअसल अच्छे आंकड़ों से वहां ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को मजबूती मिली है। सोने में आई गिरावट से के साथ चांदी पर भी दबाव बढ़ गया है और ये भी करीब 0.5 फीसदी नीचे है। कच्चा तेल इस पूरे हफ्ते के दौरान एक बेहद छोटे दायरे में कारोबार करता नजर आया है। ब्रेंट 55 डॉलर के ऊपर है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में भी छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है।

एग्री कमोडिटी में गेहूं का दाम ग्लोबल मार्केट में 7 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। इस हफ्ते शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड पर गेहूं में करीब 3 फीसदी की तेजी देखी गई है। दरअसल अमेरिकी कृषि विभाग ने गेहूं एक्सपोर्ट पर अनुमान बढ़ा दिया है, ऐसे में कीमतों को सपोर्ट मिला है।  डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी है।

ग्वार सीड, ग्वार गम और क्रुड में एनसीडीईएक्स-एमसीएक्स की 10 फरवरी की टिप्स

खरीदें - क्रुड पाम तेल पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में भाव नीचे जाने पर 3,530-3,540 रुपये पर खरीदें........3,515 रुपये का स्टोप लोस लगाए ( तथा पहला टारगेट है 3,565 और दूसरा टारगेट है 3,570 रुपये का
ग्वार सीड बेचे - फरवरी वायदा के अनुबंध में भाव बढ़ने पर 3,260 और 3,270 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचे.........3,285 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 3,240-3,230 रुपये प्रति क्विंटल का है।
ग्वार गम खरीदें - फरवरी वायदा के अनुबंध में भाव नीचे आने पर 6,300 और 6,320 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें............6,290 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 6,355 रुपये प्रति क्विंटल का है।
(मार्किट की खबर के हिसाब से यह केवल सलाहभर है, जोखिम के लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।)

सरकारी खरीद के बावजूद भी एमएसपी से नीचे बिक रही है मूंगफली

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ सीजन में मूंगफली की ज्यादा पैदावार किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। गुजरात के साथ ही अन्य उत्पादक राज्यों की मंडियों में किसानों को मूंगफली न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बेचनी पड़ रही है। चालू खरीफ सीजन के लिए केंद्र सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4,220 रुपये प्रति क्विंटल (100 रुपये बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि गुजरात की मंडियों में मूंगफली के भाव 3,750 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार चल रहे हैं।
मूंगफली के भाव एमएसपी से नीचे होने के कारण नेफैड समर्थन मूल्य पर खरीद तो कर रही है लेकिन खरीद सीमित मात्रा में ही हो रही है। चालू खरीफ में अभी तक नेफैड ने एमएसपी पर केवल 1,93,243 टन मूंगफली की खरीद ही की है।
कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ सीजन 2016-17 में मूंगफली की पैदावार 64.98 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल खरीफ सीजन में इसकी पैदावार केवल 53.40 लाख टन की ही हुई थी। चालू रबी सीजन में मूंगफली की बुवाई बढ़कर 6.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल रबी में इसकी बुवाई 5.96 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। बुवाई में हुई बढ़ोतरी से रबी में भी मूंगफली की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है।
मूंगफली दाने में इस समय थाइलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम की आयात मांग अच्छी बनी हुई है लेकिन खरीफ के साथ ही रबी में भी मूंगफली की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है ऐसे में आगामी दिनों में इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी की संभावना कम है।
दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की आयात मांग बढ़ने से दिसंबर महीने में मूंगफली दाने का रिकार्ड निर्यात हुआ है। दिसंबर महीने में 1.36 लाख मूंगफली दाने का निर्यात हुआ है जबकि दिसंबर 2015 में इसका निर्यात केवल 95 हजार टन का ही हुआ था।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 9 महीनों अप्रैल से दिसंबर के दौरान मूंगफली दाने का निर्यात बढ़कर 4.70 लाख टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2015-16 की समान अवधि में इसका निर्यात 3.70 लाख टन का हुआ था। चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 9 महीनों में इसके निर्यात में 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।........आर एस राणा

पीडीएस में आधार के बिना नहीं मिलेगा राशन

आर एस राणा
नई दिल्ली। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में राशन का आवंटन अब केवल आधार कार्ड जमा करना के बाद ही मिलेगा। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार 8 फरवरी 2017 से यह नियम लागू हो जायेगा। हालांकि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें आधार कार्ड बनवाने के लिए 30 जून 2107 तक का समय दिया गया है, ऐसे में 30 जून 2017 के बाद बगैर आधार कार्ड जमा कराए उपभोक्ताओं को राशन नहीं मिलेगा।
खाद्य सुरक्षा के तहत केंद्र सरकार पीडीएस में 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 3 रुपये प्रति किलो चावल उपभोक्ताओं को दे रही हैं। मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार असम, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के कार्ड धारकों को राहत दी गई है। ........आर एस राणा

08 February 2017

ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1240 डॉलर के पार

फ्रांस में चुनाव और यूरोपीय यूनियन से इसके बाहर होने की अटकलों के बीच सोने की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1240 डॉलर के पार चला गया है। डॉलर में आई गिरावट से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला है। वहीं चांदी भी तेज है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 25 पैसे की शानदार मजबूती आई है। 1 डॉलर की कीमत 67 रुपये के नीचे आ गई है और रुपया 3 महीने की ऊंचाई पर है। इस बीच कच्चा तेल कल के स्तर के आसपास बना हुआ है। वहीं, लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर 2 महीने के ऊपरी स्तर के पास है।

07 February 2017

डीओसी निर्यात में 131 फीसदी की भारी बढ़ोतरी

आर एस राणा
नई दिल्ली। जनवरी महीने में देश से डीओसी के निर्यात में 131 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हो कर कुल निर्यात 1,65,980 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जनवरी महीने में केवल 71,890 टन डीओसी का ही निर्यात हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2016-17 के पहले 10 महीनों अप्रैल से जनवरी के दौरान 1, 335,894 टन डीओसी का निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 1,300,465 टन का ही हुआ था।
एसईए के अनुसार जनवरी में सोया डीओसी का निर्यात 1,55,160 टन का हुआ है जबकि सरसों डीओसी का निर्यात 2,261 टन, केस्टर डीओसी का 5,263 टन और राइसब्रान डीओसी का 3,000 टन का हुआ है।
भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी के भाव जनवरी महीने में 361 डॉलर प्रति टन रहे, जबकि पिछले साल जनवरी में इसके भाव 492 डॉलर प्रति टन थे। इसी तरह से सरसों डीओसी के भाव जनवरी 2017 में भारतीय बंदरगाह पर 250 डॉलर प्रति टन रहे जबकि पिछले साल जनवरी में इसके भाव 304 डॉलर प्रति टन थे। .......आर एस राणा

केंद्र सरकार के पास 7.76 लाख टन दलहन का स्टॉक

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के पास इस समय 7.76 लाख टन दलहन का स्टॉक जमा है, तथा चालू सीजन में केंद्रीय पूल में कुल 9.71 लाख टन दालों का स्टॉक था, जिसमें से 77,199 टन दालों का वितरण राज्यों को किया जा चुका है।
केंद्र सरकार के पास कुल दलहन स्टॉक में 5.61 लाख टन दलहन की खरीद घरेलू किसानों से की गई है जबकि 4.06 लाख टन दलहन का आयात किया गया है, कुल आयात में 2.88 लाख टन दालों का आयात भातरीय बंदरगाह पर हो चुका है जबकि 1.12 लाख टन का आयात होना बाकि है।
सरकार के पास केंद्रीय पूल में इस समय 7.76 लाख टन में सबसे ज्यादा 3.16 लाख टन अरहर, 2.06 लाख टन मूंग, 1.20 लाख टन उड़द और 1 लाख टन मसूर तथा 31,765 टन चना का स्टॉक है।.........आर एस राणा

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल में भारी गिरावट

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल में भारी गिरावट आई है। कल बिकवाली हावी रहने के बाद आज भी करीब 1 फीसदी नीचे कारोबार हो रहा है। नायमैक्स पर भाव 52 डॉलर के काफी नीचे आ गया है। जबकि ब्रेंट 54.5 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। दरअसल कल अमेरिकी इंस्टीट्यूट की भंडारण रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार करीब 1 करोड़ 42 लाख बैरल बढ़ गया है। जबकि बाजार को सिर्फ 25 लाख बैरल भंडार बढ़ने की उम्मीद थी। वहीं गैसोलीन का भंडार भी करीब 29 लाख बैरल बढ़ गया है। वहीं पिछले साल चीन में कच्चे तेल की मांग में बढ़त पिछले 3 साल में सबसे कम रही है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। इस साल जनवरी से अबतक क्रूड की कीमतों में करीब 6 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। हालांकि सोना 3 महीने की ऊंचाई पर है और कॉमैक्स पर ये 1235 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालांकि कल की बढ़त के बाद चांदी में ऊपरी स्तर से हल्का दबाव है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी है।

ग्वार सीड, सरसों और क्रुड में एनसीडीईएक्स-एमसीएक्स की 8 फरवरी की टिप्स

खरीदें - क्रुड पाम तेल पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में भाव नीचे जाने पर 3,450-3,460 रुपये पर खरीदें........3,430 रुपये का स्टोप लोस लगाए ( तथा पहला टारगेट है 3,490 और दूसरा टारगेट है 3,510 रुपये का
ग्वार सीड खरीदे - फरवरी वायदा के अनुबंध में नीचे भाव आने पर 3,220 और 3,230 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें..........3,200 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 3,260 रुपये प्रति क्विंटल का है।
ग्वार गम खरीदें - फरवरी वायदा के अनुबंध में भाव नीचे आने पर 6,230 और 6,240 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें............6,200 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 6,300 रुपये प्रति क्विंटल का है।
बेचेे  -कपास खली में फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में भाव उपर जाने पर 2,245 और 2,250 रुपये पर बेचें तथा स्टॉप लोस 2,260 का लगाएं और .........टारगेट है 2,230 और 2,220 रुपये का
(मार्किट की खबर के हिसाब से यह केवल सलाहभर है, जोखिम के लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।)

आयात में हुई बढ़ोतरी से अप्रैल में कई राज्यों में एमएसपी से नीचे बिकेगा गेहूं

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में अभी तक करीब 30 लाख टन गेहूं का आयात हो चुका है तथा 28 फरवरी तक कुल आयात 40 लाख टन होने का अनुमान है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार ने जल्दी ही आयात को रोकने के लिए आयात शुल्क नहीं लगाया तो गेहूं की नई फसल आने पर अप्रैल में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिकने की आशंका है।
इस समय दक्षिण भारत में गेहूं का भारी मात्रा में आस्ट्रेलिया, यूक्रेन और फ्रांस से आयात हो रहा है तथा अभी तक करीब 30 लाख गेहूं भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुका है। आयातक 28 फरवरी 2017 से पहले की शिपमेंट के आयात सौदे कर रहे हैं, क्योंकि आयातकों को डर है कि केंद्र सरकार आयात को रोकने के लिए 28 फरवरी 2017 के बाद आयात शुल्क लगायेंगी। ऐसे में 28 फरवरी 2017 तक कुल 40 लाख टन गेहूं का आयात होने का अनुमान है। ऐसे में दक्षिण भारत की फ्लोर मिलों के पास मार्च-अप्रैल तक की पिसाई का गेहूं उपलब्ध रहेगा, जिस कारण इनकी मांग उत्तर प्रदेष, राजस्थान और मध्य प्रदेश से कम रहेगी। जिसका असर गेहूं की कीमतों पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं का भाव घटकर 1,450 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल रह जायेगा, जबकि रबी विपणन सीजन 2017-18 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
आस्ट्रेलिया से आयातित गेहूं का भाव तुतीकोरन बंदरगाह पर 1,700 से 1,780 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार है जबकि यूक्रेन से आयातित गेहूं का भाव 1,650 रुपये प्रति क्विंटल है। दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें गुजरात की मंडियों से एमएसपी पर गेहूं की खरीद करती हैं तो मिल पहुंच भाव 1,950 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल बैठेंगे, तथा अगर उत्तर प्रदेश या राजस्थान से खरीद करेंगी तो लागत बढ़कर 2,200 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल हो जायेगी। इसलिए दक्षिण भारत की फ्लोर मिलें आयातित गेहूं का स्टॉक कम रही है ताकि अगले अगले दो-तीन महीने उनको घरेलू मार्किट से खरीद ना करनी पड़े। दक्षिण भारत की मिलों को लगता है कि केंद्र सरकार 28 फरवरी 2017 के बाद आयात शुल्क लगा देगी, लेकिन अगर केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया तो फिर आयात बढ़कर 50 से 60 लाख टन के स्तर पर भी पहुंच सकता है।
चालू रबी में मध्य प्रदेश के साथ ही उत्तर प्रदेश में गेहूं की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में गेहूं की बुवाई बढ़कर 315.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 292.52 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में बुवाई 100.52 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 94.99 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह मध्य प्रदेश में बुवाई बढ़कर 62.23 लाख हैक्टेयर में हुई जबकि पिछले साल 51.84 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
चालू रबी में बुबाई में हुई बढ़ोतरी के साथ ही मौसम भी अनुकूल होने से गेहूं का बंपर उत्पादन होने का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं की एमएसपी पर खरीद होगी, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में खरीद सीमित मात्रा में होने के कारण इन राज्यों की मंडियों में गेहूं का भाव एमएसपी से नीचे बिकेगा।...............आर एस राणा

06 February 2017

सोना करीब 3 महीने के ऊपरी स्तर पर

अमेरिका में ट्रंप की नीतियों को लेकर बनी अस्थिरता की स्थिति  में सोना करीब 3 महीने के ऊपरी स्तर पर चला गया है। ईरान पर अमेरिका का सख्त रवैया और उसके बाद 7 मुस्लिम देशों पर वीजा प्रतिबंध और बाद में कोर्ट की ओर से अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर रोक के बाद ट्रंप की पॉलिसी को लेकर काफी अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में कॉमैक्स पर सोने का दाम 1235 डॉलर का स्तर छू चुका है। हालांकि डॉलर में निचले स्तर से रिकवरी के बाद फिर से सोने में दबाव भी दिखा है। वहीं चांदी भी करीब 0.25 फीसदी नीचे आई है। कच्चे तेल में हल्की बढ़त दिख रही है। ब्रेंट 56 डॉलर के पास है।  लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर दबाव में आ गया है।

ग्वार सीड, सरसों और क्रुड में एनसीडीईएक्स-एमसीएक्स की 7 फरवरी की टिप्स

बेचे - क्रुड पाम तेल पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में 3,580-3,590 रुपये पर बेचे.........3,610 रुपये का स्टोप लोस लगाए ( तथा पहला टारगेट है 3,565 और दूसरा टारगेट है 3,540 रुपये का
ग्वार सीड खरीदे - फरवरी वायदा के अनुबंध में नीचे भाव आने पर 3,230 और 3,240 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें..........3,220 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 3,260 और 3,280 रुपये प्रति क्विंटल का है।
ग्वार गम खरीदें - फरवरी वायदा के अनुबंध में भाव नीचे आने पर 6,270 और 6,280 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदें............6,250 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 6,300 और 6,320 रुपये प्रति क्विंटल का है।
बेचेे  -कपास खली में फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में भाव 2,242 रुपये हैं तथा भाव बढ़ने पर 2,250 और 2,255 रुपये पर बेचें तथा स्टॉप लोस 2,262 का लगाएं और .........टारगेट है 2,230 और 2,220 रुपये का
(मार्किट की खबर के हिसाब से यह केवल सलाहभर है, जोखिम के लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।)

नेफैड की दलहन खरीद 3 लाख टन के पार

आर एस राणा
नई दिल्ली। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चालू खरीफ सीजन में नेफैड की दलहन खरीद बढ़कर 3,09,855 टन की हो चुकी है। एजेंसी के अनुसार अभी तक हुई कुल खरीद में मूंग की हिस्सेदारी 1,27,126 टन, उड़द की 58,027 टन और अरहर की 1,24,701 टन की है। इस समय मूंग और उड़द की खरीद न के बराबर हो रही है तथा ज्यादा खरीद अरहर की ही हो रही है।
कंपनी जहां एमएसपी पर अरहर और मूंग की खरीद कर रही है, वहीं उड़द की खरीद बाजार भाव पर की जा रही है। नेफैड इस समय महाराष्ट्र, कर्नाटका, तेलंगाना और आंध्रप्रेश के अलावा मध्य प्रदेश से अरहर की खरीद 5,050 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है।...........आर एस राणा

05 February 2017

डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत

डॉलर में गिरावट बढ़ गई है और इसका फायदा रुपये को मिला है। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूती के साथ हफ्ते की शुरुआत की है। एक डॉलर की कीमत 67.20 के पास आ गई है। रुपया अपने 3 महीने के ऊपरी स्तर के पास कारोबार कर रहा है। हालांकि डॉलर में आई गिरावट से ग्लोबल मार्केट में सोने को सपोर्ट मिला है और कॉमैक्स पर सोना हल्की बढ़त के साथ 1220 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। चांदी में भी करीब 0.5 फीसदी की तेजी है और कच्चे तेल का दाम भी बढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड में 57 डॉलर के बेहद करीब कारोबार हो रहा है। जबकि नायमैक्स पर इसका भाव 54 डॉलर के पास पहुंच गया है। कमजोर डॉलर से ग्लोबल मार्केट में सोयाबीन में भी उछाल आया है और शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड पर सोयाबीन का दाम करीब 1 फीसदी उछल गया है। भारत में गेहूं की रिकॉर्ड बुआई हुई है। ऐसे हाजिर में इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

ग्वार सीड, सरसों और क्रुड में एनसीडीईएक्स-एमसीएक्स की 6 फरवरी की टिप्स

बेचे - क्रुड पाम तेल पर फरवरी महीने के वायदा अनुबंध में 3,640-3,650 रुपये पर बेचे.........3,660 रुपये का स्टोप लोस लगाए ( तथा पहला टारगेट है 3,600 और दूसरा टारगेट है 3,620 रुपये का
ग्वार सीड बेचे - फरवरी वायदा के अनुबंध में 3,275 और 3,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचे...........3,330 पर स्टॉप लोस लगाए............. टारेगट 3,250 रुपये प्रति क्विंटल का है।
सरसों बेचे -सरसों के अप्रैल वायदा अनुबंध में भाव 3,840....3,850 पर बेचे, तथा 3,870 का स्टोप लोस लगाए ............इसका टारगेट है 3,800 रुपये का
(मार्किट की खबर के हिसाब से यह केवल सलाहभर है, जोखिम के लिए हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है।)

04 February 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।

............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........

आर एस राणा
 rsrana2001@gmail.com
09811470207

एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में किन भाव पर निवेश से होगा फायदा


प्रिय पाठकों,
एनसीडीईएक्स और एमसीएक्स पर एग्री कमोडिटी में दैनिक आधार पर किस भाव पर खरीद करें, क्या स्टोप लोस लगाए तथा टारगेट क्या है, इस बारे में एग्री कमोडिटी न्यूज ब्लॉग पर सलाह दी जायेगी,  बाद में यह सर्विस मोबाईल पर एसएमएस के माध्यम से दी जायेगी। आपसे निवेदन है कि इस सर्विस को देखें तथा इस बारे में अपने सुझाव हमें जरुर दें, आपके सुझाव हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। इस बारे में हमें अपने सुझाव   rsrana2001@gmail.com     ई मेल पर भेजे या फिर मोबाईल नं0 - 09811470207 पर संपर्क करें।
धन्यवाद,
आर एस राणा
09811470207
rsrana2001@gmail.com

03 February 2017

रबी फसलों की बुवाई 645 लाख हैक्टेयर के पार

गेहूं, दलहन और तिलहन की बुवाई बढ़ी, मोटे अनाजों और धान की पिछड़ी   
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में अभी तक देशभर में 645.12 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुवाई 610.44 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चालू रबी में जहां गेहूं, दलहन और तिलहन की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मोटे अनाजों के साथ ही धान की रौपाई पिछे चल रही है। रबी फसलों के बुवाई अभी लगभग पूरी हो चुकी है तथा अभी तक मौसम भी फसलों के अनुकूल बना हुआ है, ऐसे में चालू रबी में गेहूं के साथ चना, मसूर, सरसों, मूंगफली, मक्का और जौ की पैदावार में तो बढ़ोतरी का अनुमान है लेकिन बुवाई में आई कमी से ज्वार और धान की पैदावार कम होगी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई बढ़कर 317.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 297.25 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। रबी दहलन की बुवाई चालू सीजन में रिकार्ड 159.72 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 143.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुवाई 99.01 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 89.45 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। मसूर की बुवाई भी बढ़कर चालू रबी में अभी तक 16.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 13.73 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मटर की बुवाई भी चालू रबी में बढ़कर 11.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.59 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
रबी तिलहनों की बुवाई चालू सीजन में अभी तक 84.34 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 79.42 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई 70.56 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 64.53 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंगफली की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 6.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.96 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
चालू रबी में मोटे अनाजों की बुवाई अभी भी पिछे चल रही है, अभी तक देषभर में केवल 57.61 लाख हैक्टेयर में ही मोटे अनाजों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 61.05 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा कमी ज्वार की बुवाई में आई है। ज्वार की बुवाई चालू रबी में अभी तक केवल 32.22 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 37.43 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। रबी मक्का की बुवाई भी चालू सीजन में अभी तक 16.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.07 लख हैक्टेयर में इसकी बुवाई हुई थी। जौ की बुवाई चालू रबी में 8.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.59 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। धान की रोपाई चालू रबी में अभी तक केवल 25.64 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 29.03 लाख हैक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी।............आर एस राणा

02 February 2017

उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल में तेजी

अमेरिका में आज जनवरी महीने के रोजगार के आंकड़े आएंगे। इस आंकड़ों से अमेरिकी इकोनॉमी की सेहत का पता चलेगा और ये आंकड़े अमेरिका में ब्याज दरों पर आगे फेड के फैसले को भी प्रभावित करेगा। ऐसे में डॉलर इंडेक्स बेहद छोटे दायरे में है, वहीं रुपये में भी बेहद सुस्त कारोबार हो रहा है। लेकिन पिछले महीने रोजाना 14 लाख बैरल उत्पादन में कटौती से कच्चे तेल में तेजी आई है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम करीब 0.5 फीसदी बढ़ गया है। नॉन फार्म पेरोल के इंतजार में सोना 11 हफ्ते के ऊपरी स्तर से नीचे आ गया है। फिलहाल कॉमैक्स पर सोने में 1212 डॉलर के आसपास कारोबार हो रहा है। कल सोना 1220 डॉलर के पार जाने में कामयाब हुआ था। ग्लोबल मार्केट में चांदी का दाम भी 0.5 फीसदी गिर गया है।

वहीं इस हफ्ते करीब 7 फीसदी की उछाल के बाद एलएमई पर निकेल का दाम करीब 2 फीसदी गिर गया है। कॉपर में भी सुस्ती है। दरअसल अमेरिका चीन से स्टेनलेस स्टील उत्पादों के इंपोर्ट पर भारी ड्यूटी लगाने की तैयारी में है, ऐसे में मेटल की तेजी पर ब्रेक लग गया है।