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19 August 2017

एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए

एग्री कमोडिटी दलहन, तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी।
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आर एस राणा
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20 अगस्त 2017 का मॉनसून पूर्वानुमान

हिमालय के तराई क्षेत्रों में बीते दिनों से बनी मॉनसून की अक्षीय रेखा दक्षिण की ओर पहुँच गई है। इस समय यह अमृतसर, अंबाला, सिधी, झारसुगुडा और तटीय ओड़ीशा पर बने निम्न दबाव के क्षेत्र के मध्य से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुँच रही है। अनुमान है कि मॉनसून की अक्षीय रेखा जल्द ही दक्षिणी दिशा में जाएगी।
उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भागों पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। पश्चिमी असम पर भी हवाओं में एक चक्रवाती क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
पश्चिमी तटों पर बनी मॉनसून ट्रफ का विस्तार इस समय दक्षिणी कोंकण व गोवा से केरल तक है और यहीं पर प्रभावी है।
गुजरात के कच्छ और इससे सटे दक्षिणी पाकिस्तान पर एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे भागों पर एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में बने एक सिस्टम के रूप में दिखाई दे रहा है।
बीते 24 घंटों में मॉनसून के प्रदर्शन का ज़िक्र करें तो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मॉनसून व्यापक रहा और भीषण बारिश रिकॉर्ड की गई।
पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, केरल औरकर्नाटक में भी मॉनसून सक्रिय रहा और हल्की से मध्यम मॉनसून वर्षा दर्ज की गई।
हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में पिछले 24 घंटों के दौरान मॉनसून की सामान्य सक्रियता के चलते हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।
दूसरी ओर जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में मॉनसून शांत रहा जबकि देश के बाकी भागों में कमजोर मॉनसून के चलते हल्की वर्षा हुई।
अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून का सबसे व्यापक प्रदर्शन दक्षिणी मध्य प्रदेश, विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में देखने को मिलेगा। इन भागों में मध्यम से भारी बारिश जारी रहने के आसार हैं।
केरल, तटीय कर्नाटक और आसपास के क्षेत्रों में में भी मॉनसून सक्रिय रहेगा और मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी तटीय भागों में अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून का प्रभाव बढ़ेगा और बारिश की गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिलेगी।
बिहार, झारखंड, ओडिशा और तमिलनाडु में मॉनसून सामान्य रहेगा और बादल छाए रहेंगे। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने के आसार हैं।
हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू कश्मीर और पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, गंगीय पश्चिम बंगाल,छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बारिश में गिरावट आ सकती है।
गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में मॉनसून कमजोर ही बना रहेगा। इन भागों में मुख्यतः शुष्क मौसम जारी रह सकता है।...........www.skymet.com

सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई में भी कम आई है। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में बारिश की भी कम है इसलिए सोयाबीन के भाव में सुधार आने का अनुमान है। मूंगफली में मांग कमजोर है, हालांकि नई फसल तक इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई घटकर अभी तक केवल 102.33 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 112.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि उत्पादक राज्यों में सोयाबीन का स्टॉक ज्यादा है लेकिन बारिश की कमी से सोयाबीन की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है, इसलिए मौजूदा भाव में और भी सुधार आने का अनुमान है।
मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल 37.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 42.98 लाख हैक्टेयर में मूंगफली की बुवाई हो चुकी थी। खरीफ तिलहन की अन्य फसलों में सनफ्लावर की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 1.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 1.45 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। सीशम सीड की बुवाई चालू खरीफ में 11.67 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 13.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल 3.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 4.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 157.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 175.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।..............   आर एस राणा

बाजरा की बुवाई बढ़ी, मक्का और ज्वार की पिछड़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में बाजरा की बुवाई बढ़कर 69.29 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
मक्का की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 76.72 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक मक्का की बुवाई 81.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि मक्का की सामान्य बुवाई खरीफ में 73.34 लाख हैक्टेयर में ही होती है। विश्व बाजार में मक्का के भाव सस्ते हैं, जबकि घरेलू बाजार में खरीफ मक्का की आवक सितंबर में बनेगी, इसलिए मक्का के भाव में हल्का सुधार तो सकता है लेकिन बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।
ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 15.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 18.54 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रागी की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 5.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 7.94 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चालू खरीफ में मोटे अनाजों की बुवाई घटकर 171.75 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 179.17 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.................   आर एस राणा

18 August 2017

एमपी, यूपी, हरियाणा व महाराष्ट्र तथा कर्नाटका में सूखे जैसे हालात

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मध्य प्रदेश, पष्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र के मराठवाडा और विदर्भा के साथ ही कर्नाटका में भी बारिश सामान्य से काफी कम होने के कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, जिनका असर चालू खरीफ में दलहन, तिलहन तथा मोटे अनाजों की पैदावार पर पड़ने की आशंका है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जून से 16 अगस्त तक सामान्य से 33 फीसदी बारिश कम हुई है जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई है। आईएमडी के अनुसार हरियाणा, चंडीगढ़ में चालू खरीफ में बारिश सामान्य से 24 फीसदी और पंजाब में 15 फीसदी कम बारिश हुई है। हिमाचल प्रदेश में भी सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश हुई है।
आईएमडी के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में अभी तक सामान्य से 21 फीसदी और पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 20 फीसदी तथा उड़ीसा में 7 फीसदी सामान्य से कम बारिश हुई है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भा में भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, मराठवाड़ा में जहां सामान्य से 30 फीसदी और विदर्भा में 31 फीसदी सामान्य से कम बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ में भी चालू खरीफ में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है।
कोस्टल कर्नाटका में जहां चालू खरीफ में अभी तक सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है, वहीं नार्थ इस्ट कर्नाटका में 21 फीसदी और साउथ कर्नाटका में 30 फीसदी सामान्य की तुलना में कम बारिश हुई है। केरल में भी चालू खरीफ में सामान्य के मुकाबले 29 फीसदी कम बारिश हुई है। तेलंगाना में भी 16 फीसदी बारिश चालू खरीफ में सामान्य से कम हुई है। ............   आर एस राणा

दलहन, तिलहन के साथ मोटे अनाजों की बुवाई कम, कपास की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई में कमी आई है, जबकि कपास और गन्ने की बुवाई बढ़ी है। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है। दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई तो घटी ही है, साथ ही देशभर के 23 फीसदी इलाकों में बारिश सामान्य से कम हुई है, जबकि तिलहन, दलहन और मोटे अनाजों की पैदावार खरीफ में मानसूनी बारिश पर ही निर्भर होती है, अतः चालू खरीफ में इनकी प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में की कमी आ सकती है।
मानसून के आरंभ में अच्छी बारिश से जहां खरीफ फसलों की बुवाई आगे चल रही थी, वहीं महीने से बारिश सामान्य से कम होने के कारण कुल बुवाई भी पिछड़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई घटकर अभी तक केवल 976.34 लाख हैक्टेयर में हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 984.57 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 130.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 135.42 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर की बुवाई में करीब 9 लाख हैक्टेयर में कमी आकर कुल बुवाई अभी तक 40.81 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि मूंग की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में घटी है। हालांकि उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 157.36 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 175.10 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 102.33 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 112.51 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 37.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 42.98 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू रबी में 341.58 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 340.14 लाख हैक्टेयर में रौपाई ही हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 171.75 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 179.17 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई पिछे चल रही है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 118.14 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 101.54 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...............     आर एस राणा

देश के 23% इलाकों में कम हुई बारिश

मॉनसून सीजन के 2.5 महीने खत्म हो गए हैं और इस दौरान पूर्वी और उत्तरी भारत में जहां भयंकर बाढ़ आई है, वहीं दक्षिण भारत समेत देश के  कुछ इलाकों में बेहद कम बारिश हुई है। खास करके दक्षिण भारत में सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश हुई है। जहां कर्नाटक और केरल में करीब 30 फीसदी कम बारिश हुई है।
इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी काफी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में भी बारिश की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि मौसम विभाग का दावा है कि अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश सुधर सकती है।

17 August 2017

डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की मजबूती

डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की मजबूती आई है और एक डॉलर की कीमत 64.10 रुपये के पास है। बेस मेटल में ऊपरी स्तर से तेज गिरावट आई है और लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर समेत सभी मेटल 0.5 से 1 फीसदी टूट गए हैं। एलएमई के साथ चीन में भी मेटल में गिरावट बढ़ गई है। सबसे ज्यादा गिरावट लेड में आई है।  चीन कॉपर और लेड के स्क्रैप इंपोर्ट पर रोक लगाने जा रहा है। ऐसे में मेटल मार्केट का सेंटीमेंट बिगड़ गया है। कच्चा तेल भी कमजोर है। अमेरिका में उत्पादन 2 साल के ऊपरी स्तर पर जाने के बाद से ही कच्चा तेल फिसल रहा है। ब्रेंट में इक्यावन डॉलर के स्तर पर कारोबार हो रहा है। वहीं सोने में भी सुस्ती छाई हुई है। कॉमैक्स पर इसका दाम 1290 डॉलर के नीचे है। मेटल में कमजोरी से चांदी भी दबाव में है।

18 अगस्त 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

दक्षिण पश्चिम मॉनसून ओडिशा, छत्तीसगढ़ और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह पर जोरदार रहा। सक्रिय मानसून की स्थिति पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत पर देखी गयी।
पिछले 24 घंटों के दौरान लॉन्ग आइलैंड में 126 मिमी बारिश दर्ज की गई, वहीं संबलपुर में 85 मिमी और झारसुगुदा में 65 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गयी है।
6 अगस्त को देश भर में बारिश के आंकड़े में 4 प्रतिशत की कमी आ गयी है। जहां तक ​​क्षेत्रीय वितरण का संबंध है, उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का आंकड़ा 3 प्रतिशत पर सामान्य है। जबकि मध्य और दक्षिण भारत में वर्षा में 9 और 16% की कम है।
वर्तमान में मानसून की अक्षीय रेखा का पश्चिमी छोर मुजफ्फरपुर, मालदा, दिघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रहा है। हालांकि, पूर्वी सिरा हिमालय की तराई इलाकों से गुज़र रहा है।
अगले 24 घंटों के दौरान, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और विदर्भ में मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। सामान्य मानसून की स्थिति उत्तर तमिलनाडु, केरल, तटीय कर्नाटक और महाराष्ट्र के आस-पास के क्षेत्रों में देखी जाएगी।
बारिश की तीव्रता बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में कम होने की संभावना है। हालांकि हल्की से मध्यम बारिश से इंकार नहीं किया जा सकता। ............www.skymet.com

उत्पादक क्षेत्रों में बारिश नहीं होने से ग्वार सीड में और तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख ग्वार उत्पादक राज्यों राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में बारिश की कमी से ग्वार सीड की फसल प्रभावित होने की आशंका है इसलिए ग्वार गम और ग्वार सीड की कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है। गुरुवार को राजस्थान जोधपुर मंडी में ग्वार गम का भाव 8,100 रुपये और ग्वार सीड का भाव 3,725 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
मानसून का सीजन समाप्ति की और है जबकि राजस्थान और हरियाणा के ग्वार सीड उत्पादक क्षेत्रों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है जिससे ग्वार सीड की फसल को नुकसान होने से प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है। चालू महीने में उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश नहीं हुई तो फिर भाव में अच्छी तेजी बन सकती है।
प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में ग्वार सीड की बुवाई तय लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद कम हो गई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 15 अगस्त तक राज्य में ग्वार सीड की बुवाई केवल 28.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, 10 अगस्त तक को जारी आंकड़ो में बुवाई इतनी ही हुई थी। पिछले साल इस समय तक राज्य में 27.10 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। पिछले साल कुल बुवाई 35.30 लाख  हैक्टेयर में हुई थी जबकि चालू सीजन में बुवाई का लक्ष्य 38 लाख हैक्टेयर का राज्य सरकार ने तय किया था।
एपिडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 1,45,775 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही में केवल 77,174 टन ग्वार गम उत्पादों का निर्यात हुआ था।.................   आर एस राणा

16 August 2017

कच्चे तेल में निचले स्तर से रिकवरी

अमेरिका में भंडार गिरने के बावजूद कल कच्चे तेल में भारी गिरावट आई थी। हालांकि आज निचले स्तर से रिकवरी आई है और 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है। इस बढ़त के बावजूद ब्रेंट का दाम 51 डॉलर के नीचे है। वहीं नायमैक्स क्रूड 47 डॉलर के भी नीचे कारोबार कर रहा है। अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़कर 95 लाख बैरल के स्तर पर चला गया है। पहले ये 94 लाख बैरल था। डॉलर में नरमी से सोने को भी सपोर्ट मिला है और कॉमैक्स पर सोने का दाम 1290 डॉलर के काफी करीब पहुंच गया है। चांदी में भी तेजी आई है और ये फिर से 17 डॉलर के पार चली गई है। ज्यादा एक्शन बेस मेटल में है और लंदन मेटल एक्सचेंज पर जिंक का दाम 10 साल की ऊंचाई पर है। जबकि कॉपर और एल्युमिनियम भी करीब 3 साल के ऊपरी स्तर पर चले गए हैं। चीन में मांग बढ़ने और सप्लाई की किल्लत से मेटल की कीमतों को सपोर्ट मिला है। आज पारसी न्यू इयर की वजह से करेंसी मार्केट बंद है।

चौथे आरंभिक अनुमान में गेहूं, चावल, दलहन और कपास के उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी

खाद्य उत्पादन 27.56 करोड़ टन होने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खाद्य उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी कर दी है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़कर 27.46 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में मंत्रालय ने 27.33 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 983.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में गेहूं के उत्पादन का अनुमान 974.4 लाख टन का था। इसी तरह से चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार चावल का उत्पादन बढ़कर 11.01 करोड़ टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में चावल का उत्पादन 10.91 करोड़ टन होने का अनुमान था।
मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में दलहन का रिकार्ड उत्पादन 229.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार दालों का उत्पादन 224 लाख टन होने का अनुमान जारी किया था। चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार चना का उत्पादन फसल सीजन 2016-17 में 93.3 लाख टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में इसका उत्पादन 90.8 लाख टन होने का अनुमान जारी किया था।
तिलहनों का उत्पादन चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में 320.97 लाख टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में तिलहनी फसलों के उत्पादन का अनुमान 325.22 लाख टन होने का अनुमान था। कपास का उत्पादन भी फसल सीजन 2016-17 में चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार 330.92 लाख गांठ (एक गांठ-170 किलो) होने का अनुमान है जबकि तीसरे आरंभिक अनुमान में कपास के उत्पादन का अनुमान 325.76 लाख टन होने का अनुमान था।...............   आर एस राणा

बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में सामान्य मॉनसून की स्थिति बनी रहेगी



दक्षिण पश्चिम मॉनसून बीते 24 घंटों मे गंगीय पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से सक्रिय रहा। जबकि झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तरी तटीय ओड़ीशा, कर्नाटक और आंतरिक तमिलनाडू में मॉनसून सक्रिय रहा।
बीते 24 घंटों के दौरान सबसे अधिक बारिश वाले स्थानों पर ज़िक्र करें तो चेरापुंजी में 81 मिलीमीटर की भारी वर्षा दर्ज की गई। शांतिनिकेतन में 74 और बुरद्वान में 73 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
15 अगस्त तक देश भर में कुल वर्षा का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।
क्षेत्रीय वितरण की बात करे तो मध्य भारत में 8 फीसदी और दक्षिण भारत में 16 प्रतिशत वर्षा कम हुई है। दूसरी ओर उत्तर पश्चिम भारत 4 प्रतिशत से जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत 2 प्रतिशत अधिक वर्षा से आगे है।
इस बीच मॉनसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई क्षेत्रों से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुँच रही है। पूर्व में मॉनसून ट्रफ पटना, बंकुरा और दिघा में केन्द्रित है।
अगले 24 घंटों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओड़ीशा, पश्चिम बंगाल, तटीय आंध्र प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक में मॉनसून सबसे अधिक प्रभावी रहेगा जिससे अच्छी वर्षा होने की उम्मीद है। जबकि तेलंगाना, कोंकण गोवा, असम, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम में सामान्य मॉनसून की स्थिति बनी रहेगी।........www.skymet.com

पहली तिमाही में मूंगफली का निर्यात 47 फीसदी घटा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही अप्रैल से जून के दौरान मूंगफली दाने के निर्यात में 47.24 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 89,493 टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष2016-17 की समान में 1,54,125 टन का निर्यात हुआ था।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में मूंगफली दाने का निर्यात घटकर केवल 696.39 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में 1,319,82 करोड रुपये का हुआ था।
फसल सीजन 2016-17 में मूंगफली की पैदावार ज्यादा होने से उत्पादक मंडियों में इसके भाव नई फसल की आवक के समय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे रहे थे जिस कारण चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई की बुवाई में कमी आई है। उत्पादक मंडियों में इस समय मूंगफली के भाव 4,200 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मूंगफली की बुवाई घटकर केवल 36.50 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 42.02 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। .......आर एस राणा

15 August 2017

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी बढ़ गई है। एक डॉलर की कीमत 64 रुपये के पार है। ग्लोबल मार्केट में कल की भारी गिरावट के बाद आज कच्चे तेल में रिकवरी आई है। ब्रेंट का दाम करीब 0.5 फीसदी बढ़ गया है। नायमैक्स पर भी क्रूड में 47 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। एपीआई की रिपोर्ट में अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 92 लाख बैरल गिर गया है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों को सपोर्ट मिला है। आज यूएस एनर्जी डिपार्टमेंट की भी रिपोर्ट आएगी जिस पर बाजार की नजर है।
आज अमेरिका में फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के ब्यौरा जारी होने से पहले सोने में हल्की मजबूती है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1270 डॉलर के ऊपर है। चांदी में करीब 0.5 फीसदी ऊपर कारोबार हो रहा है।  इस बढ़त के बावजूद चांदी 17 डॉलर के काफी नीचे है। कल ग्लोबल मार्केट में चांदी में तेज गिरावट आई थी, लेकिन घरेलू बाजार बंद होने की वजह से इस गिरावट का असर आज दिख रहा है ।

14 August 2017

15 अगस्त 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

दक्षिण पश्चिम मॉनसून पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के तराई वाले क्षेत्रों और मेघालय पर व्यापक रूप से सक्रिय रहा। जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दक्षिणी छत्तीसगढ़, ओड़ीशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, तटीय आंध्रा प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में सक्रिय मॉनसून की स्थिति देखी गई।
गुजरात, कोंकण गोवा, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के बचे हिस्सों में सामान्य मॉनसून की स्थिति बनी रहेगी।
पिछले 24 घंटों में, चेरापूंजी में 246 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी, वहीं गोरखपुर में 180 मिमी और धर्मशाला में 75 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गयी।
13 अगस्त तक देश भर में बारिश के आंकड़े में अभी भी 3% की कमी बरकरार है। जहां तक क्षेत्रीय वितरण की बात करें तो उत्तर-पश्चिम भारत में 6% अधिक वर्षा हो चुकी है। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में भी 2% ज़्यादा वर्षा हुई है। जबकि मध्य और दक्षिण भारत में 6% और 16% की कमी देखी गयी है।
वर्तमान में मॉनसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई इलाकों से गुज़र रही है।
अगले 24 घंटों के दौरान उप हिमालय पश्चिम बंगाल, दक्षिणी असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह पर मॉनसून व्यापक रूप से सक्रिय रहेगा।
वहीं बिहार, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओड़ीशा, छत्तीसगढ़, गंगीय पश्चिम बंगाल, कोंकण, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू और आंतरिक कर्नाटक में सक्रिय मॉनसून की स्थिति देखी जाएगी। मॉनसून राजस्थान, दक्षिणी हरियाणा, उत्तरपश्चिम मध्य प्रदेश में कमजोर रहेगा। 

जुलाई में वनस्पति तेलों का आयात 34 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। जुलाई महीने में देशों में वनस्पति तेलों का आयात 34 फीसदी बढ़कर 1,524,724 टन का हुआ है जबकि पिछले साल जुलाई में वनस्पति तेलों का आयात केवल 1,140,685 टन का ही हुआ था।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2016-17 के पहले 9 महीनों नवंबर-16 से जुलाई-17 के दौरान वनस्पति तेलों के आयात में 4 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 11,388,296 टन का हो चुका है जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 10,903,728 टन का हुआ था।
एसईए के अनुसार पिछले तीन महीनों मई से जुलाई के दौरान वनस्पति तेलों के आयात में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। जबकि घरेलू बाजार में भी खाद्य तेलों की उपलब्धता ज्यादा है। केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है इसके बावजूद भी तिलहन की कीमतों में सुधार तो आया है लेकिन बड़ी तजी नहीं है। खाद्य तेलों में त्यौहारी मांग बनी हुई है इसलिए मौजूदा भाव में हल्का सुधार तो आ सकता है लेकि बड़ी तेजी नहीं है। चालू खरीफ में तिलहनों की बुवाई में जरुर कमी आई है।
विश्व बाजार में भाव कम होने के कारण जून के मुकाबले जुलाई में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आई थी। जून महीने में आरबीडी पामोलीन का भाव भारतीय बंदरगाह पर 700 डॉलर प्रति टन था जोकि जुलाई में घटकर 683 डॉलर प्रति टन रह गया। इसी तरह से क्रुड पॉम तेल का भाव इस दौरान 697 डॉलर से घटकर 681 डॉलर प्रति टन रह गया।..............  आर एस राणा

13 August 2017

ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1290 डॉलर के पास

ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम 1290 डॉलर के पास पहुंच गया है। हालांकि ऊपरी स्तर से कुछ दबाव भी दिख रहा है। लेकिन चांदी 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 17 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रही है। कच्चे तेल में भी ऊपरी स्तर से दबाव दिख रहा है। दरअसल डॉलर में निचले स्तर से हल्की रिकवरी आई है। चीन में जून के रिकॉर्ड स्तर से एल्युमिनियम का उत्पादन जुलाई में करीब 8 फीसदी गिर गया है। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में शानदार रिकवरी आई है और 1 डॉलर की कीमत 64 रुपये के नीचे आ गई है।

12 August 2017

13 अगस्त 2017 का मॉनसून पूर्वानुमान



मॉनसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई वाले क्षेत्रो से हो कर गुजर रही है।
जम्मू कश्मीर के उत्तरी भागों में एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है।
चक्रवती हवाओ का क्षेत्र सौराष्ट्र और कच्छ पर बना हुआ है।
एक और चक्रवती सिस्टम ओड़ीशा के उत्तरी भागों और झारखंड पर बना हुआ है।
एक ट्रफ चक्रवती सिस्टम और तटीय आंध्र प्रदेश से होते हुए तटीय तमिलनाडू तक बनी हुई है।
एक और ट्रफ रेखा गुजरात तट से होते हुए तटीय केरल तक बनी हुई है।
बीते 24 घंटों के दौरान मॉनसून का प्रदर्शन
पिछले 24 घंटो में, सिक्किम, मेघालय, उप हिमालय पश्चिम बंगाल, और हिमालय के तराई वाले क्षेत्रों में व्यापक रूप से सक्रिय मॉनसून की स्थिति देखी गई।
पूर्वोत्तर राज्यो, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, उत्तरी, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी तट, पूर्वी तट, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सकरिए मॉनसून की स्थिति देखी गई।
सामान्य मॉनसून की स्थिति मध्य भारत में देखी गाई।
अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून का संभावित प्रदर्शन और वर्षा
उत्तरी बिहार, उप हिमालय पश्चिम बंगाल, असम और सिक्किम में मॉनसून व्यापक रूप से सक्रिय रहेगा।
जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी और पूर्वी तट पर मॉनसून सक्रिय रहेगा।
मध्य भारत में सामान्य मॉनसून की स्थिति देखि जाएगी जबकि दिल्ली और उत्तरपश्चिम भारत में मौसम शुष्क बना रहेगा लेकिन हल्की बारिश से इंकार नहीं किया जा सकता है।.........skymet.com

राजस्थान में ग्वार सीड की बुवाई 74 फीसदी, दलहन की 112 फीसदी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में राजस्थान में जहां ग्वार सीड की बुवाई 74.4 फीसदी हो चुकी है वहीं खरीफ दलहन की बुवाई 112.6 फीसदी की हो चुकी है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में ग्वार सीड की बुवाई बढ़कर 28.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 23.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। चालू खरीफ में राज्य में ग्वार सीड की बुवाई का लक्ष्य 38 लाख हैक्टेयर का तय किया हुआ है जबकि पिछले साल ग्वार सीड की बुवाई 35.30 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
ग्वार सीड के उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी है जिस कारण ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में तेजी बनी हुई है। मौसम विभाग ने अगले सप्ताह में उत्पादक राज्यों में बारिश होने की भविष्यवाणी की है, अतः बारिश होने के बाद ही ग्वार सीड और ग्वार गम की कीमतों में मंदा आने का अनुमान है। बारिश नहीं हुई तो फिर मौजूदा भाव में और तेजी आने का अनुमान है।
राजस्थान में चालू खरीफ में दालों की बुवाई बढ़कर 33.64 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई राज्य में 30.74 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुवाई राज्य में 15.56 लाख हैक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले साल इस समय तक 15.06 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से मोठ की बुवाई राज्य में बढ़कर 11.64 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक मोठ की बुवावई 10.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुवाई चालू खरीफ में राज्य में अभी तक 5.40 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी जबकि पिछले साल इस समय तक 3.88 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।  ......   आर एस राणा

अरहर और मूंग की बुवाई पिछड़ी, उड़द की बढ़ी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में कमी आई है, वहीं उड़द की बुवाई ज्यादा हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अरहर की बुवाई अभी तक केवल 39.91 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 49.08 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
केंद्र सरकार ने अरहर आयात के लिए वित्त वर्ष में 2 लाख टन की सीमा तय कर दी है, तथा चालू वित्त वर्ष 2017-18 में दो लाख टन से ज्यादा का आयात हो चुका है, इसलिए मार्च 2018 तक नए आयात सौदे नहीं होंगे। इसलिए घरेलू बाजार में अरहर के भाव में सुधार तो आया है लेकिन कुल स्टॉक ज्यादा होने के कारण बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है। वैसे भी केंद्रीय पूल में अरहर का 11 लाख टन से ज्यादा का स्टॉक है तथा केंद्रीय एजेंसियों को जल्दी ही इसकी बिक्री करनी पड़ेगी। लातूर मंडी में अरहर पींक का भाव शनिवार को 4,300 रुपये, लाल का भाव 4,650 रुपये और सफेद का भाव 4,400 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
उड़द की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 38.30 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 31.64 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। नई उड़द की आवक सितंबर में बनेगी, हालांकि दक्षिण भारत के राज्यों कर्नाटका, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के कई जिलों में बारिश की कमी है, साथ ही महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भा में भी बारिश सामान्य से अभी तक कम हुई है, ऐसे में आगे उड़द की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कैसी आती है इसी पर तेजी-मंदी निर्भर करेगी। आयातित एफएक्यू उड़द का भाव मुंबई में शनिवार को 4,350 रुपये और एसक्यू का भाव 5,300 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
मूंग की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 29.96 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक मूंग की बुवाई 31.17 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। खरीफ दलहल की कुल बुवाई चालू खरीफ में घटकर 127.48 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 129.59 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
महाराष्ट्र के साथ ही कर्नाटका में नई मूंग की आवक चालू हो गई है तथा चालू महीने के आखिर तक दैनिक आवक बढ़ जायेगी, इसलिए मूंग की कीमतों में आगे बड़ी तेजी की संभावना नहीं है। केंद्रीय पूल में भी 2.5 लाख टन से ज्यादा मूंग का स्टॉक है। महाराष्ट्र की सोलापूर मंडी में शनिवार को मूंग का भाव 5,000 रुपये, लातूर मंडी में 4,400 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल रहा।...................आर एस राणा