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04 अप्रैल 2018

किसानों को वाजिद दाम दिलाने हेतु एमएसपी पर खरीद और भावांतर योजना को हरी झंडी


आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानो का आय वर्ष-2022 तक दोगनुी करने का लक्ष्य लेकर चल रही नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को उनकी उपज का वाजिब दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। किसानों को अपनी फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे भाव पर नहीं बेचनी पड़े, इसके लिए दो फार्मूलों को आज मंत्रियों के समूह ने अंतिम रुप दे दिया। सूत्रों के अनुसार इसे जल्दी ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा।
फसलों के एमएसपी को लागत का डेढ़ गुना तय करने के साथ ही किसानों को अपनी उपज समर्थन मूल्य से नीचे भाव पर नहीं बेचनी पड़े, इस पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में  मंत्रियों के समूह की बैठक हुई जिसमें कृषि मंत्री, सड़क परिवहन मंत्री और खाद्य मंत्री ने भाग लिया। इसमें दो फॉर्मूलों को मंजूरी दी गई।
बैठक में तय पहले फॉर्मूले के मुताबिक केंद्र सरकार बढ़ी हुई एमएसपी पर किसानों से सीधे खाद्यान्न की खरीद करेंगी, इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार स्वयं वहन करेगी। एमएसपी पर खरीदे गए खाद्यान्न की खरीद और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।
दूसरे फॉर्मूले के तहत मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही भावांतर भुगतान योजना के तहत फसलों की खरीद की जायेगी। भावांतर भुगतान योजना के तहत अगर फसलों की बिक्री एमएसपी से नीचे भाव पर होती है तो उसकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी। अब यह राज्य सरकारों पर निर्भर करेगा कि वह इन दोनों स्कीमों में किस फॉर्मुले को अपनाना चाहती हैं।
भावांतर भुगतान योजना पर उठ रहे हैं सवाल
मध्य प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना के तहत जिंसों की खरीद तो हो रही है लेकिन हाल ही में राज्य के कृषि मंत्री ने भी स्वीकार किया है कि भावांतर भुगतान योजना के तहत मॉडल भाव से नीचे फसलें बेच चुके किसानों को नुकसान हुआ है। यही कारण है कि चालू रबी में राज्य सरकार ने एमएसपी पर ज्यादा खरीद करने का केंद्र सरकार से अनुरोध किया है।
गेहूं और धान की होती है अभी तक ज्यादा खरीद
केंद्र सरकार एमएसपी पर गेहूं और धान की ही खरीद बड़े पैमाने पर करती रही है जबकि अन्य फसलों दलहन, तिलहन या फिर मोटे अनाजों की खरीद सीमित मात्रा में ही होती है।............... आर एस राणा

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